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  • शिवपुरी में भैंसों को बचाने के लिए ट्रेन के सामने पहुंचे पशुपालक, पांच भैंसों के साथ गई जान…

    शिवपुरी में भैंसों को बचाने के लिए ट्रेन के सामने पहुंचे पशुपालक, पांच भैंसों के साथ गई जान…


    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में शनिवार शाम एक दर्दनाक रेल हादसे में पशुपालक पहलवान सिंह यादव और उनकी पांच भैंसों की मौत हो गई। बताया गया कि वह रोज की तरह जंगल से भैंसों को चराकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान कुल्हाड़ी गांव के पास रेलवे ट्रैक पार करते समय अचानक बीना की ओर से बीना पैसेंजर ट्रेन आ गई। ट्रैक पर कुछ भैंसें मौजूद थीं। उन्हें बचाने की कोशिश में पहलवान सिंह ट्रेन की चपेट में आ गए। हादसे में उनकी मौके पर ही गंभीर स्थिति हो गई। बाद में अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार, पहलवान सिंह यादव कुल्हाड़ी गांव के निवासी थे। शनिवार शाम करीब छह से सात बजे के बीच वह जंगल से अपनी भैंसों को लेकर वापस लौट रहे थे। गांव के पास रेलवे लाइन पार करते समय ट्रेन आ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, उस समय कुछ भैंसें रेलवे ट्रैक पर थीं। पहलवान सिंह के पास खुद को सुरक्षित निकालने का अवसर था, लेकिन उन्होंने भैंसों को बचाने के लिए उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की। इसी दौरान वह ट्रेन की चपेट में आ गए। ट्रेन की टक्कर से पांच भैंसों की भी मौत हो गई, जबकि चार अन्य भैंसें घायल बताई जा रही हैं।

    हादसे की सूचना मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। घायल अवस्था में पहलवान सिंह को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है। पहलवान सिंह परिवार के मुखिया थे और घर की आजीविका की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। उनकी मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

    परिवार की आय का मुख्य साधन भैंसों से मिलने वाला दूध था। बताया गया कि उनके पास कुल नौ भैंसें थीं। इनमें से पांच की हादसे में मौत हो गई, जबकि बाकी चार घायल हैं। पांच भैंसों की मौत से परिवार को करीब पांच से छह लाख रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। पशुओं पर निर्भर परिवार के लिए यह नुकसान काफी बड़ा है। एक ओर परिवार ने अपने कमाने वाले सदस्य को खो दिया है, वहीं दूसरी ओर आय का प्रमुख साधन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

    घटना के बाद ग्रामीणों में रेलवे ट्रैक की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों का कहना है कि कुल्हाड़ी गांव के पास रेलवे लाइन खुले क्षेत्र से गुजरती है। यहां न तो फेंसिंग की व्यवस्था है और न ही बाउंड्रीवाल बनाई गई है। इसके अलावा रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अंडरपास भी मौजूद नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह रास्ता आसपास के किसानों और पशुपालकों के रोजमर्रा के आवागमन में इस्तेमाल होता है। ऐसे में उन्हें अपने पशुओं के साथ इसी रास्ते से रेलवे लाइन पार करनी पड़ती है।

    ग्रामीणों ने यह भी बताया कि शाम के समय ट्रेन आने का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। उनके अनुसार, कई बार ट्रेन का हॉर्न भी सुनाई नहीं देता। इस स्थान पर सुरक्षा इंतजाम किए जाने की मांग पहले भी उठाई जा चुकी है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अब तक जरूरी व्यवस्था नहीं की गई। हादसे के बाद गांव में शोक के साथ रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी भी है।

    पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों और घटनाक्रम की पड़ताल की जा रही है। इस घटना ने रेलवे ट्रैक के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और पशुपालकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल फिर सामने ला दिए हैं।

  • शहडोल में रिहायशी इलाके में बायो वेस्ट बम: अस्पतालों ने सड़क को बना दिया डंपिंग ग्राउंड, गोवंश और इंसानों के लिए खतरा

    शहडोल में रिहायशी इलाके में बायो वेस्ट बम: अस्पतालों ने सड़क को बना दिया डंपिंग ग्राउंड, गोवंश और इंसानों के लिए खतरा


