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  • टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?

    टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons Holding company) की संभावित वार्षिक आम बैठक से पहले शेयरधारक ट्रस्टों (Shareholder trusts) के भीतर वोटिंग का अंकगणित चर्चा में है। इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) को एक और कार्यकाल दिए जाने पर फैसला होना है।

    चंद्रशेखरन का कार्यकाल सामान्य रूप से 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा। हालांकि, कंपनी बोर्ड ने 17 सितंबर की एक हंगामेदार बैठक में उन्हें तीसरा कार्यकाल देने का प्रस्ताव पारित कर दिया था, लेकिन अब इसका अंतिम फैसला शेयरधारक ट्रस्टों के हाथ में है। सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के अधीन आने वाले 7 ट्रस्टों की संरचना बताती है कि नोएल टाटा और उनके परिवार का प्रभाव बेहद मजबूत हो चुका है। इन ट्रस्टों में कुल 36 ट्रस्टी पद हैं। इनमें से 17 पदों पर अकेले नोएल टाटा और उनके परिवार (बेटे नेविल, बेटियां लीया और माया) का कब्जा है। रतन टाटा के निधन से कुछ महीने पहले मई 2024 में लीया और माया को तीन-तीन ट्रस्टों में शामिल किया गया था।

    किस ट्रस्ट में क्या है नोएल परिवार की ताकत
    सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) : टाटा संस में 27.98% हिस्सेदारी वाले इस सबसे बड़े ट्रस्ट में कुल 6 में से 2 ट्रस्टी (33%) नोएल और उनके बेटे नेविल हैं।
    सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) : टाटा संस में 23.56% हिस्सेदारी। यह ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा कथित उल्लंघनों के कारण फ्रीज है।
    जेआरडी टाटा ट्रस्ट : टाटा संस में 4.01% हिस्सेदारी। नोएल और नेविल 50% हिस्सेदारी रखते हैं।
    टाटा एजुकेशन ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया मिलकर कुल 60% ताकत रखते हैं।
    टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और नेविल का 60% दबदबा है।
    आरडी टाटा ट्रस्ट : नोएल, माया और नेविल की 50% हिस्सेदारी। अन्य ट्रस्टी विजय सिंह, श्रीनिवासन, तुषाद बी दुबाश हैं।
    सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट : टाटा संस में 0.1% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया 60% के मालिक हैं। अन्य ट्रस्टी जिमी टाटा और जेएन मिस्त्री हैं।

    शापूरजी पालोनजी ग्रुप और अन्य कंपनियों के 30% वोट भी अहम…
    एजीएम में केवल ट्रस्टों के वोट ही नहीं, बल्कि 18% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप का रुख भी देखा जाएगा। नोएल टाटा का विवाह एसपी ग्रुप के परिवार में हुआ है। इसके अलावा टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर के पास टाटा संस की करीब 12% हिस्सेदारी है।

  • चंद्रशेखरन बोले- भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर, विकसित भारत 2047 के लिए बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश जरूरी

    चंद्रशेखरन बोले- भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर, विकसित भारत 2047 के लिए बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश जरूरी

    नई दिल्ली ।टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने इसके पीछे मजबूत घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को प्रमुख कारण बताया। चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में लगातार उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है और मजबूत विकास के रास्ते पर बना हुआ है।

    इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट सिम्पोजियम 2026 में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि कई आर्थिक संकेतक देश की स्थिर और मजबूत स्थिति की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में बनी मजबूत मांग अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

    चंद्रशेखरन ने चालू खाते की स्थिति को भी सकारात्मक आर्थिक संकेतकों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा लगातार जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बना हुआ है। इसके अलावा सेवा निर्यात जीडीपी के करीब 11 प्रतिशत के बराबर है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए की बेहतर स्थिति भी देश के आर्थिक परिदृश्य को समर्थन देने वाले महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत के विकसित भारत 2047 के विजन को हासिल करने के लिए समावेशी और टिकाऊ विकास पर ध्यान देना होगा। इसके लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों और बौद्धिक संपदा का समर्थन जरूरी होगा। चंद्रशेखरन ने लंबे समय तक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत और सटीक विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार तथा मानव पूंजी में निवेश को महत्वपूर्ण बताया।

    चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर अधिक ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, भारत जर्मनी जैसे देशों से सीख सकता है, जहां इंजीनियरिंग, मानकों और सटीकता के साथ मजबूत आपूर्तिकर्ता तथा छोटे एवं मध्यम उद्यमों के इकोसिस्टम ने प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इसी तरह के बदलाव की जरूरत है।

    उन्होंने भारत की व्यापक विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं में टिकाऊ विनिर्माण को शामिल करने की आवश्यकता भी बताई। चंद्रशेखरन के मुताबिक, ऐसा बदलाव केवल बड़ी कंपनियों के स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मजबूत नेतृत्व विकसित करने में मदद करनी चाहिए। इससे ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने में भी सहायता मिलेगी, जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और प्रथाओं में योगदान देने में सक्षम हों। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता से जोड़ा।

  • टाटा संस में फिर बोर्डरूम टकराव: चंद्रशेखरन को 5 साल और, नोएल टाटा ने किया विरोध

    टाटा संस में फिर बोर्डरूम टकराव: चंद्रशेखरन को 5 साल और, नोएल टाटा ने किया विरोध


    नई दिल्ली। टाटा संस में एक बार फिर नेतृत्व और कंपनी की भविष्य की दिशा को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। गुरुवार को बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने को मंजूरी दे दी, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसका विरोध किया। इसी बैठक में टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में आगे बढ़ने पर भी फैसला हुआ। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब आरबीआई ने टाटा संस की NBFC पंजीकरण खत्म करने की अर्जी खारिज कर दी है।

    चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना है। उन्होंने अगस्त में बोर्ड को बताया था कि वह मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं। इसके बावजूद बोर्ड ने उन्हें पांच साल और देने का प्रस्ताव मंजूर कर दिया। प्रस्ताव पर नोएल टाटा ने विरोध में वोट दिया। रिपोर्टों के मुताबिक बोर्ड में प्रस्ताव 4-1 से पारित हुआ।

    नोएल टाटा ने क्यों किया विरोध?

    इस पूरे विवाद की सबसे अहम कड़ी चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति है। नोएल टाटा का तर्क है कि जब चंद्रशेखरन पहले ही 2027 के बाद पद छोड़ने की इच्छा बोर्ड को बता चुके थे, तो कंपनी को उत्तराधिकारी चुनने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए थी। टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को “कानूनी रूप से अमान्य” बताया है और कंपनी के Articles of Association से जुड़े प्रावधानों का हवाला दिया है।

    यही वजह है कि यह मामला केवल चेयरमैन के कार्यकाल तक सीमित नहीं रह गया है। इसके साथ टाटा संस के बोर्ड अधिकार, टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका और कंपनी की लिस्टिंग का सवाल भी जुड़ गया है।

    टाटा ट्रस्ट्स के पास 66% हिस्सेदारी

    टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। इसलिए बोर्ड के फैसले के बाद अगली महत्वपूर्ण परीक्षा शेयरधारकों की मंजूरी होगी। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और लिस्टिंग से जुड़े फैसलों पर आगे की प्रक्रिया में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। ताजा रिपोर्टों में दोनों मुद्दों पर ट्रस्ट्स और बोर्ड के बीच मतभेद सामने आए हैं।

    टाटा संस में शापूरजी पालोनजी समूह की हिस्सेदारी करीब 18.37% है। वह लंबे समय से लिस्टिंग के पक्ष में रहा है। लिस्टिंग से उसे अपनी हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचकर कर्ज घटाने का रास्ता मिल सकता है।

    IPO का रास्ता क्यों खुला?

