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  • राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी

    राम मंदिर चढ़ावा मामला: इस्तीफे में चंपत राय का बड़ा खुलासा, 81 लाख रुपये लौटाने की बात स्वीकारी


    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के संयुक्त इस्तीफा पत्र से चढ़ावा चोरी मामले में अहम जानकारी सामने आई है। पहली बार सार्वजनिक हुए इस पत्र में दोनों ने स्वीकार किया है कि चोरी की घटना के बाद संबंधित लोगों से 81 लाख रुपये ट्रस्ट को वापस मिले थे। साथ ही, उन्होंने एसआईटी जांच की सिफारिश करने और निष्पक्ष जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के कामकाज से स्वयं को अलग करने का भी उल्लेख किया है।

    इस्तीफा पत्र के मुताबिक, 8 जून से दानपात्र की राशि को लेकर मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने लगीं, जिससे श्रद्धालुओं में भ्रम और असंतोष की स्थिति पैदा हो गई। पत्र में कहा गया है कि 4 जून की रात दानराशि की गणना के दौरान कुछ युवकों द्वारा कथित चोरी किए जाने की जानकारी एक ट्रस्टी को मिली थी।

    सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान
    पत्र के अनुसार, 5 जून की सुबह सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई, जिसमें कुछ युवकों की पहचान हुई। ट्रस्ट ने तत्काल पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के बजाय पहले संबंधित युवकों से पूछताछ करने का फैसला किया। इस्तीफा पत्र में दावा किया गया है कि 5 जून की रात से 8 जून के बीच संबंधित युवकों और उनके परिजनों ने कुल 81 लाख रुपये ट्रस्ट को लौटा दिए। साथ ही उन्होंने लिखित रूप में चोरी स्वीकार करते हुए स्वीकृति पत्र भी सौंपे।

    विवाद बढ़ने पर कराई गई एसआईटी जांच
    चंपत राय और अनिल मिश्रा ने पत्र में बताया कि जब यह मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनने लगा, तब ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (SIT) गठित कर निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया, ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके और संबंधित सभी लोगों की प्रतिष्ठा बनी रहे। पत्र के अनुसार, राज्य सरकार ने ट्रस्ट के अनुरोध को स्वीकार करते हुए 15 जून से एसआईटी जांच शुरू करा दी।

    जांच पूरी होने तक खुद को किया अलग
    इस्तीफे के अंतिम हिस्से में दोनों पदाधिकारियों ने लिखा कि जब तक पूरे मामले में सत्य स्पष्ट नहीं हो जाता, तब तक वे ट्रस्ट के सभी दायित्वों से स्वयं को अलग रखना उचित समझते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने अपना त्यागपत्र सौंपा, जिसे ट्रस्ट की 6 जुलाई को आयोजित बैठक में स्वीकार कर लिया गया।

  • चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?

    चंपत राय ने राम भक्तों के नाम लिखी चिट्ठी, जानिए अपने ऊपर लगे आरोपों पर क्‍या कहा?


    लखनऊ । ऐसा लग रहा था कि ट्रस्ट की मीटिंग में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अयोध्या का माहौल शांत पड़ जाएगा, माहौल थोड़ा शांत होता दिख भी रहा था तभी चंपत राय ने अचानक पूरे माहौल को गर्मा दिया.

    SIT की शुरुआती रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के एक दिन बाद चंपत राय का एक सोशल मीडिया पोस्ट सामने आया, जिसमें उनकी अब तक की पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया थी. इस ट्वीट में राम भक्तों के नाम उनकी एक चिट्ठी थी. उस चिट्ठी में उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को मनगढ़ंत करार दिया और कहा कि जल्द ही वो अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का क्रमवार ढंग से जवाब देंगे. उन्होंने अपने 41 वर्षों के प्रचारक जीवन और 1991 से अयोध्या राम मंदिर से जुड़े होने का जिक्र किया.

    चंपत राय से जुड़ी दूसरी खबर उनके एक्स पोस्ट के बाद तुरंत ही सामने आ गई. एसआईटी के सामने जो उन्होंने अपना लिखित बयान दिया था. इसका एक हिस्सा लीक हो गया और इस लीक पेपर में चंपत राय ने सीधे-सीधे दान पात्रों में रकम की गिनती और बैंक में जमा होने के जिम्मेदारियों से अपने को अलग कर दिया.

    उन्होंने कहा कि बैंक के साथ जो एमओयू साइन हुआ है. उसमें उनका साइन ही नहीं है. बैंक के अधिकारियों के साथ मिलकर कैसे नोट गिनने की प्रक्रिया में फेरबदल किया. कैसे उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है और वह इस पूरे प्रॉसेस का हिस्सा भी नहीं थे.

    उन्होंने इशारों में चढ़ावा चोरी और दान पत्र की गड़बड़ियों को अनिल मिश्रा के मत्थे डाल दिया है क्योंकि बैंक के साथ हुए एमओयू के सिग्नेटरी अनिल मिश्रा ही है और चंपत राय को इसकी जानकारी भी नहीं थी. चंपत राय ने अब नए सिरे से पूरे माहौल को गरमा दिया है अब आरोप और प्रत्यारोपों का नया दौर शुरू हो गया है जिससे ट्रस्ट के भीतर नए सिरे से कलह शुरू हो सकता है. पूरे मामले में अब अनिल मिश्रा फंसते हुए दिखाई दे रहे हैं क्योंकि एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट में भी अनिल मिश्रा पर गंभीर सवाल खड़े हैं और अब उनको नोटिस भेज कर उसे पूछताछ की तैयारी हो रही है.

    उधर, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने मीडिया से बातचीत में चंपत राय को निष्कलंक लेकिन जिद्दी बताते हुए यह माना कि उनके स्तर से लापरवाही जैसी गलतियां हुई है, लेकिन वह दोषी नहीं हो सकते उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है. एक तरफ ट्रस्ट की बैठक में अब तक के मंदिर के लिए किए गए चंपत राय के काम को सभी ने खुलकर सराहा दूसरी तरफ SIT की शुरुआती रिपोर्ट में क्लीन चिट मिल जाने पर चंपत राय ने इस पूरे मुद्दे पर अपना लंबा मौन तोड़ दिया है.

    जिस तरीके से ट्रस्ट ने चंपत राय का बचाव किया है और SIT में क्लीनचिट मिलती दिखाई दे रही है. उससे साफ है कि अब चंपत राय भी खुलकर सामने आएंगे. अब बस इंतजार एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट का है. इससे पहले ट्रस्ट की बैठक को लेकर कई मतभेद उभरे थे मसलन ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास नाराज थे, अब तक उन्हें ट्रस्ट के लोग पूछते तक नहीं थे लेकिन जब चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफा की बात आई तो उन्हें मनाकर बैठक में लाना पड़ा.

    राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के पहले छोटी छावनी में हाई वोल्टेज ड्रामा चला था. अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को मनाने पहुंचे बड़े पदाधिकारी, घंटों मंथन हुआ तब महंत नृत्य गोपाल दास आने को तैयार हए थे. यही नहीं बाहर से आने वाले ट्रस्ट के कई साधु संतों को भी मुश्किल से इस मीटिंग के लिए तैयार किया गया. बैठक से पहले महंत नृत्य गोपाल दास की ओर से एक पत्र भी जारी किया गया, जिसमें उन्होंने दान चोरी की घटना पर गहरा आघात व्यक्त किया और कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है कि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई होगी.

