वेडा गांव के पास मची चीख पुकार
मशक्कत के बाद निकाला गया शव
फरार चालक की तलाश जारी

वेडा गांव के पास मची चीख पुकार
फरार चालक की तलाश जारी

घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल SDRF (राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल की टीम को बुलाया गया। पिछले 12 घंटों से भी अधिक समय से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है, लेकिन नहर का बहाव तेज होने के कारण अभी तक युवती का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। गोताखोर लगातार पानी की गहराई में उसकी तलाश कर रहे हैं, वहीं किनारे पर खड़े परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
शादी के फैसले से थी असंतुष्ट
प्रारंभिक जांच और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, युवती अपनी इस शादी को लेकर मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। बताया जा रहा है कि विवाह के बाद से ही वह गुमसुम रहती थी और अक्सर अपनी नाखुशी जाहिर करती थी। पुलिस अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या उस पर शादी के लिए किसी प्रकार का दबाव था या ससुराल पक्ष में कोई अन्य विवाद चल रहा था। पति और ससुर से भी पूछताछ की जा रही है ताकि घटना के समय की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
यह घटना एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर करती है कि किसी भी व्यक्ति की इच्छा के विरुद्ध लिए गए जीवन के बड़े फैसले किस कदर आत्मघाती साबित हो सकते हैं। फिलहाल, पूरा ध्यान रेस्क्यू ऑपरेशन पर केंद्रित है और प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही युवती को ढूंढ लिया जाएगा। घटना के बाद से ही क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है और लोग इस दुखद अंत से स्तब्ध हैं।

घटना गुरुवार शाम करीब पांच बजे की बताई जा रही है। जानकारी के मुताबिक 24 वर्षीय देवेंद्र गुर्जर और उनके 50 वर्षीय ससुर औतार गुर्जर को सुनियोजित तरीके से घेरकर करीब 12 राउंड फायरिंग की गई। चश्मदीदों के अनुसार अचानक चली गोलियों से इलाके में अफरा तफरी मच गई। देवेंद्र की जांघ को चीरती हुई गोली निकल गई जबकि औतार गुर्जर के पैर के आर पार गोली लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को तत्काल प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर किया गया है जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मौके से पांच खाली खोखे बरामद किए हैं।
इस खूनी वारदात की जड़ें एक दिन पहले हुई मारपीट में बताई जा रही हैं। बुधवार को नेशनल हाईवे 44 पर आरोपी गीताराम गिर्राज और छोटू गुर्जर ने देवेंद्र के साथ मारपीट की थी। आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई। देवेंद्र ने सराय छोला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई लेकिन परिजनों का कहना है कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। यदि आरोपियों की समय पर गिरफ्तारी होती तो शायद यह जानलेवा हमला टल सकता था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई है। सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार घायलों के बयान दर्ज करने के लिए टीम ग्वालियर भेजी गई है। उन्होंने माना कि पुरानी रंजिश और मारपीट की घटना के चलते ही फायरिंग हुई। हालांकि पुलिस का यह कहना कि वे आरोपियों को पकड़ने जाने ही वाले थे लेकिन उससे पहले वारदात हो गईपीड़ित परिवार को स्वीकार्य नहीं है। ग्रामीणों में भी पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।
घटनाक्रम पर नजर डालें तो बुधवार को मारपीट और धमकी उसी रात एफआईआर लेकिन कोई गिरफ्तारी नहीं; और गुरुवार शाम खुलेआम घेराबंदी कर 12 राउंड फायरिंगयह सिलसिला पुलिस की सुस्ती पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। फिलहाल आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश में दबिश दी जा रही है। चंबल क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं की पुनरावृत्ति ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समय पर की गई पुलिस कार्रवाई ऐसी वारदातों को रोक सकती है। केन्थरी गांव की यह घटना न केवल दो जिंदगियों को खतरे में डाल गई बल्कि कानून व्यवस्था की हकीकत भी उजागर कर गई।