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  • CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    CBSE भाषा नीति पर साफ स्थिति, मौजूदा छात्रों को नहीं बदलना होगा विषय, दो विदेशी भाषाओं की पढ़ाई 10वीं तक जारी रखने की छूट

    नई दिल्ली । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई भाषा नीति को लेकर लंबे समय से चल रहे असमंजस पर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को अपनी मौजूदा भाषा संयोजन में किसी भी प्रकार का बदलाव करने की आवश्यकता नहीं होगी। इन छात्रों को 10वीं तक अपनी चुनी हुई भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी गई है। इस फैसले से देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिली है।

    हाल ही में CBSE द्वारा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF) के तहत जारी किए गए सर्कुलर के बाद तीन-भाषा नीति को लेकर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। सर्कुलर में कहा गया था कि कक्षा 9 में प्रवेश लेने वाले छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। इसके बाद कई छात्रों और अभिभावकों ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई थी, खासकर उन छात्रों ने जो पहले से दो विदेशी भाषाओं का अध्ययन कर रहे हैं।

    इस विवाद के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया तक भी पहुंचा और सुप्रीम कोर्ट में इस नीति को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल की गईं। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ने का निर्देश दिया गया था। इसी बीच शिक्षा मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा छात्रों पर यह नियम लागू नहीं होगा।

    मंत्रालय के अनुसार, नया भाषा ढांचा केवल भविष्य में लागू होने वाले बैच पर लागू किया जाएगा। यानी कक्षा 6 से नए प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ही यह तीन-भाषा नीति प्रभावी होगी। वर्तमान में पढ़ रहे छात्र अपनी मौजूदा भाषा संरचना के साथ बिना किसी बदलाव के अपनी शिक्षा पूरी कर सकेंगे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी नीति परिवर्तन का संकेत नहीं है, बल्कि केवल पहले से मौजूद व्यवस्था को स्पष्ट करने का प्रयास है।

    शिक्षा मंत्रालय के अनुसार देश में हर वर्ष लगभग 24 लाख छात्र CBSE की 10वीं परीक्षा में शामिल होते हैं, जिनमें से केवल एक छोटा हिस्सा, लगभग 30 हजार छात्र, दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। यही वर्ग इस विवाद से प्रभावित हो सकता था। अब स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी होने के बाद इन छात्रों को भी पूरी राहत मिल गई है।

    सरकार का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना है, लेकिन इसे लागू करने में किसी भी प्रकार की अचानक बाध्यता नहीं होगी। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा ताकि छात्रों को किसी प्रकार की शैक्षणिक कठिनाई का सामना न करना पड़े।

    कुल मिलाकर, इस स्पष्टीकरण के बाद CBSE की भाषा नीति को लेकर फैला भ्रम समाप्त हो गया है। मौजूदा छात्रों के लिए यह निर्णय बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है, जबकि नई व्यवस्था भविष्य के शैक्षणिक बैचों पर लागू होगी।

  • CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक से इनकार, विस्तृत सुनवाई तक जारी रहेगा नया नियम, छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बरकरार

    CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक से इनकार, विस्तृत सुनवाई तक जारी रहेगा नया नियम, छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बरकरार

    नई दिल्ली । कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा लागू की गई नई तीन-भाषा नीति को लेकर जारी विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर तत्काल रोक लगाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि इतने महत्वपूर्ण शैक्षणिक और नीतिगत विषय पर कोई भी अंतरिम आदेश विस्तृत सुनवाई के बाद ही पारित किया जा सकता है। अदालत के इस रुख से फिलहाल बोर्ड की नई व्यवस्था प्रभावी बनी रहेगी, जबकि नीति का विरोध कर रहे अभिभावकों और शिक्षकों की चिंताएं भी बरकरार हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया था कि आगामी शैक्षणिक सत्र में इस नीति के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगाई जाए। उनका तर्क था कि नई व्यवस्था के तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाओं सहित कुल तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिसके लिए स्कूलों में अभी पर्याप्त तैयारी नहीं है। हालांकि अवकाशकालीन पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस विषय से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से लंबित हैं, जिनकी सुनवाई निर्धारित तिथि पर की जाएगी।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान याचिका को भी पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि सभी संबंधित पक्षों की दलीलें एक साथ सुनी जा सकें। न्यायालय का मानना है कि शिक्षा नीति से जुड़े ऐसे मामलों में जल्दबाजी में कोई फैसला देना उचित नहीं होगा और सभी तथ्यों तथा परिस्थितियों की गहन समीक्षा आवश्यक है।

