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  • योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा

    योगी सरकार ने शुरू की जनगणना-2027 की ऐतिहासिक शुरुआत, डिजिटल और जातीय गणना से बदलेगा विकास का चेहरा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनगणना-2027 के प्रथम चरण की शुरुआत करते हुए इसे देश के समग्र और सुनियोजित विकास की मजबूत आधारशिला बताया। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने “हमारी जनगणना, हमारा विकास” के संकल्प के साथ मकान सूचीकरण और गणना कार्य का शुभारंभ किया।

    जनगणना को बताया विकास का आधार
    सीएम योगी ने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या का आंकलन नहीं, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का आधार है। उन्होंने कहा कि सटीक डेटा से ही अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाया जा सकता है।

    पहली बार डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना की जा रही है। इसके तहत 7 से 21 मई 2026 तक नागरिकों को स्वगणना (self-enumeration) की सुविधा दी गई है, जिसमें लोग ऑनलाइन अपने विवरण दर्ज कर सकेंगे।इसके बाद जनगणना कर्मी घर-घर जाकर सत्यापन और सूचीकरण करेंगे, जबकि दूसरे चरण में व्यक्तिगत जनगणना की जाएगी।

    जातीय गणना और वन ग्राम भी शामिल
    सीएम योगी ने कहा कि इस बार जनगणना में पहली बार जातीय गणना को भी शामिल किया गया है। साथ ही वन ग्रामों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिससे व्यापक और समावेशी डेटा तैयार किया जा सके।

    विशाल स्तर पर होगा कार्य
    उन्होंने बताया कि यह कार्य उत्तर प्रदेश के 75 जिलों, 18 मंडलों, 350 तहसीलों और हजारों ग्राम व नगर निकायों में किया जाएगा। इस प्रक्रिया में करीब 5.25 लाख कर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें प्रगणक, सुपरवाइजर और प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं।

    मुख्यमंत्री की अपील
    योगी आदित्यनाथ ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व समझकर इसमें पूरी भागीदारी करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सके।जनगणना-2027 का यह डिजिटल और विस्तृत मॉडल भारत में डेटा आधारित प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे विकास योजनाओं को और अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

  • Census 2027: अब घर बैठे खुद भरें जनगणना फॉर्म, जानिए पूरा ऑनलाइन प्रोसेस

    Census 2027: अब घर बैठे खुद भरें जनगणना फॉर्म, जानिए पूरा ऑनलाइन प्रोसेस


    नई दिल्ली। देश में पहली बार Census 2027 को पूरी तरह डिजिटल बनाया जा रहा है। इस बार नागरिकों को Self Enumeration यानी खुद से ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा दी गई है। इससे अब जनगणना अधिकारी के घर आने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा आप खुद ही घर बैठे अपनी और परिवार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं।

    यह प्रक्रिया आसान, सुरक्षित और समय बचाने वाली है, जिसे पूरा करने में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है। सरकार ने इसके लिए एक आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया है, जहां से आप पूरी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। बाद में अधिकारी इस जानकारी का सत्यापन करेंगे।

    ऐसे करें Census 2027 का ऑनलाइन फॉर्म भरना

    सबसे पहले आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जाएं। वहां अपना राज्य चुनें और स्क्रीन पर दिए गए कैप्चा को भरकर आगे बढ़ें। इसके बाद घर के मुखिया का नाम और मोबाइल नंबर दर्ज करें। मोबाइल नंबर पर आए OTP से वेरिफिकेशन पूरा करना होगा।

    OTP वेरिफिकेशन के बाद आपको अपनी पसंद की भाषा चुननी होगी। फिर एड्रेस डिटेल भरनी होगी, जिसमें जिला, पिन कोड और लोकेशन जैसी जानकारी शामिल होती है।

    अगले चरण में आपको अपने घर से जुड़ी जानकारी देनी होगी जैसे मकान पक्का है या कच्चा, दीवार और छत किस प्रकार की है आदि। इसके बाद परिवार के सभी सदस्यों की डिटेल भरनी होगी, जिसमें उम्र, लिंग, शिक्षा और अन्य आवश्यक जानकारी शामिल होती है।

    इसके अलावा आपको घर में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी देनी होगी, जैसे पानी, बिजली, शौचालय, इंटरनेट, टीवी, वाहन आदि। यह डेटा सरकार को सामाजिक और आर्थिक योजनाएं बनाने में मदद करेगा।

    सबमिट करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

    फॉर्म पूरा भरने के बाद सभी जानकारी को एक बार ध्यान से जरूर जांच लें। कोई भी गलती आगे परेशानी का कारण बन सकती है। जब आप पूरी तरह संतुष्ट हों, तब ही फाइनल सबमिट करें।

    सबमिट करने के बाद आपको एक रेफरेंस आईडी मिलेगी, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसी आईडी के जरिए आगे आपकी जानकारी को ट्रैक और वेरिफाई किया जाएगा।

    क्यों खास है यह डिजिटल जनगणना?