    टाटा संस के लिए IPO का मुद्दा अचानक नहीं आया है। सितंबर 2022 में RBI ने कंपनी को अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी की कंपनियों के लिए नियामकीय नियमों के तहत शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना जरूरी है।

    टाटा संस ने इस व्यवस्था से बाहर निकलने के लिए मार्च 2024 में अपना NBFC/CIC पंजीकरण सरेंडर करने का आवेदन दिया था। कंपनी ने करीब 21-22 हजार करोड़ रुपए का कर्ज चुकाकर खुद को नियामकीय ढांचे से बाहर करने की कोशिश की थी। लेकिन 11 सितंबर 2026 को RBI ने आवेदन खारिज कर दिया। इसके बाद कंपनी के सामने लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता प्रमुख विकल्प बन गया।

    गुरुवार को बोर्ड ने RBI के फैसले को चुनौती देने के बजाय लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया। हालांकि, टाटा संस ने अभी IPO की तारीख, आकार या शेयर बिक्री का औपचारिक ऐलान नहीं किया है।

    चंद्रशेखरन का तीसरा कार्यकाल क्यों अहम?

    एन. चंद्रशेखरन करीब चार दशक से टाटा समूह से जुड़े हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत TCS से की और आगे चलकर कंपनी के CEO और MD बने। फरवरी 2017 में उन्हें पहली बार टाटा संस का चेयरमैन बनाया गया था। 2022 में उन्हें दूसरा कार्यकाल मिला।

    उनके नेतृत्व में टाटा समूह ने पारंपरिक कारोबार के साथ एयरलाइन, डिजिटल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और बैटरी जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। एयर इंडिया का अधिग्रहण भी इसी दौर की बड़ी घटनाओं में शामिल रहा।

    आपकी दी गई जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2020 में टाटा समूह का रेवेन्यू 7.89 लाख करोड़ रुपए था, जो वित्त वर्ष 2026 में बढ़कर 16.24 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया। इसी तरह लिस्टेड कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप 2020 में करीब 9.31 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2026 में 24 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा हो गया।

    असली मतभेद सिर्फ चेयरमैन पद पर नहीं

    चंद्रशेखरन और नोएल टाटा के बीच मतभेदों की चर्चा पिछले कुछ महीनों से होती रही है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों के बीच नए कारोबारों में निवेश, पूंजी आवंटन और कुछ कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राय रही है। खासकर एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे नए कारोबारों में भारी निवेश और घाटे को लेकर निगरानी बढ़ाने की मांग का मुद्दा सामने आया है।

    यानी मौजूदा विवाद को केवल इस सवाल से नहीं समझा जा सकता कि चंद्रशेखरन चेयरमैन रहेंगे या नहीं। इसके पीछे टाटा संस की रणनीति, पूंजी का इस्तेमाल, लिस्टिंग और टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका जैसे कई बड़े सवाल जुड़े हैं।

    टाटा संस की वैल्यू कितनी?

    मार्च 2026 तक टाटा संस का एसेट बेस करीब 2.01 लाख करोड़ रुपए बताया गया है। RBI के नियामकीय ढांचे में कंपनी का आकार भी महत्वपूर्ण है। संभावित लिस्टिंग के चलते बाजार में इसके वैल्यूएशन को लेकर कई अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ अनुमानों में यह 7 लाख करोड़ से 11 लाख करोड़ रुपए के बीच बताया गया है, हालांकि वास्तविक मूल्यांकन IPO प्रक्रिया, बाजार परिस्थितियों और कंपनी के अंतिम स्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा।

    टाटा संस की बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी के कारण इसकी लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो सकती है। हालांकि अभी IPO का अंतिम आकार और समयसीमा तय नहीं हुई है।

    टाटा संस में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

    टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66% हिस्सेदारी है। शापूरजी पालोनजी समूह के पास करीब 18.37% हिस्सा है। इसके अलावा टाटा समूह की कंपनियों—TCS, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील—की हिस्सेदारी भी है।

    लिस्टिंग होने की स्थिति में शेयरधारकों के लिए अपनी हिस्सेदारी का मूल्य तय करने और जरूरत के मुताबिक हिस्सेदारी बेचने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी तरफ टाटा समूह के लिए बाजार से पूंजी जुटाने का विकल्प भी बढ़ेगा।

    टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस और टाटा ग्रुप में अंतर

    टाटा ग्रुप: टाटा ब्रांड के तहत काम करने वाली 30 से अधिक प्रमुख सार्वजनिक और निजी कंपनियों का व्यापक कारोबारी समूह है। इसमें TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर, टाइटन, एयर इंडिया और ट्रेंट जैसी कंपनियां शामिल हैं।