    विवाद की जड़ हाल के महीनों में बोर्ड द्वारा जारी किए गए निर्देशों में हुए बदलाव को माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले यह संकेत दिया गया था कि नई भाषा व्यवस्था को आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, लेकिन बाद में अचानक समयसीमा बदलकर इसे जल्दी लागू करने का निर्णय लिया गया। इससे छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कई विद्यालय अभी तक नई भाषा व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक संसाधन विकसित नहीं कर पाए हैं। कई क्षेत्रों में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सीमित है, जबकि कुछ भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

    अभिभावकों और शिक्षकों का एक वर्ग यह भी तर्क दे रहा है कि भाषा सीखना व्यक्तिगत रुचि, क्षेत्रीय आवश्यकता और शैक्षणिक सुविधा से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि पहले से निर्धारित पाठ्यक्रम के बीच नई भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल करने से छात्रों को समायोजन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए चुनौती अधिक हो सकती है जो पहले से दो भाषाओं के साथ अन्य विषयों का संतुलन बना रहे हैं।

    दूसरी ओर, नई शिक्षा व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि बहुभाषी शिक्षा छात्रों के बौद्धिक विकास, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। उनका तर्क है कि भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप है और इससे विद्यार्थियों को विविध भाषाई परिवेश को समझने का अवसर मिलेगा।

    फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नई तीन-भाषा नीति पर अंतिम निर्णय आने में अभी समय लगेगा। आगामी सुनवाई में अदालत बोर्ड, संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगी। तब तक यह मुद्दा देश के शिक्षा क्षेत्र में चर्चा और बहस का प्रमुख विषय बना रहेगा।

  • कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

    कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए आखिरी मौका: सीबीएसई री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन के लिए आज अंतिम दिन

    नई दिल्ली । कक्षा 12वीं के छात्रों के लिए सीबीएसई द्वारा री-इवैल्यूएशन और उत्तर पुस्तिका सत्यापन का आवेदन आज अंतिम दिन है। जिन छात्रों को अपने परीक्षा परिणाम पर आपत्ति है, उनके पास अब केवल कुछ घंटे बचे हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की समय सीमा आज रात 11 बजकर 59 मिनट पर समाप्त हो जाएगी।

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस बार पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल के माध्यम से छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की जांच कराने का अवसर दिया है। पहले यह समय सीमा 6 जून तय की गई थी, लेकिन तकनीकी समस्याओं और उच्च मांग को देखते हुए इसे एक दिन बढ़ा दिया गया।

    छात्रों के लिए इस प्रक्रिया में सबसे पहले अपनी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी उपलब्ध कराई जाती है। इसके बाद छात्र सत्यापन के लिए आवेदन कर सकते हैं या किसी विशेष प्रश्न के पुनर्मूल्यांकन का अनुरोध कर सकते हैं। री-इवैल्यूएशन और सत्यापन की यह व्यवस्था मूल्यांकन की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और छात्रों का भरोसा मजबूत करने के उद्देश्य से बनाई गई है।

    इस वर्ष बोर्ड ने कक्षा 12वीं के परिणाम तैयार करने में ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली का उपयोग किया है। कई छात्रों ने स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में धुंधली तस्वीरें या अंकन न दिखने जैसी समस्याओं की शिकायत की थी। यही कारण है कि इस प्रक्रिया के लिए आवेदन की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। अब तक 70 हजार से अधिक आवेदन दर्ज किए जा चुके हैं।