    इस नई डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य डेटा को ज्यादा सटीक, तेज और पारदर्शी तरीके से इकट्ठा करना है। इससे सरकार को योजनाएं बनाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह नागरिकों के लिए भी सुविधाजनक है क्योंकि वे अपनी जानकारी खुद और सही तरीके से दर्ज कर सकते हैं।

  • Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण

    Census 2027 : पहली बार डिजिटल डेटा कैप्चर के साथ स्व-गणना की सुविधा, PM ने दर्ज किए अपने विवरण


    नई दिल्ली।
    विश्व के सबसे बड़े जनगणना अभियान (World’s Largest Census Campaign) ‘जनगणना-2027’ (Census 2027 first Phase) के प्रथम चरण की 1 अप्रैल से शुरुआत हो गई। इस चरण में मकान सूचीकरण और मकानों की गणना हो रही है। यह पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर (Digital Data Capture) के साथ स्व-गणना (Self-calculation) की सुविधा वाली भारत की पहली जनगणना है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।

    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो साझा करते हुए लिखा, “मैंने अपनी स्व-गणना पूरी कर ली है। आज जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो रही है, जो मकानों की सूची बनाने और आवास संबंधी कार्यों से जुड़ा है। यह पहली बार है जब जनगणना के लिए डेटा संग्रह डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है। यह भारत के लोगों को अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार भी देता है। मैं भारत के लोगों से अपील करता हूँ कि वे अपने घर-परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करें और जनगणना की प्रक्रिया में भाग लें।”


    राष्ट्रपति-उपराष्ट्रपति ने भी लिया हिस्सा

    प्रधानमंत्री के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी जनगणना 2027 के लिए आज ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया और अपने अपने आवास संबंधी जानकारी दर्ज की। बाद में मुर्मु ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने राष्ट्रपति भवन में जनगणना 2027 के लिए सरकार की ‘स्व-गणना’ पहल में भाग लिया। राष्ट्रपति ने गृह सचिव गोविंद मोहन, भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पोर्टल पर अपने आवास का विवरण स्वयं दर्ज किया। उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भी अपने आवास पर अपने अपने विवरण दर्ज किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर यह जानकारी साझा करते हुए फॉर्म में विवरण दर्ज करने के फोटो भी साझा किए।


    आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू

    जनगणना की इस राष्ट्रीय प्रक्रिया में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना की। बता दें कि प्रारंभिक चरण में आज से स्व-गणना प्रक्रिया 08 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में शुरू की गई है, जिनमें अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और राजधानी दिल्ली के नई दिल्ली नगरपालिका परिषद एवं दिल्ली छावनी बोर्ड क्षेत्र शामिल हैं। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार पहले दिन इन स्थानों से लगभग 55,000 परिवारों ने पहले ही दिन इस सुविधा का लाभ उठाया।


    16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध

    स्व-गणना एक सुरक्षित और वेब आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। पहली बार उत्तरदाताओं को प्रगणकों के आने से पहले अपनी सुविधानुसार ऑनलाइन विवरण भरने का विकल्प उपलब्ध है। प्रगणक पिछली जनगणनाओं की तरह सभी आवंटित हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में घर-घर जाएंगे, जबकि उसके पूर्व स्व-गणना एक अतिरिक्त सुविधा के रूप में काम करेगी। स्व-गणना में भाग लेने के लिए व्यक्ति अपने मोबाइल नंबर और बुनियादी क्रेडेंशियल्स का उपयोग करके एसई.सीईएनएसयूएस.जीओवी.इन पोर्टल पर लॉग इन कर सकते हैं। सफलतापूर्वक फॉर्म सबमिट करने पर एक यूनीक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी जनरेट हो जाती है, जिसे बाद में प्रगणक के फील्ड विजिट के दौरान उनसे पुष्टि करने के लिए साझा किया जाएगा।


    कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के चरण के दौरान आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और उपलब्ध परिसंपत्तियों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इन महत्वपूर्ण संकेतकों को दर्ज करने के लिए जनवरी 2026 में प्रथम चरण के लिए कुल 33 प्रश्न अधिसूचित किए गए हैं, जो साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण, नीति निर्धारण और लक्षित कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार प्रदान करते हैं।


