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  • केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह

    केन्द्र ने ईरान संकट से उपजी स्थिति से निपटने के लिए गठित किया मंत्रियों का अनौपचारिक समूह


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया संघर्ष (West Asia conflict) के कारण उत्पन्न मुद्दों पर गौर करने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) के नेतृत्व में मंत्रियों का एक ‘अनौपचारिक समूह’ (IGOM) गठित किया है। सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह, निर्मला सीतारमण और हरदीप सिंह पुरी मंत्रियों के अनौपचारिक समूह के सदस्यों में शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव से उत्पन्न होने वाले मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है।

    अमेरिका-इजरायल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमले के बाद तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी हमले किए। इसके बाद पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज हो गया है। इस संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है, जिसमें तेल और गैस की आपूर्ति बाधित हुई हैं और कीमतें बढ़ी हैं। इसका असर देश भर के नागरिकों के जीवन पर पड़ा है।


    पीएम ने मुख्यमंत्रियों संग की बैठक

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार की शाम चुनावी राज्यों को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनजर तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, डिजिटल माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के तहत समन्वय सुनिश्चित करना था। प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की है।


    देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार

    23 मार्च को लोकसभा में दिए गए बयान में प्रधानमंत्री ने कहा था कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उत्पन्न वैश्विक हालात लंबे समय तक बने रह सकते हैं और देश को एकजुट व तैयार रहने की जरूरत है, जैसे कोविड-19 महामारी के दौरान रहा था। वहीं, 24 मार्च को मोदी ने संघर्ष के संभावित दीर्घकालिक प्रभावों से निपटने के लिए सात अधिकार प्राप्त समूहों के गठन की घोषणा की और राज्यों से संकट को टालने के लिए एकजुट दृष्टिकोण के तहत केंद्र के साथ काम करने का आग्रह किया। इससे पहले बुधवार को सरकार ने पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी और देशवासियों को भरोसा दिया था कि देश में तेल और गैस के पर्याप्त भंडार हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।

  • NCERT किताब विवाद सुलझा…. केन्द्र ने न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर री-ड्राफ्ट करने के लिए गठित की कमेटी

    NCERT किताब विवाद सुलझा…. केन्द्र ने न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर री-ड्राफ्ट करने के लिए गठित की कमेटी


    नई दिल्ली।
    केंद्र सरकार (Central Government) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सूचित किया कि उसने एनसीईआरटी (NCERT) की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका पर आधारित चैप्टर को फिर से तैयार यानी री-ड्राफ्ट (Re-draft) करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस इंदु मल्होत्रा, पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस और पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल शामिल होंगे। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वीएम पंचोली की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से यह जानकारी दी।

    बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया, “हमने चैप्टर का मसौदा तैयार करने के लिए समिति बनाई है। वेणुगोपाल और जस्टिस इंदु मल्होत्रा समिति का हिस्सा होंगे। हमने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी से जस्टिस अनिरुद्ध बोस से भी अनुरोध किया है और वे भी इसमें शामिल होंगे। इस आश्वासन और समिति के गठन की जानकारी के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने विवादित चैप्टर पर दर्ज किए गए अपने स्वतः संज्ञान मामले का निपटारा कर दिया।


    क्या है पूरा विवाद?

    यह विवाद कक्षा 8 की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ (वॉल्यूम 2) से जुड़ा है। इसमें ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ नामक चैप्टर के तहत कथित तौर पर ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ पर एक हिस्सा शामिल किया गया था। इस मुद्दे को सबसे पहले 25 फरवरी को वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने उठाया था, जिस पर कोर्ट ने बताया था कि उसने पहले ही इसका स्वतः संज्ञान ले लिया है। विवाद बढ़ने पर NCERT ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि यह एक अनजाने में हुई गलती थी। उन्होंने विवादित हिस्से को किताब से वापस लेने और उचित परामर्श के बाद इसे फिर से लिखने की बात कही थी।


    सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाइयां और नाराजगी

    किताब पर बैन: 26 फरवरी को हुई विस्तारपूर्ण सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस किताब के उत्पादन और वितरण पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। अवमानना का नोटिस: अदालत ने स्कूल शिक्षा विभाग और NCERT के निदेशक डॉ. दिनेश प्रसाद सकलानी को अवमानना अधिनियम के तहत कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि विवादित चैप्टर को लिखने या मंजूरी देने वालों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई क्यों न की जाए।

    NCERT डायरेक्टर के जवाब पर आपत्ति: पिछली सुनवाई में कोर्ट ने NCERT निदेशक के उस जवाब पर कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसमें कहा गया था कि चैप्टर को फिर से लिख लिया गया है। कोर्ट ने इस जवाब को परेशान करने वाला बताया था क्योंकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि किन विशेषज्ञों ने इसे दोबारा लिखा है या किसने इसे मंजूरी दी है।

    इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर एक समिति बनाने का निर्देश दिया था, जिसमें एक सेवानिवृत्त जज, एक प्रसिद्ध शिक्षाविद और एक प्रख्यात वकील शामिल हों। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि कानूनी अध्ययन की सामग्री तैयार करने के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी को भी भरोसे में लिया जाना चाहिए।


    पुराने लेखकों से दूर रहने का निर्देश

    अदालत ने यह भी कड़ा निर्देश दिया है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रोफेसर मिशेल डैनिनो, सुपर्णा दिवाकर और आलोक प्रसन्ना कुमार के साथ भविष्य में कोई जुड़ाव न रखें। यह निर्देश तब आया जब NCERT निदेशक ने कोर्ट को बताया था कि पिछला विवादित चैप्टर मुख्य रूप से प्रोफेसर डैनिनो द्वारा तैयार किया गया था और दिवाकर व कुमार ने इस कार्य में उनकी सहायता की थी।


    सोशल मीडिया पर भी सुप्रीम कोर्ट हुआ सख्त

    इस मामले में अदालत ने सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करने वाले कुछ तत्वों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। पीठ ने कड़े शब्दों में कहा: तथाकथित सोशल मीडिया पर कुछ तत्वों ने गैर-जिम्मेदाराना हरकतें की हैं। हम समस्याओं का डटकर सामना करने में विश्वास रखते हैं। हम भारत सरकार को निर्देश देते हैं कि वह ऐसे प्लेटफार्मों और उन लोगों की पहचान करे जो इसमें लिप्त हैं, ताकि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। कानून अपना काम करेगा। भले ही वे इस देश में कहीं भी छिपे हों, हम उन्हें नहीं छोड़ेंगे।