    छात्रों को सत्यापन के लिए निर्धारित शुल्क और पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न शुल्क जमा करना होता है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जारी अंक अंतिम और बाध्यकारी होंगे। इसके बाद किसी अन्य स्तर पर अपील की अनुमति नहीं होगी। इसलिए जिन छात्रों को अपने परिणाम पर संदेह है, उनके लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    सीबीएसई ने छात्रों से अपील की है कि वे समय रहते पोर्टल पर जाकर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें। रात 11:59 के बाद पोर्टल बंद हो जाएगा और इसके बाद कोई नया आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह कदम छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में पारदर्शिता का भरोसा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    छात्रों के लिए यह अवसर उनकी मेहनत और प्रयासों की सही पहचान सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है। बोर्ड की यह व्यवस्था छात्रों और अभिभावकों के बीच भरोसे को बढ़ाने में सहायक साबित होगी।

    इसलिए कक्षा 12वीं के वे छात्र जिन्होंने अपने अंक या परिणाम पर आपत्ति दर्ज कराई है, उन्हें तुरंत री-इवैल्यूएशन और सत्यापन के लिए आवेदन करना चाहिए। समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।

  • शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    शिक्षा और संस्कृति के संगम की ओर बड़ा कदम, सीबीएसई में मैथिली भाषा शामिल होने से बढ़ा भाषाई गौरव

    नई दिल्ली । भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता दिए जाने के बाद शिक्षा और सांस्कृतिक जगत में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस फैसले को न केवल एक भाषाई उपलब्धि माना जा रहा है, बल्कि इसे क्षेत्रीय भाषाओं को नई पहचान और मजबूती देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के रूप में भी देखा जा रहा है।

    इस निर्णय के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से माध्यमिक स्तर तक मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की तैयारी की गई है। इसके बाद कक्षा एक से लेकर आठवीं तक के विद्यार्थियों को मातृभाषा के रूप में मैथिली पढ़ने का अवसर मिलेगा। लंबे समय से क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा व्यवस्था में बेहतर स्थान देने की मांग उठती रही है और इस फैसले को उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    मैथिली भाषा भारतीय संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। मिथिला क्षेत्र की पहचान केवल उसकी सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रही, बल्कि भाषा और साहित्य के क्षेत्र में भी उसका विशेष योगदान रहा है। ऐसे में शिक्षा के शुरुआती स्तर पर बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने का प्रयास भाषा संरक्षण के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

    इस फैसले को लेकर बिहार में खुशी का माहौल देखा जा रहा है। इसे मिथिला की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा यदि बच्चों की मातृभाषा में दी जाए तो उनकी समझने और सीखने की क्षमता अधिक प्रभावी होती है। यही वजह है कि नई शिक्षा व्यवस्था में मातृभाषा आधारित शिक्षा को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है।

    शिक्षा नीति में भी प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा के प्रयोग पर विशेष जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी जड़ों, संस्कृति और स्थानीय पहचान से जोड़ना है। माना जाता है कि जब बच्चे अपनी परिचित भाषा में शिक्षा प्राप्त करते हैं तो उनका बौद्धिक और भावनात्मक विकास अधिक सहज तरीके से होता है।

    मैथिली भाषा को मिला यह स्थान केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और परंपराओं के अधिक करीब आ सकेंगी। साथ ही यह कदम अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकता है, जिससे भारत की भाषाई विविधता और अधिक मजबूत हो सकती है।

    भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती बल्कि समाज की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा भी होती है। ऐसे में मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में मिला यह नया स्थान आने वाले समय में भाषाई संरक्षण और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।

  • नई शिक्षा नीति के अनुरूप CBSE का निर्णय: 9वीं कक्षा में तीन भाषाएं अनिवार्य, 1 जुलाई से लागू नियम

    नई शिक्षा नीति के अनुरूप CBSE का निर्णय: 9वीं कक्षा में तीन भाषाएं अनिवार्य, 1 जुलाई से लागू नियम

