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  • भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके साझेदारी का महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों, उद्योगों और पेशेवरों के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी।

    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे।

    सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू होने के बाद भारतीय उद्योग जगत ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का मानना है कि यह समझौता भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा तथा निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। संगठन ने इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

    फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत-यूके सीईटीए से वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग और प्रतिभा के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर देगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाएगा।

    फिक्की का कहना है कि यह समझौता भारत की मुक्त व्यापार समझौता नीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संगठन के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा उद्योगों को नई तकनीकों, निवेश और वैश्विक सहयोग का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नवाचार आधारित विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है।

    फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समझौते इस यात्रा को और मजबूत करेंगे।

    उद्योग संगठन का मानना है कि सीईटीए आर्थिक सहयोग के प्रति दीर्घकालिक और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। इससे व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने और विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे घरेलू उद्योगों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई गई है।

    भारत-यूके व्यापार समझौता बुधवार से प्रभावी हो गया है। इसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच उपलब्ध होगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार के लगभग पूरे मूल्य को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं सहित कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन, सेवाओं और रोजगार की मांग बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं

    भारत-यूके व्यापक व्यापार समझौते के नियम जारी, 15 जुलाई से शुरू होगा नया कारोबारी दौर, कंपनियों और निर्यातकों को मिलेंगी नई सुविधाएं


    नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच हुए व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इससे जुड़े नियमों को अधिसूचित कर दिया है। यह नया ढांचा 15 जुलाई 2026 से प्रभावी होगा और इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों के लिए नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक सहयोग को नई गति मिलेगी।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, समझौते के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि किसी उत्पाद को भारत या यूनाइटेड किंगडम में निर्मित तभी माना जाएगा, जब वह पूरी तरह संबंधित देश में तैयार किया गया हो, स्थानीय सामग्री से निर्मित हो या फिर निर्धारित उत्पाद-विशिष्ट मूल नियमों का पालन करते हुए तैयार किया गया हो। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारिक रियायतों का लाभ केवल पात्र उत्पादों को ही प्राप्त हो।

    केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) द्वारा जारी नियमों में उन शर्तों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है, जिनके आधार पर किसी उत्पाद को टैरिफ रियायतों के लिए योग्य माना जाएगा। साथ ही आयातकों और निर्यातकों के लिए आवश्यक अनुपालन प्रक्रियाएं भी निर्धारित की गई हैं। इन नियमों के लागू होने से सीमा शुल्क प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

    नए प्रावधानों के तहत दोनों देशों के बीच निर्मित उत्पादों के लिए ‘क्यूमुलेशन’ यानी मिला-जुला उत्पादन व्यवस्था को भी मान्यता दी गई है। इसका अर्थ यह है कि यदि किसी उत्पाद के निर्माण में दोनों साझेदार देशों की सामग्री या उत्पादन प्रक्रिया का उपयोग किया गया है, तो निर्धारित शर्तों के तहत उसे मूल उत्पाद का दर्जा दिया जा सकेगा। इससे दोनों देशों की कंपनियों के बीच औद्योगिक सहयोग और संयुक्त विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल साधारण रीपैकेजिंग, रीलेबलिंग, धुलाई, छंटाई, पॉलिशिंग, साधारण असेंबली अथवा अन्य सामान्य प्रक्रियाओं के आधार पर किसी उत्पाद को मूल उत्पाद का दर्जा नहीं मिलेगा। सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामलों की जांच करने तथा नियमों का पालन नहीं करने वाले उत्पादों को व्यापारिक रियायतों से वंचित रखने का अधिकार भी दिया गया है। इससे समझौते के दुरुपयोग की संभावना को कम करने का प्रयास किया गया है।

