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  • कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ा कदम, मैक्रों ने ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने के प्रस्ताव का किया समर्थन; कार्नी से रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा

    कनाडा का यूरोप की ओर बढ़ा कदम, मैक्रों ने ईयू का सहयोगी सदस्य बनाने के प्रस्ताव का किया समर्थन; कार्नी से रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली । फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कनाडा के यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट सदस्य बनने के प्रस्ताव का समर्थन किया। साथ ही, उन्होंने और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अंतरिक्ष, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार के क्षेत्रों में रणनीतिक संबंध और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    दोनों नेताओं की मुलाकात रविवार को सेंट-पियरे-ए-मिकेलॉन में हुई। यह न्यूफाउंडलैंड के तट के पास स्थित फ्रांस का एक इलाका है, जहां फ्रांस और कनाडा के बीच की दूरी बस कुछ ही किलोमीटर है। अमेरिका के साथ बिगड़ते रिश्तों के बीच कनाडा का यूरोप की ओर तेजी से झुकाव हो रहा है। इसके साथ ही यह जगह इस बदलाव के लिए एक दिलचस्प पृष्ठभूमि है।

    कार्नी के साथ खड़े होकर मैक्रों ने फ्रेंच भाषा में कहा कि वे यूरोपीय संघ के साथ करीबी रिश्ते बनाने के एजेंडे के बहुत ज्यादा पक्ष में हैं। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता संघ के सहयोगी सदस्य के तौर पर हो या फिर यूरोपीय समुदाय के पूर्ण सदस्य के तौर पर। वहीं, कार्नी ने फ्रेंच भाषा में कहा कि कनाडा और फ्रांस के बीच सबसे नजदीकी बिंदु पर सिर्फ कुछ किलोमीटर की दूरी है और दोनों देशों के मूल्य और भी ज्यादा करीब हैं।

    किन क्षेत्रों में सहयोग देने की हुई बात?

    कार्नी ने कहा कि दोनों देश अपनी स्पेस एजेंसियों और रक्षा मंत्रालयों को लॉन्च सिस्टम और जमीन पर आधारित रिसेप्शन सुविधाओं जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने और साझा करने का काम सौंपेंगे। वे ऊर्जा, टेलीकम्युनिकेशन, जलवायु के प्रति लचीलेपन और आर्थिक विकास के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमत हुए।

    मैक्रों का यह समर्थन यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की ओर से कनाडा को ईयू का पहला एसोसिएट सदस्य बनाने का प्रस्ताव रखने के कुछ दिनों बाद आया है।

    कनाडा यूरोप के साथ संबंध मजबूत क्यों कर रहा?

    कार्नी ने इस संभावना का स्वागत किया और तर्क दिया कि यूरोप के साथ गहरे संबंध कनाडा को और अधिक विकल्प देंगे। इससे उसे किसी एक देश की ओर से आने वाले आर्थिक दबाव के प्रति कम संवेदनशील बनाया जा सकेगा। ट्रंप के टैरिफ, आर्थिक रियायतों की मांग और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बार-बार की बातों ने यूरोप की ओर इस झुकाव को तेज कर दिया है।

    ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नक्शा भी पोस्ट किया था, जिसमें कनाडा और सेंट-पियरे-एट-मिकेलॉन सहित पूरे उत्तरी अमेरिका पर अमेरिकी झंडा दिखाया गया था।

    मैक्रों ने रविवार को सेंट-पियरे-एट-मिकेलॉन हवाई अड्डे पर कार्नी का स्वागत किया। यह न्यूफाउंडलैंड के तट के पास स्थित लगभग 5,800 लोगों की आबादी वाला फ्रांसीसी क्षेत्र है। मैक्रों ने कहा कि कनाडा महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ के महत्वपूर्ण संसाधनों वाला देश है। यह तेल और प्राकृतिक गैस का भी एक प्रमुख उत्पादक है।

    मैक्रों ने कहा कि दोनों देश अधिक लिक्विफाइड नेचुरल गैस सुरक्षित करने के लिए समझौते करना चाहते हैं, जिसे यूरोप के अटलांटिक तट पर भेजा जा सके।

    कार्नी के कार्यालय ने एक बयान में कहा कि नेताओं ने एयरोस्पेस, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और क्वांटम कंप्यूटिंग, उपग्रहों और सुपरकंप्यूटिंग जैसी उन्नत तकनीकों पर भी चर्चा की।

  • कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ी रणनीतिक साझेदारी, एसोसिएट सदस्यता प्रस्ताव से अमेरिका के साथ तनाव गहराया

    नई दिल्ली । कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम सामने आया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कनाडा के साथ मौजूदा सहयोग को एक नई और अधिक व्यापक साझेदारी में बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसी क्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोपीय संसद में यूरोप के साथ गहरे संबंधों का समर्थन किया। दोनों पक्षों के बीच चर्चा अब केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, तकनीक, अंतरिक्ष और डिजिटल व्यापार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है।

    कनाडा को यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट सदस्य बनाने की संभावना ने इस पूरी पहल को खास बना दिया है। यह पूर्ण सदस्यता से अलग व्यवस्था होगी। इसके तहत कनाडा यूरोपीय संघ के सदस्य देशों की तरह संगठन के सभी फैसलों में मतदान नहीं करेगा, लेकिन कई अहम क्षेत्रों में यूरोपीय देशों के साथ गहरा सहयोग कर सकेगा। मौजूदा समय में यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं। एसोसिएट सदस्यता की यह व्यवस्था अभी मौजूदा ढांचे में निर्धारित नहीं है, इसलिए इसे लागू करने के लिए आगे कानूनी और राजनीतिक प्रक्रिया की जरूरत होगी।

    मार्क कार्नी ने यूरोप के साथ संबंधों को आने वाले समय के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उनका जोर इस बात पर है कि दोनों पक्ष अपनी रणनीतिक क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए साथ काम करें। कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच पहले से व्यापारिक संबंध मौजूद हैं, लेकिन अब दोनों पक्ष इन्हें रक्षा और आर्थिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों तक विस्तार देने पर विचार कर रहे हैं। महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा औद्योगिक क्षमता, AI और उन्नत तकनीक को इस साझेदारी के प्रमुख क्षेत्र माना जा रहा है।

    कनाडा और यूरोपीय संघ के बीच मौजूदा व्यापारिक समझौता भी इस नई पहल की आधारभूमि है। दोनों पक्ष अब उस ढांचे से आगे बढ़कर अधिक व्यापक आर्थिक और रणनीतिक संबंध विकसित करने की बात कर रहे हैं। कनाडा यूरोपीय रक्षा खरीद व्यवस्था में शामिल होने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बन चुका है। इससे रक्षा क्षेत्र में दोनों पक्षों के बीच सहयोग का दायरा बढ़ा है।

    इस घटनाक्रम का असर अमेरिका के साथ कनाडा के संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के संभावित एसोसिएट सदस्य बनने के प्रस्ताव पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि यूरोपीय संघ के साथ यह व्यवस्था अमेरिका के लिए प्रतिकूल मानी गई, तो यूरोप पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। उन्होंने इस प्रस्ताव को लेकर आपत्ति जताई है और इसे अमेरिका के लिए संभावित रूप से शत्रुतापूर्ण कदम बताया है।

    दूसरी ओर, कनाडा यूरोप के साथ अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रूप में आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। कनाडा का फोकस भरोसेमंद साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ाने, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को विविध बनाने तथा महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक क्षमता मजबूत करने पर है। ऊर्जा, खनिज, रक्षा, तकनीक और वित्तीय सेवाओं से जुड़े सहयोग पर भी बातचीत आगे बढ़ रही है।

    कनाडा और अमेरिका के बीच टैरिफ तथा व्यापार को लेकर जारी मतभेदों के बीच यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी महत्वपूर्ण है। हालांकि, कनाडा और अमेरिका के पुराने संबंध भी बने हुए हैं। वहीं यूरोपीय संघ के साथ प्रस्तावित नई व्यवस्था का अंतिम स्वरूप अभी तय नहीं हुआ है। एसोसिएट सदस्यता की प्रकृति, अधिकार और जिम्मेदारियां आगे होने वाली बातचीत में निर्धारित होंगी। फिलहाल यह पहल कनाडा और यूरोप के बीच संबंधों को व्यापार से आगे रणनीतिक साझेदारी तक ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई है।

  • कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ

    कार्नी की US से निवेश खींचने की तैयारी….. कनाड़ा इन्वेस्टमेंट समिट में जुटेंगे 300 दिग्गज सीईओ


