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  • जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल

    जनगणना का दूसरा चरण 10 जनवरी से…. डेढ़ महीने चलेगी प्रक्रिया, पूछे जाएंगे 40 सवाल


    नई दिल्ली।
    देश में होने वाली जनगणना 2027 (Census 2027) के दूसरे चरण (Second phase) यानी जनसंख्या गणना (Population Census) की प्रक्रिया इस बार पहले के मुकाबले काफी लंबी होगी। यह प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने तक चलेगी। इसमें 15 दिनों का स्व-गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन (Self-Enumeration) का समय भी शामिल है। इस चरण में लोगों से जाति समेत कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे, जबकि 2011 की जनगणना में सवालों की संख्या 29 थी। यानी इस बार 11 नए सवाल जोड़े गए हैं।

    जनसंख्या गणना का यह चरण 10 जनवरी से 28 फरवरी तक चलेगा। वहीं, पहले की जनगणनाओं में यह प्रक्रिया आमतौर पर 9 से 28 फरवरी के बीच महज 20 दिनों में पूरी की जाती थी। भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मणिपुर (अगली घोषणा तक), गोवा, उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, लद्दाख, तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमपात प्रभावित क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 25 जनवरी 2027 से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्य किया जाएगा।


    यूपी समेत चार राज्यों में 35 दिन चलेगी घर-घर जनगणना

    अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम पहले रखा गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और पंजाब में घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना का कार्यक्रम 35 दिनों का होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी अधिसूचना के अनुसार, देशभर में जनगणना 25 जनवरी से 27 फरवरी 2027 के बीच कराई जाएगी। हालांकि, कुछ राज्यों और क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। मणिपुर में फिलहाल जनगणना की घोषणा नहीं की गई है। राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया पहले कराने की मांग के बाद जनगणना का काम रोक दिया गया था।


    कब होगी स्व-गणना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने की प्रक्रिया?

    जनगणना 2027 के लिए लोगों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने का भी मौका मिलेगा। इसके लिए 10 से 24 जनवरी 2027 तक स्व-गणना की अवधि निर्धारित की गई है। इसके बाद घर-घर जाकर जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) पहले ही 1 मार्च 2027 घोषित की जा चुकी है। इसके बाद 1 से 5 मार्च 2027 तक संशोधन का चरण भी आयोजित किया जाएगा।


    जनगणना में पूछे जाएंगे ये 40 सवाल

    इस बार दूसरे चरण में सवालों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। इनमें जाति से जुड़ी जानकारी के अलावा परिवार और व्यक्तिगत पहचान से संबंधित कई जानकारियां भी शामिल होंगी। रिपोर्ट के मुताबिक, जनगणना के दौरान ये जानकारियां जुटाई जाएंगी:
    – जाति से संबंधित जानकारी
    – पति या पत्नी का नाम
    – माता और पिता से जुड़ी जानकारी
    – व्यक्ति की घोषित राष्ट्रीयता
    – स्थायी पता
    – कोविड-19 टीकाकरण की जगह
    – कुल बैंक खातों की संख्या
    – मोबाइल नंबर
    – आधार नंबर
    – मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) नंबर
    – पासपोर्ट नंबर
    – ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता
    – मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी उपलब्ध होने पर शेयर की जा सकती है। वहीं, पासपोर्ट नंबर केवल भारतीय पासपोर्ट धारकों से मांगा जाएगा। देश में पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जिसमें 62.32 करोड़ पुरुषों और 58.75 करोड़ महिलाओं सहित 1.21 अरब आबादी होने की बात कही गई थी। देश में उस समय 24.95 करोड़ परिवार थे।


    मणिपुर में फिलहाल जनगणना नहीं

    मणिपुर को जनगणना के मौजूदा कार्यक्रम से बाहर रखा गया है। राज्य में विभिन्न वर्गों की ओर से पहले राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की प्रक्रिया कराने की मांग उठाई गई थी। इसके बाद वहां जनगणना की प्रक्रिया रोक दी गई। केंद्र सरकार की अधिसूचना में भी मणिपुर को फिलहाल बाहर रखा गया है। इसके अलावा लद्दाख और हिमाचल प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर के बर्फबारी वाले गैर-समकालिक क्षेत्रों में जनगणना का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है।

  • जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश

    जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    देश में जारी जनगणना (Census) के नतीजे आने के बाद शहरों की असली तस्वीर सामने आएगी। संसद की संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से कहा है कि वर्तमान में 3,000 से अधिक शहर या कस्बे शहरी विशेषताएं तो रखते हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। यह स्थिति बदलनी चाहिए। शहर की मौजूदा परिभाषा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। आजादी के सौवें वर्ष तक शहरी आबादी 87 करोड़ तक होने की उम्मीद है।

    मंत्रालय ने शहरीकरण की बदलती जरूरतों को देखते हुए बस्ती वर्गीकरण व्यवस्था में ‘संक्रमणकालीन क्षेत्र’ (ट्रांजिशनल एरिया) की नई श्रेणी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान और नियोजन आसान हो सकता है, जहां आबादी और आर्थिक गतिविधियां तो शहरी स्वरूप ले रही हैं, लेकिन उन्हें अभी शहर का दर्जा नहीं मिला है। भारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त कार्यालय ने कहा है, मौजूदा जनगणना डिजिटल तरीके से हो रही है। आंकड़ों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद गांव व शहरों के आंकड़ों से सीमाओं का विश्लेषण कर अर्धशहरी या संक्रमणकालीन बस्तियों की पहचान की जा सकती है। लेकिन इस वक्त जनगणना के बीच अर्ध शहरी क्षेत्रों की नई श्रेणी शुरू करना संभव नहीं है।

    वर्ष 2025 में भारत की शहरी आवादी लगभग 45 से 50 करोड़ के बीच होने का अनुमान था। वहीं, 2047 तक इसके बढ़कर 85 से 87 करोड़ होने की संभावना है। मंत्रालय का कहना है कि नए शहरी क्षेत्रों का विकास हाई स्पीड रेल नेटवर्क, क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली और प्रमुख एक्सप्रेसवे जैसे परिवहन एवं आर्थिक गलियारों के आसपास होने की संभावना है।


    क्या होते हैं जनगणना नगर व वैधानिक नगर

    5,000 आबादी, 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र जनगणना नगर कहलाता है। यहां मुख्य कामगारों में पुरुष के कम से कम 75 प्रतिशत गैर-कृषि गतिविधियों में शामिल रहना जरूरी शर्त है। वैधानिक नगर में नगर निगम, नगरपालिका, छावनी बोर्ड और अधिसूचित क्षेत्र समितियां शामिल हैं।


    संसदीय समिति की सिफारिशें

    संसदीय समिति ने कहा, शहर की परिभाषा में बदलाव की जरूरत है। सरकार लैंगिक पक्षपाती मानदंड में संशोधन के लिए एक केंद्रित अध्ययन कराए और शहरी क्षेत्रों की पहचान हेतु लैंगिक-समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करे।

  • जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया

    जनगणना: इस बार मिलेगी Self Enumeration की सुविधा….16 नवंबर से शुरू होगी ऑनलाइन प्रक्रिया


    नई दिल्ली।
    जनगणना-2027 (Census 2027) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार लोगों को अपना जनगणना ब्योरा खुद दर्ज करने (Self Enumeration) की सुविधा भी मिल रही है। 16 से 30 नवंबर तक स्व-गणना (Self Enumeration) की जा सकेगी। वहीं, 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक प्रगणक घर-घर पहुंचकर जनगणना करेंगे।

    स्व-गणना पूरी करने वाले परिवार को एक स्व-गणना पहचान संख्या मिलेगी। इसे सुरक्षित रखना होगा और घर पहुंचने वाले प्रगणक को यह संख्या बतानी होगी।


    जाति और राष्ट्रीयता के लिए प्रमाणपत्र नहीं मांगा जाएगा

    जनगणना के दौरान जाति और राष्ट्रीयता से जुड़ी जानकारी व्यक्ति की ओर से दी गई सूचना के आधार पर दर्ज की जाएगी। इसके लिए किसी नागरिक से प्रमाणपत्र या अन्य दस्तावेज नहीं मांगा जाएगा। जनगणना के दूसरे चरण में प्रत्येक परिवार से निर्धारित 40 सवाल पूछकर जानकारी दर्ज की जाएगी।


