Tag: Capital Expenditure

  • अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    अदाणी समूह का बड़ा दांव: FY26 में सबसे अधिक कैपेक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी पर फोकस

    नई दिल्ली । देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और यूटिलिटी समूहों में शामिल अदाणी पोर्टफोलियो ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। समूह ने इस अवधि में करीब 1.53 लाख करोड़ रुपये का कैपेक्स किया, जिसे किसी भी भारतीय कॉर्पोरेट समूह द्वारा एक वित्तीय वर्ष में किया गया सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है। इस निवेश के साथ समूह का कुल परिसंपत्ति आधार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 7.85 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज की गई है जब देश में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और ऊर्जा परिवर्तन परियोजनाओं पर जोर दिया जा रहा है।

    समूह के वित्तीय प्रदर्शन में भी मजबूती देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 में ईबीआईटीडीए बढ़कर लगभग 94,834 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। इस आय में ऊर्जा, यूटिलिटी, परिवहन और लॉजिस्टिक्स जैसे मुख्य इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबारों की सबसे बड़ी हिस्सेदारी रही। समूह का मानना है कि मजबूत परिचालन प्रदर्शन और दीर्घकालिक निवेश रणनीति भविष्य में भी विकास की गति बनाए रखने में मदद करेगी।

    कैपेक्स का बड़ा हिस्सा ऊर्जा और यूटिलिटी सेक्टर में लगाया गया, जहां नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया गया। वित्त वर्ष के दौरान 5 गीगावाट से अधिक नई रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी गई, जिससे समूह की कुल परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसके साथ ही बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को भी विस्तार दिया गया है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों और ग्रीन ट्रांजिशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा क्षेत्र में यह निवेश आने वाले वर्षों में समूह के राजस्व और नकदी प्रवाह को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं आगे बढ़ीं। नए एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विकास से समूह ने अपने इंफ्रास्ट्रक्चर पोर्टफोलियो को और व्यापक बनाया है। एयरपोर्ट कारोबार में यात्रियों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बंदरगाह कारोबार में कार्गो हैंडलिंग वॉल्यूम ने भी नया स्तर हासिल किया। वैश्विक विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाते हुए समूह ने विदेशों में रणनीतिक परिसंपत्तियों के अधिग्रहण और विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है।

    वित्तीय मोर्चे पर समूह ने नकदी स्थिति और ऋण प्रबंधन को भी मजबूत बनाए रखा है। बेहतर क्रेडिट प्रोफाइल और वित्तीय अनुशासन के कारण उधारी लागत में कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा इक्विटी आधारित वित्तपोषण पर जोर देकर समूह ने अपनी बैलेंस शीट को अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े निवेश चक्र के बावजूद ऋण और नकदी के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी इंफ्रास्ट्रक्चर समूह के लिए महत्वपूर्ण होता है और यही पहलू निवेशकों का भरोसा बढ़ाता है।

    आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं के पूरी तरह परिचालन में आने के बाद समूह की आय, लाभ और नकदी प्रवाह में और वृद्धि देखने को मिल सकती है। भारत में तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, शहरीकरण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरतों के बीच इस तरह के बड़े निवेश देश की आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?

    सीमित संसाधनों के बावजूद सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देने की तैयारी, क्या सफल होगा यह बड़ा दांव?


    नई दिल्ली।देश के विभिन्न राज्यों के लिए वित्त वर्ष 2027 में आर्थिक रणनीति का केंद्र सार्वजनिक निवेश बना रहेगा। अनुमान है कि राज्य सरकारें बुनियादी ढांचे के विकास और दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती को ध्यान में रखते हुए पूंजीगत खर्च को प्राथमिकता देती रहेंगी। हालांकि, इस खर्च की वृद्धि दर अपेक्षाकृत सीमित रह सकती है और इसके 8 से 10 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है। यह स्थिति दर्शाती है कि राज्यों को विकास और वित्तीय संतुलन के बीच सावधानीपूर्वक तालमेल बनाना होगा।

    आर्थिक आकलनों के अनुसार, राज्यों का पूंजीगत व्यय सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 2.3 से 2.4 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है। यह संकेत देता है कि बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं जैसे सड़क, परिवहन, ऊर्जा और शहरी विकास में निवेश जारी रहेगा। इस तरह के निवेश से रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है, जो दीर्घकाल में राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर सकता है।

