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  • हाईकोर्ट के फैसले के बाद जांच और सख्त, पति समर्थ पहले ही रिमांड पर

    हाईकोर्ट के फैसले के बाद जांच और सख्त, पति समर्थ पहले ही रिमांड पर


    भोपाल । भोपाल के बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच एजेंसी सीबीआई ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में नामजद रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद अब उनकी गिरफ्तारी कभी भी संभव मानी जा रही है। गुरुवार सुबह सीबीआई की टीम उनके आवास पर पहुंची और उनसे गहन पूछताछ शुरू कर दी गई है।

    जांच के दौरान सीबीआई ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए घर के पूरे परिसर को हाई-इंटेंसिटी 3D कैमरों से स्कैन किया। इस 360 डिग्री रिकॉर्डिंग के जरिए घटनास्थल की डिजिटल मैपिंग तैयार की जा रही है, ताकि यह समझा जा सके कि घटना के समय आसपास की किसी छत या बालकनी से गतिविधियों को देखा जा सकता था या नहीं। इसके साथ ही पूरे इलाके का भी तकनीकी विश्लेषण किया जा रहा है।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को अपने 17 पन्नों के आदेश में रिटायर्ड जज की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को राहत देना उचित नहीं होगा। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि निचली अदालत ने केस डायरी और साक्ष्यों का सही मूल्यांकन नहीं किया था, जबकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आए चोटों के निशान पर आरोपी पक्ष संतोषजनक जवाब देने में असफल रहा।

    इस मामले में पहले से ही सह-आरोपी बनाए गए ट्विशा के पति समर्थ सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार कर रिमांड पर लिया है, जिसकी अवधि 29 मई तक तय की गई है। उनसे लगातार पूछताछ जारी है और जांच टीम हर पहलू को जोड़ने में लगी है।

    घटना 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स क्षेत्र में हुई थी, जहां ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का गंभीर आरोप लगाया है।

    24 मई को AIIMS भोपाल में दिल्ली AIIMS की फोरेंसिक टीम द्वारा दोबारा पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसके बाद अंतिम संस्कार भदभदा श्मशान घाट में हुआ। मृतका के भाई मेजर हर्षित ने अंतिम संस्कार किया था।

    फिलहाल सीबीआई वैज्ञानिक, फोरेंसिक और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच को निर्णायक दिशा देने में जुटी है, जिससे मामले की सच्चाई जल्द सामने आ सके।

  • ट्विशा केस की जांच तेज: CBI की दबिश, बेल्ट-फंदे को FSL भेजा गया, आज कोर्ट में अहम सुनवाई

    ट्विशा केस की जांच तेज: CBI की दबिश, बेल्ट-फंदे को FSL भेजा गया, आज कोर्ट में अहम सुनवाई


    नई दिल्ली । एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा मौत मामले ने अब कानूनी और जांच दोनों स्तरों पर गंभीर मोड़ ले लिया है। मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने को लेकर आज भोपाल जिला अदालत में अहम सुनवाई होनी है। इस सुनवाई पर पूरे केस की दिशा काफी हद तक निर्भर मानी जा रही है।

    ट्विशा के परिवार की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने कोर्ट में आवेदन देकर CDR सुरक्षित रखने की मांग की है, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने का आवेदन दायर किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलों पर मंगलवार को सुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें कोर्ट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित करने को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी कर सकता है।

    इस बीच, सीबीआई ने मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए सोमवार को कटारा हिल्स थाने में दर्ज एफआईआर को री-रजिस्टर कर दिया है। अब इस केस में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया है। सीबीआई ने अपनी जांच में दहेज के रूप में 20 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग के आरोपों को आधार बनाया है।

    सोमवार देर शाम सीबीआई की टीम भोपाल पहुंची और जांच को तेज कर दिया। एजेंसी ने गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ पूछताछ शुरू की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी जुटाई। इसी दौरान SIT की टीम ने भी समर्थ सिंह के घर पहुंचकर करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की और स्पॉट वेरिफिकेशन कराया।

    जांच के दौरान समर्थ सिंह ने पुलिस को बताया कि ट्विशा गर्भपात के बाद मानसिक तनाव में थी। हालांकि, परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, मामले को प्रभावित करने की कोशिश की गई और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है।

    इसी बीच, एक अहम विवाद उस बेल्ट को लेकर भी सामने आया है, जिसे कथित तौर पर फांसी लगाने में इस्तेमाल किया गया था। डीसीपी विकास कुमार शहवाल ने स्पष्ट किया कि जिमनास्टिक बेल्ट को पहले ही 7 दिन पूर्व सागर FSL लैब भेजा जा चुका है और उसकी जांच प्रक्रिया जारी है।

    मामले में यह भी सामने आया है कि पुलिस को सूचना देने में देरी हुई थी, जिसकी जांच अब सीबीआई कर रही है। आरोप है कि अस्पताल में मृत्यु की पुष्टि के बाद भी समय पर पुलिस को सूचना नहीं दी गई, जिससे केस के शुरुआती साक्ष्यों पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्विशा की मौत 12 मई की रात कथित तौर पर फांसी लगाने से हुई थी, जबकि 13 मई की सुबह मामला दर्ज किया गया। इस देरी को लेकर भी जांच एजेंसियां सक्रिय हैं और संबंधित डॉक्टरों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

    उधर, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए टिप्पणी की है और मीडिया को संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी है। कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा बनाए रखा जाए और जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ने दिया जाए। अब सभी की नजरें भोपाल कोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां CDR और CCTV फुटेज को सुरक्षित रखने को लेकर अहम फैसला आ सकता है।