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  • अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच ईरान ने भारत से व्यापार बढ़ाने की अपील की, चाबहार बंदरगाह पर भी दिया अहम संकेत

    नई दिल्ली ।अमेरिकी प्रतिबंधों और भुगतान संबंधी परेशानियों के बीच ईरान ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार जारी रखने और उसे विस्तार देने की अपील की है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भारतीय कारोबारियों से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रतिबंधों के कारण व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, लेकिन ऊर्जा, कृषि और जरूरी वस्तुओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं अब भी मौजूद हैं।

    ईरान के पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल कारोबार से जुड़े भारतीय कारोबारियों पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी समस्याओं ने दोनों देशों के व्यापार को प्रभावित किया है। इन चुनौतियों के बावजूद ईरान भारत के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने के लिए व्यावहारिक विकल्प तलाशने पर जोर दे रहा है। फतहली के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संपर्क जारी है और व्यापार को सुचारु बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की जा रही है।

    बासमती चावल की आपूर्ति पर भी ईरान ने भरोसा दिलाया है। ईरान भारत से बासमती चावल और चाय खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। ऐसे में प्रतिबंधों और भुगतान में आ रही दिक्कतों के बीच इन उत्पादों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फतहली ने भारतीय बासमती चावल समेत जरूरी वस्तुओं की किल्लत होने की आशंका को खारिज किया।

    ईरानी राजदूत के अनुसार, उनका देश संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने की तैयारी कर चुका है और आयात के लिए उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में कुछ वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन इसके पीछे केवल आपूर्ति में कमी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। व्यापक आर्थिक दबाव भी कीमतों में बढ़ोतरी का एक कारण है।

    फतहली ने कहा कि ईरान लगभग 47 वर्षों से प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और इस दौरान उसने उनके प्रभाव को कम करने के तरीके विकसित किए हैं। उन्होंने नैनो टेक्नोलॉजी और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में ईरान की प्रगति का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक, ईरान की भौगोलिक स्थिति और उसके 15 पड़ोसी देश व्यापार तथा आर्थिक साझेदारी के लिए नए अवसर उपलब्ध कराते हैं। ईरान दूसरे देशों के साथ पारस्परिक लाभ वाले संबंध बनाए रखने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशता रहेगा।

    भारत और ईरान के कारोबार को अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की संभावना पर भी चर्चा हुई है। फतहली ने बताया कि भारतीय भागीदारों के साथ संपर्क जारी है। हालांकि, उन्होंने किसी अंतिम समझौते या नई व्यवस्था की घोषणा नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे उपायों को तय करने और लागू करने के लिए विशेषज्ञ स्तर पर बातचीत तथा संबंधित पक्षों के बीच समन्वय जरूरी होगा।

    चाबहार बंदरगाह को लेकर भी ईरान ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। यह बंदरगाह भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। भारत के संचालन से संबंधित अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने के बाद परियोजना के भविष्य को लेकर सवाल उठे हैं।

    फतहली ने कहा कि ईरान चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि इसके विकास में योगदान देने के इच्छुक किसी भी देश के निवेश और भागीदारी का स्वागत किया जाएगा। हालांकि, बंदरगाह से संबंधित आगे की व्यवस्था और भारत-ईरान व्यापार को प्रभावित करने वाली बाधाओं के समाधान के लिए बातचीत तथा समन्वय महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

  • ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    ईरान पर अमेरिका की नई बमबारी से बढ़ा तनाव, तबरीज, बुशेहर और चाबहार बने निशाना, होर्मुज स्ट्रेट और बहरीन तक सुरक्षा अलर्ट से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव लगातार अधिक गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका ने लगातार नौवीं रात ईरान के विभिन्न हिस्सों में नए हवाई हमले किए, जिससे पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव और बढ़ गया। इस अभियान के दौरान ईरान के कई रणनीतिक क्षेत्रों में विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जबकि होर्मुज स्ट्रेट में एक व्यापारिक जहाज में आग लगने और बहरीन में सुरक्षा अलर्ट जारी होने से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