    टोरंटो।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) चाहते हैं कि कारखाने और निवेश दक्षिण की ओर यानी अमेरिका (America) आएं। वहीं, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Canadian Prime Minister Mark Carney) को उम्मीद है कि वे अरबों डॉलर का निवेश उत्तर की ओर यानी कनाडा ((Canada) की तरफ ला सकते हैं।

    इस हफ्ते कार्नी के ‘कनाडा इन्वेस्टमेंट समिट’ के लिए दुनिया की कुछ सबसे बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनियों के लगभग 300 सीईओ और सीनियर एग्जीक्यूटिव टोरंटो के यॉर्कविले इलाके में मौजूद ‘फोर सीजन्स’ होटल में इकट्ठा हो रहे हैं। ये निवेशक मिलकर 120 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा की संपत्ति का प्रबंधन करते हैं। इससे उस पूंजी के बड़े पैमाने का पता चलता है जिसे कार्नी हासिल करना चाहते हैं, क्योंकि कनाडा अरबों डॉलर का नया निवेश आकर्षित करने और अमेरिका पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।


    पीएम कार्नी ने क्या कहा था?

    पिछले हफ्ते अल्बर्टा के बैनफ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्नी ने कहा, ‘कनाडा की पहचान सिर्फ अमेरिका के पड़ोस में होने तक सीमित नहीं है। हमारे पास वह सब कुछ है जिसकी दुनिया को जरूरत है।’ कार्नी ने कनाडा के विशाल ऊर्जा और जरूरी खनिजों के संसाधनों, वहां के पढ़े-लिखे वर्कफोर्स और उन ट्रेड एग्रीमेंट्स की ओर इशारा किया, जिनकी वजह से कनाडा में मौजूद कंपनियों को दुनिया भर में लगभग 1.5 अरब ग्राहकों तक पहुंच मिलती है।

    कनाडा को भरोसा है कि वह ट्रंप का सामना कर सकता है और अपने निवेश के स्रोतों में विविधता ला सकता है। लेकिन यह शिखर सम्मेलन कनाडा के लिए एक नाजुक समय पर हो रहा है। व्यापार वार्ता 21 अगस्त को विफल हो गई, जिसके बाद ट्रंप ने लगभग 20 अरब अमेरिकी डॉलर के कनाडाई सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया। कनाडा ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद वाशिंगटन ने फिर से दबाव बढ़ाते हुए कुछ कनाडाई आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की और बड़े, दीर्घकालिक अमेरिकी सरकारी अनुबंधों से कनाडाई उत्पादों को बाहर करने की दिशा में कदम उठाए।

    ट्रंप के टैरिफ और मैन्युफैक्चरिंग को बॉर्डर के दक्षिण में ले जाने की कोशिशें उस चीज को कमजोर कर रही हैं, जो लंबे समय से विदेशी निवेशकों के लिए देश के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक थी। कॉन्टिनेंटल फ्री ट्रेड के तहत विशाल अमेरिकी बाजार तक भरोसेमंद पहुंच।


    वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने क्या कहा?

    जब पूछा गया कि क्या कनाडा ट्रंप के साथ ट्रेड डील के बिना लंबे समय तक टिक सकता है, तो वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शैम्पेन ने कहा कि ओटावा प्रभावित व्यवसायों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए तैयार है। शैम्पेन ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया, ‘हमारे पास अपने उद्योगों और कर्मचारियों की मदद करने के लिए जरूरी संसाधन हैं – चाहे कितना भी समय लगे या जो कुछ भी करना पड़े।’

    सरकार ने सोमवार को यह भी कहा कि वह 1 अरब अमेरिकी डॉलर या उससे अधिक के निवेश के लिए कर संबंधी निर्णयों को प्राथमिकता देगी, जिससे बड़े निवेशकों को पूंजी लगाने से पहले अधिक निश्चितता मिलेगी।


    कनाडा पर दांव लगाने पर कार्नी ने क्या कहा?

