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  • दिलजीत की फिल्म विवाद के बीच रवि किशन का बयान इतिहास और समाज के प्रति जिम्मेदार रहें फिल्म निर्माता

    दिलजीत की फिल्म विवाद के बीच रवि किशन का बयान इतिहास और समाज के प्रति जिम्मेदार रहें फिल्म निर्माता


    नई दिल्ली। भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता तथा सांसद रवि किशन ने फिल्मों में सेंसरशिप को लेकर चल रही बहस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फिल्मों पर सेंसर बोर्ड की आपत्तियां या बदलाव की मांग कोई नई बात नहीं है बल्कि यह प्रक्रिया वर्षों से चली आ रही है। रवि किशन का कहना है कि किसी भी फिल्म निर्माता और कलाकार की जिम्मेदारी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं होती बल्कि समाज और इतिहास के प्रति भी उसकी जवाबदेही होती है।

    हाल ही में एक बातचीत के दौरान रवि किशन से अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म को लेकर उठे विवाद और सेंसरशिप पर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने साफ कहा कि उन्हें उस पूरे मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें सिर्फ इतना पता है कि एक फिल्म रिलीज हुई और बाद में उसे हटाया गया लेकिन बिना पूरी जानकारी के किसी विवाद पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

    हालांकि सेंसरशिप के मुद्दे पर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी। रवि किशन ने कहा कि जब भी कोई फिल्म बनाई जाती है तब उसके निर्माता निर्देशक और कलाकारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनकी प्रस्तुति से किसी समुदाय की भावनाएं आहत न हों और किसी ऐतिहासिक घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत न किया जाए। उनके अनुसार फिल्मों का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है और युवा पीढ़ी भी उनसे काफी प्रभावित होती है इसलिए जिम्मेदारी के साथ कंटेंट तैयार करना बेहद जरूरी है।

    उन्होंने कहा कि कलाकारों का काम केवल मनोरंजन करना नहीं बल्कि समाज के प्रति अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाना भी है। यदि किसी फिल्म या कहानी में तथ्यों को तोड़ मरोड़कर पेश किया जाता है या झूठी जानकारी दिखाई जाती है तो उसका असर लंबे समय तक लोगों की सोच पर पड़ सकता है। इसलिए लेखन से लेकर निर्माण तक हर स्तर पर सावधानी बरतनी चाहिए।

    रवि किशन ने यह भी कहा कि अगर कभी उनकी किसी फिल्म पर सेंसर बोर्ड की ओर से आपत्ति जताई जाती है तो वह सबसे पहले यह जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर समस्या क्या है। यदि किसी दृश्य या संवाद से किसी वर्ग की भावनाएं आहत होती हैं या इतिहास को गलत तरीके से दिखाया गया है तो उसमें सुधार करने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी। उनका कहना था कि फिल्मों के निर्माण में काफी समय मेहनत और धन लगता है इसलिए विवाद की जगह समाधान तलाशना बेहतर होता है।

    सेंसरशिप को लेकर उन्होंने इतिहास का भी जिक्र किया। रवि किशन ने कहा कि फिल्मों पर कट्स लगना या रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सवाल उठना पहले भी होता रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई चर्चित फिल्मों को भी सेंसर बोर्ड की आपत्तियों का सामना करना पड़ा था। उनके अनुसार यह केवल आज की स्थिति नहीं है बल्कि पहले की सरकारों के समय भी ऐसी घटनाएं होती रही हैं।

    रवि किशन का मानना है कि रचनात्मक स्वतंत्रता और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग को ऐसे विषयों पर काम करते समय संवेदनशीलता और तथ्यों की सटीकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए ताकि मनोरंजन के साथ समाज में सकारात्मक संदेश भी पहुंचे।

  • रथ यात्रा के बीच नहीं होगी 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए इंतजार जरूरी

    रथ यात्रा के बीच नहीं होगी 'महाप्रभु जगन्नाथ' की रिलीज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए इंतजार जरूरी

    नई दिल्ली ।भगवान जगन्नाथ के जीवन और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराओं पर आधारित एनिमेटेड फिल्म ‘महाप्रभु जगन्नाथ’ की रिलीज को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फिल्म को तत्काल सिनेमाघरों में प्रदर्शित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुरी में चल रही भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा समाप्त होने के बाद ही फिल्म की रिलीज पर आगे विचार किया जा सकता है। इस फैसले के बाद फिल्म की निर्धारित रिलीज फिलहाल टल गई है।