    अमेरिकी सैन्य अभियान के तहत उत्तर-पश्चिमी ईरान के तबरीज सहित कई स्थानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा दक्षिणी प्रांतों होरमोज़गान और बुशेहर में भी तेज धमाकों की सूचना मिली। दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार में कई विस्फोट दर्ज किए गए, जिसके बाद आसपास के कोनारक क्षेत्र में ईरान ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिले कि संभावित नए हमलों की आशंका को देखते हुए ईरान अपनी सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत कर रहा है।

    अमेरिकी सैन्य अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनके जरिए वाणिज्यिक जहाजों और नागरिक नाविकों के लिए खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। इसी रणनीति के तहत लगातार कई दिनों से हवाई अभियान जारी रखा गया है। हालांकि इन हमलों के बाद ईरान की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था को उच्च स्तर पर बनाए रखा गया है।

    इसी दौरान होर्मुज स्ट्रेट से एक और चिंताजनक खबर सामने आई। ओमान के तट के निकट एक बड़े व्यापारिक जहाज में भीषण आग लग गई, जिससे समुद्री गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई। जहाज की पहचान और आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है और यहां किसी भी प्रकार की अस्थिरता का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।

    क्षेत्रीय हालात को देखते हुए बहरीन की राजधानी मनामा स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। दूतावास ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने, भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचने और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। संभावित सुरक्षा जोखिमों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त एहतियाती कदम भी उठाए जा रहे हैं।

    लगातार बढ़ते सैन्य अभियानों और सुरक्षा तैयारियों के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल दिखाई नहीं दे रहे हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने में लगे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर बनी हुई है कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। यदि सैन्य कार्रवाई का यह सिलसिला जारी रहता है तो इसका असर केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और कूटनीतिक संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें इस संघर्ष के अगले घटनाक्रम और संभावित राजनीतिक समाधान पर टिकी हुई हैं।

  • अमेरिका ने ईरान के चाबहार में तबाह किया सर्विलांस टावर, भारत से है कनेक्शन, जाने कैसे ?

    अमेरिका ने ईरान के चाबहार में तबाह किया सर्विलांस टावर, भारत से है कनेक्शन, जाने कैसे ?


    वॉशिंगटन। अमेरिका ने दावा किया है कि उसकी सेना ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के एक महत्वपूर्ण सर्विलांस टावर को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई का वीडियो फुटेज भी जारी किया है।

    अमेरिका के अनुसार, यह हमला होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की निगरानी और सैन्य क्षमता को कमजोर करने के अभियान का हिस्सा था। अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि अमेरिकी सेना ने चाबहार बंदरगाह शहर में स्थित ‘चाबहार शहीद कलंतरी पोर्ट’ सर्विलांस टावर को निशाना बनाया।

    खास बात यह है कि चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत भी कभी ईरान का सहयोगी रह चुका है। भारत ने इस रणनीतिक बंदरगाह के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    16 जुलाई को किया गया हमला
    CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने 16 जुलाई को इस ऑपरेशन को अंजाम दिया और चाबहार शहीद कलंतरी पोर्ट के सर्विलांस टावर को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। अमेरिकी सेना का कहना है कि यह टावर ईरान के ओमान की खाड़ी तट पर मौजूद समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा था। इसका इस्तेमाल कथित तौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों की निगरानी और कार्रवाई के लिए किया जाता था।

    अमेरिका के अनुसार, टावर के नष्ट होने से IRGC की उस क्षमता को नुकसान पहुंचा है, जिसके जरिए वह रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने और हमलों के समन्वय का काम करता था।

    अमेरिका ने बताई कार्रवाई की वजह
    CENTCOM ने कहा कि इस हमले से नागरिक जहाजों के क्रू सदस्यों को निशाना बनाने की IRGC की क्षमता कम होगी। अमेरिकी कमान ने यह भी दावा किया कि इस कार्रवाई से क्षेत्रीय जल क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, अमेरिका ने यह भी कहा कि यह सुविधा उन जहाजों के लिए लागू नहीं होगी, जो ईरान के खिलाफ चल रही अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी का उल्लंघन करने की कोशिश कर रहे हैं।

    होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ता तनाव
    अमेरिकी कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि दुनिया के बड़े हिस्से का तेल और गैस व्यापार इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका रणनीतिक रूप से इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी और प्रभाव मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान लंबे समय से इस इलाके में अपनी सैन्य और निगरानी क्षमता बनाए हुए है।