    कार्नी वैश्विक निवेशकों से व्यापार युद्ध को नजरअंदाज करते हुए कनाडा पर दांव लगाने का आग्रह कर रहे हैं। साथ ही ट्रंप के नेतृत्व में तेजी से अप्रत्याशित होते जा रहे संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ कनाडा के कानून के शासन और विश्वसनीयता की तुलना स्पष्ट रूप से कर रहे हैं। कार्नी ने कहा, ‘निवेशकों को एक ऐसा देश मिलेगा जो कानून के शासन का सम्मान करता है और एक ऐसा देश जो भरोसेमंद है। दुनिया में ऐसा संयोजन बहुत कम देखने को मिलता है। यह एक आकर्षक संयोजन है।’

    इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य वैश्विक पूंजी को महत्वपूर्ण खनिजों, प्रौद्योगिकी, रक्षा, उन्नत विनिर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में प्रमुख परियोजनाओं के साथ जोड़ना है। सोमवार को एक बड़े निवेश की घोषणा की गई। बेल कनाडा ने कहा कि वह सस्केचेवान में पहले से निर्माणाधीन एआई डेटा-सेंटर परियोजना को चार गुना बढ़ाएगी, जिससे 1.2 गीगावाट की सुविधा का मार्ग प्रशस्त होगा और कुल अनुमानित पूंजी निवेश 50 अरब कनाडाई डॉलर (36 अरब अमेरिकी डॉलर) से अधिक हो जाएगा।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार वार्ता विफल होने के बाद बढ़ा तनाव, पीएम मार्क कार्नी ने अमेरिकी शुल्क का जवाब देने का ऐलान किया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। दोनों देशों के बीच नई व्यापारिक डील को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने कनाडा से आने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से चल रहे व्यापारिक विवाद को और गहरा करने वाला माना जा रहा है।

    अमेरिकी प्रशासन के अनुसार यह शुल्क कनाडा के कुछ उत्पादों पर लगाया गया है और इसका उद्देश्य अमेरिकी व्यापारिक हितों के खिलाफ माने जा रहे कनाडाई कदमों का जवाब देना है। अमेरिका ने कनाडा पर अमेरिकी उत्पादों के साथ भेदभावपूर्ण व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि कनाडा ने बातचीत के दौरान तय शर्तों के आधार पर समझौते को अंतिम रूप देने से इनकार कर दिया।

    टैरिफ लागू करने का फैसला अचानक नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच कई सप्ताह से व्यापार समझौते को लेकर गहन बातचीत चल रही थी। अगस्त के मध्य में दोनों पक्षों के बीच प्रगति के संकेत मिले थे और अमेरिका ने नई टैरिफ व्यवस्था लागू करने की समयसीमा भी कुछ दिनों के लिए आगे बढ़ाई थी। इसके बावजूद अंतिम चरण में दोनों सरकारें किसी साझा समझौते तक नहीं पहुंच सकीं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिकी कदम पर कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान कुछ महत्वपूर्ण प्रगति जरूर हुई थी, लेकिन अंतिम समय में अमेरिका की ओर से ऐसी शर्तें और बदलाव सामने आए जिन्हें कनाडा अपने हितों के अनुरूप नहीं मान सकता था। इसके बाद कनाडा ने व्यापार वार्ता को रोकने का फैसला किया है।

    कार्नी ने स्पष्ट किया है कि कनाडा अमेरिकी टैरिफ का जवाब डॉलर के बदले डॉलर के आधार पर देगा। इसका अर्थ है कि कनाडा अमेरिकी उत्पादों पर भी समान आर्थिक प्रभाव वाला शुल्क लगाने की तैयारी कर रहा है। कनाडाई सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य अपने श्रमिकों, किसानों और कारोबारियों के हितों की रक्षा करना है।

    अमेरिकी कदम से प्रभावित होने वाले सामान कनाडा के कुल अमेरिकी निर्यात का एक सीमित हिस्सा हैं। फिर भी इसका राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव व्यापक हो सकता है, क्योंकि अमेरिका और कनाडा लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच हर वर्ष बड़े पैमाने पर वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार होता है।

    नए टैरिफ से हॉकी उपकरण, कुछ औद्योगिक उत्पाद, डेयरी और अन्य निर्धारित श्रेणियों के सामान प्रभावित हो सकते हैं। इससे कारोबारियों की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव आने की आशंका है। यदि कनाडा भी जवाबी शुल्क लागू करता है तो दोनों देशों के उत्पादों की कीमतों और व्यापारिक गतिविधियों पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है।

    यह विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब दोनों देश उत्तर अमेरिकी व्यापार व्यवस्था को लेकर भविष्य की दिशा तय करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के बीच मौजूदा व्यापार समझौते की समीक्षा भी आगे महत्वपूर्ण विषय बनने वाली है। ऐसे में मौजूदा टैरिफ विवाद आने वाली व्यापार वार्ताओं को और जटिल कर सकता है।