    फिल्म के निर्माताओं ने ओडिशा हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें फिल्म की देशभर में रिलीज पर रोक लगाई गई थी। निर्माता पक्ष का कहना था कि फिल्म पूरी तरह तैयार है, सिनेमाघरों की बुकिंग हो चुकी है और इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड से आवश्यक प्रमाणन भी प्राप्त हो चुका है। उनका तर्क था कि तय समय पर रिलीज न होने से आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

    सुनवाई के दौरान निर्माता पक्ष ने अदालत को बताया कि यह एक एनिमेटेड फिल्म है, जिसे विशेष रूप से बच्चों और नई पीढ़ी को भगवान जगन्नाथ की परंपराओं, संस्कृति और धार्मिक विरासत से परिचित कराने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। उनका कहना था कि जिस प्रकार विभिन्न धार्मिक और पौराणिक विषयों पर पहले भी एनिमेशन फिल्में बनाई जाती रही हैं, उसी प्रकार यह फिल्म भी सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से तैयार की गई है।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि वर्तमान में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा जारी है और इस दौरान धार्मिक भावनाओं से जुड़े विवादों को गंभीरता से देखा जाना चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि रथ यात्रा पूरी होने के बाद फिल्म की रिलीज पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। न्यायालय के इस रुख के बाद फिलहाल फिल्म के प्रदर्शन पर लगी रोक प्रभावी बनी हुई है।

    फिल्म को लेकर विवाद की शुरुआत उसके टीजर जारी होने के बाद हुई थी। टीजर सामने आने के बाद कुछ धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि फिल्म में भगवान जगन्नाथ के स्वरूप और उनसे जुड़ी कुछ परंपराओं को धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसी आधार पर फिल्म के कुछ दृश्यों और संवादों पर आपत्ति दर्ज कराई गई।

    बाद में इस मामले में ओडिशा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई, जिसमें फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यदि विवादित अंशों के साथ फिल्म प्रदर्शित की गई तो इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी थी।

    विवाद के बीच फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग पुरी के गजपति महाराजा और श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के प्रतिनिधियों के समक्ष भी कराई गई। बताया गया कि इस दौरान फिल्म में कुछ आवश्यक बदलावों को लेकर सुझाव दिए गए थे। हालांकि, याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सभी आवश्यक संशोधन किए बिना ही फिल्म को रिलीज करने की तैयारी की जा रही थी।

    सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अब फिल्म के निर्माता रथ यात्रा समाप्त होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया और संशोधनों के आधार पर अगला कदम उठाएंगे। फिलहाल फिल्म की रिलीज स्थगित रहने से यह मामला धार्मिक आस्था, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक प्रस्तुति के बीच संतुलन को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • 'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    'रामायण' ट्रेलर लॉन्च से पहले रणबीर कपूर की तबीयत बिगड़ी, आंखों के संक्रमण के बावजूद इवेंट में होंगे शामिल

    नई दिल्ली । अभिनेता रणबीर कपूर की तबीयत को लेकर एक अहम जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इन दिनों कंजंक्टिवाइटिस यानी आंखों के संक्रमण से जूझ रहे हैं। यह खबर ऐसे समय आई है जब उनकी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ के मेगा ट्रेलर लॉन्च की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के बावजूद रणबीर के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

    बताया जा रहा है कि फिल्म का भव्य ट्रेलर लॉन्च नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी की गई है, जिसमें फिल्म से जुड़े प्रमुख कलाकारों और निर्माताओं की मौजूदगी रहने की उम्मीद है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रणबीर कपूर भी अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद इस आयोजन में शामिल होकर अपनी पेशेवर प्रतिबद्धता निभाने का फैसला कर चुके हैं।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, आंखों के संक्रमण की शुरुआत सबसे पहले रणबीर कपूर की बेटी राहा को हुई थी। बाद में यह संक्रमण रणबीर तक भी पहुंच गया। हालांकि उनकी स्थिति गंभीर नहीं बताई जा रही है, लेकिन सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान संक्रमण को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरती जाएगी। फिलहाल उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

    ‘रामायण: पार्ट 1’ इस समय हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित फिल्मों में शामिल है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं। लंबे समय से इस फिल्म को लेकर दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई है और ट्रेलर लॉन्च को भी एक बड़े सिनेमाई आयोजन के रूप में देखा जा रहा है। इसी वजह से रणबीर की तबीयत से जुड़ी खबर ने प्रशंसकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

