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  • कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम

    कैंसर पर जोंटी रोड्स का बड़ा संदेश, फिटनेस के साथ सही खानपान और जीवनशैली को बताया अहम


    नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर जोंटी रोड्स ने कैंसर को लेकर लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है। अपने क्रिकेट करियर में शानदार फील्डिंग के लिए दुनिया भर में पहचान बनाने वाले रोड्स ने मुंबई में आयोजित एक कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़े विकल्पों पर बात की। वह SSO Cancer Hospitals से ब्रांड एंबेसडर के तौर पर जुड़े हुए हैं और हाल ही में अस्पताल की ओर से शुरू किए गए Head and Neck Cancer Centre of Excellence के उद्घाटन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।

    रोड्स ने कहा कि कैंसर जैसी बीमारी को केवल अचानक होने वाली समस्या के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने अपनी बात रखते हुए आदतों तनाव और जीवनशैली से जुड़े फैसलों को स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना था कि व्यक्ति को अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में ऐसे विकल्प चुनने चाहिए जो लंबे समय तक उसके स्वास्थ्य के लिए बेहतर साबित हों। हालांकि कैंसर के मामले में यह समझना भी जरूरी है कि बीमारी का कोई एक कारण नहीं होता और हर मरीज के कैंसर को उसकी जीवनशैली से जोड़ना सही नहीं है।

    विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कैंसर कई तरह की बीमारियों का समूह है और इसके पीछे आनुवंशिक कारणों के साथ पर्यावरणीय और व्यवहार से जुड़े कई कारक हो सकते हैं। तंबाकू का सेवन शराब अस्वास्थ्यकर खानपान शारीरिक निष्क्रियता अधिक वजन वायु प्रदूषण और कुछ संक्रमण कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। WHO के मुताबिक 2022 में दुनिया भर में कैंसर के नए मामलों में करीब 37 प्रतिशत मामले ऐसे कारणों से जुड़े थे जिन्हें रोकथाम की रणनीतियों के जरिए कम किया जा सकता है।

    रोड्स ने अपनी फिटनेस यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि खिलाड़ी होने के कारण व्यायाम और फिटनेस उनकी जीवनशैली का हिस्सा रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिट व्यक्ति को कैंसर नहीं हो सकता ऐसा कहना सही नहीं होगा। उनका संदेश मुख्य रूप से लोगों को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक करने और बेहतर विकल्प चुनने पर केंद्रित था। दरअसल कैंसर का जोखिम कम करने के लिए केवल व्यायाम ही पर्याप्त नहीं है बल्कि तंबाकू से दूरी स्वस्थ वजन संतुलित खानपान नियमित शारीरिक गतिविधि और शराब से बचाव जैसे कई कदम महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    जोंटी रोड्स ने भारत में अपने परिवार के साथ लंबे समय तक रहने का अनुभव साझा करते हुए कहा कि वह भारत को केवल एक पर्यटक के रूप में नहीं देखते। उन्होंने यहां लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को करीब से देखने की बात कही। उनका उद्देश्य अपने अनुभव के जरिए लोगों को कैंसर के बारे में ज्यादा जानकारी हासिल करने और समय रहते जागरूक होने के लिए प्रेरित करना है।

    कैंसर को लेकर जागरूकता का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर जांच और इलाज भी है। WHO के अनुसार कई तरह के कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने और उचित उपचार मिलने पर इलाज संभव है। यही वजह है कि शरीर में लगातार बने रहने वाले असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। साथ ही नियमित स्वास्थ्य जांच और जोखिम कारकों को कम करने की कोशिश बीमारी के बोझ को घटाने में मदद कर सकती है।