    01 अप्रैल से 30 सितंबर तक मकान गणना

    मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का चरण 01 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच पूरे देश में संचालित किया जाएगा। इस छह माह की अवधि में प्रत्येक राज्य और संघ राज्य क्षेत्र, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र सरकार द्वारा अधिसूचित 30 दिनों की अवधि में इस क्षेत्रीय कार्य को पूरा करेंगे। पहली बार, घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिनों की अतिरिक्त अवधि स्व-गणना के लिए प्रदान की गई है, जिससे लोग प्रगणक के आने से पहले अपने विवरण डिजिटल रूप से स्वयं दर्ज कर सकते हैं।

    जनगणना शासन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, जो अगले दशक के लिए भारत की विकास योजना का आधार प्रदान करती है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्रित सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रखे जाते हैं। जनगणना 2027 के लिए उपयोग किए जा रहे डिजिटल उपकरण उच्च स्तरीय डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण से युक्त हैं।

  • जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल

    जनगणना 2027: आज से शुरू होगा पहला चरण….पहली बार पूरी प्रक्रिया होगी डिजिटल


    नई दिल्ली।
    भारत (India) की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना (Census-2027) का पहला चरण (First Phase) आज यानी एक अप्रैल 2027 से शुरू हो रहा है। यह दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा जनगणना अभियान होगा, जो पहली बार पूरी तरह से डिजिटल माध्यमों (Digital-Process) से संचालित किया जाएगा। इस बार नागरिकों के लिए ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ (Self-Enumeration) यानी स्व-गणना भरने का विकल्प भी उपलब्ध होगा। नागरिक डिजिटल माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।

    दो चरणों में होगी जनगणना
    पहले चरण में भवन सूचीकरण और आवास जनगणना: यह चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक छह महीने की अवधि में संपन्न होगा। इसमें घरों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और घरेलू संपत्तियों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। भवन सूचीकरण कार्य के 30 दिनों की अवधि से ठीक पहले 15 दिनों के लिए स्व-गणना का विकल्प भी उपलब्ध होगा।

    दूसरे चरण में जनसंख्या गणना: यह चरण फरवरी 2027 में आयोजित किया जाएगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति से जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवासन, प्रजनन क्षमता आदि से संबंधित जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में जातियों की गणना भी की जाएगी, जैसा कि सीसीपीए द्वारा निर्णय लिया गया है। जनसंख्या गणना की सटीक तारीखें और इस चरण में शामिल किए जाने वाले प्रश्न जल्द ही अधिसूचित किए जाएंगे।


    जनगणना में डिजिटल क्रांति

    जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने 11,718.24 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है। इस बार जनगणना के लिए कागजी फॉर्मों का उपयोग नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, गणनाकर्ता स्मार्ट फोन पर मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे डेटा एकत्र और जमा करेंगे। इसके अतिरिक्त, दोनों चरणों में सेल्फ-एन्यूमरेशन के लिए एक ऑनलाइन सुविधा भी उपलब्ध होगी। मोबाइल ऐप और स्व-गणना पोर्टल हिंदी और अंग्रेजी सहित 16 भाषाओं में उपलब्ध होंगे।


    विभिन्न राज्यों के लिए अनुसूची

    देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भवन सूचीकरण और आवास जनगणना की अलग-अलग तारीखें तय की गई हैं। उदाहरण के लिए, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दिल्ली, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा और सिक्किम में 16 अप्रैल से 15 मई तक भवन सूचीकरण और आवास जनगणना होगी, जिसमें एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि शामिल होगी। वहीं, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 1 मई से 30 मई तक भवन सूचीकरण जनगणना शुरू होगी, जिसमें 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सेल्फ-एन्यूमरेशन की अवधि होगी।


    इन राज्यों में अलग है संदर्भ तिथि

    जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 की आधी रात 00:00 बजे है। हालांकि, जम्मू और कश्मीर के बर्फीले गैर-सिंक्रोनस क्षेत्रों और उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों के लिए यह संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर, 2026 की आधी रात 00:00 बजे होगी। इस डिजिटल जनगणना से डेटा संग्रह की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और कुशल होने की उम्मीद है, जो भविष्य की नीतियों के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेगी।

  • Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड

    Census 2027: डिजिटल जनगणना से बदलेगा भारत का राजनीतिक, आर्थिक और नीतिगत भविष्य, हर घर–हर व्यक्ति का बनेगा रिकॉर्ड