    फिल्म के ट्रेलर को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से ‘यू’ सर्टिफिकेट मिल चुका है। इसका अर्थ है कि ट्रेलर सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त माना गया है। जानकारी के अनुसार, ट्रेलर के दो अलग-अलग संस्करण प्रमाणन के लिए भेजे गए थे, जिनकी अवधि लगभग चार मिनट के आसपास है। माना जा रहा है कि इनमें से एक संस्करण सिनेमाघरों में भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण नमित मल्होत्रा के नेतृत्व में किया जा रहा है। ट्रेलर लॉन्च समारोह में फिल्म की प्रमुख स्टारकास्ट के शामिल होने की संभावना है। हालांकि फिल्म में रावण की भूमिका निभा रहे यश और हनुमान के किरदार में नजर आने वाले सनी देओल की उपस्थिति को लेकर अभी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    ‘रामायण’ को दो भागों में रिलीज करने की योजना बनाई गई है। पहला भाग दिवाली 2026 के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगा, जबकि दूसरा भाग दिवाली 2027 में दर्शकों के सामने आएगा। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों में काफी उत्साह बना हुआ है। अब सभी की नजर ट्रेलर लॉन्च और रणबीर कपूर की उपस्थिति पर टिकी हुई है, क्योंकि यह आयोजन फिल्म के प्रचार अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

  • फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    फिल्म, विवाद और सियासत के बीच दिलजीत दोसांझ चर्चा में, क्या 'सतलुज' के बाद बदलने वाली है पंजाब की राजनीति?

    नई दिल्ली । अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ एक बार फिर अपनी फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। लंबे समय तक विवादों और इंतजार के बाद ओटीटी पर रिलीज हुई यह फिल्म पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन और 1990 के दशक की घटनाओं पर आधारित है। फिल्म के सामने आने के साथ ही पंजाब में फिल्मों और राजनीति के पुराने रिश्ते पर नई बहस शुरू हो गई है। साथ ही, दिलजीत के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी अटकलों का दौर तेज हो गया है।

    फिल्म में पंजाब के उस दौर को दिखाया गया है जब राज्य उग्रवाद और सुरक्षा अभियानों के कारण लगातार सुर्खियों में था। कहानी कथित मानवाधिकार उल्लंघनों और उन मामलों की पड़ताल पर केंद्रित है, जिन्होंने वर्षों तक सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित किया। इसी संवेदनशील विषय के कारण फिल्म लंबे समय तक विवादों में रही और इसके शीर्षक तथा अन्य पहलुओं को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई।

    पंजाब में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनी फिल्मों की चर्चा चुनावी माहौल को प्रभावित कर सकती है। हालांकि इस बात पर राय अलग-अलग है कि फिल्म का सीधा चुनावी असर कितना होगा। कुछ लोगों का मानना है कि इसका प्रभाव सीमित रहेगा, जबकि अन्य इसे जनभावनाओं और राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने वाला मान रहे हैं।

    पंजाब में फिल्मों और राजनीतिक विवादों का इतिहास नया नहीं है। राज्य के इतिहास, धार्मिक भावनाओं, सामाजिक मुद्दों और राजनीतिक घटनाओं पर आधारित कई फिल्मों को पहले भी विरोध और विवाद का सामना करना पड़ा है। विभिन्न अवसरों पर सेंसर प्रक्रिया, प्रदर्शन और सार्वजनिक प्रतिक्रियाओं ने इन फिल्मों को चर्चा का विषय बनाया है। ऐसे मामलों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर भी सवाल खड़े किए हैं।

    दिलजीत दोसांझ भी पिछले कुछ वर्षों में कई सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखने के कारण चर्चा में रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान उन्होंने किसानों के समर्थन में खुलकर अपनी बात रखी थी। हालांकि उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से जुड़े नहीं हैं और खुद को केवल एक कलाकार मानते हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है कि राजनीति में आने की उनकी कोई योजना नहीं है।

    बीते समय में देश और विदेश में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान भी दिलजीत कई बार सुर्खियों में रहे। उन्होंने विभिन्न मंचों पर पंजाबी संस्कृति और प्रवासी समुदाय की उपलब्धियों का उल्लेख किया, वहीं विवादित राजनीतिक प्रतीकों और अलगाववादी विचारों से दूरी बनाए रखने की भी कोशिश की। उनके इन बयानों को कई लोगों ने संतुलित सार्वजनिक रुख के रूप में देखा।

