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  • मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान

    मध्य पूर्व में बढ़ा युद्ध का खतरा, अमेरिका ने फिर किए हवाई हमले, हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा बयान


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार 10वीं रात ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव और तेज होने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका उपयोग क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों के लिए खतरा पैदा करने में किया जा सकता है। इस घटनाक्रम ने पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को एक बार फिर वैश्विक चिंता का विषय बना दिया है।

    अमेरिकी सैन्य कमान का कहना है कि हालिया अभियान के दौरान ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, समुद्री ठिकानों तथा वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और समुद्री मार्गों पर किसी भी संभावित खतरे को कम करना है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल माना जाता है।

    अमेरिका ने यह भी दावा किया कि उसकी सैन्य गतिविधियों के कारण हॉर्मुज से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार पिछले कुछ समय में अमेरिकी बलों ने सैकड़ों वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित रूप से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने में सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही करोड़ों बैरल कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने का भी दावा किया गया है। ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

    इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा रुख दोहराया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचाया गया तो उसका जवाब बेहद सख्त और कई गुना अधिक होगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना को आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और किसी भी हमले का जवाब पूरी ताकत के साथ दिया जाएगा। उनके इस बयान को क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक स्पष्ट रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

    दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई उसके सैन्य अभियान के तहत की गई, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। दोनों देशों की ओर से लगातार सामने आ रहे सैन्य दावों और जवाबी कार्रवाइयों ने पूरे क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, समुद्री परिवहन और कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे समय में दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस बढ़ते संघर्ष को रोकने में सफल होंगे या फिर क्षेत्र में तनाव और अधिक गंभीर रूप लेगा।

  • ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में नए हवाई हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। इस अभियान के दौरान ईरान के कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यापारिक जहाज में आग लगने और बहरीन में सुरक्षा अलर्ट जारी होने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा दक्षिणी प्रांतों होरमोज़गान और बुशेहर में भी तेज धमाकों की सूचना मिली। दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार में कई विस्फोट दर्ज किए गए, जिसके बाद आसपास के कोनारक क्षेत्र में ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि संभावित नए हमलों की आशंका को देखते हुए ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। इसी रणनीति के तहत लगातार कई दिनों से हवाई अभियान जारी रखा गया है। हालांकि इन हमलों के बाद ईरान की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया है।

    इसी दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एक और चिंताजनक खबर सामने आई। ओमान के तट के निकट एक बड़े व्यापारिक जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई। जहाज की पहचान और आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

    क्षेत्रीय हालात को देखते हुए बहरीन की राजधानी मनामा स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त एहतियाती कदम भी उठाए जा रहे हैं।

    लगातार बढ़ते सैन्य अभियानों और सुरक्षा तैयारियों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कूटनीतिक संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इस संघर्ष के अगले घटनाक्रम और संभावित राजनीतिक समाधान पर टिकी हुई हैं।

  • ईरान-इराक संबंधों पर व्यक्तिगत बयानों का असर नहीं पड़ना चाहिए, विदेश मंत्रियों की बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और बढ़ते तनाव पर गंभीर चर्चा

    ईरान-इराक संबंधों पर व्यक्तिगत बयानों का असर नहीं पड़ना चाहिए, विदेश मंत्रियों की बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा और बढ़ते तनाव पर गंभीर चर्चा

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लगातार बदलते सुरक्षा परिदृश्य के बीच ईरान और इराक ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है। दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई टेलीफोन वार्ता में क्षेत्रीय तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और आपसी सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। इस दौरान ईरान ने स्पष्ट किया कि कुछ व्यक्तिगत या गैर-आधिकारिक टिप्पणियों के कारण दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध प्रभावित नहीं होने चाहिए।

    ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अपने इराकी समकक्ष फुआद हुसैन से बातचीत में कहा कि तेहरान और बगदाद के संबंध केवल वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और साझा रणनीतिक हितों की मजबूत नींव पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान, अच्छे पड़ोसी के सिद्धांत और निरंतर सहयोग के आधार पर दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाना दोनों पक्षों के हित में है।

    वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और उनके संभावित प्रभावों का आकलन किया। चर्चा में इस बात पर भी सहमति जताई गई कि मौजूदा परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच नियमित संवाद, समन्वय और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना आवश्यक है ताकि किसी भी प्रकार के तनाव को और बढ़ने से रोका जा सके तथा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बनाए रखने में सहयोग मिल सके।

