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  • आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के बीच जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    आरक्षण विरोधी प्रदर्शनों के बीच जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने सरकार की प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल

    नई दिल्ली ।आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर देश के कई हिस्सों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस ने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया है कि सरकार जिस तरीके से जातिगत आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, उससे सामाजिक न्याय के उद्देश्य को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताते हुए व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से जातियों की गणना कराने की मांग की है।

    जयराम रमेश ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सामाजिक न्याय के प्रति प्रतिबद्ध है तो उसे वर्तमान प्रक्रिया में बदलाव करना चाहिए। कांग्रेस का तर्क है कि जनगणना में केवल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज करने से देश की अन्य जातियों की वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक आकलन नहीं हो पाएगा।

    कांग्रेस ने विशेष रूप से इस बात पर सवाल उठाया है कि जनगणना के फॉर्म में एससी और एसटी के लिए अलग व्यवस्था है, जबकि अन्य जातियों के लिए उसी तरह का स्पष्ट कॉलम उपलब्ध नहीं कराया गया है। पार्टी का कहना है कि जातिगत जनगणना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसके जरिए देश के विभिन्न सामाजिक समूहों की संख्या और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति की वास्तविक तस्वीर सामने आनी चाहिए।

    जयराम रमेश ने कहा कि जातिगत आंकड़ों का सही संग्रह सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, अलग-अलग समुदायों की जनसंख्या, सामाजिक स्थिति और आर्थिक परिस्थितियों का विश्वसनीय आकलन होने पर ही नीतियां अधिक प्रभावी ढंग से तैयार की जा सकती हैं। कांग्रेस इसी आधार पर जातियों की गिनती के लिए अधिक स्पष्ट और वैज्ञानिक प्रक्रिया अपनाने पर जोर दे रही है।

    कांग्रेस महासचिव ने बिहार और तेलंगाना में अपनाई गई व्यवस्थाओं का राष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन करने की मांग भी रखी है। उन्होंने सरकार से विशेषज्ञों के साथ चर्चा करने और सभी राजनीतिक दलों की बैठक बुलाने की अपील की है, ताकि जातिगत जनगणना की प्रक्रिया को लेकर व्यापक सहमति बनाई जा सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना को लेकर कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। कांग्रेस के मुताबिक, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री को 21 पन्नों का पत्र भेजा था। इससे पहले खरगे ने अप्रैल 2023 और मई 2025 में भी इस मुद्दे पर पत्र लिखे थे। कांग्रेस का दावा है कि इन पत्रों का अब तक जवाब नहीं मिला है।

    कांग्रेस ने जनगणना में जाति संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए जा रहे खुले प्रश्न वाले तरीके पर भी सवाल उठाया है। पार्टी का कहना है कि यदि प्रक्रिया स्पष्ट और मानकीकृत नहीं होगी तो आंकड़ों की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। कांग्रेस के अनुसार, सामाजिक न्याय से जुड़ी नीतियों के लिए सटीक आंकड़े बेहद आवश्यक हैं।

    यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और पटना समेत कई शहरों में आरक्षण की मौजूदा व्यवस्था को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए हैं। आरक्षण के पक्ष और विरोध में सामने आ रहे अलग-अलग राजनीतिक तथा सामाजिक रुख के बीच जातिगत जनगणना का मुद्दा भी बहस के केंद्र में आ गया है।

    कांग्रेस का कहना है कि जातिगत जनगणना को व्यापक, पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जाना चाहिए। पार्टी के मुताबिक, इससे सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को समझने और भविष्य की नीतियों को बेहतर आधार देने में मदद मिल सकती है। वहीं, इस मुद्दे पर सरकार की प्रक्रिया और कांग्रेस की आपत्तियों को लेकर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने के आसार हैं।

  • जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    जनगणना 2027 में जाति के सवाल पर गिरिराज सिंह का राहुल गांधी पर हमला, बोले अपनी जाति बतानी पड़ेगी

    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने आगामी जनगणना 2027 के लिए सवालों की सूची जारी कर दी है। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसी मुद्दे को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उन्हें भी अपनी जाति बतानी पड़ेगी। उनके इस बयान के बाद जाति जनगणना का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि जनगणना में जब जाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी तो राहुल गांधी को भी अपनी जाति बतानी होगी। उन्होंने राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि उन्हें अपनी जाति के बारे में जवाब देना पड़ा तो उनके लिए स्थिति अलग हो सकती है। केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान राहुल गांधी के राजनीतिक रुख पर भी सवाल उठाए।