    नई दिल्ली । भारतीय शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी बदलाव की घोषणा की गई है, जिसने स्कूल शिक्षा के ढांचे को नई दिशा देने की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड CBSE ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए एक नई भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब छात्रों को कम से कम तीन भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

    यह व्यवस्था 1 जुलाई 2026 से पूरे देश के विद्यालयों में लागू की जाएगी और इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचे के अनुरूप एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुभाषी क्षमता को विकसित करना, भारतीय भाषाओं के प्रति रुचि बढ़ाना और शिक्षा को अधिक समावेशी एवं व्यावहारिक बनाना है। नए नियम के अनुसार प्रत्येक छात्र को आर1, आर2 और आर3 के रूप में तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी आवश्यक हैं।

    यदि कोई छात्र विदेशी भाषा का चयन करता है तो उसे पहले दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करना अनिवार्य होगा, इसके बाद ही वह तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में विदेशी भाषा चुन सकेगा। इस निर्णय को शिक्षा विशेषज्ञ छात्रों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं, क्योंकि इससे न केवल भाषाई दक्षता बढ़ेगी बल्कि सांस्कृतिक समझ और संचार कौशल भी मजबूत होंगे।

    बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि कक्षा 10 में आर3 भाषा के लिए किसी प्रकार की बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी, बल्कि इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का अतिरिक्त बोझ कम करना और सीखने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना है।

    हालांकि, आर3 विषय का प्रदर्शन छात्रों के प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा, जिससे उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों का उचित मूल्यांकन हो सके। इस नीति के लागू होने से विद्यालयों को भी अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी क्योंकि उन्हें योग्य भाषा शिक्षकों की व्यवस्था करनी होगी। जिन स्कूलों में संसाधनों की कमी है, वहां अंतर-विद्यालय सहयोग, ऑनलाइन शिक्षण और मिश्रित शिक्षण मॉडल का सहारा लिया जा सकता है।

    इसके अलावा सेवानिवृत्त शिक्षकों और योग्य स्नातकोत्तर उम्मीदवारों की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी गई है ताकि शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो। यह भी सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी छात्र को इस नई व्यवस्था के कारण बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा और विशेष आवश्यकता वाले छात्रों के लिए आवश्यक छूट भी प्रदान की जाएगी। साथ ही विदेश से लौटने वाले छात्रों को भी विशेष परिस्थितियों में छूट देने का प्रावधान रखा गया है।

    कुल मिलाकर यह निर्णय भारतीय शिक्षा प्रणाली को एक बहुभाषी और आधुनिक ढांचे में ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में छात्रों की भाषा क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

  • मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया

    मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच CBSE ने GCC देशों में 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को रद्द किया


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल अमेरिका के हालिया संघर्ष के चलते तनावपूर्ण स्थिति बढ़ने के बीच भारतीय दूतावासों ने छात्रों और अभिभावकों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इस अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) ने 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं को बहरीन ईरान कुवैत ओमान कतर सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रद्द करने की घोषणा की है। यह निर्णय छात्रों की सुरक्षा और शिक्षण गतिविधियों पर पड़ रहे प्रभावों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    ओमान में भारतीय दूतावास ने बताया कि यह एडवाइजरी पहले जारी 01.03.2026 03.03.2026 05.03.2026 07.03.2026 और 09.03.2026 के सर्कुलरों का अपडेशन है। इन सर्कुलरों के माध्यम से प्रभावित देशों में स्कूलों और संबंधित अधिकारियों से मिले इनपुट और अपील के आधार पर बोर्ड ने 12वीं क्लास की परीक्षाओं की समीक्षा की। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि 16 मार्च से लेकर 10 मार्च तक निर्धारित सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं। इसके साथ ही पहले स्थगित की गई परीक्षाओं की तारीखें भी पूरी तरह रद्द होंगी।