    इन नियमों में उन आयातकों को भी राहत प्रदान की गई है जो आयात के समय किसी कारणवश टैरिफ लाभ का दावा नहीं कर पाए थे। निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऐसे मामलों में बाद में भी पात्रता के आधार पर रियायत प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध रहेगा। इससे व्यापारिक समुदाय को अधिक लचीलापन और सुविधा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत-यूके सीईटीए केवल व्यापारिक शुल्कों में राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग, नवाचार, विनिर्माण और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में भी नए अवसर पैदा करेगा। दोनों देशों के उद्योगों के बीच साझेदारी बढ़ने से निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारतीय कंपनियों को विकसित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी। 15 जुलाई से नियम लागू होने के साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के आर्थिक संबंधों में एक नए चरण की शुरुआत होने की उम्मीद है।

  • India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप

    India UK Trade Deal से पहले बड़ा कदम पीयूष गोयल ने जारी किया CETA बिजनेस मैनुअल कारोबारियों को मिलेगा व्यापार बढ़ाने का पूरा रोडमैप


    नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लंदन में भारत यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते यानी सीईटीए के लिए विशेष बिजनेस मैनुअल लॉन्च किया है। यह मैनुअल ऐसे समय जारी किया गया है जब दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय और ब्रिटिश कारोबारियों को समझौते के प्रावधानों को सरल तरीके से समझाना और उनके माध्यम से अधिकतम व्यावसायिक लाभ प्राप्त करने में सहायता देना है।

    सीईटीए बिजनेस यूटिलाइजेशन मैनुअल को एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में तैयार किया गया है। इसमें व्यापार से जुड़े नियमों प्रक्रियाओं और उपलब्ध अवसरों को आसान भाषा में समझाया गया है ताकि छोटे मध्यम और बड़े सभी प्रकार के उद्योग इस समझौते का प्रभावी उपयोग कर सकें। इस पहल से दोनों देशों के बीच व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    इस मैनुअल का विमोचन एफआईसीसीआई द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया जिसमें यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल और एचएसबीसी इंडिया ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों संस्थानों ने संयुक्त रूप से इस दस्तावेज को तैयार किया है। इसे एक लिविंग डॉक्यूमेंट के रूप में विकसित किया गया है जिसका अर्थ है कि समय समय पर बदलती व्यापारिक जरूरतों और नए नियमों के अनुसार इसमें संशोधन और अपडेट किए जाएंगे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि सीईटीए लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच बाजार तक पहुंच पहले से अधिक आसान होगी। व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और निवेश के नए अवसर सामने आएंगे। इससे निर्यातकों आयातकों और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला माना जा रहा है।

    यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल के ग्रुप मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ किशोर जयरामन ने कहा कि यह मैनुअल केवल जानकारी देने वाला दस्तावेज नहीं बल्कि कारोबारियों के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप है। इसके माध्यम से कंपनियां व्यापार समझौते के नियमों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी और उनका लाभ उठाकर अपने कारोबार का विस्तार कर सकेंगी।

    एचएसबीसी इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हितेंद्र दवे ने भी इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के उद्योगों को अधिक भरोसा बेहतर बाजार पहुंच और मजबूत व्यावसायिक साझेदारी का अवसर देगा। उनका मानना है कि कंपनियों को इस मैनुअल का उपयोग करते हुए सीमा पार व्यापार और निवेश को नई दिशा देनी चाहिए।

    भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार लगातार मजबूत हो रहा है। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 की चौथी तिमाही तक दोनों देशों के बीच कुल व्यापार लगभग अड़तालीस अरब पाउंड के करीब पहुंच चुका है जो पिछले वर्षों की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी को दर्शाता है। ऐसे में सीईटीए और इसके लिए तैयार किया गया यह बिजनेस मैनुअल भविष्य में व्यापार निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड

    भारत-ब्रिटेन रिश्तों को नई मजबूती देने पर पीयूष गोयल सम्मानित, UK-India Awards 2026 में मिला विशेष अवॉर्ड


    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को भारत और ब्रिटेन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए लंदन में आयोजित यूके-इंडिया अवॉर्ड्स 2026 में ‘भारत-ब्रिटेन संबंधों को बेहतर बनाने में उत्कृष्ट नेतृत्व’ के विशेष सम्मान से नवाजा गया।