    5 से 9 जनवरी तक होगा पुनरीक्षण

    1 दिसंबर से शुरू होने वाली घर-घर जनगणना प्रक्रिया 4 जनवरी तक चलेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी तक पुनरीक्षण किया जाएगा। 5 जनवरी 2027 की मध्यरात्रि को जनगणना की संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।


    50 फील्ड ट्रेनर होंगे तैयार

    औरैया में जनगणना की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी बृजेश कुमार की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित मानस सभागार में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक हुई। इसमें तैयारियों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को समय से सभी व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।

    जिले में जनगणना के लिए 50 फील्ड ट्रेनर चिह्नित किए गए हैं। अक्टूबर में मास्टर ट्रेनर इन्हें प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद 20 नवंबर से पहले फील्ड ट्रेनर प्रगणकों और सुपरवाइजरों को जनगणना की प्रक्रिया समझाएंगे।


    स्कूल-कॉलेज से गांवों तक चलेगा जागरूकता अभियान

    जनगणना में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें- पेंटिंग, रंगोली, भाषण, निबंध, प्रश्नोत्तरी, प्रभात फेरी जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।

    ग्रामीण और शहरी इलाकों में वॉल पेंटिंग, बैनर-पोस्टर, होर्डिंग, कूड़ा संग्रहण वाहनों और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के जरिए भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। डीएम ने छोटे जागरूकता वीडियो और डिजिटल प्रचार सामग्री तैयार कर सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।


    जनगणना के आंकड़े क्यों अहम

    बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना से जुटाए जाने वाले आंकड़े भविष्य की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण का आधार बनते हैं। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ तैयारियां समय से पूरी करने को कहा।

  • आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के बीच जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के बीच जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर देश के कई हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि सरकार जिस तरीके से जातिगत आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, उससे सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से जातियों की गणना कराने की मांग की है।

    जयराम रमेश ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है तो उसे वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव करना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज करने से देश की अन्य जातियों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक आकलन नहीं हो पाएगा।

    कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि जनगणना के फॉर्म में एससी और एसटी के लिए अलग व्यवस्था है, जबकि अन्य जातियों के लिए उसी तरह का स्पष्ट कॉलम उपलब्ध नहीं कराया गया है। पार्टी का कहना है कि जातिगत जनगणना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके जरिए देश के विभिन्न सामाजिक समूहों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आनी चाहिए।

    जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत आंकड़ों का सही संग्रह सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, अलग-अलग समुदायों की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों का विश्वसनीय आकलन होने पर ही नीतियां अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सकती हैं। कांग्रेस इसी आधार पर जातियों की गिनती के लिए अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे रही है।

    कांग्रेस महासचिव ने बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई व्यवस्थाओं का राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन करने की मांग भी रखी है। उन्होंने सरकार से विशेषज्ञों के साथ चर्चा करने और सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने की अपील की है, ताकि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को लेकर व्यापक सहमति बनाई जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना को लेकर कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को 21 पन्नों का पत्र भेजा था। इससे पहले खरगे ने अप्रैल 2023 और मई 2025 में भी इस मुद्दे पर पत्र लिखे थे। कांग्रेस का दावा है कि इन पत्रों का अब तक जवाब नहीं मिला है।

    कांग्रेस ने जनगणना में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए जा रहे खुले प्रश्न वाले तरीके पर भी सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि यदि प्रक्रिया स्पष्ट और मानकीकृत नहीं होगी तो आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस के अनुसार, सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए सटीक आंकड़े बेहद आवश्यक हैं।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और पटना समेत कई शहरों में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। आरक्षण के पक्ष और विरोध में सामने आ रहे अलग-अलग राजनीतिक तथा सामाजिक रुख के बीच जातिगत जनगणना का मुद्दा भी बहस के केंद्र में आ गया है।

    कांग्रेस का कहना है कि जातिगत जनगणना को व्यापक, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, इससे सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को समझने और भविष्य की नीतियों को बेहतर आधार देने में मदद मिल सकती है। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार की प्रक्रिया और कांग्रेस की आपत्तियों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के आसार हैं।

  • जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए सवालों की सूची जारी कर दी है। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें भी अपनी जाति बतानी पड़ेगी। उनके इस बयान के बाद जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि जनगणना में जब जाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी तो राहुल गांधी को भी अपनी जाति बतानी होगी। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उन्हें अपनी जाति के बारे में जवाब देना पड़ा तो उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान राहुल गांधी के राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए।