    बैठक में ट्रस्ट सदस्य और निर्मोही अखाड़े के महंत महंत दिनेंद्र दास की मौजूदगी को लेकर भी दिनभर सस्पेंस बना रहा, लेकिन वे बैठक में शामिल हुए. SIT रिपोर्ट सामने आने के बाद अब ट्रस्ट से जुड़े लोग थोड़े निश्चित हो गए हैं क्योंकि चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल चुकी है और ट्रस्ट ने चढ़ावे में उपहार स्वरूप मिले सभी आभूषण और कीमती उपहार का पूरा रिकॉर्ड भी जारी कर दिया है, जिसके बाद उपहार वाले चढ़ावों के चोरी की चर्चा बंद हो चुकी है हालांकि अनिल मिश्रा सवालों के घेरे में हैं जांच के बाद उन पर गाज गिर सकती है.

    नए तरीके से ट्रस्ट में होने वाले बदलाव की रूपरेखा तैयार हो चुकी है जल्द ही ट्रस्ट को नया सीईओ मिलने वाला है जिसके लिए तीन लोगों की एक कमेटी बना दी गई है और 22 को होने वाली अगली मीटिंग में ट्रस्ट के पुनर्गठन और नए सीईओ के नाम के ऐलान की उम्मीद है. चंपत राय को लगभग क्लीन चिट मिल जाना और उपहार की पूरी सूची और प्रदर्शनी के साथ सामने आने के बाद ट्रस्ट को थोड़ी राहत मिली है नए कार्यकारी महासचिव कृष्ण मोहन की नियुक्ति ने भी थोड़ा माहौल को ठंडा किया है लेकिन अभी जांच में और खुलासे होने बाकी हैं.

    अनिल मिश्रा को नोटिस भेजा जा चुका है अब जल्द ही SIT उनसे पूछताछ करेगी. उधर अयोध्या पुलिस लगातार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ में जुटी है. उम्मीद है इसमें बचे हुए खुलासे और होंगे.

  • अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय

    अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की बड़ी बैठक चढ़ावा चोरी मामले के बाद लिए जा सकते हैं अहम निर्णय


    उत्तरप्रदेश। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को शुरू हो गई। इस बैठक पर देशभर के श्रद्धालुओं और आम लोगों की नजरें टिकी हैं क्योंकि इसमें ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों सहित कई अहम मुद्दों पर फैसला लिया जाना है।

    बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचकर शामिल हुए। महासचिव चंपत राय भी बैठक में मौजूद रहे जबकि अनिल मिश्रा बैठक शुरू होने तक नहीं पहुंचे। जानकारी के अनुसार ट्रस्ट के कुछ पदेन सदस्य और केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि भी प्रत्यक्ष रूप से बैठक में शामिल नहीं हुए और उनके ऑनलाइन जुड़ने की संभावना जताई गई।

    बताया जा रहा है कि चढ़ावा चोरी की घटना सार्वजनिक होने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया था। ट्रस्ट की बैठक में इन इस्तीफों को स्वीकार करने या आगे की कार्रवाई को लेकर विचार किया जा रहा है। ट्रस्ट में कुल 14 सदस्य हैं जिनमें चार पदेन सदस्य शामिल हैं। किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है जबकि पदेन सदस्यों के मतों की गणना नहीं की जाती।

    बैठक से पहले ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने एक बयान जारी कर कहा कि मंदिर में चढ़ावे की चोरी की घटना से वे बेहद आहत हैं। उन्होंने कहा कि जिसने भी ऐसा महापाप किया है उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम पर भरोसा जताया। उनका कहना था कि इस घटना से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आवश्यक है।

    सूत्रों के अनुसार यदि महासचिव पद पर बदलाव होता है तो विश्व हिंदू परिषद के बजरंग बागड़ा का नाम सामने आ सकता है। वहीं ट्रस्टी पद के लिए नीरज दौनेरिया के नाम पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन संभावित नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक के बाद ही स्पष्ट होगा।

    इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है। अदालत ने कहा कि इसी विषय से संबंधित मामला पहले से सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में अब सभी की निगाहें ट्रस्ट की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय और जांच की अगली दिशा पर टिकी हुई हैं।

  • उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज

    उज्जैन से दिग्विजय सिंह का केंद्र और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा प्रहार बोले चंपत राय पर हो केस दर्ज