    इस बीच क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी तेज होती दिखाई दे रही हैं। अमेरिकी सेना ने घोषणा की है कि उसने ईरान के खिलाफ नए हवाई अभियान शुरू किए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई हाल में हुए उन हमलों के जवाब में की गई है, जिनमें अमेरिकी सैनिक हताहत हुए। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिन्हें क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा और अमेरिकी बलों के लिए खतरा माना जा रहा है।

    अमेरिकी सेना के अनुसार हालिया हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है, जबकि एक अन्य सैनिक के लापता होने की जानकारी दी गई है। इसके बाद सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हुए नए हवाई हमलों की शुरुआत की गई। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के कारण नागरिकों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार हाल के हमलों में कई लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। मृतकों में महिलाओं और बच्चों के शामिल होने का भी दावा किया गया है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में एक ओर जहां सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने के प्रयास भी जारी हैं। ईरान और इराक के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों ने इस बात पर बल दिया कि संवाद और समन्वय ही क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, कूटनीतिक प्रयासों की निरंतरता आने वाले दिनों में क्षेत्र की राजनीतिक और सामरिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती।

    रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं।

    दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इजरायल की बढ़ी सैन्य तैयारी, ट्रंप के फैसले पर टिकी नजर, पश्चिम एशिया में फिर गहराया युद्ध का खतरा

    अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इजरायल की बढ़ी सैन्य तैयारी, ट्रंप के फैसले पर टिकी नजर, पश्चिम एशिया में फिर गहराया युद्ध का खतरा


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर बढ़ते सैन्य तनाव ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को बेहद संवेदनशील बना दिया है। इसी बीच इजरायल की ओर से यह संकेत मिला है कि आवश्यकता पड़ने पर वह ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है। हालांकि इजरायली सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देश की ओर से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे प्रत्यक्ष सैन्य टकराव में शामिल होने का कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया गया है। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों और सेना को हर संभावित परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क रखा गया है।

    बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा सैन्य टकराव आने वाले दिनों में और गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे परिदृश्य में यदि अमेरिका अपने सहयोगी देशों से समर्थन चाहता है तो इजरायल भी संभावित सैन्य अभियान का हिस्सा बन सकता है। अधिकारियों का कहना है कि देश पहले भी अपने रणनीतिक सहयोगियों के साथ सुरक्षा अभियानों में भाग ले चुका है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार रहेगा।

    इजरायल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने संकेत दिया कि यदि हालात की मांग हुई तो देश दोबारा कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी पक्ष क्षेत्र में नए युद्ध की स्थिति नहीं चाहता, लेकिन ईरान की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सुरक्षा से जुड़े निर्णय क्षेत्रीय हालात और सहयोगी देशों के साथ समन्वय को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।

    दूसरी ओर इजरायली रक्षा बलों का आकलन है कि वर्तमान समय में ईरान भी सीधे इजरायल को इस संघर्ष में शामिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। सेना का मानना है कि निकट भविष्य में इजरायल पर किसी बड़े हमले की आशंका सीमित है। इसके बावजूद सीमाओं की निगरानी बढ़ा दी गई है और सभी सैन्य इकाइयों को उच्च स्तर की तैयारियों में रखा गया है ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का तुरंत जवाब दिया जा सके।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। अमेरिका ने हालिया सैन्य कार्रवाई को इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति तथा वैश्विक व्यापार पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है। यही कारण है कि कई देशों की नजर इस क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों पर बनी हुई है।

    अमेरिकी नेतृत्व की ओर से भी हाल के दिनों में ईरान के प्रति कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए गए हैं। अमेरिका ने यह स्पष्ट किया है कि मौजूदा परिस्थितियों में उसकी प्राथमिकता क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह भी संकेत मिले हैं कि कूटनीतिक विकल्पों के साथ-साथ सैन्य तैयारियों को भी बनाए रखा जाएगा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी इसके व्यापक असर पड़ सकते हैं। ऐसे में दुनिया की प्रमुख शक्तियां हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद की जा रही है कि तनाव को नियंत्रित रखने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी समानांतर रूप से जारी रहेंगे।

  • होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव

    होर्मुज में बड़ा खेल? अमेरिका ने ईरानी जहाज छोड़कर पाकिस्तान को क्यों सौंपा, ट्रम्प के ‘रेस्क्यू मिशन’ से बढ़ा समुद्री तनाव


