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  • जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    जोशीमठ-बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसा, पायलट समेत छह लोग सवार, यात्रियों की तलाश में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी…

    नई दिल्ली । उत्तराखंड के चमोली जिले में जोशीमठ और बद्रीनाथ के बीच हेलिकॉप्टर हादसे की सूचना से हड़कंप मच गया। चाई गांव के पास हेलिकॉप्टर क्रैश होने की जानकारी सामने आई है। इसमें पायलट समेत कुल छह लोग सवार बताए गए हैं। हादसे की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और सेना की टीमों को घटनास्थल के आसपास भेजा गया है। यात्रियों की स्थिति और हादसे में किसी के हताहत होने को लेकर शुरुआती जानकारी के बाद भी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है। घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हेलिकॉप्टर हादसे की जानकारी देते हुए बताया कि जोशीमठ के निकट चाई गांव के पास दुर्घटना की सूचना मिली है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग के साथ एसडीआरएफ की टीमें संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल एयरलिफ्ट करके बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने हेलिकॉप्टर में सवार सभी यात्रियों के सुरक्षित होने की कामना भी की।

    उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रतीक जैन के अनुसार, ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर बद्रीनाथ से देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपोर्ट के लिए रवाना हुआ था। उड़ान के दौरान हेलिकॉप्टर जोशीमठ घाटी के नजदीक पहुंचा, जिसके बाद उसकी लोकेशन मिलनी बंद हो गई। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और संभावित दुर्घटनास्थल की तलाश शुरू की गई।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलिकॉप्टर में कैप्टन हिमांशु पायलट के रूप में मौजूद थे। उनके अलावा पांच यात्री सवार थे। यात्रियों की पहचान प्रतापा, अरुण, शंकर गौड़ा, सुधीर के. और एचएस नटराज के रूप में बताई गई है। हालांकि, इन सभी की वर्तमान स्थिति को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। प्रशासन की ओर से घटनास्थल तक पहुंचने और यात्रियों के बारे में पुष्टि करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए चमोली जिला प्रशासन, एसडीआरएफ और सेना की एक टुकड़ी को संभावित घटनास्थल के आसपास रवाना किया गया। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती बनी हुई है। हेलिकॉप्टर की आखिरी लोकेशन के आधार पर तलाश की जा रही है। अधिकारियों की प्राथमिकता विमान का सटीक स्थान पता लगाना और उसमें सवार लोगों तक पहुंचना है।

    हादसे के बाद ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने एहतियाती कदम उठाते हुए अपने सभी हेलिकॉप्टरों की उड़ानें रोक दी हैं। कंपनी के पूरे बेड़े का संचालन अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है। इस फैसले का उद्देश्य घटना की परिस्थितियों की जानकारी मिलने तक आगे की उड़ानों को रोकना है।

    उत्तराखंड में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाओं का पिछला रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाने वाला रहा है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2020 से जुलाई 2025 के बीच राज्य में सात हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं हुई थीं। इन हादसों में कुल 21 लोगों की मौत हुई थी। वहीं, वर्ष 2023 से 2025 के बीच छह हेलिकॉप्टर दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि, राज्य में अब तक कितने हेलिकॉप्टर लापता हुए हैं, इसका अलग से कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

    जोशीमठ-बद्रीनाथ मार्ग पर हुई इस घटना के बाद अब सबकी नजरें राहत एवं बचाव अभियान पर टिकी हैं। हेलिकॉप्टर में सवार छह लोगों की वास्तविक स्थिति, दुर्घटना के कारण और घटनास्थल से मिलने वाली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

  • चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे

    चमोली की जिस टनल में हुआ हादसा, आखिर किस प्रोजेक्ट का है हिस्सा? जानें 444 MW की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना के 5 बड़े फायदे


    चमोली।
    उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में गुरुवार शाम निर्माणाधीन सुरंग में मलबा और पानी घुसने से बड़ा हादसा हो गया। अचानक टनल में पानी और मलबा आने के कारण कई मजदूर अंदर फंस गए। राहत और बचाव दल ने करीब 13 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि बाकी मजदूरों की तलाश और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ NDRF, SDRF और मेडिकल टीम भी मौजूद है।