    अमेरिका और कनाडा के बीच रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश सुरक्षा, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग के मामलों में भी लंबे समय से साझेदार रहे हैं। इसलिए व्यापारिक टकराव का असर व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल दोनों पक्षों के रुख से साफ है कि तत्काल समझौते के बजाय आर्थिक दबाव और जवाबी कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।

  • अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया

    अमेरिका-कनाडा व्यापार विवाद निर्णायक मोड़ पर, ट्रंप की समयसीमा से पहले समझौते की कोशिशें तेज, टैरिफ बढ़ने का खतरा मंडराया


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहा व्यापार विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां आने वाले कुछ घंटे दोनों देशों के आर्थिक और राजनीतिक संबंधों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के साथ समझौते के लिए बुधवार दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक की समयसीमा तय की है। निर्धारित समय तक सहमति नहीं बनने की स्थिति में कनाडा से अमेरिका पहुंचने वाले करीब 20 अरब डॉलर के सामान पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण व्यापारिक रिश्तों पर दबाव और बढ़ गया है।

    ट्रंप की ओर से रखी गई मांगें केवल टैरिफ व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं। अमेरिका चाहता है कि कनाडा अधिक अमेरिकी सैन्य उपकरण खरीदे। इसके अलावा कनाडा की अमेरिका के गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में भागीदारी और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों तक अमेरिकी पहुंच भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। रणनीतिक खनिजों को लेकर अमेरिका की चिंता का संबंध चीन पर निर्भरता कम करने की व्यापक नीति से है। ऐसे खनिज आधुनिक रक्षा उपकरणों, ऊर्जा तकनीक और उच्च तकनीक वाले उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रंप के बीच पिछले दो दिनों में दो बार फोन पर बातचीत हो चुकी है। कार्नी ने बातचीत को गहन और नाजुक बताया है और संकेत दिया है कि इस स्तर की चर्चा के विवरण को सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्ष अंतिम समय तक समझौते की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। हालांकि, दोनों देशों की प्राथमिकताओं में अंतर इतना बड़ा है कि समयसीमा समाप्त होने से पहले सहमति बनना आसान नहीं माना जा रहा।

    ट्रंप का कनाडा के प्रति मौजूदा रुख पारंपरिक अमेरिकी नीति से काफी अलग दिखाई देता है। उन्होंने कनाडाई उत्पादों पर अलग-अलग स्तर के टैरिफ लगाए हैं और कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने जैसी टिप्पणियां भी की हैं। इन बयानों और व्यापारिक कदमों से कनाडा में अमेरिका के प्रति असंतोष बढ़ा है। कनाडाई सरकार पर घरेलू स्तर पर यह दबाव भी है कि वह अमेरिकी दबाव के सामने अपने आर्थिक हितों से समझौता न करे।

    अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक मतभेद हालांकि नए नहीं हैं। सॉफ्टवुड लकड़ी, डेयरी बाजार और कई अन्य उत्पादों को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहे हैं। मौजूदा टैरिफ संघर्ष ने इन पुराने मतभेदों को और गंभीर बना दिया है। हॉकी स्टिक और टंग डिप्रेशर जैसे उत्पादों पर भी अमेरिकी शुल्क लगाए जाने से विवाद का दायरा स्पष्ट होता है।

    दोनों देशों के बीच करीब 5,525 मील लंबी सीमा है और इस सीमा के जरिए रोजाना लगभग 3.3 लाख लोग तथा करीब 2 अरब डॉलर का सामान आवाजाही करता है। कनाडा के कुल माल निर्यात का लगभग 72 प्रतिशत अमेरिका को जाता है। ऐसे में लंबे समय तक चलने वाला व्यापार युद्ध कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है, जबकि अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी महंगे आयात और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का असर पड़ सकता है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप की तय समयसीमा समाप्त होने से पहले दोनों पक्ष कोई समझौता कर पाएंगे। अंतिम दौर की बातचीत जारी रहने से उम्मीद बनी हुई है, लेकिन अमेरिकी मांगों और कनाडा की घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के बीच संतुलन बनाना कठिन है। यदि आखिरी समय में समझौता हो जाता है तो दोनों देशों को तत्काल आर्थिक दबाव से राहत मिल सकती है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो नए और ऊंचे टैरिफ व्यापारिक संबंधों को और तनावपूर्ण बना सकते हैं।