    टाटा संस: यह टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग और प्रमोटर कंपनी है। समूह की बड़ी कंपनियों में इसकी हिस्सेदारी है और ‘टाटा’ ब्रांड के इस्तेमाल से जुड़े अधिकार भी इसी के पास हैं। फिलहाल यह अनलिस्टेड कंपनी है।

    टाटा ट्रस्ट्स: सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट समेत विभिन्न परोपकारी ट्रस्टों का समूह है। टाटा संस में करीब 66% हिस्सेदारी होने के कारण इसकी भूमिका कारोबारी फैसलों में भी महत्वपूर्ण है। इसके संसाधनों का बड़ा हिस्सा शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण से जुड़े कामों में लगाया जाता है।

    फिलहाल चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति और टाटा संस की लिस्टिंग दोनों ही अगले चरण की मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रिया पर निर्भर हैं। बोर्ड के फैसले के बाद अब निगाह इस बात पर है कि टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के बीच यह मतभेद किस तरह आगे बढ़ता है।

  • टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    टाटा संस के पूर्व चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को मोदी कैबिनेट में जगह मिलने की अटकलों से दिल्ली में सियासी चर्चा तेज हुई

    नई दिल्ली । टाटा संस के चेयरमैन पद से हाल ही में इस्तीफा देने वाले एन चंद्रशेखरन का नाम अब केंद्र सरकार में संभावित मंत्री पद को लेकर राजनीतिक चर्चाओं में सामने आ रहा है। दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में यह अटकल तेज है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में संभावित फेरबदल के दौरान चंद्रशेखरन को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या पुष्टि नहीं हुई है।

    राजनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार चंद्रशेखरन को कॉर्पोरेट मामलों या शिक्षा जैसे किसी मंत्रालय की जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना पर बात हो रही है। कुछ नेताओं का कहना है कि उन्होंने इस तरह की चर्चा सुनी है। ऐसे में फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक नियुक्ति से जुड़ी अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    चंद्रशेखरन ने हाल में टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने अपने मौजूदा कार्यकाल की समाप्ति के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने की इच्छा जताई थी। बताया गया कि उन्होंने 12 अगस्त को इस्तीफा दिया था और उनका वर्तमान कार्यकाल 20 फरवरी को समाप्त होना था। उनके इस्तीफे के पीछे टाटा ट्रस्ट बोर्ड के सदस्यों के साथ मतभेदों की चर्चा भी सामने आई है।

    चंद्रशेखरन की उम्र 63 वर्ष है। राजनीतिक नियुक्तियों के संदर्भ में यह उम्र अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है। भारतीय जनता पार्टी में वरिष्ठ पदों के लिए 75 वर्ष की आयु सीमा का नियम चर्चा में रहा है, हालांकि अलग-अलग परिस्थितियों में इसके अपवाद भी देखे गए हैं। इसी वजह से उनकी उम्र को संभावित जिम्मेदारी के रास्ते में बड़ी बाधा के रूप में नहीं देखा जा रहा है।

    शिक्षा मंत्रालय को लेकर चंद्रशेखरन का नाम सामने आने की चर्चा ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी कई नेताओं के पास रही है। स्मृति ईरानी, प्रकाश जावड़ेकर, रमेश पोखरियाल और धर्मेंद्र प्रधान इस पद पर रह चुके हैं। अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक परिस्थितियों में इन सभी को बाद में पद से हटना पड़ा।

    शिक्षा क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों ने भी संभावित बदलाव को लेकर चर्चाओं को बढ़ाया है। परीक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार से जुड़े मुद्दे लगातार राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहे हैं। परीक्षा सुधारों के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति की जिम्मेदारी इंफोसिस के पूर्व सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को दिए जाने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सरकार शिक्षा व्यवस्था में विशेषज्ञता रखने वाले गैर-राजनीतिक व्यक्तियों को अधिक भूमिका देने पर विचार कर रही है।

