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  • दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ हृदय रोगी की रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से नई मिसाल

    दिल्ली के सरकारी अस्पताल ने बनाया विश्व रिकॉर्ड, दुर्लभ हृदय रोगी की रोबोटिक वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी से नई मिसाल

    नई दिल्ली । भारत ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम दर्ज कर ली है। दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (वीएमएमसी) और सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सकों ने दुनिया की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एट्रियोवेंट्रिकुलर (एवी) वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक कर वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है। इस उपलब्धि को आधुनिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रक्रिया एक ऐसे मरीज पर की गई जो जन्म से ही दो अत्यंत दुर्लभ और जटिल हृदय संबंधी विकृतियों से पीड़ित था।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार यह जटिल ऑपरेशन संस्थान की निदेशक डॉ. कविता शर्मा की देखरेख में संपन्न हुआ। कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग की विशेषज्ञ टीम ने प्रोफेसर डॉ. अनुभव गुप्ता के नेतृत्व में इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफल बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में अत्याधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाओं की क्षमता का भी प्रमाण है।

    जिस मरीज का ऑपरेशन किया गया, वह जन्मजात रूप से ‘कंजेनिटली करेक्टेड ट्रांसपोजिशन ऑफ द ग्रेट आर्टरीज’ (ccTGA) और ‘डेक्स्ट्रोकार्डिया’ जैसी दुर्लभ बीमारियों से प्रभावित था। ccTGA ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय की संरचना सामान्य से भिन्न होती है और शरीर में रक्त प्रवाह बनाए रखने के लिए हृदय के हिस्सों को अतिरिक्त दबाव में कार्य करना पड़ता है। वहीं डेक्स्ट्रोकार्डिया में हृदय सामान्य स्थिति के विपरीत छाती के दाईं ओर स्थित होता है, जिससे किसी भी प्रकार की सर्जरी अत्यधिक जटिल हो जाती है।

    इन दोनों स्थितियों के कारण पारंपरिक सर्जरी की तकनीक अपनाना संभव नहीं था। आमतौर पर रोबोटिक माइट्रल वाल्व रिप्लेसमेंट छाती के दाईं ओर से किया जाता है, लेकिन इस मरीज में हृदय की स्थिति अलग होने के कारण चिकित्सकों ने पूरी प्रक्रिया के लिए बाईं ओर से प्रवेश का नया तरीका विकसित किया। यह तकनीक पहले कभी इस प्रकार उपयोग में नहीं लाई गई थी और इसी कारण इसे विश्व की पहली रोबोटिक लेफ्ट सिस्टमिक एवी वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी माना जा रहा है।

    विशेषज्ञ टीम ने ऑपरेशन के दौरान छाती की हड्डी को काटने के बजाय छोटे-छोटे पोर्ट के माध्यम से रोबोटिक उपकरणों का उपयोग किया। इस मिनिमली इनवेसिव तकनीक के कारण मरीज के शरीर को कम नुकसान पहुंचा और ऑपरेशन अधिक सटीकता के साथ पूरा किया गया। चिकित्सकों के अनुसार इस पद्धति से रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा काफी कम रहता है, ऑपरेशन के बाद दर्द भी अपेक्षाकृत कम होता है तथा मरीज सामान्य जीवन में जल्दी लौट सकता है।

    चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सफलता भविष्य में जटिल जन्मजात हृदय रोगों के उपचार के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। रोबोटिक तकनीक की मदद से कठिन सर्जरी को अधिक सुरक्षित, सटीक और कम जोखिम वाला बनाया जा सकता है। इससे ऐसे मरीजों को भी लाभ मिलेगा जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है।

    यह उपलब्धि भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र, चिकित्सा अनुसंधान और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का विश्वास है कि इस सफलता के बाद देश में रोबोटिक कार्डियक सर्जरी के क्षेत्र में नए अनुसंधान और उन्नत उपचार पद्धतियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही भारत वैश्विक चिकित्सा समुदाय में नवाचार आधारित स्वास्थ्य सेवाओं के एक मजबूत केंद्र के रूप में अपनी पहचान और अधिक सुदृढ़ करेगा।

  • 40 घंटे तक थमी रही दिल की धड़कन, आधुनिक इलाज और डॉक्टरों की कोशिशों ने मरीज को दी नई जिंदगी

    40 घंटे तक थमी रही दिल की धड़कन, आधुनिक इलाज और डॉक्टरों की कोशिशों ने मरीज को दी नई जिंदगी

