Tag: Carney

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नई व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह शुल्क कनाडा के कुछ उत्पादों पर लगाया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों के खिलाफ माने जा रहे कनाडाई कदमों का जवाब देना है। अमेरिका ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने बातचीत के दौरान तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।

    टैरिफ लागू करने का फैसला अचानक नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच कई सप्ताह से व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। अगस्त के मध्य में दोनों पक्षों के बीच प्रगति के संकेत मिले थे और अमेरिका ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की समयसीमा भी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाई थी। इसके बावजूद अंतिम चरण में दोनों सरकारें किसी साझा समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रगति जरूर हुई थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें और बदलाव सामने आए जिन्हें कनाडा अपने हितों के अनुरूप नहीं मान सकता था। इसके बाद कनाडा ने व्यापार वार्ता को रोकने का फैसला किया है।

    कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के आधार पर देगा। इसका अर्थ है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर भी समान आर्थिक प्रभाव वाला शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अपने श्रमिकों, किसानों और कारोबारियों के हितों की रक्षा करना है।

    अमेरिकी कदम से प्रभावित होने वाले सामान कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात का एक सीमित हिस्सा हैं। फिर भी इसका राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर वर्ष बड़े पैमाने पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है।

    नए टैरिफ से हॉकी उपकरण, कुछ औद्योगिक उत्पाद, डेयरी और अन्य निर्धारित श्रेणियों के सामान प्रभावित हो सकते हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव आने की आशंका है। यदि कनाडा भी जवाबी शुल्क लागू करता है तो दोनों देशों के उत्पादों की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब दोनों देश उत्तर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा भी आगे महत्वपूर्ण विषय बनने वाली है। ऐसे में मौजूदा टैरिफ विवाद आने वाली व्यापार वार्ताओं को और जटिल कर सकता है।

    अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश सुरक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों में भी लंबे समय से साझेदार रहे हैं। इसलिए व्यापारिक टकराव का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि तत्काल समझौते के बजाय आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।