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  • चंबल के बीहड़ों में शूट हुई नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म शक्ति शालिनी, ग्वालियर-दतिया-मुरैना में फिल्माए गए सीन

    चंबल के बीहड़ों में शूट हुई नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म शक्ति शालिनी, ग्वालियर-दतिया-मुरैना में फिल्माए गए सीन


    मध्य प्रदेश : बॉलीवुड अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनकी आखिरी फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ है, जिसकी शूटिंग मध्य प्रदेश के ग्वालियर, दतिया और मुरैना में की गई थी। फिल्म में नाना पाटेकर तांत्रिक की भूमिका निभाने वाले हैं। यह फिल्म वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। नाना पाटेकर ने निधन से पहले फिल्म से जुड़े अपने हिस्से की शूटिंग पूरी कर ली थी।

    नाना पाटेकर का मध्य प्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। अपने करीब पांच दशक के फिल्मी करियर के दौरान उन्होंने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कई फिल्मों की शूटिंग की। इनमें ‘राजनीति’, ‘तरकीब’ और ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएं’ जैसी फिल्में शामिल हैं। अंतिम समय तक वह ‘शक्ति शालिनी’ पर काम कर रहे थे और फिल्म के लिए मध्य प्रदेश भी पहुंचे थे। मई 2026 में उन्होंने ग्वालियर और दतिया में फिल्म के कई दृश्यों की शूटिंग की थी।

    ‘शक्ति शालिनी’ मैडॉक हॉरर कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। फिल्म में नाना पाटेकर के अलावा अभिनेत्री अनीत पड्डा और अभिनेता विनीत कुमार सिंह भी नजर आएंगे। नाना ने इन कलाकारों के साथ फिल्म के कई सीन शूट किए थे। फिल्म की कहानी में चंबल के डाकुओं और बीहड़ों से जुड़ा एंगल भी बताया जा रहा है। इसी वजह से ग्वालियर और दतिया के इलाकों को शूटिंग के लिए चुना गया था।

    फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग मुरैना में भी हुई। दतिया के करण सागर इलाके में शूटिंग के दौरान स्थानीय लोगों ने नाना पाटेकर को देखा था। फिल्म में उनके किरदार को लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन बताया गया है कि वह तांत्रिक की भूमिका निभाएंगे। फिल्म की रिलीज की बात करें तो ‘शक्ति शालिनी’ वर्ष 2027 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

    मध्य प्रदेश में नाना पाटेकर की फिल्मों का जुड़ाव इससे पहले भी रहा है। वर्ष 2010 में रिलीज हुई फिल्म ‘राजनीति’ की शूटिंग के लिए वह भोपाल आए थे और कुछ दिन राजधानी में बिताए थे। इस फिल्म में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके अलावा उनकी फिल्म ‘थोड़ा सा रूमानी हो जाएं’ की शूटिंग भी मध्य प्रदेश के पचमढ़ी में हुई थी। यह फिल्म वर्ष 1990 में रिलीज हुई थी।

    वर्ष 2000 में आई क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘तरकीब’ की शूटिंग भी पचमढ़ी में की गई थी। पचमढ़ी वर्तमान में नर्मदापुरम जिले में स्थित है, जबकि पहले इस जिले का नाम होशंगाबाद था। इस तरह नाना पाटेकर का मध्य प्रदेश से जुड़ाव भोपाल से लेकर पचमढ़ी और चंबल क्षेत्र तक रहा है। अब उनकी आखिरी बताई जा रही फिल्म ‘शक्ति शालिनी’ में ग्वालियर, दतिया और मुरैना के इलाके भी बड़े पर्दे पर दिखाई दे सकते हैं।

  • चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा

    चंबल राजघाट में अवैध रेत उत्खनन पर वन विभाग और पुलिस की संयुक्त पेट्रोलिंग, टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा


    चंबल।  अवैध रेत उत्खनन की लगातार शिकायतों के बीच चंबल के राजघाट क्षेत्र में वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने अचानक पेट्रोलिंग की। टीम का मकसद रेत माफियाओं को रंगे हाथों पकड़ना था, लेकिन मौके पर कोई भी ट्रैक्टर-ट्रॉली या लोडर मशीन नहीं मिली, जिससे टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, स्थानीय लोगों और प्रशासनिक शिकायतों के आधार पर वन विभाग और पुलिस ने राजघाट क्षेत्र में छापामार कार्रवाई और पेट्रोलिंग की योजना बनाई थी। हालांकि, पूरी टीम के पहुंचने पर इलाका सुनसान मिला और रेत से जुड़े किसी भी वाहन या गतिविधि के प्रमाण नहीं मिले।

    माफियाओं को पहले ही मिली भनक
    देवरी घड़ियाल सेंचुरी के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि टीम ने राजघाट और चंबल किनारे पेट्रोलिंग की, लेकिन वहाँ कोई अवैध रेत लदे वाहन या मशीन नहीं मिली। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि कार्रवाई की सूचना पहले ही रेत माफियाओं तक पहुंच गई थी, जिसके कारण मौके पर कोई भी वाहन नहीं मिला।

    अधिकारियों का कहना है कि अवैध रेत उत्खनन रोकने के लिए नियमित पेट्रोलिंग और निगरानी जारी रहेगी। हालांकि, इस घटना से यह स्पष्ट हो गया है कि माफिया प्रशासन की छापामारी और निगरानी के प्रति सतर्क हैं।

    प्रशासन की अगली रणनीति
    वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम अब राजघाट और आसपास के इलाकों में और सघन निगरानी करेगी। अधिकारियों ने कहा कि अगले दौर की कार्रवाई में अवैध रेत लदे वाहनों और मशीनों की त्वरित पहचान के लिए ड्रोन और अन्य तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जाएगा।साथ ही, प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अवैध रेत उत्खनन की सूचना तुरंत पुलिस या वन विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

  • दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी

    दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पोस्ट पर कांग्रेस में मचा घमासान ग्वालियर-चंबल में खामोशी


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट के बाद कांग्रेस पार्टी में घमासान मच गया है लेकिन उनके राजनीतिक गढ़ ग्वालियर-चंबल अंचल में अब तक इस मामले पर कोई बड़ी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दिग्विजय सिंह ने हाल ही में संघ और भाजपा की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया था जिस पर विवाद छिड़ गया है। इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है लेकिन ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में खामोशी का माहौल बना हुआ है।

    कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि यह पोस्ट पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ है जबकि पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थक खासकर उनके बेटे जयवर्धन सिंह और पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह उनके समर्थन में खड़े हैं। जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर अपने पिता के संगठन के प्रति समर्पण को व्यक्त करते हुए राहुल गांधी की यात्रा से जुड़े कुछ फोटो भी पोस्ट किए और कहा कि उनके पिता के लिए संगठन सर्वोपरि है।पूर्व मुख्यमंत्री के संगठन के प्रति निष्ठा पर सवाल उठाने वालों को डॉ. गोविंद सिंह ने गलत बताया।

    उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के संगठन के प्रति समर्पण पर संदेह करना अनुचित है और उनके द्वारा की गई पोस्ट केवल एक व्यंग्य है न कि भाजपा या संघ की प्रशंसा।दिग्विजय सिंह की पोस्ट के बाद ग्वालियर-चंबल अंचल में उनके कट्टर समर्थक माने जाने वाले नेताओं जैसे पूर्व मंत्री केपी सिंह और राज्यसभा सदस्य अशोक सिंह की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। इसके साथ ही उनके विरोधी भी फिलहाल चुप हैं जिससे यह साफ है कि कांग्रेस के नेता शायद पार्टी नेतृत्व के रूख का इंतजार कर रहे हैं।

    वहीं भाजपा के नेताओं ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें भाजपा में शामिल होने का न्योता दिया जबकि नगरीय निकाय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें सरदार पटेल के रूप में निरूपित किया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे दिग्विजय सिंह की राज्यसभा में दोबारा जाने के लिए दबाव बनाने की कोशिश बताया। अब देखना होगा कि दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट का असर कांग्रेस पार्टी और उनके गढ़ ग्वालियर-चंबल में किस प्रकार होता है और क्या इस विवाद से पार्टी में कोई बड़े बदलाव होते हैं।