    नई दिल्ली । पूर्वी चीन में सामने आया एक दुर्लभ चिकित्सा मामला आधुनिक मेडिकल साइंस की क्षमताओं और समय पर मिले उपचार के महत्व को रेखांकित करता है। लगभग 40 वर्षीय एक व्यक्ति, जिसे सीने में जकड़न और सांस लेने में कठिनाई की शिकायत थी, अस्पताल पहुंचने के कुछ ही समय बाद अचानक गंभीर स्थिति में चला गया। इलाज के दौरान उसका दिल और सांस दोनों एक साथ बंद हो गए। सामान्य परिस्थितियों में ऐसी स्थिति को अत्यंत गंभीर माना जाता है और लंबे समय तक हृदय की धड़कन बंद रहने पर बचने की संभावना बहुत कम रह जाती है। इसके बावजूद चिकित्सकों ने लगातार प्रयास जारी रखे और अंततः मरीज को सुरक्षित जीवन वापस दिलाने में सफलता हासिल की।

    अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच के साथ ही मरीज का उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी हालत तेजी से बिगड़ गई। चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट के बाद हृदय को दोबारा सक्रिय करने के लिए आवश्यक सभी मानक प्रक्रियाएं अपनाईं। कई बार इलेक्ट्रिक शॉक देने सहित अन्य आपातकालीन उपाय किए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। इसके बाद विशेषज्ञों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्नत लाइफ सपोर्ट तकनीकों का सहारा लेने का निर्णय लिया।

    मरीज को ऐसी मशीन से जोड़ा गया जिसने अस्थायी रूप से उसके दिल और फेफड़ों का कार्य संभाल लिया। यह प्रणाली शरीर से रक्त निकालकर उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और फिर उसे वापस शरीर में पहुंचाती है, जिससे आवश्यक अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बनी रहती है। इसके साथ एक अन्य सहायक उपकरण का उपयोग भी किया गया, जिससे हृदय पर दबाव कम रखने और रक्त संचार को स्थिर बनाए रखने में सहायता मिली। इन आधुनिक तकनीकों के कारण मरीज के शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को लगातार ऑक्सीजन मिलती रही।

    करीब 40 घंटे तक मरीज का शरीर पूरी तरह इन लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। इस दौरान डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर रखती रही और आवश्यक चिकित्सकीय बदलाव करती रही। लंबे समय तक हृदय की सामान्य धड़कन वापस न आने के बावजूद इलाज जारी रखा गया। आखिरकार लगभग दो दिन बाद मरीज के हृदय ने स्वयं दोबारा काम करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसकी धड़कन सामान्य होने लगी और शरीर ने उपचार के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया।

    आगे की जांच में चिकित्सकों ने पाया कि मरीज गंभीर मायोकार्डाइटिस यानी हृदय की मांसपेशियों में सूजन से पीड़ित था। यह बीमारी कई मामलों में तेजी से हृदय की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है और समय पर उपचार न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मामलों में शीघ्र पहचान, लगातार निगरानी और उन्नत चिकित्सा सुविधाएं मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

    लगातार इलाज और निगरानी के बाद मरीज की स्थिति में सुधार होता गया। लगभग तीन सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में छुट्टी दे दी गई। चिकित्सकों का मानना है कि आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों की त्वरित निर्णय क्षमता और समय पर मिले उपचार ने इस चुनौतीपूर्ण मामले को सफल परिणाम तक पहुंचाया। यह घटना बताती है कि गंभीर कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में भी उचित चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक उपकरण और निरंतर चिकित्सकीय प्रयास कई बार असंभव लगने वाली परिस्थितियों को भी सकारात्मक परिणाम में बदल सकते हैं। ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी प्रगति और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था के महत्व को भी स्पष्ट रूप से सामने लाती हैं।

  • आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा, आदतों में समय रहते सुधार से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

    आईसीएमआर के अध्ययन में खुलासा, आदतों में समय रहते सुधार से टल सकता है हार्ट अटैक का खतरा

    नई दिल्ली । भारत सहित वैश्विक स्तर पर कम उम्र के युवाओं में हृदय संबंधी बीमारियों और अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में हो रही अप्रत्याशित वृद्धि ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को गहरी चिंता में डाल दिया है। बीस वर्ष से कम आयु के युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर, धमनियों में ब्लॉकेज और दिल के दौरों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि यह समस्या केवल आनुवंशिक कारणों तक सीमित नहीं रह गई है। चिकित्सा विज्ञानियों के अनुसार, दैनिक दिनचर्या में शामिल गलत आदतें और अस्वस्थ जीवनशैली इस गंभीर स्वास्थ्य संकट का सबसे मुख्य कारण बनकर सामने आई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्टों में भी यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि गैर-संक्रामक रोगों में हृदय रोग दुनिया भर में होने वाली सर्वाधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।

    भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए हालिया शोध में एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। इस अध्ययन के अनुसार, देश के लगभग नब्बे प्रतिशत वयस्कों के रक्त नमूनों में कोलेस्ट्रॉल या वसा का कम से कम एक स्तर सामान्य मापदंडों से असंतुलित पाया गया है। शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का बढ़ना धमनियों में रुकावट पैदा करता है, जिससे दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। कई बार ये स्वास्थ्य समस्याएं बिना किसी स्पष्ट शारीरिक लक्षण के लंबे समय तक शरीर के भीतर विकसित होती रहती हैं, जिससे स्थिति अचानक गंभीर रूप ले लेती है और व्यक्ति को संभलने का अवसर नहीं मिलता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी कई आदतें दिल की सेहत को सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रही हैं। लगातार कई घंटों तक एक ही स्थान पर बैठकर काम करना, शारीरिक व्यायाम की कमी, जंक फूड और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन धमनियों को सख्त और संकीर्ण बना देता है। इसके अलावा, धूम्रपान और तंबाकू के सेवन से रक्त में ऑक्सीजन का स्तर घटता है तथा रक्त धमनियों की अंदरूनी दीवारों को क्षति पहुंचती है। अत्यधिक मानसिक तनाव, अनिद्रा और खानपान में अत्यधिक नमक व शर्करा की मात्रा भी उच्च रक्तचाप को बढ़ावा देकर हृदय के कार्यकलापों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।

    चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही दैनिक आदतों में सकारात्मक परिवर्तन किए जाएं, तो हृदय रोगों, स्ट्रोक और अकाल मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए संतुलित आहार का सेवन, नियमित रूप से योग या व्यायाम, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन जैसी स्वास्थवर्धक आदतों को अपनाना अनिवार्य है। साथ ही, पारिवारिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए नियमित अंतराल पर ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की निवारक जांच कराना आवश्यक है। समय पर की गई यह सतर्कता बेजुबान दिल को सुरक्षित रखने और गंभीर चिकित्सा आपात्काल से बचाने में अत्यंत कारगर सिद्ध हो सकती है।

  • हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल

    हार्ट ट्रीटमेंट में नई उपलब्धि बुजुर्ग मरीज को लगाया 25 साल तक चलने वाला आधुनिक हार्ट वाल्व जटिल प्रक्रिया रही सफल


    नई दिल्ली। हृदय रोगों के उपचार में आधुनिक चिकित्सा तकनीक ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। टेंडरपाम हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विभाग ने 78 वर्षीय एक बुजुर्ग मरीज पर अत्यंत जटिल हृदय प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए उन्हें नई जिंदगी देने का दावा किया है। मरीज को गंभीर हृदय संबंधी समस्याओं के साथ एक ऐसा अत्याधुनिक हार्ट वाल्व लगाया गया है जिसकी अनुमानित कार्यक्षमता लगभग 25 वर्षों तक बनी रह सकती है।

    अस्पताल के अनुसार मरीज मधुमेह कोरोनरी आर्टरी डिजीज सौम्य प्रोस्टेट वृद्धि पेसमेकर और गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस जैसी कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित थे। इन बीमारियों के कारण पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी का जोखिम काफी अधिक था। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कम जोखिम वाली आधुनिक तकनीक अपनाते हुए एक ही सत्र में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व इम्प्लांटेशन और जटिल कोरोनरी एंजियोप्लास्टी करने का निर्णय लिया।

    प्रक्रिया के दौरान मरीज में एडवर्ड सैपियन अल्ट्रा रेसिलिया नाम का अत्याधुनिक ट्रांसकैथेटर हार्ट वाल्व प्रत्यारोपित किया गया। इस वाल्व की सबसे बड़ी विशेषता इसका विशेष रेसिलिया टिश्यू है जो सामान्य बायोलॉजिकल वाल्व की तुलना में अधिक समय तक टिकाऊ माना जाता है। उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर इसकी अनुमानित आयु लगभग 25 वर्ष बताई जाती है। इसी कारण इसे सरल भाषा में पूरी जिंदगी के लिए एक वाल्व के रूप में भी प्रचारित किया जा रहा है।

    इलाज के दौरान की गई कोरोनरी एंजियोग्राफी में मरीज की हृदय धमनियों में गंभीर कैल्सीफाइड ब्लॉकेज का पता चला। यह स्थिति सामान्य एंजियोप्लास्टी से उपचार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। डॉक्टरों ने आधुनिक ऑर्बिटल एथेरेक्टॉमी तकनीक की मदद से धमनियों में जमा कैल्शियम को हटाया और इंट्रावास्कुलर लिथोट्रिप्सी तकनीक का उपयोग कर ब्लॉकेज को खोला। इसके बाद मुख्य धमनी एलएडी में दो स्टेंट सफलतापूर्वक लगाए गए।