    शहडोल । शहडोल के बुढार नगर में एक ऐसा दृश्य सामने आया है जिसने लोगों को हिलाकर रख दिया। हनुमान मंदिर के ठीक बगल सड़क किनारे खुलेआम फेंके गए मेडिकल बायो वेस्ट ने न सिर्फ इंसानों के लिए खतरा बढ़ा दिया है बल्कि बेजुबान गोवंश की जान भी खतरे में डाल दी है। इंजेक्शन, नीडल और दवाइयों के खतरनाक कचरे को मवेशी चारे की तरह खा रहे हैं।

    स्थानीय निवासी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि सुबह मॉर्निंग वॉक के दौरान उन्होंने हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे पड़े मेडिकल अपशिष्ट का ढेर देखा। आश्चर्य की बात यह रही कि कई गोवंश इस कचरे के बीच विचरण कर रहे थे और उसे चारे की तरह ग्रहण कर रहे थे, जो उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।

    रिहायशी इलाके में खुले में मेडिकल कचरा फेंके जाने से संक्रमण फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है। बुढार नगर में कई निजी क्लिनिक संचालित हैं, जहां से निकलने वाले मेडिकल अपशिष्ट का उचित निस्तारण नहीं किया जाता। नतीजा यह हुआ कि सड़कें डंपिंग ग्राउंड बन गई हैं और पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

    विशेष रूप से, उपयोग किए गए इंजेक्शन, सुइयां और दवाइयों की शीशियां सीधे तौर पर लोगों और मवेशियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। स्थानीय लोग चिंता जताते हुए प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि जिम्मेदार क्लीनिक संचालकों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

    नरेंद्र तिवारी ने कहा कि अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं। स्थानीय प्रशासन से भी आग्रह किया गया है कि रिहायशी इलाकों में निगरानी बढ़ाई जाए और मेडिकल अपशिष्ट का सही निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। यह मामला न केवल शहडोल बल्कि पूरे प्रदेश के स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन की प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। ऐसे बायो वेस्ट की अनदेखी से संक्रमण और जानलेवा बीमारियों का खतरा बढ़ता है।

  • महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश

    महाराष्ट्र ले जाते गौवंशों से भरी पिकअप पकड़ी गोरक्षकों की सतर्कता से बचे गौवंश


    धार ।जानकारी के अनुसार बजरंग दल के गोरक्षक प्रमुख मोहन को यह सूचना मिली थी कि धार जिले की ओर से एक पिकअप वाहन क्रमांक MH-05 DK-0327 में गौवंशों को भरकर महाराष्ट्र ले जाया जा रहा है। जैसे ही यह सूचना गोरक्षकों के पास पहुंची मोहन ने तुरंत अपने साथियों प्रदीप मनीष और शुभम के साथ पिकअप वाहन को पकड़ने की योजना बनाई। वे रात करीब एक बजे धार फाटा स्थित नागौरी ढाबे के पास सिरसोदिया धामनोद पहुंचे और पिकअप वाहन को रुकवाया।

    गोरक्षकों ने वाहन की तलाशी ली और पाया कि उसमें कई गौवंशों को बुरी तरह से ठूस-ठूसकर भरा गया था। तस्करों ने गौवंशों को बिना किसी सुविधाजनक व्यवस्था के वाहन में लाकर उन्हें महाराष्ट्र ले जाने की कोशिश की थी। गोरक्षकों की सतर्कता से यह तस्करी नाकाम हो गई और गौवंशों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

    इस कार्रवाई से साबित होता है कि गोरक्षकों की सजगता और समाज की जागरूकता से ऐसी अवैध गतिविधियों पर काबू पाया जा सकता है। पुलिस और प्रशासन को सूचित कर मामले की जांच शुरू कर दी गई है जबकि गौवंशों को सुरक्षित और उचित देखभाल के लिए एक गोशाला भेज दिया गया है।

    यह घटना यह भी दर्शाती है कि तस्करी के मामले में समाज के विभिन्न हिस्सों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है। गोरक्षकों की सतर्कता से ना केवल गौवंशों की जान बची बल्कि तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मार्ग भी प्रशस्त हुआ।