    रोड्स ने कैंसर को लेकर डर के बजाय जागरूकता और सकारात्मक सोच पर जोर दिया। उनका कहना था कि भारत में कैंसर के इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और चिकित्सा सुविधाएं मौजूद हैं और मरीजों को बीमारी का सामना हिम्मत के साथ करना चाहिए। उनका संदेश यही है कि स्वास्थ्य को लेकर छोटे लेकिन लगातार किए जाने वाले सही फैसले लंबे समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को कैंसर होने या न होने का फैसला केवल उसकी जीवनशैली से नहीं किया जा सकता और किसी भी लक्षण या जोखिम की स्थिति में डॉक्टर की सलाह ही सबसे महत्वपूर्ण है।

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    Cancer का खतरा कम करने की नई रणनीति, समय पर जांच से बच सकती हैं हजारों जानें, जानें भारत का पूरा प्लान


    नई दिल्ली। भारत में कैंसर का बढ़ता संकट केवल मरीजों की संख्या तक सीमित नहीं है बल्कि सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की देर से पहचान है। अस्पतालों तक पहुंचने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसी स्थिति में इलाज मुश्किल होने के साथ महंगा भी हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक उपचार के साथ समय पर पहचान और बचाव पर सबसे ज्यादा जोर देने की जरूरत है।

    कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे बढ़ती उम्र के साथ बदलती जीवनशैली धूम्रपान तंबाकू का सेवन असंतुलित खानपान शारीरिक गतिविधियों की कमी और पर्यावरणीय कारणों को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के कई जोखिम कारकों को जीवनशैली में बदलाव और समय पर जांच के जरिए कम किया जा सकता है। इसलिए कैंसर के खिलाफ जागरूकता की शुरुआत इलाज के बाद नहीं बल्कि बचपन से होनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। खानपान शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य नशे से दूरी टीकाकरण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जैसे विषयों को जीवन कौशल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बचपन से अच्छी आदतें विकसित होने पर भविष्य में कैंसर के साथ साथ हृदय रोग डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

    कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए एक आसान बात लोगों को हमेशा याद रखनी चाहिए। अगर शरीर में कोई असामान्य लक्षण लगातार तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहता है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार दर्द शरीर में असामान्य गांठ बिना वजह वजन कम होना लंबे समय तक रहने वाली खांसी निगलने में परेशानी असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय से बनी कमजोरी जैसे लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते लेकिन लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    स्क्रीनिंग भी कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कुछ कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में स्क्रीनिंग के जरिए की जा सकती है। यही वह समय होता है जब उपचार के विकल्प अपेक्षाकृत बेहतर हो सकते हैं। आने वाले समय में तकनीक इस क्षेत्र को और मजबूत कर सकती है। मल्टी कैंसर अर्ली डिटेक्शन जैसे रक्त आधारित परीक्षणों पर दुनियाभर में शोध जारी है। इनका उद्देश्य एक ही रक्त नमूने से कई प्रकार के कैंसर से जुड़े संकेतों की पहचान करना है। हालांकि ऐसे परीक्षणों को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले उनकी सटीकता उपयोगिता और चिकित्सकीय प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी कैंसर की पहचान और रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मेडिकल इमेजिंग और पैथोलॉजी डेटा के बड़े डेटाबेस की मदद से AI आधारित सिस्टम को प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे संदिग्ध मामलों की पहचान में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सहायता मिल सकती है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ केंद्र तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है।

    भारत जैसे विशाल देश में कैंसर स्क्रीनिंग का एक ही मॉडल सभी क्षेत्रों के लिए प्रभावी नहीं हो सकता। गांवों और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स मोबाइल डायग्नोस्टिक सेवाएं डिजिटल रिस्क असेसमेंट और मजबूत रेफरल सिस्टम की जरूरत होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर बड़े कैंसर अस्पताल तक मरीजों को समय पर जोड़ना इस पूरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।

    कैंसर के खिलाफ भारत की असली सफलता केवल आधुनिक मशीनों अस्पतालों या महंगे उपचारों की संख्या से तय नहीं होगी। असली सफलता तब मानी जाएगी जब बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने लगे और कम मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचें। जागरूकता समय पर जांच स्वस्थ जीवनशैली AI आधारित तकनीक और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर कैंसर के खिलाफ भारत की लड़ाई को नई दिशा दे सकते हैं।