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  • नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके वर्षों पुराने एक बयान की चर्चा भी हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर अपनी इच्छा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें दुनिया से जाना है और उनके अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पर्याप्त होगी। अभिनेता ने इसे अपनी आखिरी संपत्ति तक बताया था।

    नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान मौत और अंतिम संस्कार को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह मौत में विश्वास रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा। अपने अंतिम संस्कार के बारे में उन्होंने बेहद साधारण अंदाज में कहा था कि उन्हें 12 मन लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा था कि यही उनकी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’ है और इसके साथ ही वह दुनिया से चले जाएंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट था कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव को लेकर व्यावहारिक सोच रखते थे।

    अभिनेता ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पहले से ही जमा करके रखी है। उन्होंने खास तौर पर इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि जो लकड़ी उन्होंने जमा कर रखी है, वह सूखी है और उसी से उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि गीली लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर की यह बात उनके सहज और अलग अंदाज को भी दिखाती है, जिसमें उन्होंने गंभीर विषय को भी अपने खास हास्य के साथ सामने रखा था।

    सूखी लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में इसकी वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर गीली लकड़ी का इस्तेमाल किया गया तो आंखों में आंसू आ सकते हैं। ऐसे में मरते समय यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कम से कम मरते समय ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान में मौत जैसे गंभीर विषय के बीच उनका चिर-परिचित हास्य नजर आया था।

    नाना पाटेकर के आखिरी समय की बात करें तो गुरुवार सुबह गोवा में उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने एक दोस्त से कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और सीने के बाईं ओर दर्द हो रहा है। इसके बाद उनका दोस्त डोना पाउला स्थित घर पहुंचा, जहां उन्हें तकलीफ में पाया गया। इसके बाद केयरटेकर को बुलाया गया और एम्बुलेंस भी बुलाई गई।

    नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 बजे मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से होने की बात सामने आई है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। अभिनेता के निधन के बाद उनके पुराने बयान में कही गई अंतिम संस्कार की इच्छा भी चर्चा में आ गई है।

  • बैतूल में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद तेज DJ और स्वास्थ्य जोखिम को लेकर सवाल उठे हैं।

    बैतूल में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान छात्रा की तबीयत बिगड़ने के बाद तेज DJ और स्वास्थ्य जोखिम को लेकर सवाल उठे हैं।

    मध्य प्रदेश: के बैतूल में गणेश विसर्जन जुलूस के दौरान 17 वर्षीय छात्रा की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौत के बाद तेज DJ की आवाज को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। घटना शुक्रवार रात जेएच कॉलेज परिसर की बताई गई है। छात्रा प्रतीक्षा वर्मा जुलूस के दौरान अपनी छोटी बहन के साथ कॉलेज पहुंची थी। इसी दौरान उसे चक्कर आया और वह बेहोश हो गई। बाद में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने तेज DJ की आवाज को उसकी तबीयत बिगड़ने की वजह बताया है, हालांकि मौत की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    तेज आवाज शरीर में तनाव की प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। अचानक बहुत अधिक शोर होने पर शरीर में एड्रिनेलिन और कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ सकते हैं। इसके चलते कुछ समय के लिए रक्तचाप और हृदय गति बढ़ सकती है। जिन लोगों को पहले से हृदय संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या धड़कन से जुड़ी समस्या है, उनके लिए अत्यधिक शोर और तनाव परेशानी बढ़ाने वाला हो सकता है।

    तेज आवाज और हैवी बेस से पैदा होने वाले कंपन का असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में तनाव और अचानक बढ़ा रक्तचाप हृदय की धड़कन को प्रभावित कर सकता है। हालांकि केवल DJ की तेज आवाज को सीधे हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट का कारण मानना सही नहीं होगा। इसके लिए व्यक्ति की पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थिति और अन्य परिस्थितियों की भी जांच जरूरी होती है।

    बैतूल की घटना में सामने आई जानकारी के मुताबिक, प्रतीक्षा बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा थी और एसएससी जीडी की तैयारी भी कर रही थी। उसकी बहन वेदिका ने बताया कि कॉलेज परिसर में DJ काफी तेज बज रहा था। इसी दौरान प्रतीक्षा को चक्कर आया। उसे अलग बैठाया गया और बाद में जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर उसकी कैरोटिड पल्स नहीं मिली और ECG में फ्लैट लाइन दर्ज हुई। शुरुआती स्थिति कार्डियक अरेस्ट जैसी बताई गई।

