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  • भारतीय मूल के नीरव डी. शाह की अमेरिकी सीनेट चुनाव में एंट्री, डेमोक्रेट उम्मीदवार के हटने के बाद पेश की मजबूत दावेदारी

    भारतीय मूल के नीरव डी. शाह की अमेरिकी सीनेट चुनाव में एंट्री, डेमोक्रेट उम्मीदवार के हटने के बाद पेश की मजबूत दावेदारी

    नई दिल्ली । भारतीय मूल के महामारी विशेषज्ञ और वरिष्ठ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशासक नीरव डी. शाह ने अमेरिकी सीनेट चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार के चुनावी दौड़ से हटने के बाद उनकी उम्मीदवारी सामने आई है, जिससे मेन राज्य की राजनीति में नया समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है। नीरव शाह पहले भी राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं और गवर्नर पद के लिए हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव में प्रमुख दावेदारों में शामिल रहे थे।

    नीरव शाह का यह फैसला ऐसे समय आया है जब डेमोक्रेटिक पार्टी अपने नए उम्मीदवार की तलाश में जुटी है। पूर्व घोषित उम्मीदवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों के बाद उनके चुनाव से हटने की स्थिति बनी, जिसके बाद पार्टी के सामने नए चेहरे को आगे लाने की चुनौती खड़ी हो गई। इसी बीच नीरव शाह ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और आम नागरिकों की पहुंच में बेहतर चिकित्सा व्यवस्था को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही।

    चुनावी अभियान की शुरुआत करते हुए नीरव शाह ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य सुविधा की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना है कि किसी भी नागरिक को केवल इलाज के बढ़ते खर्च के कारण आर्थिक संकट का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुलभ, प्रभावी और समान अवसर आधारित बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। माना जा रहा है कि स्वास्थ्य प्रशासन में उनके लंबे अनुभव को चुनावी अभियान में प्रमुख मुद्दे के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

    भारतीय मूल के नीरव शाह का सार्वजनिक जीवन और प्रशासनिक अनुभव काफी व्यापक रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने मेन राज्य के रोग नियंत्रण केंद्र का नेतृत्व किया और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा वे अमेरिका की राष्ट्रीय स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े सर्वोच्च प्रशासनिक पदों पर भी कार्य कर चुके हैं। राज्य और संघीय स्तर पर स्वास्थ्य नीतियों के संचालन का उनका अनुभव उन्हें अन्य उम्मीदवारों से अलग पहचान देता है।

    शैक्षणिक क्षेत्र में भी नीरव शाह का रिकॉर्ड उल्लेखनीय माना जाता है। उन्होंने चिकित्सा और कानून दोनों विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त की है तथा अर्थशास्त्र का भी अध्ययन किया है। वर्तमान में वे उच्च शिक्षा संस्थान में अध्यापन से जुड़े हुए हैं। बहुभाषी व्यक्तित्व और सार्वजनिक नीति की गहरी समझ के कारण उन्हें प्रशासनिक और अकादमिक दोनों क्षेत्रों में सम्मानित विशेषज्ञ माना जाता है। भारतीय मूल से जुड़े होने के कारण प्रवासी भारतीय समुदाय के बीच भी उनकी विशेष पहचान है।

    अमेरिकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं की बढ़ती भागीदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार चर्चा का विषय रही है। विभिन्न राज्यों और संघीय संस्थानों में भारतीय मूल के कई नेता महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। ऐसे माहौल में नीरव डी. शाह की सीनेट चुनाव में संभावित उम्मीदवारी को भी इसी बदलते राजनीतिक परिदृश्य का हिस्सा माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि डेमोक्रेटिक पार्टी आधिकारिक रूप से किसे उम्मीदवार घोषित करती है और आगामी चुनाव में नीरव शाह अपनी प्रशासनिक पृष्ठभूमि तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य के अनुभव को किस तरह मतदाताओं तक पहुंचाकर राजनीतिक समर्थन हासिल करते हैं।

  • कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात

    कौन बन सकता है RSS चीफ… मोहन भागवत ने चुनाव प्रक्रिया और उम्मीदवारी को लेकर की खुलकर बात


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh- RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) ने अपने रिटायरमेंट को लेकर जारी अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने कहा है कि 75 वर्ष का होने के बाद भी संघ ने उनसे काम जारी रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि संघ के कहने पर वह काम छोड़ सकते हैं पर काम से रिटायर नहीं होंगे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संघ प्रमुख के चुनाव की प्रक्रिया और उम्मीदवारी पर भी बात की।


    कैसे होता है चुनाव

    भागवत ने यह भी कहा कि संघ का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति हमेशा एक हिंदू ही होगा, चाहे उसकी जाति कुछ भी हो और शीर्ष पद सबसे योग्य उम्मीदवार को ही दिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘RSS प्रमुख के पद के लिए कोई चुनाव नहीं होता। क्षेत्रीय और मंडल प्रमुख ही संघ प्रमुख की नियुक्ति करते हैं। आम तौर पर कहा जाता है कि 75 वर्ष की आयु के बाद किसी को कोई पद धारण किए बिना काम करना चाहिए।’


    RSS में कैसे होता है प्रमोशन

    भागवत ने कहा कि RSS में समुदाय आधारित प्रतिनिधित्व नहीं है और स्वयंसेवक अपने काम के आधार पर प्रमोशन पाते हैं। उन्होंने बताया कि जब RSS की स्थापना हुई थी, तब इसका काम ब्राह्मण-बहुल समुदाय में शुरू हुआ था और इसलिए इसके अधिकांश संस्थापक ब्राह्मण थे, जिसके कारण उस समय संगठन को ब्राह्मण संगठन के रूप में जाना जाता था। उन्होंने कहा कि लोग हमेशा ऐसे संगठन की तलाश करते हैं जिसमें उनके समुदाय के प्रतिनिधि हों।


    SC-ST से होगा प्रमुख?

    भागवत ने कहा कि वह इस बारे में कोई निश्चित जवाब नहीं दे सकते कि संघ प्रमुख अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति पृष्ठभूमि से होगा या नहीं क्योंकि यह निर्णय संघ प्रमुख की नियुक्ति करने वालों पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय से होना अयोग्यता नहीं है, और न ही ब्राह्मण होना संघ प्रमुख बनने की योग्यता है।


    मोहन भागवत ने बताई अपनी नियुक्ति की कहानी

    उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे किसी प्रमुख का चयन करना होता, तो मैं ‘सबसे योग्य उम्मीदवार’ के मानदंड को अपनाता। जब मुझे RSS प्रमुख नियुक्त किया गया था, तब कई योग्य उम्मीदवार थे लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। मैं ही वह व्यक्ति था जिसे कार्यभार से मुक्त किया जा सकता था और नियुक्त किया जा सकता था।’ भागवत ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि संगठन ‘अपने स्वयंसेवकों से खून के आखिरी कतरे तक काम निकलवाता है’। उन्होंने दावा किया कि RSS के इतिहास में अब तक ऐसी कोई स्थिति नहीं आई है जब किसी को सेवानिवृत्त करना पड़ा हो।