    मध्यप्रदेश । उज्जैन दौरे पर पहुंचे मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले को लेकर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की। दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया था इसलिए ट्रस्ट की जवाबदेही भी केंद्र सरकार की बनती है। उन्होंने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चांदी की ईंटों जेवरात नकदी और विदेशी चंदे के प्रबंधन में गड़बड़ियां हुई हैं जिनकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

    उज्जैन के सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इन संगठनों का धर्म और धार्मिक कार्यों से कोई सरोकार नहीं है बल्कि उनका उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना है। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर सनातन समाज की भावनाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने चंपत राय को संघ का प्रचारक बताते हुए कहा कि उन्हें धार्मिक परंपराओं से कोई संबंध नहीं है और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं का पालन नहीं किया गया और पूजा की प्रक्रिया शास्त्रीय नियमों के अनुरूप नहीं थी। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले में ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार पदाधिकारियों की भूमिका की जांच कराई जाए और आवश्यक होने पर उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जाए।

    उन्होंने ऐलान किया कि कांग्रेस इस मुद्दे को केवल प्रेस वार्ताओं तक सीमित नहीं रखेगी बल्कि गांव गांव और घर घर तक पहुंचाएगी। उन्होंने बताया कि उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में कांग्रेस ने दल और मंडल स्तर पर समितियां गठित की हैं जो लोगों के बीच जाकर राम मंदिर दान चोरी के मामले की जानकारी देंगी और पूरे घटनाक्रम को जनता के सामने रखेंगी।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं और मंदिर की जमीन को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि महाकाल मंदिर की जमीन आरएसएस से जुड़ी संस्थाओं को दी गई और वहां गेस्ट हाउस बनाए गए जबकि साधु संतों की उपेक्षा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान व्यवस्था में आम श्रद्धालुओं और संत समाज को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

    इंदौर उज्जैन मेट्रोपॉलिटन रीजन के नामकरण को लेकर चल रहे विवाद पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। उनका कहना था कि इस क्षेत्र के नाम में इंदौर का नाम पहले होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव को सलाह देते हुए कहा कि प्रशासनिक स्तर पर होने वाली गड़बड़ियों की जिम्मेदारी आखिरकार सरकार पर ही आती है इसलिए अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण रखना जरूरी है।

    प्रेस वार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने कुछ दस्तावेज भी दिखाए और दावा किया कि उनके पास जमीन घोटाले से जुड़े नए साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की पूरी जांच के बाद संबंधित लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएंगे और पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

  • राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता

    राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की चोरी का विवाद गहराया, चंपत राय पर उठे सवाल, जांच से तय होगा आगे का रास्ता


    लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस विवाद के केंद्र में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय आ गए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

    राम मंदिर निर्माण की पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चंपत राय लंबे समय से ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थक उन्हें अनुशासित और समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं, वहीं आलोचक उन पर निर्णयों में एकतरफा रवैया अपनाने के आरोप लगाते रहे हैं।

    ट्रस्ट में बढ़ता असंतोष और पुराने विवाद

    सूत्रों और चर्चा के अनुसार, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई पुराने संत और महंत ट्रस्ट के गठन से ही कुछ फैसलों से असंतुष्ट रहे हैं। उनका आरोप रहा है कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले कई प्रमुख संतों और संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा गया।

    ट्रस्ट में अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और अन्य पदों की मौजूदगी के बावजूद, लंबे समय से यह धारणा रही है कि प्रशासनिक और संगठनात्मक निर्णयों में चंपत राय की भूमिका प्रमुख रही है। इसी कारण कुछ सदस्यों के बीच असंतोष की स्थिति भी बनी रही।

    चढ़ावे की चोरी का मामला और बढ़ता विवाद

    हाल ही में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस मामले के बाद चंपत राय पर भी राजनीतिक और धार्मिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। कुछ पूर्व जुड़े लोगों और संतों ने सार्वजनिक रूप से आलोचना भी की है, जबकि कुछ ने जांच की मांग की है।