    इसी संदर्भ में चंद्रशेखरन की संभावित नियुक्ति को लेकर भी चर्चा हो रही है। उद्योग और प्रबंधन क्षेत्र में लंबे अनुभव के कारण उन्हें प्रशासनिक और आर्थिक मामलों की समझ रखने वाला व्यक्ति माना जाता है। यदि सरकार उन्हें कोई जिम्मेदारी देती है तो यह पारंपरिक राजनीतिक नियुक्तियों से अलग एक महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकता है।

    फिलहाल शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अंतरिम रूप से प्रह्लाद जोशी के पास है। यह व्यवस्था उस समय बनी थी जब NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सवाल उठे और धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। ऐसे में अब निगाहें संभावित कैबिनेट फेरबदल और शिक्षा मंत्रालय के लिए सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। चंद्रशेखरन के नाम पर चल रही चर्चाओं के बीच सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि उनकी नियुक्ति को लेकर अभी कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।

  • टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    नई दिल्ली ।टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने की घोषणा के बाद बुधवार को टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने नेतृत्व परिवर्तन की खबर पर सतर्क प्रतिक्रिया दी और समूह की प्रमुख कंपनियों में बिकवाली बढ़ गई। कारोबार के दौरान कुछ शेयरों में करीब छह प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    सबसे अधिक दबाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान टीसीएस का शेयर करीब 5.9 प्रतिशत तक टूटकर 2,300.10 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह लगभग 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,328 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।

    टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी करीब चार प्रतिशत तक कमजोरी रही। सत्र के दौरान यह 334.20 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो लगभग 3.85 प्रतिशत की गिरावट थी। टाटा स्टील के शेयर भी दो प्रतिशत से अधिक फिसले और एक समय 2.4 प्रतिशत गिरकर 183.60 रुपये के स्तर तक पहुंच गए।

    टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और यह करीब 2.65 प्रतिशत गिरकर 4,992 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर भी लगभग दो प्रतिशत कमजोर रहे। समूह की अन्य कंपनियों में टाटा एलेक्सी, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर और ट्रेंट के शेयरों में भी करीब दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार से जुड़े शेयर, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और तेजस नेटवर्क्स भी दबाव में रहे। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ कुछ कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर से सुधार देखने को मिला। दूसरी ओर टाटा केमिकल्स ने इस कमजोर माहौल में मजबूती दिखाई और उसके शेयरों में करीब दो प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उनका यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से पहले सामने आया है।

    इस घोषणा के साथ टाटा समूह में करीब नौ वर्षों से चले आ रहे चंद्रशेखरन के शीर्ष नेतृत्व के अगले वर्ष समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो गई है। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और करीब तीन दशक तक टीसीएस में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया। वर्ष 2009 में वह टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। समूह की विभिन्न कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, धातु, ऊर्जा, विमानन और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करती हैं। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाइटन जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन पर समूह के नेतृत्व से जुड़े फैसलों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

    अब बाजार की नजर टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पर रहेगी। निवेशक यह भी देखेंगे कि नया नेतृत्व समूह की मौजूदा कारोबारी रणनीति, निवेश प्राथमिकताओं और विभिन्न कंपनियों के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। फिलहाल चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े इस फैसले ने टाटा समूह के शेयरों में निकट अवधि की अनिश्चितता बढ़ा दी है।

  • चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता

    चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता


    नई दिल्ली ।
    टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर बुधवार को अटकलें तेज हो गईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम से पहले अपने पद से हटने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में टाटा संस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन चेयरमैन के रूप में बने रहने के लिए उनका टाटा संस के निदेशक के तौर पर पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली एजीएम में उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर शेयरधारकों को मतदान करना है।

    रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चंद्रशेखरन अपने करीबी सहयोगियों के साथ इस विकल्प पर चर्चा कर चुके हैं कि वह शेयरधारकों के संभावित विवादास्पद मतदान का सामना करने के बजाय स्वयं पद छोड़ दें। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह वास्तव में इस्तीफा देने जा रहे हैं या नहीं।

    नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है और समूह की रणनीतिक दिशा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बताया गया है कि इस वर्ष फरवरी में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति से जुड़े फैसले को टाल दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद पुनर्नियुक्ति के मामले में अंतिम निर्णय आगे बढ़ा दिया गया।