    अस्पताल के अनुसार एक ही सत्र में दोनों जटिल प्रक्रियाएं पूरी करने से मरीज का कुल जोखिम कम हुआ और उपचार अधिक प्रभावी रहा। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति स्थिर रही तथा उन्हें केवल तीन दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीकों के कारण अब ऐसे बुजुर्ग और उच्च जोखिम वाले मरीजों का भी सफल उपचार संभव हो रहा है जिनके लिए पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी सुरक्षित विकल्प नहीं मानी जाती। अस्पताल ने इस उपलब्धि को उत्तर प्रदेश में अपनी तरह की शुरुआती जटिल प्रक्रियाओं में से एक बताया है।

    हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी भी हार्ट वाल्व की वास्तविक आयु मरीज की स्वास्थ्य स्थिति जीवनशैली संक्रमण के जोखिम और नियमित चिकित्सकीय देखभाल जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए हर मरीज के लिए उपचार और परिणाम अलग हो सकते हैं।

  • सेंसिटिव टूथपेस्ट पर विशेषज्ञों की चेतावनी, दांतों को राहत देने वाला तत्व कुछ मरीजों के लिए बन सकता है खतरा

    सेंसिटिव टूथपेस्ट पर विशेषज्ञों की चेतावनी, दांतों को राहत देने वाला तत्व कुछ मरीजों के लिए बन सकता है खतरा

    नई दिल्ली । दांतों की संवेदनशीलता से राहत दिलाने वाले विशेष टूथपेस्ट का उपयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। ठंडी या गर्म चीजें खाने-पीने पर दांतों में होने वाली झनझनाहट से परेशान लोग ऐसे उत्पादों का सहारा लेते हैं, जो तत्काल राहत देने का दावा करते हैं। हालांकि अब स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इन टूथपेस्ट में मौजूद कुछ तत्व विशेष परिस्थितियों में हृदय और किडनी के मरीजों के लिए चिंता का कारण बन सकते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, कई सेंसिटिव टूथपेस्ट में पोटैशियम नाइट्रेट नामक तत्व का उपयोग किया जाता है। यह दांतों की नसों की गतिविधि को शांत करके संवेदनशीलता से होने वाले दर्द को कम करने में मदद करता है। यही कारण है कि ऐसे टूथपेस्ट दांतों में होने वाली झनझनाहट और असहजता को नियंत्रित करने में प्रभावी माने जाते हैं। हालांकि कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों के लिए इसके उपयोग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि पोटैशियम शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक तत्व है। यह विशेष रूप से हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेतों के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि शरीर में पोटैशियम का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है तो हृदय की सामान्य कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में धड़कनों की अनियमितता सहित कई गंभीर समस्याएं उत्पन्न होने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि केवल सेंसिटिव टूथपेस्ट के उपयोग से अधिकांश स्वस्थ लोगों में कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने की संभावना बहुत कम होती है। चिंता मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जो पहले से हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं या ऐसी दवाएं ले रहे हैं जो शरीर में पोटैशियम के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे मरीजों में अतिरिक्त पोटैशियम का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

    विशेषज्ञों ने कुछ श्रेणियों के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। इनमें उच्च रक्तचाप या हार्ट फेलियर के उपचार के लिए कुछ विशेष दवाएं लेने वाले लोग शामिल हैं। इसके अलावा पोटैशियम संतुलन को प्रभावित करने वाली दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को भी अपने चिकित्सक की सलाह के बिना किसी नए उत्पाद का नियमित उपयोग शुरू नहीं करना चाहिए।

    किडनी रोगियों के लिए भी यह विषय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। किडनी शरीर में पोटैशियम के स्तर को नियंत्रित रखने में प्रमुख भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तब शरीर में अतिरिक्त पोटैशियम जमा होने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि क्रोनिक किडनी डिजीज से जूझ रहे मरीजों को ऐसे उत्पादों के उपयोग के दौरान चिकित्सकीय सलाह लेना उचित माना जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का मूल्यांकन व्यक्ति की समग्र स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर किया जाना चाहिए। केवल किसी एक उत्पाद को पूरी तरह खतरनाक मान लेना उचित नहीं है। सेंसिटिव टूथपेस्ट आज भी दांतों की संवेदनशीलता से राहत देने के लिए व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं और अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। फिर भी यदि कोई व्यक्ति हृदय या किडनी संबंधी बीमारी से पीड़ित है, तो उसे अपने डॉक्टर या दंत चिकित्सक से परामर्श लेकर ही ऐसे उत्पादों का चयन करना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और चिकित्सकीय सलाह के साथ किसी भी उत्पाद का सुरक्षित उपयोग संभव है। इसलिए दांतों की समस्या से राहत पाने के साथ-साथ अपनी संपूर्ण स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना भी उतना ही आवश्यक है।