    जनगणना 2027 के लिए जारी किए गए प्रश्नों में जाति से संबंधित सवाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जाति संबंधी प्रश्न सूची में 10वें स्थान पर है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ जाति की जानकारी का विकल्प भी जोड़ा गया है। यह बदलाव सामाजिक संरचना से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आजादी के बाद होने वाली जनगणनाओं के संदर्भ में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार सभी समुदायों की जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के फॉर्म में जाति से जुड़े सवाल के तहत मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती थी।

    नई जनगणना में केवल जाति तक सीमित जानकारी नहीं ली जाएगी। व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता और धर्म जैसे विषयों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

    शिक्षा और डिजिटल साक्षरता को लेकर भी सवाल पूछे जाने हैं। व्यक्ति किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहा है या नहीं, उसकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता क्या है और संबंधित अध्ययन क्षेत्र कौन सा है, जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े आंकड़ों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

    जनगणना में लोगों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष में काम किया है या नहीं, उसका व्यवसाय क्या है और वह किस क्षेत्र में कार्य करता है, जैसे प्रश्न शामिल किए गए हैं। कामगार की श्रेणी और काम से जुड़ी अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

    इसके अलावा काम की तलाश, काम करने की उपलब्धता और कार्यस्थल तक आने जाने से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। जनगणना के दौरान मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते से संबंधित सवालों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जाति जनगणना को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जनगणना 2027 में जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    नई दिल्ली । देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार आजादी के बाद देशव्यापी स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। नागरिकों से उनकी सामाजिक, जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना के रूप में आयोजित की जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जाति से संबंधित जानकारी भी आधिकारिक तौर पर दर्ज की जाएगी। इससे देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

    निर्धारित 40 सवालों में नागरिकों से जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र की जाएगी।

    जनगणना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया रखी गई है। दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।

    इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने के साथ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने और आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

    पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं असमान क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समयसीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

    जनगणना 2027 की प्रक्रिया में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने को सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार के पास विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या से संबंधित अधिक विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

    यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसकी प्रक्रिया निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई वर्षों की देरी के बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन स्व-पंजीकरण और पहली बार जातिगत आंकड़ों का समावेश इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।

  • एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी

    एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी


    नई दिल्ली ।  देश की राजधानी में जनसंख्या और आवास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जनगणना 2027 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत एमसीडी क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण के साथ की गई है, जिसमें मकानों की सूची तैयार करने और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घर या परिवार का डेटा छूट न जाए और शहर की वास्तविक जनसंख्या संरचना को सही ढंग से समझा जा सके।

    इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 32 लाख मकानों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके लिए पूरे क्षेत्र को 46 हजार से अधिक छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 180 से 200 घर शामिल किए गए हैं और अनुमान है कि हर ब्लॉक में 700 से 800 लोग निवास करते हैं। इस कार्य के लिए लगभग 50 हजार जनगणना कर्मियों को तैनात किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर डिजिटल टैबलेट के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे और उसे सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेंगे।

    इस प्रक्रिया में प्रत्येक जनगणना कर्मी को एक निश्चित ब्लॉक सौंपा गया है और उन्हें घर-घर जाकर परिवारों की स्थिति, मकान की संरचना, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर दर्ज करने होंगे। इस बार विशेष रूप से किरायेदारों के आंकड़ों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि शहर की बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इस डेटा के आधार पर शहरी विकास और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी घर में ताला लगा हुआ मिलता है तो संबंधित कर्मी दोबारा वहां जाएंगे और यदि कोई परिवार दिन में उपलब्ध नहीं होता है तो उनके घर का दौरा देर रात तक भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार का डेटा सही तरीके से दर्ज किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनगणना कर्मियों और सुपरवाइजरों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है, जहां हर छह कर्मियों पर एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।

    इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जनगणना कर्मियों की पहचान को भी सत्यापित करने की व्यवस्था की गई है, जिसमें उनके पहचान पत्र और क्यूआर कोड स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। पहले से ही कई लोगों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर दी है, जिसे आगे चलकर फील्ड सर्वे के दौरान सत्यापित किया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा अभियान न केवल जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शहर के विकास को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।