    राजनीतिक गलियारों में समय-समय पर यह चर्चा होती रही है कि लोकप्रिय कलाकार भविष्य में सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकते हैं। दिलजीत के मामले में भी ऐसी अटकलें लगती रही हैं, लेकिन उन्होंने अब तक किसी राजनीतिक दल से जुड़ने या चुनाव लड़ने का संकेत नहीं दिया है। उनके हालिया बयान भी यही दर्शाते हैं कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अभिनय, संगीत और सामाजिक विषयों पर आधारित रचनात्मक कार्यों पर है।

    फिलहाल ‘सतलुज’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि पंजाब के इतिहास, सामाजिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर नई चर्चा का माध्यम बन गई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म को दर्शकों का कितना व्यापक समर्थन मिलता है और क्या इससे जुड़ी राजनीतिक चर्चाएं चुनावी माहौल तक कोई प्रभाव छोड़ पाती हैं।

  • 'मातृभूमि' की रिलीज पर फैली अफवाहों पर विराम, सलमान खान फिल्म्स ने स्पष्ट किया- CBFC के पास अभी भेजी ही नहीं गई फिल्म

    'मातृभूमि' की रिलीज पर फैली अफवाहों पर विराम, सलमान खान फिल्म्स ने स्पष्ट किया- CBFC के पास अभी भेजी ही नहीं गई फिल्म

    नई दिल्ली । अभिनेता सलमान खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और मनोरंजन जगत में कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि फिल्म के केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से जुड़े सर्टिफिकेशन में अड़चन आने के कारण इसकी रिलीज प्रभावित हो सकती है। अब इन सभी अटकलों पर फिल्म के निर्माताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट कर दी है।

    सलमान खान फिल्म्स की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फिल्म के CBFC सर्टिफिकेशन को लेकर सामने आ रही सभी खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। निर्माण कंपनी ने स्पष्ट किया कि फिल्म को अभी तक प्रमाणन के लिए CBFC के पास प्रस्तुत ही नहीं किया गया है। ऐसे में सर्टिफिकेट रोके जाने या प्रक्रिया में किसी तरह की बाधा आने की खबरों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है।

    निर्माताओं ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में मीडिया और दर्शकों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें। साथ ही यह भी कहा गया कि फिल्म से संबंधित किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी, रिलीज अपडेट या अन्य आधिकारिक घोषणा केवल सलमान खान फिल्म्स के अधिकृत माध्यमों से ही साझा की जाएगी। इस स्पष्टीकरण के बाद फिल्म के भविष्य को लेकर चल रही कई अटकलों पर विराम लग गया है।

    इससे पहले कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि फिल्म की संभावित रिलीज अगस्त में हो सकती है, लेकिन कथित सेंसर संबंधी कारणों से इसमें देरी होने की संभावना है। हालांकि निर्माताओं के ताजा बयान के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि रिलीज में देरी को लेकर सामने आए दावों की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। फिल्म की रिलीज तिथि का भी अभी औपचारिक ऐलान नहीं किया गया है।

    गौरतलब है कि इस फिल्म की शुरुआत एक अलग शीर्षक के साथ हुई थी। प्रारंभिक चरण में इसे ‘बैटल ऑफ गलवान’ नाम से विकसित किया जा रहा था। बाद में निर्माताओं ने फिल्म का नाम बदलकर ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ कर दिया। इसके साथ ही कहानी और प्रस्तुति में भी कुछ बदलाव किए गए, जिससे फिल्म का स्वरूप पहले की तुलना में अलग हो गया।

    उद्योग से जुड़ी चर्चाओं के अनुसार फिल्म की शुरुआती अवधारणा वास्तविक घटनाओं से प्रेरित थी, लेकिन बाद में पटकथा और शीर्षक दोनों में संशोधन किए गए। इसके बाद कथित तौर पर कुछ प्रत्यक्ष संदर्भों को भी बदला गया, जिससे फिल्म की कहानी को व्यापक और अलग रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

    फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। इसमें सलमान खान के साथ अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। फिल्म की घोषणा के बाद से ही दर्शकों के बीच इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है और अब आधिकारिक स्पष्टीकरण आने के बाद प्रशंसकों की निगाहें इसके टीजर, ट्रेलर और रिलीज डेट की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं। फिलहाल निर्माताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि फिल्म के सर्टिफिकेशन को लेकर प्रसारित की जा रही खबरें तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं और किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए केवल अधिकृत घोषणाओं पर ही भरोसा किया जाना चाहिए।

  • भारत की पहली एडल्ट फिल्म में मधुबाला का रोल, रिलीज से पहले ही मचा था बवाल, अभिनेत्री ने कभी नहीं देखी अपनी ही फिल्म

    भारत की पहली एडल्ट फिल्म में मधुबाला का रोल, रिलीज से पहले ही मचा था बवाल, अभिनेत्री ने कभी नहीं देखी अपनी ही फिल्म


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की अमर और पाकिज़ा अभिनेत्रियों में से एक मधुबाला ने अपने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली करियर में कई ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं। उनकी सुंदरता और अभिनय क्षमता ने हमेशा स्क्रीन पर उपस्थित होने वाले हर दृश्य को यादगार बना दिया। लोग उनके किरदारों और फिल्मों को आज भी बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ याद करते हैं। हालांकि, उनके करियर में एक ऐसी फिल्म भी थी, जिसने रिलीज होने से पहले ही विवाद और चर्चा का केंद्र बन गई। यह फिल्म थी साल 1950 में रिलीज़ हुई ‘हंसते आंसू’, जिसे भारतीय सिनेमा की पहली एडल्ट फिल्म के रूप में जाना गया।

    मधुबाला ने इस फिल्म में काम किया तब उनकी उम्र केवल 16 साल थी। फिल्म को सेंसर बोर्ड ने ए सर्टिफिकेट दिया, और यही उस समय के लिए एक नई और विवादास्पद पहल थी। इस फिल्म का नाम डबल मीनिंग माना गया और कथानक में घरेलू हिंसा के दृश्य दिखाए जाने के कारण इसे लेकर काफी हंगामा हुआ। सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए इस सर्टिफिकेट के बाद भी, मधुबाला खुद अपनी ही फिल्म देखने के लिए तैयार नहीं थीं। यह तथ्य इस बात को दर्शाता है कि उनकी संवेदनशीलता और पेशेवर नैतिकता कितनी प्रबल थी, क्योंकि उन्होंने केवल अभिनय पर ध्यान केंद्रित किया और विवाद को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

    फिल्म का निर्देशन केबी लाल ने किया था और इसके अलावा मोतीलाल, गोप और मनोरमा जैसे कलाकारों ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म की कहानी में फैमिली ड्रामा के तत्व थे, लेकिन उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों के कारण इसे ए सर्टिफिकेट दिया गया। फिल्म के टाइटल और कंटेंट को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐतिहासिक घटना बन गई। यह फिल्म ए सर्टिफिकेट की शुरुआत का प्रतीक भी मानी जाती है और यह दर्शाती है कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में समय-समय पर किस प्रकार सेंसरशिप और नैतिकता के सवाल उठते रहे हैं।

    मधुबाला की अभिनय क्षमता ने इस विवादित फिल्म में भी अपनी चमक बनाए रखी। उनके प्रदर्शन ने दर्शकों को यह साबित कर दिया कि वे केवल खूबसूरत नहीं थीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं को निभाने में भी सक्षम थीं। ‘हंसते आंसू’ न केवल उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण थी, बल्कि इसने भारतीय सिनेमा में ए सर्टिफिकेट के प्रचलन और फिल्मों के सामाजिक प्रभाव पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाला। यह फिल्म मधुबाला की कला और उनकी पेशेवर प्रतिबद्धता का प्रतीक बनी, और इसने उन्हें भारतीय सिनेमा में अमर और यादगार बना दिया।

    समग्र रूप से देखा जाए, तो ‘हंसते आंसू’ सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि उस समय की सामाजिक, सांस्कृतिक और सेंसरशिप से जुड़ी चुनौतियों का दस्तावेज़ भी थी। मधुबाला ने अपनी कम उम्र के बावजूद इस फिल्म में काम करके यह साबित किया कि प्रतिभा और संवेदनशीलता का मेल किसी भी विवाद या चुनौती को मात दे सकता है। यह फिल्म उनके करियर की एक यादगार उपलब्धि के रूप में हमेशा सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जीवित रहेगी।

