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  • उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    उम्र कम है तो कैंसर का खतरा नहीं ऐसा सोचना पड़ सकता है भारी 20 से 30 की उम्र में इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज


    नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर लोगों के मन में यह धारणा बनती है कि यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों को ही होती है। हालांकि कुछ प्रकार के कैंसर कम उम्र के लोगों में भी हो सकते हैं। 20 से 30 साल की उम्र में कैंसर का खतरा आमतौर पर उम्र बढ़ने के मुकाबले कम होता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युवाओं को शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज कर देना चाहिए। कई बार सामान्य लगने वाले लक्षण किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या की वजह से भी हो सकते हैं लेकिन अगर कोई बदलाव लगातार बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    शरीर में अचानक कोई गांठ महसूस होना ऐसा संकेत है जिस पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर अगर गांठ लंबे समय तक बनी रहे या उसके आकार में बदलाव दिखाई दे तो इसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। हर गांठ कैंसर नहीं होती क्योंकि शरीर में कई तरह की गैर कैंसरकारी गांठ भी बन सकती हैं। इसलिए खुद से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    बिना किसी स्पष्ट वजह के लगातार वजन कम होना भी ऐसा बदलाव है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अगर खानपान या व्यायाम में कोई बड़ा बदलाव किए बिना वजन तेजी से कम हो रहा है तो इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव संक्रमण हार्मोन संबंधी समस्या या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं। लगातार वजन घटने पर डॉक्टर से जांच कराना सही कदम माना जाता है।

    लगातार थकान महसूस होना भी कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। पर्याप्त आराम और नींद के बावजूद कमजोरी बनी रहती है तो इसके कारणों की जांच जरूरी हो सकती है। इसी तरह लंबे समय तक रहने वाला बुखार रात में अत्यधिक पसीना आना या शरीर में लगातार कमजोरी जैसी समस्या होने पर भी चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।
    कुछ मामलों में शरीर से असामान्य रक्तस्राव भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। मल या पेशाब में खून दिखाई देना या बिना सामान्य कारण के रक्तस्राव होना ऐसी स्थिति है जिसमें देरी नहीं करनी चाहिए। इसी तरह लंबे समय तक बनी रहने वाली खांसी आवाज में लगातार बदलाव निगलने में परेशानी या शरीर के किसी हिस्से में लगातार दर्द जैसे लक्षणों की भी जांच कराना जरूरी हो सकता है।

    यह समझना बेहद जरूरी है कि इन लक्षणों में से किसी एक का होना कैंसर होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे कई लक्षण सामान्य संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। कैंसर की पुष्टि केवल चिकित्सकीय जांच और जरूरी टेस्ट के बाद ही हो सकती है। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी का अनुमान लगाने से बचना चाहिए।

    युवाओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि अपने शरीर में होने वाले लगातार और असामान्य बदलावों को लेकर जागरूक रहें। संतुलित भोजन नियमित शारीरिक गतिविधि पर्याप्त नींद तंबाकू और धूम्रपान से दूरी तथा समय पर स्वास्थ्य जांच बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अगर कोई लक्षण लगातार बना रहता है या तेजी से बढ़ रहा है तो डॉक्टर से संपर्क करना समझदारी है। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से बीमारी का कारण समझने और जरूरत पड़ने पर उचित उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है।

  • ओवेरियन कैंसर के 6 शुरुआती संकेत जिन्हें महिलाएं अक्सर कर देती हैं नजरअंदाज, समय रहते पहचान बचा सकती है जान

    ओवेरियन कैंसर के 6 शुरुआती संकेत जिन्हें महिलाएं अक्सर कर देती हैं नजरअंदाज, समय रहते पहचान बचा सकती है जान


    नई दिल्ली । महिलाओं की सेहत से जुड़ी सबसे गंभीर बीमारियों में ओवेरियन कैंसर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। भारत में यह महिलाओं के बीच तीसरा सबसे आम कैंसर माना जाता है, लेकिन चिंता की बात यह है कि इसके अधिकांश मामलों की पहचान तब होती है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार करीब 70 से 80 प्रतिशत मरीजों में ओवेरियन कैंसर एडवांस स्टेज में सामने आता है, जिससे इलाज चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य दिखाई देते हैं और महिलाएं उन्हें रोजमर्रा की स्वास्थ्य समस्याएं समझकर नजरअंदाज कर देती हैं।

    लंबे समय तक ओवेरियन कैंसर को “साइलेंट कैंसर” कहा जाता रहा है, लेकिन डॉक्टरों का मानना है कि यह बीमारी पूरी तरह खामोश नहीं होती। यह शरीर को कई छोटे-छोटे संकेत देती है, जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। सबसे आम लक्षणों में लगातार पेट फूलना शामिल है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के पेट हमेशा फूला हुआ महसूस हो या कपड़े अचानक टाइट लगने लगें, तो इसे सामान्य गैस की समस्या समझकर टालना ठीक नहीं है।

    दूसरा महत्वपूर्ण संकेत है कम खाना खाने के बाद भी पेट भरा हुआ महसूस होना। यदि थोड़ी मात्रा में भोजन करने के बावजूद बार-बार ऐसा लगे कि पेट पूरी तरह भर गया है, तो यह शरीर की चेतावनी हो सकती है। इसके साथ ही पेट के निचले हिस्से या पेल्विक एरिया में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना भी ओवेरियन कैंसर का शुरुआती संकेत माना जाता है। यदि यह दर्द बार-बार लौटता है या लंबे समय तक बना रहता है, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    महिलाओं को अपने मासिक धर्म चक्र में होने वाले बदलावों पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। अनियमित पीरियड्स, अत्यधिक या बहुत कम ब्लीडिंग, अचानक मासिक चक्र में बदलाव या मेनोपॉज के बाद किसी भी प्रकार की ब्लीडिंग गंभीर संकेत हो सकते हैं। कई बार महिलाएं इसे सामान्य हार्मोनल बदलाव मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि यह किसी गंभीर बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।

    इसके अलावा असामान्य वेजाइनल डिस्चार्ज भी चिंता का विषय हो सकता है। यदि डिस्चार्ज में दुर्गंध हो, खून के निशान दिखाई दें या मेनोपॉज के बाद इस प्रकार की समस्या हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। बार-बार पेशाब लगना या अचानक यूरिन संबंधी आदतों में बदलाव भी ओवेरियन कैंसर के संकेतों में शामिल हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहे या महीने में 12 दिनों से ज्यादा महसूस हो, तो जांच करवाना बेहद जरूरी है। जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट, ओवेरियन या कोलन कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए क्योंकि उनमें आनुवंशिक जोखिम अधिक हो सकता है।

    चूंकि ओवेरियन कैंसर की पहचान के लिए कोई नियमित और प्रभावी स्क्रीनिंग टेस्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। शरीर के संकेतों को समझना और समय पर डॉक्टर से परामर्श लेना इस गंभीर बीमारी से लड़ाई में सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।