    सम्मान प्राप्त करने के बाद 300 से अधिक नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच रणनीतिक, आर्थिक और तकनीकी साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों की साझेदारी का सबसे बेहतरीन दौर अभी आना बाकी है।

    उन्होंने बताया कि भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। उनके अनुसार यह समझौता व्यापार, निवेश, नवाचार और आर्थिक सहयोग को नई गति देगा तथा दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाएगा।

    पीयूष गोयल ने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों का है जिन्होंने सरकार, उद्योग, शिक्षा, संस्कृति और भारतीय प्रवासी समुदाय के माध्यम से भारत और ब्रिटेन के संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया है।

    उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आर्थिक प्रगति कर रहा है। यह विकास यात्रा व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, नवाचार और उभरते क्षेत्रों में भारत और ब्रिटेन के बीच सहयोग के अभूतपूर्व अवसर पैदा कर रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने समारोह में सम्मानित अन्य विजेताओं को भी बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके प्रयासों से भारत-ब्रिटेन रणनीतिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बढ़ता व्यापार, मजबूत होते कारोबारी संबंध और लोगों के बीच गहरे होते संपर्क भविष्य में सहयोग के नए आयाम स्थापित करेंगे।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि “भारत-ब्रिटेन साझेदारी की सबसे बेहतरीन पारी अभी बाकी है।” यह संदेश दोनों देशों के बीच भविष्य में और व्यापक आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित करता है।

  • भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, CETA लागू होने से व्यापार, निवेश और इनोवेशन के खुलेंगे बड़े अवसर: पीयूष गोयल

    नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई मजबूती देने की दिशा में दोनों देश लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों देश ऐसा सहयोगी वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो व्यापार, निवेश, नवाचार और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करे। उनका कहना है कि आगामी समय में लागू होने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाएगा।

    लंदन दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने यूके के बिजनेस एवं ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के साथ विस्तृत चर्चा की। बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और गहरा बनाने, निवेश बढ़ाने तथा नई व्यापारिक संभावनाओं पर विचार किया गया। गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, पारदर्शिता और भविष्य की साझा सोच लगातार मजबूत हो रही है, जो इस साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत है।

    उन्होंने कहा कि 15 जुलाई 2026 से भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) लागू होने के बाद दोनों देशों के उद्योगों, निवेशकों और कारोबारियों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, निवेश को प्रोत्साहन देना और आर्थिक सहयोग को व्यापक आधार प्रदान करना है।

    अपने दौरे के दौरान पीयूष गोयल ने भारत और यूनाइटेड किंगडम के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों को भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों में रोजगार सृजन, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विकास को भी नई दिशा देगा। उन्होंने कारोबारी समुदाय से आग्रह किया कि वे इस समझौते के माध्यम से उपलब्ध होने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं।

    गोयल ने कहा कि भारत और यूके के बीच संबंध अब पारंपरिक व्यापारिक दायरे से कहीं आगे निकल चुके हैं। दोनों देश तकनीक, नवाचार, निवेश, रक्षा, उन्नत विनिर्माण, आवश्यक खनिजों और रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भी दोनों देशों की भूमिका मजबूत होगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जबकि यूनाइटेड किंगडम वैश्विक वित्त, अनुसंधान और नवाचार का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में दोनों देशों की साझेदारी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है। मजबूत आर्थिक सहयोग से उद्योगों के लिए बाजार का विस्तार होगा और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ेगा।

    पीयूष गोयल ने विश्वास जताया कि व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता भारत और यूके के संबंधों को नई ऊंचाई तक पहुंचाएगा। उनका कहना है कि दोनों देश साझा हितों और दीर्घकालिक विकास के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी व्यापार, निवेश, तकनीक, नवाचार और रणनीतिक सहयोग के नए आयाम स्थापित करेगी तथा दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।