    हालांकि, इन घटनाक्रमों को लेकर टाटा समूह की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इसलिए चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की खबर को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति एजीएम से पहले या शेयरधारकों के मतदान के बाद अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ करीब चार दशक का जुड़ाव रहा है। उन्होंने 1987 में समूह में अपने करियर की शुरुआत की थी। आगे चलकर उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उनके नेतृत्व में टीसीएस ने वैश्विक आईटी सेवा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की।

    वर्ष 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने समूह की विभिन्न कंपनियों और कारोबारों से जुड़े रणनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर सामने आई खबरों ने निवेशकों और बाजार में भी ध्यान खींचा है।

    बुधवार सुबह कारोबार के दौरान टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर एनएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 1,066 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। टीसीएस में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट रही और शेयर करीब 2,424.50 रुपये तक पहुंचा।

    टाइटन कंपनी का शेयर लगभग 1.03 प्रतिशत गिरकर 5,075.10 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं टाटा पावर में करीब 0.9 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई और शेयर लगभग 376.60 रुपये के स्तर पर रहा।

    टाटा संस के नेतृत्व से जुड़ी स्थिति पर अब 18 अगस्त की एजीएम महत्वपूर्ण होगी। शेयरधारकों के मतदान और कंपनी की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा के बाद ही चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने या संभावित बदलाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

  • एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस का संयुक्त घाटा वित्त वर्ष 26 में 22,238 करोड़ रुपये पहुंचा, सुधार प्रक्रिया लंबी रहने के संकेत

    नई दिल्ली । टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया और उसकी सहायक बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस को वित्त वर्ष 2025-26 में संयुक्त रूप से 22,238 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। यह पिछले वित्त वर्ष के 10,859 करोड़ रुपये के घाटे की तुलना में दोगुने से भी अधिक है। इसी अवधि में दोनों एयरलाइंस की संयुक्त आय में भी लगभग 9 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी का पुनर्गठन अभी चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है।

    वार्षिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों एयरलाइंस की कुल संयुक्त आय 71,870 करोड़ रुपये रही। परिचालन गतिविधियों के बावजूद बढ़ते खर्च, आधुनिकीकरण की प्रक्रिया और अन्य परिचालन चुनौतियों का असर कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई दिया। हालांकि प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान चरण को लंबे समय तक चलने वाली परिवर्तन प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए।

    एयर इंडिया ने इस दौरान 51,452 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जबकि उसका शुद्ध घाटा 15,368 करोड़ रुपये रहा। दूसरी ओर एयर इंडिया एक्सप्रेस का राजस्व 19,088 करोड़ रुपये दर्ज किया गया और कंपनी को 6,767 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ। दोनों कंपनियों के संयुक्त परिणाम बताते हैं कि एयरलाइन समूह अभी भी व्यापक पुनर्गठन और निवेश के दौर में है।

    वर्तमान शेयरधारिता संरचना के अनुसार एयर इंडिया में 73.82 प्रतिशत हिस्सेदारी टाटा संस के पास है, जबकि 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी सिंगापुर एयरलाइंस के स्वामित्व में है। इसके अलावा 1.08 प्रतिशत हिस्सेदारी कर्मचारियों के पास है, जो वर्ष 2022 में निजीकरण के बाद लागू की गई कर्मचारी शेयर लाभ योजना के तहत प्रदान की गई थी।

    एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने शेयरधारकों के नाम अपने संदेश में कहा कि किसी वैश्विक स्तर की एयरलाइन का निर्माण अल्प अवधि में संभव नहीं होता। उनके अनुसार एयर इंडिया के व्यापक परिवर्तन को कुछ तिमाहियों के प्रदर्शन से नहीं आंका जाना चाहिए, क्योंकि ऐसी संस्थाओं का विकास वर्षों की निरंतर प्रक्रिया का परिणाम होता है।

    उन्होंने कहा कि एयर इंडिया का पुनरुद्धार लगभग पांच से दस वर्षों की यात्रा है। जब टाटा समूह ने वर्ष 2022 में एयरलाइन का अधिग्रहण किया था, तब कंपनी कई परिचालन और संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही थी। इन चुनौतियों में पुराने सिस्टम और प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, विमान बेड़े का नवीनीकरण, तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना, संगठनात्मक संस्कृति में सुधार और वैश्विक स्तर की परिचालन क्षमता विकसित करना शामिल है।