  • पार्ट 1 से छोटी होगी Dhurandhar 2: The Revenge? Ranveer Singh की फिल्म को मिला UA 16+ सर्टिफिकेट

    पार्ट 1 से छोटी होगी Dhurandhar 2: The Revenge? Ranveer Singh की फिल्म को मिला UA 16+ सर्टिफिकेट


    नई दिल्ली । रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म धुरंधर के बाद अब दर्शकों को इसके सीक्वल का बेसब्री से इंतजार है। धुरंधर 2: द रिवेंज 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है और रिलीज से पहले फिल्म से जुड़ी अहम जानकारी सामने आ गई है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन  ने फिल्म को रिव्यू कर इसका सर्टिफिकेट और रनटाइम तय कर दिया है।

    सीबीएफसी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, धुरंधर 2 को UA 16+ सर्टिफिकेट दिया गया है। यानी 16 वर्ष से कम उम्र के दर्शकों को अभिभावक की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी गई है। फिल्म को 9 फरवरी को प्रमाणपत्र जारी किया गया। इससे साफ है कि फिल्म में एक्शन और इंटेंस ड्रामा का स्तर पहले भाग से भी ज्यादा हो सकता है।

    रनटाइम की बात करें तो धुरंधर 2 की अवधि 208 मिनट यानी 3 घंटे 28 मिनट होगी। दिलचस्प बात यह है कि धुरंधर का पहला भाग 3 घंटे 35 मिनट लंबा था। हालांकि उसमें करीब चार मिनट का पोस्ट-क्रेडिट सीन भी शामिल था, जिसकी वजह से उसकी कुल अवधि बढ़ गई थी। ऐसे में देखा जाए तो सीक्वल पार्ट 1 से थोड़ा छोटा जरूर है, लेकिन फिर भी यह एक लंबी और ग्रैंड स्केल पर बनी फिल्म साबित होगी।

    फिल्म का निर्देशन Aditya Dhar ने किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार कहानी और भी ज्यादा तीव्र और भावनात्मक होगी। रणवीर सिंह एक बार फिर हम्जा अली के किरदार में नजर आएंगे और सीक्वल में उनके किरदार की गहराई को और विस्तार से दिखाया जाएगा। साथ ही पहले भाग से जुड़े कई अनसुलझे सवालों के जवाब भी इस फिल्म में मिल सकते हैं। खासतौर पर बड़े साहब के किरदार से पर्दा उठने की चर्चा है, जिसने पहले भाग में दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी थी।

    फिल्म को लेकर एक और चर्चा जोरों पर है कि इसमें Yami Gautam का कैमियो देखने को मिल सकता है। हालांकि मेकर्स की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह दर्शकों के लिए बड़ा सरप्राइज होगा।

    बॉक्स ऑफिस की बात करें तो धुरंधर 2 का मुकाबला साउथ सुपरस्टार Yash की फिल्म Toxic से होने वाला है। दोनों बड़ी फिल्मों के बीच यह क्लैश मार्च में सिनेमाघरों में जबरदस्त टक्कर पैदा कर सकता है।

    कुल मिलाकर, धुरंधर 2: द रिवेंज पार्ट 1 से थोड़ी छोटी जरूर है, लेकिन इसकी कहानी, एक्शन और ड्रामा पहले से ज्यादा दमदार होने का दावा कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या रणवीर सिंह की यह फिल्म भी पहले भाग की तरह बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ पाती है या नहीं।

  • टॉक्सिक टीजर विवाद: ईसाई समुदाय और महिला आयोग की भारी नाराजगी, क्या यश की फिल्म से हटेंगे विवादित सीन?

    टॉक्सिक टीजर विवाद: ईसाई समुदाय और महिला आयोग की भारी नाराजगी, क्या यश की फिल्म से हटेंगे विवादित सीन?


