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  • CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत

    CG: कबीरधाम जिले में पुल से नीचे गिरी बेकाबू कार…. 4 युवकों की मौत


    कबीरधाम।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के कबीरधाम जिले (Kabirdham district) में एक कार अनियंत्रित होकर पुल से नीचे गिर (Car Skidded off Bridge) गई। इस हादसे में कार पर सवार चार युवकों की मौत हो गई। दुर्घटना में दो अन्य घायल हो गए। घटना की जानकारी देते हुए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिले के पंडरिया इलाके में पांडातराई के करीब गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल से तेज गति से जा रही कार अनियंत्रित होकर नीचे गई। इस घटना में अरमान अली (20), मोहम्मद सैफ (19), अनस अली (21) और कौनैन (19) की मौत हो गई तथा दो अन्य जुनेद रजा (21) और आरजू खान (19) घायल हो गए हैं।

    पुलिस को मिली सूचना के अनुसार, रायपुर के बिरगांव निवासी युवक एक कार में सवार होकर विवाह समारोह में शामिल होने पंडरिया के लिए रवाना हुए थे। रविवार देर रात जब वह गड़ाई गांव स्थित एक छोटे पुल के करीब पहुंचे तब उसकी कार अनियंत्रित होकर पुल से लगभग 50 फुट नीचे गिर गई। इस घटना में चार युवकों की मौत हो गई तथा दो अन्य घायल हो गए।

    अधिकारियों ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा शवों और घायलों को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घायल युवकों को बेहतर इलाज के लिए रायपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस मामला दर्ज कर जांच कर रही है।

  • CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया

    CG: दुर्ग जिले में अफ्रीकन स्वाइन फीवर' का कहर…., 83 सुअरों को मारकर दफनाया


    दुर्ग।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के दुर्ग जिले (Durg district) में ‘अफ्रीकन स्वाइन फीवर’ (‘African Swine Fever’-ASF) संक्रमण पाए जाने के बाद 83 सुअरों को मार दिया गया है तथा संक्रमण से बचाव के उपाय किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने मंगलवार को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि जिले के धमधा विकासखंड में मुड़पार गांव के सुअर फार्म में ASF संक्रमण पाए जाने के बाद पशुपालन विभाग ने अन्य सुअर पालकों को सतर्क कर दिया है।

    उन्होंने बताया कि मुड़पार गांव में एक निजी सुअर पालक के यहां पिछले कुछ दिनों से सुअरों की मृत्यु हो रही थी और जब सुअर पालक ने इसकी सूचना जिला पशुपालन विभाग को दी, तब दो अप्रैल को पशुपालन विभाग सुअर फार्म पहुंचा और नमूना जांच के लिए भोपाल भेजा गया। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को रिपोर्ट में सुअरों में ASF की पुष्टि होने के बाद पशुपालन विभाग द्वारा 83 सुअरों को इंजेक्शन देकर मार दिया गया तथा संक्रमण रोकने के लिए सुअरों के शवों को नियमों के अनुसार दफना दिया गया है।

    दुर्ग में पशु चिकित्सा सेवाओं के उप संचालक डॉक्टर वसीम शम्स ने बताया कि ASF एक ऐसी बीमारी है जिसका ना तो कोई इलाज है और ना ही अभी तक इसकी कोई वैक्सिन बनी है, इसलिए भारत सरकार के दिशानिर्देश के तहत वैज्ञानिक पद्धति से सुअरों को मारकर दफनाने का प्रावधान है।

    डॉक्टर शम्स ने बताया कि यह बीमारी केवल सुअरों से सुअरों तक ही फैलती है, अन्य किसी जानवर या इंसानो में इसका असर नहीं होता है। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया गया है।

  • CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास

    CG: HC का बड़ा फैसला…. जग्गी हत्याकांड में पूर्व CM अजीत जोगी के बेटे को आजीवन कारावास


    बिलासपुर।
    छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने साल 2003 के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी (Former Chief Minister Ajit Jogi) के बेटे अमित जोगी (Amit Jogi) दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा (Life Sentence) सुनाई है। हाईकोर्ट ने बीते गुरुवार को अमित जोगी को इस मामले में दोषी करार दिया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा अमित जोगी को सजा सुनाया जाना 23 सालों से चल रही कानूनी लड़ाई में एक बड़ा मोड़ है।


    सजा के साथ जुर्माना भी लगाया

    चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। बेंच ने अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।


    निचली अदालत ने जोगी को कर दिया था बरी

    हाईकोर्ट का आज का फैसला 31 मई 2007 को रायपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय को पूरी तरह पलटता है, जिसमें अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी समेत अन्य 28 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था।


    मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ना न्यायसंगत नहीं : हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को सजा देना और कथित मुख्य साजिशकर्ता को छोड़ देना न्यायसंगत नहीं है। हाईकोर्ट ने इसे विधिक दृष्टि से त्रुटिपूर्ण बताया।


    SC के आदेश पर दोबारा खुला था मामला

    गौरतलब है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा खोला गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सतीश जग्गी की ओर से वकील बीपी शर्मा ने गंभीर तर्क प्रस्तुत किए। उन्होंने अदालत को बताया कि यह हत्याकांड उस समय की राज्य सरकार के संरक्षण में रचा गया षड्यंत्र था। दलील दी गई कि जब सीबीआई ने जांच शुरू की, तब प्रभावशाली हस्तक्षेप के चलते महत्वपूर्ण सबूतों को मिटा दिया गया। ऐसे मामलों में केवल भौतिक साक्ष्यों की कमी के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती, बल्कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियों को समझना आवश्यक है।


    क्या था मामला

    उल्लेखनीय है कि 4 जून 2003 को राष्ट्रवादी कांग्रेस (राकांपा) नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस प्रकरण में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। शेष 28 आरोपियों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था। बाद में रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। शुरुआती दौर में अमित जोगी को राहत मिली, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया था।


    विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे जग्गी

    कारोबारी और राजनेता रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। कांग्रेस से अलग होकर जब शुक्ल ने राकांपा का रुख किया, तब जग्गी भी उनके साथ जुड़े और उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया।


    इन लोगों को ठहराया था दोषी

    जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी पाया गया था।

  • CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण

    CG: वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापा राव ने 17 साथियों के साथ डाले हथियार, किया आत्मसमर्पण


    छत्तीसगढ़।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में नक्सलियों (Naxalites) की दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति के सदस्य व वरिष्ठ नक्सली कमांडर पापाराव (Senior Naxalite Commander Paparao) ने अपने 17 अन्य साथी माओवादियों के साथ मंगलवार को बीजापुर जिले में आत्मसमर्पण कर दिया। हथियार डालने वाले नक्सलियों में 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। यह सरेंडर सुरक्षाबलों व राज्य सरकार के लिए एक अहम रणनीतिक सफलता है और 31 मार्च तक देश से माओवादी उग्रवाद के खात्मे की डेडलाइन के संबंध में सबसे अहम पड़ाव भी है।

    एक रिपोर्ट के अनुसार पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ कुटरू थाने में आत्मसमर्पण किया। इसके बाद उन्हें वहां से बस के जरिए जगदलपुर ले जाया गया। अब इस बारे में राज्य सरकार बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए जानकारी दे सकती है।


    पापा राव पर घोषित था 25 लाख रुपए का इनाम

    दो दशकों से ज्यादा समय तक घने इंद्रावती-अबूझमाड़ जंगल इलाके में सक्रिय रहा पापा राव भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से जुड़े आखिरी बड़े कमांडरों में से एक है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार पापा राव लगभग 25 वर्षों से जंगलों में सक्रिय था और इस दौरान कई बार सुरक्षा बलों के साथ उसकी मुठभेड़ भी हुई, लेकिन हर बार वह बच निकलता था। राज्य सरकार ने उस पर 25 लाख रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था।

    पापा राव ने दक्षिण बस्तर में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमलों की साज़िश रची थी, जिनमें 2010 का ताड़मेटला हमला (तब के दंतेवाड़ा जिले में था, लेकिन अब सुकमा में है) भी शामिल है। इस हमले में 76 जवान मारे गए थे।


    सबसे अहम कमेटी का मुख्य सदस्य था पापा राव

    बस्तर संभाग और आसपास के राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों को अंजाम देने वाले दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) को इस प्रतिबंधित संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही है।

    अधिकारियों के मुताबिक पापा राव का समर्पण छत्तीसगढ़ में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है। उन्होंने बताया कि यह समर्पण देश के सबसे लंबे समय से चल रहे उग्रवादों में से एक के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।

    बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी ने कहा, ‘नक्सली संगठन में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य तथा साउथ सब जोनल ब्यूरो के इंचार्ज पापा राव का 17 अन्य साथियों के साथ पुनर्वास, क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को समाप्त करने के हमारे सतत प्रयासों में एक निर्णायक सफलता का प्रतीक है।’


    नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियार भी सौंपे

    सुंदरराज ने बताया कि पापा राव, डिविजनल कमेटी सदस्य प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित कुल 18 माओवादियों के इस समूह ने हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की इच्छा के साथ आत्मसमर्पण किया है। इनमें सात महिला नक्सली भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि नक्सलियों ने आत्मसपर्मण के दौरान एके-47 राइफलें तथा अन्य हथियार भी सौंपे।

    वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार नक्सल संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वविहीन हो गया है। सुंदरराज ने कहा कि सरकार की परिकल्पना और क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से रही आकांक्षा के अनुरूप, बस्तर अब एक नई ऊर्जा, नए उत्साह और सकारात्मक पहचान के साथ और अधिक सशक्त होकर उभरने की दिशा में अग्रसर है।


    दो दशकों में हुए कई हमलों में शामिल रहा था DKSZC

    उन्होंने बताया कि DKSZC बस्तर संभाग और पड़ोसी राज्यों के कुछ हिस्सों में माओवादी गतिविधियों के लिए जिम्मेदार है और इसे प्रतिबंधित माओवादी संगठन की सबसे मजबूत इकाई माना जाता था। पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों पर कई जानलेवा हमले करने में इसकी अहम भूमिका रही थी।

    सुंदरराज ने कहा, ‘हमें आशा है कि शेष बचे माओवादी, जो वर्तमान में छोटे-छोटे समूहों में भटक रहे हैं, भी आने वाले दिनों में हिंसा छोड़ मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लेंगे।’ उन्होंने बताया कि साउथ सब जोनल ब्यूरो इलाके से जुड़े समर्पण करने वाले सभी 18 माओवादियों को औपचारिक रूप से मुख्यधारा में शामिल करने की प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी।


    पापा राव को मंगू के नाम से भी जाना जाता है

    इससे पहले दिन में, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, जिनके पास गृह मंत्रालय का प्रभार भी है, ने कहा कि राव, जिन्हें मंगू के नाम से भी जाना जाता है, बस्तर इलाके में अपने दल के एक दर्जन से अधिक सदस्यों के साथ समर्पण करेंगे। शर्मा ने कहा, ‘इस समर्पण के साथ ही, राज्य में उस वरिष्ठ स्तर का कोई भी नक्सली नेता सक्रिय नहीं रहेगा। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ 31 मार्च, 2026 की तय समयसीमा तक सशस्त्र नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।’


    ‘कभी पशुपति से तिरुपति तक फैला हुआ था रेड कॉरिडोर’

    अधिकारियों ने बताया कि यह समर्पण भाकपा (माओवादी) से जुड़े माओवादी नेटवर्क के बड़े पैमाने पर कमजोर पड़ने का संकेत है, जिसने सालों तक मध्य भारत के बड़े हिस्सों में अपनी समानांतर सत्ता कायम रखी थी। उन्होंने कहा कि ‘रेड कॉरिडोर’ कभी बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों से होते हुए ‘पशुपति से तिरुपति’ तक फैला हुआ था और नक्सलियों के प्रभाव वाले इस गलियारे को देश के लिए ‘सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा चुनौती’ माना जाता था। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में शासन-प्रशासन कमज़ोर पड़ गया था, और माओवादियों ने हाशिए पर पड़े समुदायों के बीच जोर-जबरदस्ती और सहमति, दोनों के जरिए अपना प्रभाव जमा रखा था।

  • CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल

    CG: खल्लारी माता मंदिर में रोपवे केबल टूटने से नीचे गिरी ट्रॉली, महिला की मौत; 7 घायल


    महासमुंद।
    छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के महासमुंद जिला (Mahasamund district) से रविवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां खल्लारी माता मंदिर (Khallari Mata Temple) में रोपवे ट्रॉली हादसे (Ropeway Trolley Accident) का शिकार हो गई, जिसमें एक महिला की जान चली गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। हादसे के बाद इलाके में अफरातफरी मच गई और मौके पर चीख-पुकार गूंज उठी। हादसे के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    केबल टूटने से गिरी थी ट्रॉली
    जानकारी के अनुसार, यह घटना सुबह करीब 10 बजे की है, जब मंदिर से श्रद्धालुओं को लेकर एक रोपवे ट्रॉली नीचे की ओर आ रही थी। इसी दौरान अचानक ट्रॉली का केबल टूट गया, जिससे वह अनियंत्रित होकर नीचे गिर गई। ट्रॉली में कुल आठ लोग सवार थे, जो मंदिर में दर्शन कर वापस लौट रहे थे। इसी दौरान हादसा हो गया और हादसे में एक श्रद्धालु की जान चली गई।


    एक महिला की मौत

    इस हादसे में आयुषी सतकर (28), निवासी रायपुर की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि आयुषी अपने परिवार या परिचितों के साथ नवरात्रि के अवसर पर माता के दर्शन करने पहुंची थीं। वहीं, हादसे में घायल हुए सात अन्य लोगों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।


    राहत-बचाव कार्य जारी

    प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। ट्रॉली के गिरते ही आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया गया।

    इस मामले पर बात करते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शुरुआती तौर पर केबल टूटने को दुर्घटना की वजह माना जा रहा है, लेकिन तकनीकी जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।