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  • अंजड नगर में चैत्र नवरात्रि: गायत्री मंदिर में विशेष पंचकुंडीय यज्ञ और साधकों का जप-तप

    अंजड नगर में चैत्र नवरात्रि: गायत्री मंदिर में विशेष पंचकुंडीय यज्ञ और साधकों का जप-तप


    बड़वानी । अंजड नगर के ठीकरी रोड स्थित गायत्री मंदिर में चैत्र नवरात्रि को भक्तिभाव और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस दौरान साधक प्रतिदिन सुबह 5 बजे से सामूहिक जप, तप, ध्यान और साधना कर रहे हैं। परम पूज्य गुरुदेव की वाणी के बाद नादयोग साधना का क्रम निरंतर चलता रहा।

    रविवार सुबह 7:30 बजे से मंदिर में परिव्राजक और महिला मंडल की बहनों ने संगीत के साथ देव पूजन और देव आव्हान किया। इसके बाद पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ शुरू हुआ। यज्ञशाला में विश्व कल्याण की भावना के साथ गायत्री मंत्र के साथ आहुतियां प्रदान की गई। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के कई स्वरूपों, महालक्ष्मी और महामृत्युंजय मंत्रों के साथ विशेष आहुतियां दी जा रही हैं।

    इसके साथ ही परम पूज्य गुरुदेव का 18 सूत्रीय सदसंकल्प पाठ भी सभी साधकों के साथ दोहराया गया। सुबह 9:30 बजे यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद वेदमाता गायत्री और भगवान प्रज्ञेश्वर महादेव की आरती हुई और प्रसादी का वितरण किया गया।

    गायत्री शक्तिपीठ के प्रमुख ट्रस्टी जगदीश एग्रो ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की सप्तमी 25 मार्च को पंचकुंडीय यज्ञ के साथ कई प्रकार के संस्कार निशुल्क संपन्न करवाए जाएंगे। इनमें पुंसवन, नामकरण, विद्यारंभ, यज्ञोपवीत और मुंडन जैसे संस्कार शामिल हैं।

    उन्होंने यह भी बताया कि 27 मार्च को नवमी के दिन सुबह 8 बजे से नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ संपन्न कर नौ दिनों से चल रहे आयोजन की महा पूर्णाहुति की जाएगी। इसी अवसर पर भगवान श्रीरामचंद्र जी का पूजन और जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इसके पश्चात मंचासीन कार्यक्रम और अमृतासन प्रसादी का वितरण होगा। ट्रस्ट मंडल और परिजन नगर की धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आवाहन कर रहे हैं।

    हिन्दू शास्त्रों के अनुसार चैत्र और अश्विन माह की नवरात्रि शक्ति संचय करने का सर्वोत्तम समय है। इस अवसर पर साधक 24 हजार गायत्री मंत्रों का जप करते हैं, जिसे “लघु अनुष्ठान” कहा जाता है। साधक प्रतिदिन 27 माला गायत्री मंत्र का जप सुबह 4 से 8 बजे या शाम 4 से सूर्यास्त तक कर रहे हैं। साधक और परिजन अपनी सामर्थ्य और इच्छा अनुसार व्रतों का पालन भी कर रहे हैं।

    पंचकुंडीय यज्ञ में नगर सहित आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालुजन आए और धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है बल्कि नगर और आसपास के लोगों में सामूहिक भक्ति और श्रद्धा की भावना को भी प्रगाढ़ बनाता है।

  • चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन और हाथी पर प्रस्थान के संकेत..

    चैत्र नवरात्र: पालकी पर आगमन और हाथी पर प्रस्थान के संकेत..

    नई दिल्ली: देशभर में मनाए जाने वाले पावन पर्व चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व धार्मिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से माना जाता है। यह पर्व न केवल शक्ति की उपासना का प्रतीक है, बल्कि नए हिंदू वर्ष की शुरुआत और जीवन में आने वाले बदलावों के संकेत भी देता है। इस वर्ष 19 मार्च से नवरात्र की शुरुआत हुई है और श्रद्धालु मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना में लीन हैं।

    मान्यता है कि नवरात्र में माता दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी आने वाले समय के संकेत देती है। इस बार मां जगदम्बा का आगमन गुरुवार के दिन पालकी पर हुआ है। शास्त्रों के अनुसार, पालकी पर आगमन को सामान्यतः शुभ संकेत नहीं माना जाता। इसे प्राकृतिक आपदाओं, सामाजिक अस्थिरता या आर्थिक चुनौतियों का संकेत माना जाता है। गुरुवार के दिन आगमन को लेकर यह भी माना जाता है कि यह समय कुछ सावधानियों और सतर्कता की मांग करता है।

    हालांकि, इस वर्ष मां का प्रस्थान शुक्रवार को हाथी पर होगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है। हाथी स्थिरता, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। शास्त्रों के अनुसार, जब मां हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करती हैं, तो यह संकेत देता है कि आने वाला समय सुख, शांति और आर्थिक स्थिरता लेकर आएगा। यह स्थिति जीवन में संतुलन और प्रगति का संकेत भी मानी जाती है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान की सवारी सप्ताह के दिन के अनुसार बदलती रहती है और हर सवारी का अलग महत्व होता है। उदाहरण के लिए, रविवार और सोमवार को प्रस्थान होने पर मां की सवारी भैंसा मानी जाती है, जिसे अशुभ माना जाता है क्योंकि यह रोग और शोक का प्रतीक है। वहीं, मंगलवार और शनिवार को प्रस्थान होने पर सवारी मुर्गा होती है, जो कुछ स्थानों पर महामारी या जनहानि का संकेत माना जाता है।

    इसके विपरीत, बुधवार और शुक्रवार को मां की सवारी हाथी मानी जाती है, जो बेहद शुभ संकेत देता है और जीवन में सुख-समृद्धि, स्थिरता और उन्नति का प्रतीक होता है। गुरुवार को प्रस्थान होने पर मां मनुष्य के कंधे पर सवार होकर जाती हैं, जिसे भक्त और देवी के बीच विशेष आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।

    विगत वर्ष 2025 की शारदीय नवरात्रि में भी मां का आगमन हाथी पर हुआ था, जो शुभ संकेत था, लेकिन प्रस्थान गुरुवार को भक्तों के कंधे पर हुआ था, जो संतुलन और मिश्रित परिणामों का संकेत माना गया।

     नवरात्रि में मां के आगमन और प्रस्थान की सवारी को भविष्य के संकेत के रूप में देखा जाता है। इस वर्ष जहां पालकी पर आगमन कुछ सावधानी बरतने का संदेश देता है, वहीं हाथी पर प्रस्थान आने वाले समय में स्थिरता और सकारात्मकता की उम्मीद जगाता है। यह पर्व न केवल आस्था और भक्ति का प्रतीक है, बल्कि जीवन में संतुलन और चेतना का संदेश भी देता है।