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  • क्या सर्वाइकल कैंसर दुनिया से खत्म हो जाएगा? ऑस्ट्रेलिया की सफलता से भारत के लिए बड़ी सीख और नई उम्मीद

    क्या सर्वाइकल कैंसर दुनिया से खत्म हो जाएगा? ऑस्ट्रेलिया की सफलता से भारत के लिए बड़ी सीख और नई उम्मीद

    नई दिल्ली। सर्वाइकल कैंसर यानी गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर दुनिया की महिलाओं के लिए सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बना हुआ है, लेकिन अब इसे लेकर एक बड़ी उम्मीद भी सामने आई है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने इस बीमारी को खत्म करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है, जिससे दुनिया भर में इसके उन्मूलन की चर्चा तेज हो गई है।

    भारत की रहने वाली 40 वर्षीय सुनीता की कहानी इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाती है। लगातार थकान और असामान्य रक्तस्राव को उन्होंने सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन बाद में पता चला कि वह एडवांस स्टेज सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं। देर से इलाज मिलने के कारण उनकी जान नहीं बच सकी। भारत में ऐसी लाखों महिलाएं हर साल इस बीमारी का शिकार बनती हैं, जिसका प्रमुख कारण जागरूकता की कमी और समय पर जांच न होना है।

    ऑस्ट्रेलिया ने कैसे बदली तस्वीर

    ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो सर्वाइकल कैंसर को लगभग खत्म कर सकता है। यह बीमारी मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) के कारण होती है। ऑस्ट्रेलिया ने 2006 में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय में विकसित HPV वैक्सीन ‘गार्डासिल’ को बड़े पैमाने पर लागू किया।

    2007 में वहां राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम शुरू हुआ, जिसके तहत 12-13 वर्ष की उम्र के बच्चों को स्कूलों में मुफ्त वैक्सीन दी जाने लगी। 2013 से यह कार्यक्रम लड़कों के लिए भी लागू किया गया, ताकि वायरस के फैलाव को रोका जा सके। इसके साथ ही 2017 में ऑस्ट्रेलिया ने पारंपरिक पैप स्मीयर टेस्ट की जगह अधिक प्रभावी HPV-आधारित स्क्रीनिंग शुरू की, जो हर पांच साल में एक बार की जाती है। महिलाओं को खुद सैंपल लेने का विकल्प भी दिया गया, जिससे जांच की पहुंच और आसान हो गई।

    ‘कैंसर खत्म’ का मतलब क्या है?
    चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बीमारी को खत्म करने का मतलब पूरी तरह शून्य केस नहीं, बल्कि प्रति 1 लाख लोगों पर 4 से कम मामले होना है। ऑस्ट्रेलिया फिलहाल इस लक्ष्य के बेहद करीब है और 2035 से पहले इसे हासिल कर सकता है। 2021 में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि 25 वर्ष से कम उम्र की किसी भी महिला में सर्वाइकल कैंसर का नया मामला वहां दर्ज नहीं हुआ।

    वैश्विक स्तर पर प्रयास तेज
    स्वीडन और रवांडा जैसे देश 2027 तक इस बीमारी को खत्म करने का लक्ष्य रख रहे हैं, जबकि ब्रिटेन 2040 तक इसे समाप्त करने की योजना पर काम कर रहा है। हालांकि विकासशील देशों के लिए यह चुनौती अभी भी बड़ी है, क्योंकि वैक्सीन और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है।

    भारत के लिए बड़ी उम्मीद
    भारत में सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। लेकिन हाल के वर्षों में इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। देश ने अपनी स्वदेशी HPV वैक्सीन ‘सर्वावैक’ विकसित की है, जिससे टीकाकरण अधिक किफायती और सुलभ हो गया है। सरकार 9 से 14 वर्ष की किशोरियों को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर टीकाकरण और नियमित जांच से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है।

  • मध्यप्रदेश ने HPV टीकाकरण में देश में पहला स्थान हासिल किया, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य टीम को दी बधाई

    मध्यप्रदेश ने HPV टीकाकरण में देश में पहला स्थान हासिल किया, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य टीम को दी बधाई


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की टीम एएनएम आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को एचपीवी HPV टीकाकरण अभियान में शानदार प्रदर्शन करने पर बधाई दी है। अभियान के तहत मात्र 15 दिनों में प्रदेश की 1 लाख से अधिक बेटियों को वैक्सीन दी गई जिससे मध्यप्रदेश ने देश में पहला स्थान हासिल किया।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किया गया था ताकि बेटियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित किया जा सके। डॉ. यादव ने कहा कि अभियान के सफल क्रियान्वयन में स्वास्थ्य विभाग की टीम और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।

    इस पहल से न केवल बेटियों को गंभीर बीमारी से बचाने में मदद मिलेगी बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता और टीकाकरण के प्रति समुदाय में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।

  • भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे

    भोपाल के काटजू अस्पताल में 20 मार्च से शुरू होगा स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर, नि:संतानता और स्त्री रोग की सभी सुविधाएं एक ही छत के नीचे


    भोपाल । भोपाल के कैलाश नाथ काटजू अस्पताल में 20 मार्च से महिलाओं के लिए हाईटेक स्वास्थ्य सुविधा शुरू होने जा रही है। इस सेंटर का नाम है स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर फॉर प्रिवेंटिव गायनाकोलॉजी एंड इन्फर्टिलिटी । यह प्रदेश का पहला सरकारी इन्फर्टिलिटी सेंटर होगा जहां महिलाओं को नि:संतानता इन्फर्टिलिटी पीसीओएस हार्मोनल असंतुलन मेनोपॉज फाइब्रॉइड अनियमित मासिक धर्म और सर्वाइकल कैंसर जैसी स्त्री रोग संबंधी समस्याओं का इलाज मिलेगा।

    करीब दो करोड़ रुपए की लागत से तैयार इस सेंटर में जांच से लेकर उपचार तक सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। सेंटर की स्टेट नोडल अधिकारी और स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रचना दुबे के अनुसार यहां आईयूआई जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए इन्फर्टिलिटी का इलाज भी होगा। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए वीआईए तकनीक का उपयोग किया जाएगा जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके और महिलाओं की जान बचाई जा सके।

    सरकारी सेंटर में नि:संतानता का इलाज 40, 000 से 80, 000 रुपए तक में हो सकेगा जबकि प्राइवेट अस्पतालों में यही इलाज 3 लाख रुपए तक का खर्च मांगता है। भारत में महिलाओं में नि:संतानता की दर लगभग 10-14% है जो खराब जीवनशैली और देर से शादी करने के कारण बढ़ रही है।

    महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर देश में दूसरा सबसे बड़ा कैंसर है भोपाल इस मामले में 15वें स्थान पर है। ब्रेस्ट कैंसर सबसे अधिक आम है और भोपाल देश में 8वें नंबर पर है। गर्भाशय में गांठ या फाइब्रॉइड महिलाओं के जीवनकाल में 30-50% में विकसित होते हैं और 40 वर्ष के बाद अधिक आम हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज पीसीओडी से 10-27% महिलाएं प्रभावित हैं जिससे अनियमित पीरियड्स और बांझपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

    काटजू अस्पताल में शुरू हो रहे इस स्टेट ऑफ द आर्ट सेंटर के जरिए प्रदेश की महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षित आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवा मिलेगी। एम्स में भी जल्द ही आईवीएफ की सुविधा शुरू होने वाली है लेकिन सरकारी सेंटर की तुलना में यहां खर्च अधिक है।