    इस निर्णय का उद्देश्य न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि उनके परिणाम सही समय पर घोषित किए जाएं। एडवाइजरी में यह भी कहा गया कि परीक्षा स्थगित होने के बाद रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और तरीका बाद में अलग से बताया जाएगा। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि सीबीएसई 10 मार्च को स्थिति की पुनः समीक्षा करेगा और 12 मार्च से होने वाली परीक्षाओं के लिए सही निर्णय लेगा।

    मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण ओमान में भारतीय दूतावास ने पहले भी 9 10 और 11 मार्च को होने वाली 12वीं बोर्ड परीक्षाओं को फिलहाल टालने की जानकारी साझा की थी। यह कदम ईरान इजरायल युद्ध और वहां की सुरक्षा स्थिति के मद्देनजर छात्रों और उनके परिवारों के हित में उठाया गया। दूतावास ने यह भी बताया कि सभी संबंधित स्कूलों और अधिकारियों को बोर्ड ने सीधे निर्देश दिए हैं कि परीक्षा स्थगित होने की जानकारी तुरंत छात्रों तक पहुँचाई जाए।

    इस स्थिति से प्रभावित छात्रों और अभिभावकों के लिए राहत की बात यह है कि बोर्ड ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षाओं के परिणामों को घोषित करने की प्रक्रिया सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। इस बीच छात्रों को आवश्यकतानुसार ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा सकता है ताकि उनका अकादमिक नुकसान कम से कम हो।

    इस निर्णय से यह भी साफ हो जाता है कि वैश्विक तनाव और सुरक्षा स्थिति सीधे तौर पर शिक्षा पर प्रभाव डाल सकती है। सीबीएसई का यह कदम छात्रों की सुरक्षा मानसिक शांति और शिक्षण गतिविधियों की निरंतरता को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां

    CBSE का बड़ा निर्णय… 12वीं के रिजल्ट के बाद नहीं होगा Mark Verification… अब पूरी तरह डिजिटल जांची जाएंगी कॉपियां


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) (Central Board of Secondary Education (CBSE) ने 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 (12th Board Exam 2026) को लेकर अहम निर्णय लिया है। इस बार 12वीं के परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्रों को अंक सत्यापन (मार्क वेरिफिकेशन) (Mark Verification) की सुविधा उपलब्ध नहीं होगी। बोर्ड ने तय किया है कि 2026 से 12वीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरी तरह डिजिटल प्रणाली ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के जरिए किया जाएगा।

    दरअसल, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) इस बार 12वीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग’ के साथ पूरी तरह डिजिटल तरीके से कराने जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इसके बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रहेगी। शुक्रवार को सीबीएसई अधिकारियों ने संबद्ध स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए आयोजित एक कार्यशाला में यह जानकारी दी। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि 2026 में 12वीं की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में ऑन स्क्रीन मार्किंग की जाएगी। डिजिटल मूल्यांकन की इस प्रक्रिया के बाद अंकों की गिनती में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं रह जाएगी। ऐसे में छात्रों के लिए परिणाम घोषित होने के बाद अंकों के सत्यापन की जरूरत नहीं रह जाएगी।


    10वीं का मूल्यांकन मैनुअल ही होगा

    परीक्षा नियंत्रक भारद्वाज ने बताया कि बोर्ड इस बार सिर्फ 12वीं की परीक्षा के लिए यह सुविधा लागू कर रहा है। इस बार होने वाली दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा में कॉपियों का मूल्यांकन ‘मैनुअल’ यानी शिक्षकों के द्वारा ही किया जाएगा।


    इसलिए कराया जाता था अंक सत्यापन

    पुरानी व्यवस्था में कई बार मानवीय भूलों के चलते अंक जुड़ने से रह जाते थे। परिणाम के बाद छात्र अंक सत्यापन को आवेदन करते थे, जिसके बाद कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन होता था।