    नई दिल्ली।
    भारत एक बार फिर इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है। अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रही Census 2027 न सिर्फ देश की 16वीं जनगणना होगी, बल्कि यह भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना के रूप में दर्ज होगी। इस बार गिनती केवल आबादी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि हर घर, हर व्यक्ति और हर इलाके का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जो आने वाले वर्षों में देश की राजनीति, नीतियों और विकास की दिशा तय करेगा।

    इस ऐतिहासिक जनगणना में करीब 30 लाख (3 मिलियन) एंयूरेटर मैदान में उतरेंगे, जो Android और iOS आधारित मोबाइल ऐप के जरिए डेटा एकत्र करेंगे।

    पहली बार नागरिकों को सेल्फ-एंयूरेशन की सुविधा भी दी जाएगी, जिसमें लोग 15 दिन के भीतर खुद अपने परिवार और घर से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि डेटा की सटीकता और पारदर्शिता भी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ेगी।

    डिजिटल जनगणना का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि सरकारी योजनाएं कागजों तक सीमित न रहकर सही लोगों तक पहुंचेंगी। अब यह साफ तौर पर पता चलेगा कि किस जिले, गांव या शहरी वार्ड में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। इससे संसाधनों का बेहतर बंटवारा होगा और योजनाओं की प्रभावशीलता जमीन पर दिखाई देगी।

    Census 2027 का असर केवल सामाजिक नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर भी बेहद गहरा होगा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी GDP अनुमानों के साथ जब जनगणना के आंकड़े जुड़ेंगे, तब यह स्पष्ट हो सकेगा कि आर्थिक विकास का असली लाभ आम नागरिक तक पहुंच रहा है या नहीं।

    यह डेटा सरकार को यह समझने में मदद करेगा कि किन क्षेत्रों में योजनाएं सफल रहीं और कहां सुधार की जरूरत है।

    राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह जनगणना बेहद निर्णायक साबित हो सकती है। इसके आधार पर भविष्य में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की सीटों के पुनर्निर्धारण (डिलिमिटेशन) का रास्ता साफ होगा। दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में जन्म दर नियंत्रण की वजह से जनसंख्या स्थिर है, जबकि उत्तर, मध्य और पूर्वी राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। नए आंकड़ों के बाद संसदीय सीटों का संतुलन बदल सकता है, जिससे राजनीतिक शक्ति का केंद्र भी प्रभावित होगा। इसका सीधा असर चुनावी रणनीतियों, प्रतिनिधित्व और नीति निर्माण पर पड़ेगा।

    Census 2027 में केवल जनसंख्या नहीं, बल्कि घर की स्थिति, भाषा, धर्म, शिक्षा स्तर, रोजगार, व्यापार गतिविधियां, प्रवास, जन्म और मृत्यु दर जैसी अहम जानकारियां भी जुटाई जाएंगी।

    यह डेटा गांव से लेकर शहर और वार्ड स्तर तक उपलब्ध होगा, जिससे योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान पहले से कहीं ज्यादा सटीक हो सकेगी। स्कूल, अस्पताल, सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की योजना इसी डेटा के आधार पर बनाई जा सकेगी।

    हालांकि, इतनी बड़ी डिजिटल कवायद के साथ चुनौतियां भी कम नहीं हैं। ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट और स्मार्टफोन की उपलब्धता, तकनीकी प्रशिक्षण, डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता जैसे मुद्दे सरकार के सामने बड़ी परीक्षा होंगे। यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण कोई वर्ग या क्षेत्र पीछे न छूट जाए।

    इसके बावजूद, विशेषज्ञ मानते हैं कि Census 2027 भारत के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है। यह न केवल देश की सामाजिक विविधता और आर्थिक ताकत को सामने लाएगी, बल्कि नीति निर्माताओं को ठोस और विश्वसनीय डेटा देगी, जिसके आधार पर भविष्य की योजनाएं बनाई जा सकेंगी।

    कुल मिलाकर, Census 2027 सिर्फ आंकड़ों की गिनती नहीं, बल्कि भारत की असली तस्वीर सामने लाने की कवायद है। हर घर और हर व्यक्ति की जानकारी जब डिजिटल रूप में दर्ज होगी, तब नीतियां ज्यादा सटीक, न्यायसंगत और असरदार बनेंगी। यह जनगणना भारत की राजनीति, विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को नई दिशा देगी, जहां हर नागरिक की मौजूदगी नीति निर्माण में स्पष्ट रूप से नजर आएगी।