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  • अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस

    अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस


    नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर आर्थिक विवाद को लेकर चर्चा में हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने ऋण की बकाया राशि जमा नहीं होने पर उनकी संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक ने शाहजहांपुर में स्थित अभिनेता के प्लॉट के बाहर नोटिस चस्पा कर स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद अभिनेता और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बंडा स्थित शाखा से लिए गए ऋण का भुगतान लंबे समय से नहीं किया गया है। बैंक का दावा है कि अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव और उनकी मां गोदावरी यादव पर कुल 16.61 करोड़ रुपये का बकाया है। लगातार नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बावजूद जब राशि जमा नहीं की गई तो बैंक ने ऋण वसूली की दिशा में अगला कदम उठाते हुए संपत्ति कुर्क करने और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    बैंक की ओर से जिस संपत्ति को नीलामी के लिए चिन्हित किया गया है उसकी अनुमानित कीमत करीब 3.10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा ऋण वसूली की कार्रवाई के तहत शाहजहांपुर कचहरी के पास स्थित अभिनेता के एक अन्य प्लॉट के बाहर भी आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज हो सके।

    बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में मुंबई स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने भी बैंक के पक्ष में कार्रवाई की अनुमति दी है। न्यायाधिकरण के आदेश के बाद बैंक ने नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक नियमों के तहत संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी करेगा और उससे प्राप्त राशि से ऋण की वसूली की जाएगी।

    बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वित्तीय संस्था द्वारा ऋण वसूली की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है। पहले उधारकर्ता को नोटिस दिया जाता है फिर भुगतान का अवसर प्रदान किया जाता है और उसके बाद भी राशि जमा नहीं होने पर संपत्ति कुर्क कर नीलामी की कार्रवाई की जाती है। यह प्रक्रिया सभी उधारकर्ताओं पर समान रूप से लागू होती है चाहे वह आम नागरिक हो या कोई चर्चित हस्ती।

    राजपाल यादव हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं और उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि इस समय उनका नाम फिल्मों से ज्यादा आर्थिक विवाद और बैंक की कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अभिनेता और उनका परिवार समय रहते बकाया राशि का भुगतान कर नीलामी की कार्रवाई को रोक पाएगा या फिर बैंक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए संपत्ति की नीलामी करेगा।

  • सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर

    सरकार का बड़ा फैसला: सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 8% हिस्सेदारी OFS के जरिए बिक्री पर, निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली । सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकिंग सेक्टर में विनिवेश की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में अपनी हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के माध्यम से बिक्री के लिए पेश कर दी है। इस कदम के तहत सरकार कुल मिलाकर बैंक में अपनी 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने की योजना पर काम कर रही है, जिससे निवेशकों के बीच बाजार में हलचल बढ़ गई है।

    विनिवेश विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार पहले चरण में बैंक में अपनी 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के लिए उपलब्ध कराएगी। इसके साथ ही ग्रीन शू विकल्प के तहत अतिरिक्त 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे कुल बिक्री 8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह पूरी प्रक्रिया सरकार की उन नीतियों का हिस्सा है, जिसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में हिस्सेदारी घटाकर बाजार आधारित संरचना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।

    ऑफर फॉर सेल की शुरुआत नॉन-रिटेल निवेशकों के लिए 22 मई से कर दी गई है। इस दौरान संस्थागत निवेशकों को निर्धारित समय के भीतर अपनी बोलियां लगाने का अवसर दिया गया है। सरकार ने इस इश्यू के लिए न्यूनतम मूल्य 31 रुपये प्रति शेयर तय किया है, जो पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 9.4 प्रतिशत कम है। इस मूल्य निर्धारण को निवेशकों को आकर्षित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    रिटेल निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया 25 मई से शुरू होगी। इस दिन आम निवेशक और पात्र कर्मचारी निर्धारित बाजार समय के दौरान अपनी बोलियां लगा सकेंगे। नियमों के अनुसार, कुल ऑफर किए गए शेयरों का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा रिटेल निवेशकों के लिए आरक्षित रहेगा, जिससे छोटे निवेशकों को भी इस विनिवेश प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर मिल सके।

    ऑफर डॉक्यूमेंट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बैंक के कर्मचारियों के लिए विशेष रूप से 75 लाख इक्विटी शेयर आरक्षित किए गए हैं। यह कदम कर्मचारियों की भागीदारी सुनिश्चित करने और प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

    सरकार की योजना के अनुसार, प्रारंभिक चरण में 36.21 करोड़ शेयरों की बिक्री की जाएगी, जो 4 प्रतिशत हिस्सेदारी के बराबर है। यदि ग्रीन शू विकल्प का पूरा उपयोग किया जाता है, तो अतिरिक्त 36.21 करोड़ शेयर और बेचे जाएंगे, जिससे कुल बिक्री दोगुनी होकर लगभग 72.41 करोड़ शेयर तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में कुल इश्यू साइज लगभग 2,244 करोड़ रुपये तक हो सकता है।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के OFS से बैंक के शेयरों में निकट भविष्य में अस्थिरता देखने को मिल सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह प्रक्रिया निवेशकों के लिए अवसर भी पैदा कर सकती है। वहीं, सरकार के इस कदम को विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और बैंकिंग सेक्टर में हिस्सेदारी संरचना को संतुलित करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।