    हालांकि, चंपत राय को लेकर उनके समर्थक यह भी मानते हैं कि उनका सार्वजनिक जीवन पारदर्शिता और सादगी से जुड़ा रहा है और उन पर सीधे तौर पर किसी तरह के भ्रष्टाचार का आरोप साबित नहीं हुआ है।

    सरकार और ट्रस्ट की प्रतिक्रिया

    इस पूरे मामले पर सरकार और ट्रस्ट से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों ने संयमित प्रतिक्रिया दी है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने ट्रस्ट के कार्यों में कुछ व्यवस्थागत कमियों की बात स्वीकार की है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर किसी भी तरह के गंभीर आरोपों से इनकार किया है।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी हालिया घटनाक्रमों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के चरित्र पर बिना ठोस आधार के टिप्पणी नहीं होनी चाहिए।

    आगे क्या होगा?

    सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच जारी है और यदि आवश्यकता पड़ी तो ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव या पुनर्गठन पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही संबंधित व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल पूरा मामला जांच के दायरे में है और आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और आधिकारिक निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

  • राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी

    राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह 31 दिसंबर को चंपत राय ने दी जानकारी


    अयोध्या । अयोध्या स्थित राम मंदिर के उद्घाटन और राम लला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी सालगिरह इस बार 22 जनवरी 2026 को नहीं मनाई जाएगी। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसारराम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की दूसरी वर्षगांठ इस बार 31 दिसंबर 2025 को होगीक्योंकि प्रतिष्ठा द्वादशी इसी दिन पड़ेगी।

    राम मंदिर ट्रस्ट के अनुसारप्राण प्रतिष्ठा की इस वर्षगांठ को प्रतिष्ठा द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी और विभिन्न सांस्कृतिक तथा सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में राम मंदिर के उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं को दर्शाया जाएगाताकि इस अवसर की महिमा और महत्व को और अधिक बढ़ाया जा सके।

    राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की पहली सालगिरह 2024 में आयोजित की गई थीजब मंदिर के गर्भगृह में राम लला की भव्य मूर्ति स्थापित की गई थी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीउत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत सहित कई प्रमुख व्यक्तित्वों ने शिरकत की थी। यह आयोजन भारतीय समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण थाक्योंकि वर्षों बाद राम लला की पूजा अर्चना अयोध्या में उनके जन्म स्थान पर शुरू हो सकी थी।

    राम मंदिर का निर्माण श्रीराम के प्रति भारतीय जनता की आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैबल्कि भारतीय संस्कृतिसभ्यता और एकता का भी प्रतीक बन चुका है। राम मंदिर का उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा समारोह एक ऐतिहासिक घटना थीजिससे न केवल हिंदू समाज बल्कि समग्र भारत के लोग जुड़े हुए हैं।

    31 दिसंबर को होने वाले इस विशेष आयोजन में न केवल धार्मिक अनुष्ठान होंगेबल्कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी योजना बनाई गई हैजिनमें रामकथाभजन कीर्तननृत्य एवं संगीत के कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। इसके अतिरिक्तविभिन्न सामाजिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगीजो राम मंदिर की महिमा को और अधिक बढ़ावा देंगी। इस दिन अयोध्या में विशेष रौनक देखने को मिलेगी और यह आयोजन वहां के नागरिकों और श्रद्धालुओं के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।

    राम मंदिर के इस आयोजन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट ने व्यापक तैयारियां की हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्र को सजाया जाएगा और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा ताकि आयोजन निर्विघ्न रूप से संपन्न हो सके।
    अयोध्या में होने वाला यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगाबल्कि यह भारतीयतासंस्कृति और सभ्यता के प्रति एक गहरी श्रद्धा का प्रतीक भी रहेगा।