    पुलिस के अनुसार, छात्रा के बचपन से ही दिल संबंधी समस्या होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में यह पहलू जांच के लिए महत्वपूर्ण है। पुलिस DJ साउंड सिस्टम की तकनीकी जांच भी करा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि आयोजन के दौरान ध्वनि का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक था या नहीं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत की चिकित्सकीय वजह स्पष्ट हो सकेगी।

    तेज आवाज का जोखिम केवल पहले से हृदय रोग वाले लोगों तक सीमित नहीं माना जा सकता। लंबे समय तक अत्यधिक शोर तनाव, नींद और रक्तचाप पर असर डाल सकता है। भीड़, गर्मी, शारीरिक थकान और लगातार तेज आवाज जैसी परिस्थितियां किसी व्यक्ति की परेशानी बढ़ा सकती हैं।

    ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए देश में निर्धारित नियम लागू हैं। खुले स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और ध्वनि विस्तारक उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। आयोजन के दौरान निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना जरूरी है। अस्पताल, स्कूल और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास शोर को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

    DJ की आवाज कितनी तेज है, इसका अंदाजा लगाने के लिए डेसिबल मीटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है। बड़े आयोजनों में ध्वनि स्तर की निगरानी से अत्यधिक शोर को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हृदय संबंधी समस्या वाले लोगों के लिए तेज DJ और भारी भीड़ से दूरी बनाए रखना अतिरिक्त सावधानी हो सकती है।

  • एक ही दिन में बुझ गए दो जीवन: रीवा के कारोबारी की मौत के बाद पत्नी भी नहीं सह सकीं सदमा

    एक ही दिन में बुझ गए दो जीवन: रीवा के कारोबारी की मौत के बाद पत्नी भी नहीं सह सकीं सदमा


    मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के रीवा और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से सामने आई एक मार्मिक घटना ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। रीवा के युवा कारोबारी प्रदीप सोनी की अचानक हुई मौत के कुछ समय बाद उनकी पत्नी वैशाली खड़ायत की भी मृत्यु हो गई। एक ही दिन में हुई इन दोनों घटनाओं ने परिजनों, मित्रों और स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया है।

    जानकारी के अनुसार प्रदीप सोनी रीवा के अनंतपुर क्षेत्र स्थित अपने घर में अकेले रह रहे थे। उनकी पत्नी वैशाली कुछ दिनों के लिए अपने मायके उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गई हुई थीं। रविवार को जब लंबे समय तक प्रदीप का मोबाइल फोन बंद मिला और उनसे संपर्क नहीं हो पाया, तो परिजनों को चिंता हुई। परिवार के सदस्य उनके घर पहुंचे, लेकिन दरवाजा नहीं खुलने पर अंदर प्रवेश किया गया। वहां प्रदीप मृत अवस्था में मिले।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और चिकित्सकीय टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के अनुसार प्रदीप और वैशाली का विवाह वर्ष 2021 में हुआ था। दोनों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव था और परिवार के लोग उन्हें एक-दूसरे के प्रति बेहद समर्पित बताते हैं। प्रदीप के पिता परमानंद सोनी ने बताया कि परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि बेटे की अचानक हुई मृत्यु ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।

    इधर उत्तराखंड में मौजूद वैशाली को पति के निधन की सूचना मिली तो वह गहरे सदमे में चली गईं। परिजनों के अनुसार सूचना मिलने के कुछ समय बाद वह घर से निकल गईं। बाद में उनका शव जाजरदेवल थाना क्षेत्र के एक जलाशय के पास मिला। मौके से उनका मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान भी बरामद हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    दोनों घटनाओं के बाद सोनी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ही दिन में बेटे और बहू को खो देने से परिवार के सदस्य गहरे सदमे में हैं। रिश्तेदारों और परिचितों का लगातार घर पहुंचना जारी है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

    मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच में किसी प्रकार की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है। दोनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने स्तर पर घटनाओं की जांच कर रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है।

    इस घटना के साथ ही युवाओं में बढ़ते हृदय संबंधी जोखिमों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कारक हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। चिकित्सकों का सुझाव है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर ऐसे जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    फिलहाल यह घटना एक ऐसे परिवार की त्रासदी बनकर सामने आई है, जिसने कुछ ही घंटों के अंतराल में अपने दो प्रिय सदस्यों को खो दिया। पूरे घटनाक्रम ने लोगों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है और हर किसी की संवेदनाएं शोकग्रस्त परिवार के साथ हैं।