    दूसरी ओर, राज्यों के सामने राजस्व व्यय को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बन सकता है। जनकल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ता खर्च और ऊर्जा तथा कमोडिटी की ऊंची लागत से वित्तीय दबाव बढ़ने की संभावना है। इसके चलते राज्यों के कुल खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे उनके बजट संतुलन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि दर भी सीमित रहने का अनुमान है, जो वित्त वर्ष 2026 में लगभग 6.2 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027 में करीब 7.9 प्रतिशत तक रह सकती है। यह वृद्धि दर नाममात्र के आर्थिक विस्तार की तुलना में कम मानी जा रही है।

    राज्यों की आय पर केंद्र से मिलने वाले संसाधनों की गति में संभावित कमी का भी प्रभाव पड़ सकता है। वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती सब्सिडी आवश्यकताओं के कारण केंद्र सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे राज्यों को मिलने वाले हस्तांतरणों की वृद्धि धीमी हो सकती है। इस स्थिति में राज्यों को अपने संसाधनों का अधिक कुशल प्रबंधन करना होगा ताकि विकास परियोजनाओं को जारी रखा जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता देने के बावजूद इसकी वृद्धि दर धीमी पड़ सकती है, जिसका असर राजकोषीय घाटे और ऋण स्तर पर दिखाई दे सकता है। अनुमान है कि राजस्व घाटा धीरे-धीरे बढ़कर वित्त वर्ष 2027 तक सकल राज्य घरेलू उत्पाद के लगभग 1.2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। यह स्थिति राज्यों के लिए वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता को और महत्वपूर्ण बना देती है, ताकि वे अपने विकास लक्ष्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन स्थापित कर सकें।

    उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना जैसे प्रमुख राज्यों ने पहले भी सीमित राजस्व वृद्धि के बावजूद पूंजीगत व्यय को प्राथमिकता दी है। यह रुझान बताता है कि राज्यों का ध्यान दीर्घकालिक आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। आने वाले समय में भी यह रणनीति आर्थिक स्थिरता और विकास को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • दिल्ली का नया बजट 2026-27: राजधानी में तेजी से डिलीवरी और प्रशासनिक सुधारों का रोडमैप

    दिल्ली का नया बजट 2026-27: राजधानी में तेजी से डिलीवरी और प्रशासनिक सुधारों का रोडमैप


    नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन 2026-27 का बजट सर्वसम्मति से पास हो गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट पेश करते हुए स्पष्ट किया कि अब राजधानी में काम करने का तरीका पूरी तरह बदलने वाला है। उनका संदेश साफ था, यह नई सरकार है और काम करने का तरीका भी नया है। अब फोकस सिर्फ डिलीवरी पर होगा। सीएम ने भरोसा दिलाया कि अधूरे प्रोजेक्ट पूरे किए जाएंगे, जनता के पैसे का सही हिसाब होगा और हर नागरिक को उसका हक मिलेगा।

    रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली की बुनियादी सुविधाएं अब उनकी सरकार की प्राथमिकता हैं। अब दिल्ली को बहाने नहीं, परिणाम चाहिए। अब हेडलाइन्स नहीं, गाइडलाइन्स के साथ काम होगा और हर नागरिक को उसका अधिकार दिलाना हमारी जिम्मेदारी है। यह बयान प्रशासनिक बदलाव और तेज कामकाज का संकेत देता है।

    इस बजट की सबसे बड़ी खासियत पूंजीगत खर्च यानी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर जोर है। सीएम ने कहा, दिल्ली के सर्वांगीण विकास के लिए इस बार पूंजीगत खर्च पर अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटन किया गया है। उनका कहना है कि यह बजट केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने में काम आएगा।

    सीएम ने पिछली सरकार पर भी निशाना साधते हुए बताया कि दिल्ली पर ₹47,000 करोड़ से ज्यादा का कर्ज छोड़ा गया, जिसमें ₹27,547 करोड़ अब भी बकाया है। उन्होंने आरोप लगाया, PWD के एक प्रोजेक्ट में बिना काम हुए ₹250 करोड़ का भुगतान कर दिया गया, जो गंभीर अनियमितता को दिखाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खिलाड़ियों, EWS वर्ग, स्कॉलरशिप, अवॉर्ड्स और किशोरी योजना से जुड़े लंबित भुगतान को साफ कर रही है।

