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  • सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में बदलाव से भोपाल मंडल में 4500 टिकट रद्द, यात्रियों को 35 लाख रुपये का रिफंड मिलेगा

    सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में बदलाव से भोपाल मंडल में 4500 टिकट रद्द, यात्रियों को 35 लाख रुपये का रिफंड मिलेगा

    मध्य प्रदेश। के भोपाल रेल मंडल में 9 और 10 अक्टूबर को करीब 4500 यात्रियों के टिकट रद्द हुए हैं। सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में हुए बदलाव के बीच यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। रेलवे प्रशासन के अनुसार, टिकट रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को कुल 35 लाख रुपये का रिफंड दिया जाएगा। यह राशि 24 से 48 घंटे के भीतर यात्रियों के खातों में वापस भेजने की व्यवस्था की गई है।

    रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनें निरस्त होने से प्रभावित यात्रियों को नियमानुसार टिकट का पूरा रिफंड मिलेगा। इसके लिए करीब 35 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मधुर वर्मा ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि उन्हें रिफंड के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि उनके खातों में वापस कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से टिकट रद्द होने के कारण प्रभावित यात्रियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    9 अक्टूबर को दिल्ली की ओर आने-जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनें निरस्त रहीं। इनमें मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस, जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, एमपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस और शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस शामिल थीं। इन ट्रेनों के रद्द होने से दिल्ली जाने वाले और वहां से लौटने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन यात्रियों ने पहले से आरक्षण करा रखा था, उनकी यात्रा योजनाएं भी प्रभावित हुईं।

    10 अक्टूबर को भी रेल सेवाओं पर असर जारी रहा। दिल्ली से भोपाल आने वाली हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस निर्धारित समय पर रवाना नहीं हो सकी। इसी दिन कोटा-हजरत निजामुद्दीन जनशताब्दी एक्सप्रेस भी निरस्त रही। लगातार दो दिनों तक ट्रेनों के रद्द होने और परिचालन में बदलाव के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजनाओं में फेरबदल करना पड़ा। कुछ यात्रियों को यात्रा टालनी पड़ी, जबकि अन्य को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

    भोपाल मंडल में रेल परिचालन से जुड़ा एक अन्य बदलाव बीना-आगासौद यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण किया गया है। इस काम के चलते 15 अक्टूबर तक करीब 17 ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं। यार्ड में चल रहे कार्य के कारण निर्धारित अवधि के दौरान संबंधित ट्रेनों का परिचालन बदले हुए मार्गों से किया जा रहा है। इससे यात्रियों के लिए अपनी ट्रेन की स्थिति और यात्रा मार्ग की जानकारी रखना जरूरी हो गया है।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन के परिचालन की स्थिति और बदले हुए मार्ग की जानकारी जांचने की सलाह दी है। खासकर दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी ट्रेन के समय और परिचालन से संबंधित अपडेट की पुष्टि करनी चाहिए। टिकट रद्द होने की स्थिति में प्रभावित यात्रियों को नियमानुसार पूरा रिफंड देने और 24 से 48 घंटे के भीतर 35 लाख रुपये लौटाने की व्यवस्था की गई है। वहीं, बीना-आगासौद यार्ड में रीमॉडलिंग के कारण 15 अक्टूबर तक मार्ग परिवर्तन लागू रहने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनानी होगी।

  • यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

    यूरोप पर मंडरा रहा ‘फ्यूल संकट’ का खतरा: सिर्फ 6 हफ्तों का जेट ईंधन, उड़ानें रद्द होने की आशंका

    वाशिंगटन। मिडल ईस्ट में जारी तनाव अब वैश्विक ऊर्जा संकट का रूप लेता दिख रहा है।
    अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने चेतावनी दी है कि यूरोप के पास जेट ईंधन का भंडार बेहद सीमित रह गया है—सिर्फ करीब छह सप्ताह या उससे थोड़ा अधिक। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में फ्लाइट्स कैंसल होने की नौबत आ सकती है।

    होर्मुज बना संकट का ‘गला दबाने वाला पॉइंट’

    बिरोल ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इस पूरे संकट का सबसे बड़ा कारण बताया। यह वही समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। मौजूदा युद्ध के चलते यहां आपूर्ति बाधित है, जिससे तेल, गैस और अन्य जरूरी संसाधनों की वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है।

    उन्होंने साफ कहा—अगर यह मार्ग जल्द नहीं खुला, तो यह “अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट” साबित हो सकता है।

    यूरोप में ईंधन की किल्लत, दुनिया पर असर

    IEA प्रमुख के मुताबिक, यूरोप में जेट ईंधन की कमी सबसे पहले नजर आएगी।

    फ्लाइट्स रद्द होने लगेंगी
    पेट्रोल, गैस और बिजली महंगी होगी
    सप्लाई चेन प्रभावित होगी

    इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा—महंगाई बढ़ेगी और विकास दर धीमी पड़ सकती है।

    गरीब देशों पर सबसे ज्यादा मार

    बिरोल ने चेताया कि इस संकट का असर सभी देशों पर पड़ेगा, लेकिन सबसे ज्यादा नुकसान एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को झेलना पड़ेगा।

    उनके मुताबिक,

    आर्थिक नुकसान असमान होगा
    कमजोर अर्थव्यवस्थाएं ज्यादा प्रभावित होंगी
    कुछ देशों में मंदी तक की स्थिति बन सकती है
    ‘टोल बूथ’ सिस्टम पर आपत्ति

    ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क (टोल) लगाने की कोशिश पर भी बिरोल ने कड़ी आपत्ति जताई।

    उन्होंने कहा कि अगर यह व्यवस्था स्थायी हो गई, तो भविष्य में अन्य अहम समुद्री रास्तों—जैसे मलक्का स्ट्रेट—पर भी ऐसा हो सकता है, जो वैश्विक व्यापार के लिए खतरनाक संकेत है।

    टैंकर फंसे, उत्पादन ठप
    फारस की खाड़ी में 110+ तेल टैंकर और 15+ LNG जहाज फंसे हुए हैं
    युद्ध में 80 से ज्यादा ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित
    उत्पादन सामान्य होने में कई महीने, पूरी रिकवरी में 2 साल तक लग सकते हैं
    आगे क्या?

    बिरोल के अनुसार, अगर मई के अंत तक हालात नहीं सुधरे, तो दुनिया को

    ऊंची महंगाई
    धीमी आर्थिक वृद्धि
    और संभावित मंदी
    का सामना करना पड़ सकता है।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संकट भविष्य में परमाणु ऊर्जा और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर दुनिया को तेजी से मोड़ सकता है।

    ऊर्जा और भू-राजनीति का यह टकराव अब पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेता दिख रहा है। अगर होर्मुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुला, तो आने वाले हफ्तों में इसका असर सीधे लोगों की जेब और यात्रा दोनों पर दिखेगा।