    चेयरमैन ने यह भी संकेत दिया कि विमानों के पुर्जों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में लंबे समय से बनी हुई बाधाओं ने भी सुधार प्रक्रिया की गति को प्रभावित किया है। इसके बावजूद कंपनी अपने बेड़े के विस्तार, सेवा गुणवत्ता में सुधार और परिचालन दक्षता बढ़ाने की दिशा में लगातार निवेश कर रही है।

    वित्तीय परिणाम यह दर्शाते हैं कि एयर इंडिया का पुनर्गठन अभी शुरुआती चरणों से आगे बढ़ते हुए एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। टाटा समूह एयरलाइन को प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से लगातार निवेश कर रहा है। आने वाले वर्षों में आधुनिकीकरण, परिचालन सुधार और सेवा विस्तार की योजनाओं का प्रभाव कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन पर दिखाई देने की उम्मीद की जा रही है।

  • टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के भविष्य का फैसला 24 फरवरी को… ग्रुप बोर्ड की होगी अहम बैठक

    टाटा संस के चेयरमैन चंद्रशेखरन के भविष्य का फैसला 24 फरवरी को… ग्रुप बोर्ड की होगी अहम बैठक


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह (Tata Group) के लिए अगला सप्ताह काफी अहम होगा। ये हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अगले सप्ताह टाटा संस के बोर्ड की मीटिंग (Board meeting of Tata Sons) होने वाली है। 24 फरवरी को प्रस्तावित इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) के तीसरे कार्यकाल पर फैसला होगा। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में बोर्ड के सामने तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा जा सकता है। बिजनेस स्टैंडर्ड के एक सूत्र के अनुसार टाटा संस बोर्ड में कार्यकाल बढ़ाने की चर्चा से चंद्रशेखरन खुद को अलग रखेंगे। बता दें कि एन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल अगले वर्ष पूरा होने वाला है, ऐसे में समय से पहले ही उनके नेतृत्व को लेकर स्पष्टता लाने की तैयारी की जा रही है।


    पिछले साल नोएल टाटा ने रखा था प्रस्ताव

    टाटा संस के सबसे बड़े शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स ने पिछले साल एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की सिफारिश करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया था। उस बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और वाइस चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन ने चंद्रशेखरन को टाटा संस के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल के लिए फिर से नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा था। अब इस प्रस्ताव पर बोर्ड की मंजूरी जरूरी है।


    रतन टाटा ने की थी सिफारिश

    चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल की बात करें तो साल 2022 में जब कार्यकाल बढ़ाया गया था, तब टाटा ट्रस्ट्स के तत्कालीन अध्यक्ष और समूह के मानद अध्यक्ष रतन टाटा ने टाटा संस बोर्ड की बैठक में हिस्सा लिया था। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों के लिए चंद्रशेखरन के नाम की सिफारिश की थी। बता दें कि नमक से सेमीकंडक्टर तक के कारोबार में सक्रिय टाटा समूह इस समय कई रणनीतिक विस्तार योजनाओं पर काम कर रहा है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की निरंतरता को समूह की दीर्घकालिक रणनीति के लिए अहम माना जा रहा है। चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने एयरलाइन, टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार में बड़े फैसले लिए हैं, जिससे कंपनी की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हुई है।


    कौन है एन चंद्रशेखरन?

    नटराजन चंद्रशेखरन टाटा समूह की सभी कंपनियों के प्रमोटर टाटा संस के चेयरमैन हैं। वह अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में चेयरमैन नियुक्त हुए। वे टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा पावर, एयर इंडिया, इंडियन होटल्स कंपनी और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज सहित समूह की कई ऑपरेटिंग कंपनियों के बोर्ड के भी अध्यक्ष हैं।चेयरमैन बनने से पहले, वे टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थे, जहां उन्होंने 30 वर्षों तक सेवा की। वह 2017 तक आठ वर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में शामिल हैं।