    जनगणना 2027 के लिए जारी किए गए प्रश्नों में जाति से संबंधित सवाल को विशेष रूप से शामिल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जाति संबंधी प्रश्न सूची में 10वें स्थान पर है। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के साथ जाति की जानकारी का विकल्प भी जोड़ा गया है। यह बदलाव सामाजिक संरचना से जुड़ा विस्तृत आंकड़ा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आजादी के बाद होने वाली जनगणनाओं के संदर्भ में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बार सभी समुदायों की जाति संबंधी जानकारी दर्ज किए जाने की व्यवस्था की गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के फॉर्म में जाति से जुड़े सवाल के तहत मुख्य रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी दर्ज की जाती थी।

    नई जनगणना में केवल जाति तक सीमित जानकारी नहीं ली जाएगी। व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, वैवाहिक स्थिति, विवाह के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता और धर्म जैसे विषयों से संबंधित जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके साथ माता-पिता से जुड़ी जानकारी भी जनगणना प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

    शिक्षा और डिजिटल साक्षरता को लेकर भी सवाल पूछे जाने हैं। व्यक्ति किसी शैक्षणिक संस्थान में पढ़ रहा है या नहीं, उसकी उच्चतम शैक्षणिक योग्यता क्या है और संबंधित अध्ययन क्षेत्र कौन सा है, जैसी जानकारियां दर्ज की जाएंगी। इससे देश की शिक्षा व्यवस्था और मानव संसाधन से जुड़े आंकड़ों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

    जनगणना में लोगों की आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी जानकारी भी जुटाई जाएगी। व्यक्ति ने पिछले एक वर्ष में काम किया है या नहीं, उसका व्यवसाय क्या है और वह किस क्षेत्र में कार्य करता है, जैसे प्रश्न शामिल किए गए हैं। कामगार की श्रेणी और काम से जुड़ी अन्य गतिविधियों के बारे में भी जानकारी ली जाएगी।

    इसके अलावा काम की तलाश, काम करने की उपलब्धता और कार्यस्थल तक आने जाने से जुड़े विवरण भी दर्ज किए जाएंगे। जनगणना के दौरान मोबाइल नंबर, आधार, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते से संबंधित सवालों को भी शामिल किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    जाति जनगणना को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच पहले से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लंबे समय से जातिगत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में जनगणना 2027 में जाति संबंधी जानकारी शामिल किए जाने का निर्णय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    जनगणना 2027 में जाति और कोविड टीकाकरण की जानकारी भी होगी दर्ज, डिजिटल प्रक्रिया के तहत जुटाए जाएंगे 40 सवालों के जवाब

    नई दिल्ली । देश में जनगणना 2027 की प्रक्रिया का दूसरा चरण 17 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। इस चरण में पहली बार आजादी के बाद देशव्यापी स्तर पर जातिगत आंकड़े जुटाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने जनगणना के लिए पूछे जाने वाले 40 सवालों की सूची अधिसूचित कर दी है। नागरिकों से उनकी सामाजिक, जनसांख्यिकीय और आर्थिक स्थिति से जुड़ी विभिन्न जानकारियां दर्ज की जाएंगी।

    जनगणना 2027 देश की 16वीं जनगणना होगी, जबकि स्वतंत्रता के बाद यह आठवीं जनगणना के रूप में आयोजित की जा रही है। इस बार की जनगणना कई मायनों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसमें जाति से संबंधित जानकारी भी आधिकारिक तौर पर दर्ज की जाएगी। इससे देश में विभिन्न सामाजिक समूहों की जनसंख्या से जुड़े आंकड़े सामने आने की संभावना है।

    निर्धारित 40 सवालों में नागरिकों से जाति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से संबंधित जानकारी मांगी जाएगी। इसके अलावा कोविड-19 टीकाकरण से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार और व्यक्ति से निर्धारित प्रश्नों के आधार पर जानकारी एकत्र की जाएगी।

    जनगणना दो चरणों में पूरी की जा रही है। पहले चरण में मकानों और आवास से संबंधित विवरण जुटाने की प्रक्रिया रखी गई है। दूसरे चरण में प्रत्येक नागरिक की जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसी दूसरे चरण में जातिगत आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।

    इस बार जनगणना को डिजिटल तरीके से संचालित किया जा रहा है। मोबाइल उपकरणों के माध्यम से आंकड़े दर्ज करने के साथ नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की सुविधा भी दी गई है। इससे कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने और आंकड़ों को डिजिटल रूप में संग्रहित करने में मदद मिलेगी।

    पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों के लिए जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख तथा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले एवं असमान क्षेत्रों में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इन क्षेत्रों में मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए समयसीमा अलग निर्धारित की गई है।

    इन क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को 17 अगस्त से 31 अगस्त तक स्वयं ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध रहेगी। वहीं देश के अन्य हिस्सों में जनसंख्या की गणना फरवरी 2027 में की जाएगी। इस तरह अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप जनगणना का कार्यक्रम निर्धारित किया गया है।

    जनगणना 2027 की प्रक्रिया में जातिगत जानकारी शामिल किए जाने को सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे सरकार के पास विभिन्न सामाजिक वर्गों की जनसंख्या से संबंधित अधिक विस्तृत आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे। इन आंकड़ों का उपयोग भविष्य में नीतियों और योजनाओं के निर्माण में किया जा सकता है।

    यह जनगणना मूल रूप से वर्ष 2021 में प्रस्तावित थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसकी प्रक्रिया निर्धारित समय पर शुरू नहीं हो सकी। अब कई वर्षों की देरी के बाद जनगणना की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। डिजिटल व्यवस्था, ऑनलाइन स्व-पंजीकरण और पहली बार जातिगत आंकड़ों का समावेश इस जनगणना को पिछली जनगणनाओं से अलग बनाता है।

  • एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी

    एमसीडी क्षेत्रों में जनगणना अभियान की शुरुआत, हर घर से जुटाई जाएगी विस्तृत जनसांख्यिकी जानकारी


    नई दिल्ली ।  देश की राजधानी में जनसंख्या और आवास से जुड़े आंकड़ों को अधिक सटीक और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से जनगणना 2027 की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण की शुरुआत एमसीडी क्षेत्रों में घर-घर सर्वेक्षण के साथ की गई है, जिसमें मकानों की सूची तैयार करने और परिवारों से संबंधित विस्तृत जानकारी एकत्र करने का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घर या परिवार का डेटा छूट न जाए और शहर की वास्तविक जनसंख्या संरचना को सही ढंग से समझा जा सके।

    इस व्यापक अभियान के तहत लगभग 32 लाख मकानों का विस्तृत सर्वे किया जाएगा, जिसके लिए पूरे क्षेत्र को 46 हजार से अधिक छोटे ब्लॉकों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक में करीब 180 से 200 घर शामिल किए गए हैं और अनुमान है कि हर ब्लॉक में 700 से 800 लोग निवास करते हैं। इस कार्य के लिए लगभग 50 हजार जनगणना कर्मियों को तैनात किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर डिजिटल टैबलेट के माध्यम से जानकारी एकत्र करेंगे और उसे सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेंगे।

    इस प्रक्रिया में प्रत्येक जनगणना कर्मी को एक निश्चित ब्लॉक सौंपा गया है और उन्हें घर-घर जाकर परिवारों की स्थिति, मकान की संरचना, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से जुड़े लगभग 33 प्रश्नों के उत्तर दर्ज करने होंगे। इस बार विशेष रूप से किरायेदारों के आंकड़ों पर भी ध्यान दिया जा रहा है, क्योंकि शहर की बड़ी आबादी किराए के मकानों में रहती है। इस डेटा के आधार पर शहरी विकास और भविष्य की योजनाओं को अधिक प्रभावी और वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा।

    सर्वेक्षण के दौरान यदि किसी घर में ताला लगा हुआ मिलता है तो संबंधित कर्मी दोबारा वहां जाएंगे और यदि कोई परिवार दिन में उपलब्ध नहीं होता है तो उनके घर का दौरा देर रात तक भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार का डेटा सही तरीके से दर्ज किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जनगणना कर्मियों और सुपरवाइजरों की निगरानी व्यवस्था भी मजबूत की गई है, जहां हर छह कर्मियों पर एक पर्यवेक्षक तैनात किया गया है।

    इसके साथ ही नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए जनगणना कर्मियों की पहचान को भी सत्यापित करने की व्यवस्था की गई है, जिसमें उनके पहचान पत्र और क्यूआर कोड स्कैन करके उनकी प्रामाणिकता की पुष्टि की जा सकती है। पहले से ही कई लोगों ने स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर दी है, जिसे आगे चलकर फील्ड सर्वे के दौरान सत्यापित किया जाएगा।

    कुल मिलाकर यह पूरा अभियान न केवल जनसंख्या के सटीक आंकड़े जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह शहरी नियोजन, संसाधन प्रबंधन और विकास योजनाओं के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगा, जिससे आने वाले वर्षों में शहर के विकास को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।