    हादसे के बाद लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर पहाड़ के भीतर इतनी बड़ी सुरंग क्यों बनाई जा रही थी? दरअसल, यह कोई सामान्य सड़क या आवाजाही की सुरंग नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की एक बड़ी जलविद्युत परियोजना का हिस्सा है।

    यह सुरंग 444 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना (VPHEP) के तहत बनाई जा रही है। आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की खासियत और इससे होने वाले फायदे।

    क्या है विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर विकसित की जा रही एक महत्वपूर्ण रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।

    इस परियोजना में अलकनंदा नदी के तेज बहाव और करीब 237 मीटर के हेड का इस्तेमाल कर बिजली पैदा की जाएगी। यह परियोजना ऋषिकेश से लगभग 225 किलोमीटर दूर NH-58 पर स्थित है।

    परियोजना का निर्माण THDC इंडिया लिमिटेड कर रहा है, जबकि सुरंग निर्माण का काम HCC को दिया गया है। इसकी कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 444 मेगावाट है, जिसे 111-111 मेगावाट की चार यूनिट के जरिए हासिल किया जाएगा।

    कैसे काम करेगा पूरा प्रोजेक्ट?

    विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना को मुख्य रूप से तीन बड़े हिस्सों में समझा जा सकता है।

    1. 65 मीटर ऊंचा डायवर्जन डैम

    अलकनंदा नदी के पानी को परियोजना की दिशा में मोड़ने के लिए करीब 65 मीटर ऊंचे कंक्रीट डायवर्जन डैम का निर्माण किया जा रहा है।

    2. 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल

    यह परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण सुरंगों में से एक है। करीब 13.4 किलोमीटर लंबी हेड रेस टनल के जरिए नदी का पानी बिजली उत्पादन के लिए टर्बाइन तक पहुंचाया जाएगा।

    3. 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल

    टर्बाइन से बिजली पैदा होने के बाद पानी को दोबारा अलकनंदा नदी में छोड़ने के लिए करीब 3.04 किलोमीटर लंबी टेल रेस टनल बनाई जा रही है।

    पीपलकोटी में हुआ ताजा हादसा इसी जलविद्युत परियोजना के टनल निर्माण कार्य के दौरान हुआ है।

    परियोजना के 5 बड़े फायदे

    1. 444 मेगावाट बिजली का उत्पादन

    परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि 444 मेगावाट बिजली उत्पादन होगी। इससे उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की बिजली जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।

    2. नदी के बहाव से बिजली

    यह रन-ऑफ-द-रिवर परियोजना है। यानी बिजली उत्पादन के लिए नदी के प्राकृतिक बहाव और ऊंचाई के अंतर का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह बड़े पैमाने पर पानी को लंबे समय तक रोककर रखने की जरूरत अपेक्षाकृत कम होती है।

    3. स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा

    जलविद्युत को नवीकरणीय ऊर्जा के प्रमुख स्रोतों में गिना जाता है। परियोजना से बिजली उत्पादन बढ़ने पर कोयला आधारित बिजली पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    4. राज्य की ऊर्जा जरूरतों में मदद

    444 मेगावाट की क्षमता वाली परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत कर सकती है। इससे राज्य को बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र में अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी।


    5. स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियां

    इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। इसके साथ ही निर्माण कार्य, परिवहन, स्थानीय सेवाओं और दूसरे कारोबारों को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    हादसे के बाद रेस्क्यू पर नजर

    पीपलकोटी टनल हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल प्राथमिकता टनल के अंदर फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालना है। NDRF, SDRF और अन्य बचाव दल मौके पर जुटे हैं और ऑपरेशन लगातार जारी है।

    हालांकि यह परियोजना उत्तराखंड की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, लेकिन चमोली जैसे संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र में सुरंग निर्माण के दौरान मजदूरों की सुरक्षा, भूगर्भीय जोखिम और आपातकालीन बचाव व्यवस्था भी उतनी ही अहम हो जाती है।