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव के बीच एक बड़ा और चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी सेना ने जब्त किए गए ईरानी जहाज ‘टूस्का’ को अब पाकिस्तान को सौंप दिया है। यह जहाज पहले चीन से लौटते समय अमेरिकी कार्रवाई में पकड़ा गया था।

    यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड United States Central Command (CENTCOM) के प्रवक्ता ने दी है। बताया जा रहा है कि जहाज को उसके क्रू के साथ आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत ईरान वापस भेजने की तैयारी की जा रही है।

    क्यों पकड़ा गया था जहाज?
    अमेरिकी अधिकारियों का दावा था कि यह जहाज ऐसे सामान लेकर जा रहा था जो हथियार निर्माण से जुड़े हो सकते हैं। इसी आधार पर 21 अप्रैल को इसे जब्त किया गया था। हालांकि ईरान ने इस कार्रवाई को “समुद्री डकैती” बताते हुए कड़ी आलोचना की थी।

    होर्मुज स्ट्रेट में नया अभियान
    इसी बीच अमेरिका ने Donald Trump के नेतृत्व में होर्मुज स्ट्रेट में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए एक नया रेस्क्यू अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। यह इलाका वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कई देशों के जहाज वहां फंस गए हैं और अमेरिका उन्हें सुरक्षित रास्ता देगा ताकि वे बिना खतरे के अपना संचालन जारी रख सकें।

    ईरान को चेतावनी
    अमेरिकी प्रशासन ने साफ किया है कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन सोमवार सुबह से शुरू होगा। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि ईरान ने इस अभियान में कोई बाधा डाली तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

    बढ़ता तनाव
    जहाज को पाकिस्तान को सौंपे जाने और रेस्क्यू मिशन की घोषणा के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

  • हाइपरसोनिक वार की तैयारी? ईरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ विकल्प पर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में बढ़ी टेंशन

    हाइपरसोनिक वार की तैयारी? ईरान पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ विकल्प पर अमेरिका, मिडिल ईस्ट में बढ़ी टेंशन


    नई दिल्ली। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (United States Central Command) ने व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक में राष्ट्रपति Donald Trump को ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कमांडर Brad Cooper ने एक “छोटा लेकिन बेहद शक्तिशाली हमला” करने की रणनीति प्रस्तुत की, जिसमें ईरान की बची हुई सैन्य क्षमता, नेतृत्व और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जा सकता है।

    इस प्रस्ताव में अत्याधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी विचार किया जा रहा है, जिनमें ‘डार्क ईगल’ हाइपरसोनिक मिसाइल शामिल है। यह मिसाइल करीब 3,200 किलोमीटर तक सटीक हमला करने में सक्षम मानी जाती है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों को टारगेट कर सकती है।

    इसके साथ ही अमेरिकी वायुसेना ने B-1B Lancer जैसे भारी बमवर्षक विमानों की तैनाती भी बढ़ा दी है, जो बड़ी मात्रा में हथियार और उन्नत मिसाइल सिस्टम ले जाने में सक्षम हैं।

    बढ़ते तनाव के संकेत:
    बीते 24 घंटों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सख्त संदेश देते हुए कहा कि “तूफान आगे बढ़ रहा है, इसे कोई नहीं रोक पाएगा।” दूसरी ओर, ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया आई है।

    Mojtaba Khamenei ने चेतावनी दी कि अगर हमला हुआ तो जवाबी कार्रवाई की जाएगी और हमलावरों को “समंदर में डुबो दिया जाएगा।”

    इसी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो पिछले चार वर्षों में सबसे ऊंचा स्तर है, हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट आई।


    जमीनी हालात और क्षेत्रीय असर:
    दूसरी ओर, लेबनान में भी हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दक्षिणी इलाकों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की खबर है। यह घटनाएं ऐसे समय में सामने आई हैं जब संघर्ष विराम लागू होने के बावजूद Hezbollah और इजरायल के बीच तनाव बना हुआ है।

    ट्रम्प का बदला हुआ सुर:
    हालांकि, इन सभी तैयारियों के बीच ट्रम्प ने यह भी कहा है कि वे दोबारा हमले शुरू करने के पक्ष में नहीं हैं और फिलहाल सीजफायर तोड़ने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि ईरान समझौते के लिए तैयार नजर आ रहा है।एक तरफ सैन्य तैयारियां और दूसरी ओर कूटनीतिक बयान—इन दोनों के बीच मिडिल ईस्ट की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।