    क्या होती है ऑन स्क्रीन मार्किंग

    ऑन स्क्रीन मार्किंग डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली है। इसमें उत्तर पुस्तिका को हाथों से चेक नहीं किया जाता। शिक्षक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका को कंप्यूटर पर चेक करेंगे। छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं पहले स्कैन की जाती हैं। इसके बाद ये कॉपियां सुरक्षित ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड होती हैं और शिक्षक कंप्यूटर पर उन्हें देखकर अंक देते हैं। इस सिस्टम में सॉफ्टवेयर खुद ही कुल अंक जोड़ देता है, जिससे टोटलिंग की गलती की संभावना खत्म हो जाती है। अभी तक कई बार हाथ से जोड़ने में गलती हो जाती थी, जिससे छात्रों को बाद में वेरिफिकेशन के लिए आवेदन करना पड़ता था।


    शिक्षक अब अपने स्कूल से ही जांच सकेंगे कॉपियां

    इस नए सिस्टम की एक खास बात यह है कि शिक्षकों को अब कॉपी जांचने के लिए किसी मूल्यांकन केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं होगी। वे अपने ही स्कूल में बैठकर, नियमित काम करते हुए कॉपियों का मूल्यांकन कर सकेंगे। इससे समय और यात्रा खर्च दोनों की बचत होगी और ज्यादा शिक्षक इस प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे।


    17 फरवरी से शुरू हो रही है परीक्षा

    सीबीएसई की 12वीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू हो रही हैं। बोर्ड से भारत और दुनिया के 26 देशों में 31,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं।

  • CBSE ने क्लास 10 के लिए जारी की नई गाइडलाइन, उत्तर पुस्तिका में लिखने का तरीका बदला

    CBSE ने क्लास 10 के लिए जारी की नई गाइडलाइन, उत्तर पुस्तिका में लिखने का तरीका बदला


    नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए छात्रों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्नों के उत्तर लिखने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को अपनी उत्तर पुस्तिका को अलग-अलग सेक्शनों में बांटकर लिखना अनिवार्य होगा।

    तीन हिस्सों में विज्ञान का प्रश्नपत्र

    CBSE के अनुसार विज्ञान का प्रश्नपत्र तीन हिस्सों में विभाजित होगा:

    सेक्शन A: बायोलॉजी

    सेक्शन B: केमिस्ट्री

    सेक्शन C: फिजिक्स

    छात्रों को उत्तर पुस्तिका में भी इसी क्रम में तीन अलग-अलग सेक्शन बनाकर अपने उत्तर लिखने होंगे। अगर किसी छात्र ने फिजिक्स का उत्तर गलती से बायोलॉजी वाले सेक्शन में लिखा, तो उस प्रश्न के अंक नहीं मिलेंगे।

    चार हिस्सों में सामाजिक विज्ञान का प्रश्नपत्र

    सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र को चार सेक्शनों में बांटा गया है:

    सेक्शन A: इतिहास

    सेक्शन B: भूगोल

    सेक्शन C: राजनीति विज्ञान

    सेक्शन D: अर्थशास्त्र

    छात्रों को उत्तर पुस्तिका में भी चार स्पष्ट सेक्शन बनाकर ही उत्तर लिखना होगा। किसी भी उत्तर को गलत सेक्शन में लिखने पर उसे मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।

    CBSE के मुख्य निर्देश

    विज्ञान की उत्तर पुस्तिका में तीन सेक्शन, और सामाजिक विज्ञान की उत्तर पुस्तिका में चार सेक्शन बनाना अनिवार्य है।

    किसी भी उत्तर को गलत सेक्शन में नहीं लिखा जा सकता।

    अगर कोई छात्र ऐसा करता है, तो उस उत्तर का मूल्यांकन नहीं होगा, और री-चेकिंग या री-इवैल्युएशन में भी इसे सही नहीं किया जा सकेगा।

    बोर्ड ने साफ किया है कि यह बदलाव उत्तर पुस्तिका को व्यवस्थित और मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए किया गया है। छात्रों को समय रहते इन नई गाइडलाइन्स को समझकर अभ्यास करना जरूरी होगा।