    चाबहार और भारत का संबंध
    चाबहार बंदरगाह भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है। भारत ने ईरान के साथ मिलकर इस बंदरगाह के विकास में सहयोग किया था। इसका उद्देश्य भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक वैकल्पिक व्यापार मार्ग उपलब्ध कराना था। यही वजह है कि चाबहार का नाम किसी भी सैन्य कार्रवाई के संदर्भ में आने पर भारत के लिए भी यह घटनाक्रम खास महत्व रखता है।

  • चाबहार पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर के साथ ‘सिस्टर पोर्ट’ योजना ने बढ़ाई भारत की चिंता, रणनीतिक समीकरण बदलने की आशंका

    चाबहार पर पाकिस्तान की नजर, ग्वादर के साथ ‘सिस्टर पोर्ट’ योजना ने बढ़ाई भारत की चिंता, रणनीतिक समीकरण बदलने की आशंका

    नई दिल्ली । ईरान के चाबहार बंदरगाह को पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट के साथ जोड़कर ‘सिस्टर पोर्ट’ के रूप में विकसित करने की चर्चा ने क्षेत्रीय भू-राजनीतिक समीकरणों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। इस प्रस्ताव को ऐसे समय में सामने रखा गया है जब चाबहार परियोजना में भारत की भूमिका और भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं जारी हैं। रणनीतिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि इस दिशा में कोई ठोस प्रगति होती है तो इसका प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।

    पाकिस्तान के कुछ विश्लेषकों द्वारा प्रस्तुत इस विचार में चाबहार और ग्वादर के बीच आर्थिक एवं लॉजिस्टिक सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। प्रस्ताव के अनुसार दोनों बंदरगाहों के बीच परिवहन, कस्टम प्रक्रियाओं और व्यापारिक गतिविधियों को एकीकृत कर बड़े पैमाने पर क्षेत्रीय व्यापार को बढ़ावा दिया जा सकता है। ग्वादर पहले से ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जबकि चाबहार को भारत ने अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित करने में निवेश किया है।

    चाबहार बंदरगाह भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक परियोजनाओं में शामिल रहा है। यह बंदरगाह पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक व्यापारिक पहुंच प्रदान करता है। यही कारण है कि इसे केवल आर्थिक परियोजना नहीं बल्कि भारत की व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण आधार माना जाता रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और ईरान से जुड़े प्रतिबंधों ने इस परियोजना के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण चाबहार परियोजना की गति प्रभावित हुई है। इसी बीच यह भी चर्चा रही कि भारत अपनी कुछ हिस्सेदारी और संचालन व्यवस्था को लेकर वैकल्पिक विकल्पों पर विचार कर रहा है ताकि परियोजना पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। हालांकि भारत ने चाबहार को लेकर अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को कई बार दोहराया है।

    रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भविष्य में चाबहार और ग्वादर के बीच किसी प्रकार का औपचारिक सहयोग विकसित होता है तो इससे क्षेत्र में चीन, पाकिस्तान और ईरान के बीच सहयोग का नया आयाम उभर सकता है। ऐसे परिदृश्य में भारत की समुद्री रणनीति और पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में उसकी उपस्थिति को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से अरब सागर और हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभाव बनाए रखने के लिए भारत को अपनी नीतियों की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

    जानकारों के अनुसार मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बंदरगाह केवल व्यापारिक केंद्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वे सामरिक और कूटनीतिक महत्व के प्रमुख केंद्र बन चुके हैं। ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं में उनकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण चाबहार और ग्वादर से जुड़ी हर गतिविधि पर क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों की नजर बनी हुई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के लिए आने वाले वर्षों में चाबहार परियोजना का महत्व कम नहीं होगा। मध्य एशिया, रूस और पश्चिम एशिया के साथ संपर्क बढ़ाने की रणनीति में यह बंदरगाह अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य के बीच भारत के लिए अपनी आर्थिक, कूटनीतिक और सामरिक प्राथमिकताओं के अनुरूप संतुलित और सक्रिय नीति अपनाना आवश्यक होगा।