    बजट में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया गया है। सीएम ने बताया कि मुनक नहर के साथ ₹5,000 करोड़ की एलिवेटेड रोड बनाई जा रही है, जिससे ट्रैफिक जाम में राहत मिलेगी। इसके अलावा मेट्रो विस्तार, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) ट्रांजिशन और सड़कों के बड़े निर्माण पर भी जोर दिया गया है।

    ग्रीन और एडमिनिस्ट्रेटिव सुधार भी इस बजट का अहम हिस्सा हैं। दिल्ली में पहली बार 4,200 हेक्टेयर रिज एरिया को फॉरेस्ट लैंड घोषित किया गया है और अगले चार साल में 35 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासनिक सुधारों के तहत लाइसेंस प्रक्रिया आसान होगी, फायर NOC डिजिटल किया जाएगा और 1.5 लाख से ज्यादा प्रॉपर्टीज को बिजली कनेक्शन देने की योजना है।

    इस बजट के साथ सीएम रेखा गुप्ता ने यह साफ कर दिया कि अब बहाने नहीं, सिर्फ परिणाम होंगे। जमीनी बदलाव, बुनियादी सुविधाओं की तेजी और प्रशासनिक सुधार दिल्ली के नागरिकों को सीधा लाभ पहुंचाएंगे और राजधानी के विकास की दिशा को नई गति देंगे।

  • मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश

    मध्य प्रदेश का महाबजट तैयार, 4.70 लाख करोड़ के करीब आकार; 18 फरवरी को विधानसभा में होगा पेश


    भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार इस बार राज्य का बजट आकार करीब 4.70 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के 4.21 लाख करोड़ रुपये के बजट से लगभग 12 प्रतिशत अधिक होगा। बजट 18 फरवरी को विधानसभा में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किया जाएगा। इसके साथ ही प्रदेश की आर्थिक दिशा और विकास की प्राथमिकताएं स्पष्ट होंगी।

    बजट पेश करने से पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बजट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। बैठक में विकास योजनाओं वित्तीय अनुशासन और दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति पर विशेष चर्चा हुई। सरकार इस बार राजकोषीय घाटा नियंत्रित रखने पर खास जोर दे रही है ताकि राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित और मजबूत बनी रहे। वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करने के साथ-साथ विकास की रफ्तार बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती और प्राथमिकता दोनों है।

    सूत्रों के मुताबिक इस बार पूंजीगत व्यय कैपिटल एक्सपेंडिचर में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। इसका सीधा असर बुनियादी ढांचे के विकास पर पड़ेगा। सड़क पुल सिंचाई परियोजनाएं शहरी अधोसंरचना शिक्षा संस्थानों का विस्तार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर बड़े निवेश की तैयारी है। सरकार का मानना है कि पूंजीगत निवेश बढ़ने से रोजगार के अवसर सृजित होंगे और निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

    विधानसभा का बजट सत्र 16 फरवरी से प्रारंभ हो रहा है। इस दौरान बजट प्रस्तुति के अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी। यह बजट मोहन यादव सरकार का तीसरा प्रमुख बजट माना जा रहा है जिससे जनता और विभिन्न वर्गों को काफी उम्मीदें हैं।

    सरकार के संकेत हैं कि इस बजट में किसान कल्याण योजनाओं को मजबूती दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी सुधार सिंचाई विस्तार और समर्थन मूल्य से जुड़ी व्यवस्थाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसके अलावा महिला सशक्तिकरण लाड़ली बहना जैसी योजनाओं के लिए प्रावधान बढ़ने की संभावना है। युवाओं के लिए कौशल विकास स्टार्टअप प्रोत्साहन और सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाने जैसे कदम भी बजट का हिस्सा बन सकते हैं।

    ग्रामीण विकास पेयजल बिजली और आवास योजनाओं के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित किए जाने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि यह बजट विकास और वित्तीय अनुशासन के संतुलन का मॉडल पेश करेगा और प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब निगाहें 18 फरवरी पर टिकी हैं जब विधानसभा में इस ‘महाबजट का औपचारिक ऐलान होगा।