    नई दिल्ली।कन्नड़ सुपरस्टार यश की बहुप्रतीक्षित पैन इंडिया फिल्म टॉक्सिक ने अपने टीजर के रिलीज होते ही विवादों का बवंडर खड़ा कर दिया है। फिल्म के टीजर में दिखाए गए कुछ दृश्यों को लेकर न केवल सामाजिक बल्कि धार्मिक स्तर पर भी भारी विरोध देखने को मिल रहा है। नेशनल क्रिश्चियन फेडरेशन NCF ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड CBFC के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। ईसाई समुदाय का आरोप है कि टीजर में कब्रिस्तान के बाहर कार में एक आपत्तिजनक दृश्य दिखाया गया है और उसके तुरंत बाद पवित्र स्थल के भीतर गोलीबारी होती है, जो धार्मिक मर्यादा के खिलाफ है।

    NCF की शिकायत में विशेष रूप से आर्कएंजल माइकल की मूर्ति के चित्रण पर सवाल उठाए गए हैं। समुदाय का कहना है कि जिस तरह से धार्मिक प्रतीकों के साथ हिंसा और अश्लीलता को जोड़ा गया है, उससे उनकी भावना को गहरी ठेस पहुंची है। फेडरेशन ने मांग की है कि इस टीजर को यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाए। उनका तर्क है कि ईसाई समुदाय की आस्था के साथ खिलवाड़ को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर अनदेखा नहीं किया जा सकता, और फिल्म मेकर्स को इसके लिए जवाबदेह होना चाहिए।

    धार्मिक विवाद के साथ-साथ इस फिल्म को महिला आयोग के गुस्से का भी सामना करना पड़ रहा है। टीजर में दिखाए गए कुछ अंतरंग दृश्यों पर आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे अश्लीलता की श्रेणी में रखा है। विवाद इस कदर बढ़ गया कि दृश्यों में नजर आईं अभिनेत्री बीट्रिज टौफेनबाक को सोशल मीडिया पर भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट तक डिलीट कर दिया। आयोग का मानना है कि इस तरह के सीन अनावश्यक हैं और समाज में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं।

    फिल्म जगत से इस विवाद पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। दिग्गज निर्देशक अनुराग कश्यप ने फिल्म के पक्ष में अपना बयान जारी करते हुए विरोध करने वालों को ‘पाखंडी’ करार दिया है। कश्यप का तर्क है कि जब पुरुष कलाकार पर्दे पर कामुकता दिखाते हैं तो समाज उसे सहजता से स्वीकार कर लेता है, लेकिन महिला कलाकारों के मामले में दोहरा मापदंड अपनाया जाता है। उन्होंने इसे कलाकारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया है। उनके इस समर्थन ने सोशल मीडिया पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।

    गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म 19 मार्च को रिलीज होने वाली है। फिल्म में यश के साथ नयनतारा, कियारा आडवाणी और तारा सुतारिया जैसे बड़े सितारे नजर आएंगे। लेकिन रिलीज से पहले ही टॉक्सिक को न केवल कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि बॉक्स-ऑफिस पर इसकी सीधी टक्कर रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर 2 से होने वाली है। अब देखना यह होगा कि केवीएन प्रोडक्शंस इन विवादित दृश्यों को फिल्म से हटाते हैं या यह विवाद फिल्म की कमाई और साख पर कोई बड़ा असर डालता है।

  • Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली। थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहा सेंसर सर्टिफिकेट विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को तुरंत फिल्म को UA सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
    फिल्म के निर्माताओं ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेशन में हो रही देरी को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि बिना किसी ठोस वजह के सर्टिफिकेट रोका जा रहा है, जिससे प्रोड्यूसर्स को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 6 जनवरी को CBFC द्वारा जारी उस पत्र को भी रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजने की बात कही गई थी।
    CBFC चेयरपर्सन पर भी कोर्ट की टिप्पणी
    मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CBFC चेयरपर्सन के पास फिल्म को दोबारा रिव्यू कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, फिल्म के खिलाफ की गई शिकायतें बाद में सोची-समझी प्रतीत होती हैं और यदि ऐसी शिकायतों को महत्व दिया गया, तो यह एक खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है।
    UA सर्टिफिकेट के साथ रिलीज का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद ‘जना नायकन’ को बिना किसी और देरी के UA सर्टिफिकेट देने का फैसला लिया गया। UA सर्टिफिकेट का मतलब है कि यह फिल्म बच्चों सहित सभी दर्शकों के लिए उपयुक्त है, हालांकि छोटे बच्चों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है।

    सुनवाई में शामिल रहे दिग्गज वकील
    इस मामले में फिल्म प्रोडक्शन हाउस की ओर से सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन और CBFC की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरसन ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने निर्माताओं के हक में फैसला सुनाया।

    गौरतलब है कि थलपति विजय की यह फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण रिलीज टल गई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद ‘जना नायकन’ के आसपास बना सारा विवाद खत्म हो चुका है और दर्शक जल्द ही इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे।