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  • अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ओवरथ्रो से लेकर रन आउट तक…. ICC ने किया कई नियमों में बदलाव

    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ओवरथ्रो से लेकर रन आउट तक…. ICC ने किया कई नियमों में बदलाव


    नई दिल्ली।
    इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (International Cricket Council- ICC) ने इंटरनेशनल क्रिकेट (International Cricket) में 1 अक्टूबर (गुरुवार) 2026 से कई नए प्लेइंग कंडीशन्स (New playing conditions) लागू किए गए हैं. हालांकि, जो सीरीज पहले से चल रही हैं, उनमें पुराने नियम ही लागू रहेंगे।


    1. बल्लेबाज ने समय गंवाया तो 5 रन की पेनल्टी

    अगर बल्लेबाज निर्धारित समय के अंदर अगली गेंद खेलने के लिए तैयार नहीं होता है, तो
    – पहली गलती पर चेतावनी
    – दूसरी गलती पर अंतिम चेतावनी
    – तीसरी और उसके बाद हर गलती पर गेंदबाजी करने वाली टीम को 5 पेनल्टी रन


    2. दिन के टेस्ट में पिंक बॉल का ट्रायल

    अब आपसी सहमति से दिन में खेले जाने वाले टेस्ट मैचों में पिंक बॉल का इस्तेमाल ट्रायल के तौर पर किया जा सकता है. इसका उद्देश्य खराब रोशनी के कारण खेल रुकने की संभावना को कम करना है.

    हालांकि, पिंक बॉल के इस्तेमाल का फैसला टेस्ट शुरू होने से पहले करना होगा. मैच शुरू होने के बाद रेड बॉल से पिंक बॉल या पिंक बॉल से रेड बॉल में बदलाव नहीं किया जा सकता.


    3. महिला क्रिकेट की गेंद के आकार और वजन के नियम सख्त

    महिला और जूनियर क्रिकेट में गेंद के आकार और वजन को लेकर नए नियम बनाए गए हैं. अब पुरुष, महिला और जूनियर क्रिकेट के लिए तीन अलग-अलग आकार और वजन निर्धारित किए गए हैं.


    4. ओवरथ्रो की परिभाषा स्पष्ट

    अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि ओवरथ्रो कब माना जाएगा. अगर कोई फील्डर गेंद को स्टंप की दिशा में फेंकता है ताकि रन रोका जा सके या रन आउट किया जा सके, तो यह ओवरथ्रो माना जाएगा. लेकिन केवल गेंद को रोकने या दूसरे फील्डर को पास करने की कोशिश में हुई मिस्फील्ड को ओवरथ्रो नहीं माना जाएगा.


    5. गेंद कब स्थिर मानी जाएगी?

    अब अंपायर को यह तय करने में ज्यादा अधिकार होगा कि गेंद आखिरकार स्थिर हो गई है या नहीं. गेंद का बॉलर या विकेटकीपर के हाथ में होना जरूरी नहीं होगा. यह नियम खासकर करीबी मुकाबलों में महत्वपूर्ण हो सकता है, जैसे मैच की आखिरी गेंद पर.


    6. रन आउट और स्टंपिंग में फील्डर का पूरा कंट्रोल जरूरी

    अगर फील्डर गेंद को पकड़कर स्टंप गिराता है, तो उसके पास गेंद पर पूरा नियंत्रण होना जरूरी होगा. सिर्फ हाथ से गेंद को छूना और उसी दौरान स्टंप गिर जाना पर्याप्त नहीं माना जाएगा.


    कब से लागू होंगे नए नियम?
    ये बदलाव 1 अक्टूबर 2026 या उसके बाद शुरू होने वाली इंटरनेशनल सीरीज में लागू होंगे. जो सीरीज 1 अक्टूबर से पहले शुरू हो चुकी हैं, वे पुराने प्लेइंग कंडीशन्स के तहत जारी रहेंगी. नए नियमों का फोकस खास तौर पर खेल की गति बढ़ाने, समय बर्बाद रोकने, गेंद के आकार और वजन को स्पष्ट करने और फील्डिंग से जुड़े नियमों में भ्रम दूर करने पर है.

  • सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…

    सब्सिडी का लाभ लेने वाले LPG ग्राहकों के लिए 1 अक्टूबर से बदलेगा ये नियम…


    नई दिल्ली।
    घरेलू एलपीजी सिलेंडर (Domestic LPG cylinder) पर सब्सिडी का लाभ लेने वाले उपभोक्ताओं के लिए जरूरी खबर है। दरअसल, 1 अक्टूबर 2026 से सब्सिडी के साथ विनियमित खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) पर घरेलू LPG रिफिल बुक कराने के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण (Biometric Aadhaar Authentication- BAA) पूरा करना अनिवार्य होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो सब्सिडी का लाभ मिलने में दिक्कत हो सकती है।


    क्या है इसका मकसद?

    बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण से यह सुनिश्चित होता है कि सब्सिडी वाली एलपीजी केवल वास्‍तविक और योग्‍य परिवारों तक पहुंचे। प्रत्‍येक कनेक्शन को आधार-प्रमाणित उपभोक्‍ता से जोड़ने से सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडरों का कॉमर्शियल और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए डायवर्जन रोकने में मदद मिलती है। इसके अलावा, डुप्लीकेट और अयोग्य कनेक्शन हटते हैं। वहीं, सब्सिडी पहुंचाने का तरीका पारदर्शी और सही लोगों तक पहुंचने वाला बनता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्‍य किसी भी वास्‍तविक परिवार को एलपीजी से वंचित करना नहीं है और प्रत्‍येक योग्य उपभोक्‍ता इसे कई आसान तरीकों से पूरा कर सकते हैं।


    कितने लोग कर चुके बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण

    पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि 19 सितंबर तक देश के 27.43 करोड़ सक्रिय घरेलू एलपीजी उपभोक्ता यानी 89.9 प्रतिशत अपना बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा कर चुके हैं। इन उपभोक्ताओं को दोबारा प्रमाणीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी और उन्हें रिफिल पहले की तरह मिलता रहेगा।


    एक अक्टूबर से पहले करना जरूरी

    जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, वे एक अक्टूबर से पहले इसे पूरा कर सकते हैं। यह प्रक्रिया एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी के समय भी पूरी की जा सकती है। डिलीवरी कर्मचारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) के मोबाइल ऐप के माध्यम से मौके पर ही प्रमाणीकरण करा सकता है। इसके अलावा उपभोक्ता अपने एलपीजी वितरक की दुकान पर जाकर भी यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। उपभोक्ताओं के लिए घर बैठे मोबाइल ऐप से स्वयं ई-केवाईसी पूरा करने का विकल्प भी उपलब्ध है।

    इंडेन के ग्राहक इंडेनऑइलवन, भारत गैस के ग्राहक हेलोबीपीसीएल और एचपी गैस के ग्राहक एचपी पे ऐप के माध्यम से यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। स्वयं ई-केवाईसी करने के संबंध में वीडियो ट्यूटोरियल पीएमयूवाई पोर्टल पर उपलब्ध है।

    जिन उपभोक्ताओं ने बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा नहीं किया है, उनके लिए प्रमाणीकरण पूरा होने के बाद सब्सिडी के साथ खुदरा बिक्री मूल्य पर रिफिल बुकिंग शुरू हो जाएगी। हालांकि, जो उपभोक्ता बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण नहीं कराना चाहते या किसी कारण से इसे पूरा करने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए भी एलपीजी प्राप्त करने का विकल्प रहेगा।


    LPG पर करीब ₹210 की सब्सिडी

    सरकार घरेलू LPG को उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनाए रखने के लिए वित्तीय सहायता भी दे रही है। सितंबर 2026 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू LPG सिलेंडर पर निहित सब्सिडी करीब ₹210 प्रति सिलेंडर बताई गई है।

  • रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता

    रिकॉर्डतोड़ कीमत ने बदले आभूषण बाजार के नियम…. अब कम वजन का सोना खरीद रहा आम उपभोक्ता


    नई दिल्ली।
    सोने (Gold) की रिकॉर्डतोड़ कीमतों (Record-Breaking Prices) ने भारत के करीब 7 लाख करोड़ रुपये के आभूषण बाजार के बुनियादी नियमों को पूरी तरह बदल दिया है। पहली नजर में यह बड़ा विरोधाभास लगता है, लेकिन आम उपभोक्ता कम वजन का सोना (Low Weight Gold) खरीद रहा है, जबकि कारोबारियों की तिजोरियां रिकॉर्ड कमाई से भर रही हैं। यानी अब बाजार की वृद्धि ज्यादा ग्राम सोना बेचने से नहीं, बल्कि प्रति ग्राम अधिक वैल्यू निकालने से तय हो रही है।

    वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2026 की पहली छमाही में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 17.1 फीसदी गिर गई, लेकिन खर्च की गई कुल रकम 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई। इस बदलाव को भांपते हुए आभूषण कारोबारियों ने हल्के वजन, कम कैरेट, स्टड डायमंड्स और पुराने सोने की रीसाइक्लिंग को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है।


    ब्रांडेड जूलरी पर बढ़ रहा भरोसा :

    जीएसटी, अनिवार्य हॉलमार्किंग और पैन कार्ड नियमों ने असंगठित सुनारों के पारंपरिक बाजार को झटका दिया है। केयरएज के निदेशक अखिल गोयल के मुताबिक, पहले ग्राहक अपने खानदानी सुनार के व्यक्तिगत संबंध पर भरोसा करते थे। लेकिन अब संगठित ब्रांड्स ने इसकी जगह मानकीकृत शुद्धता, पारदर्शी बिलिंग, आसान बायबैक व डिजिटल डिस्कवरी का ऐसा मजबूत ढांचा खड़ा किया है, जो टियर-2 व टियर-3 शहरों में भी तेजी से अपनी पैठ बना रहा है।


    वजन घटा फिर भी बिल बढ़ा

    आंकड़े बताते हैं कि सोने की रिकॉर्ड कीमतों के कारण खरीदारों का व्यवहार और बाजार का ढांचा तेजी से बदल रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में देश में सोने के जेवरों की मांग वजन के लिहाज से 15.4 फीसदी गिरकर 75.1 टन रह गई, लेकिन इसी अवधि में खर्च की गई कुल रकम 34.4 फीसदी के उछाल के साथ 1.13 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वहीं, पूरे 2026 की पहली छमाही की बात करें तो सोने की मांग वजन में 17.1 फीसदी घटी, जबकि कुल खरीदारी की वैल्यू 40 फीसदी बढ़कर 2.13 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो यह साबित करता है कि उपभोक्ता अब बजट तो बढ़ा रहे हैं, लेकिन वजन कम खरीद रहे हैं।

    इस बदलाव का सीधा फायदा संगठित और बड़े ब्रांड्स को मिला है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में टाइटन की जूलरी आय में 43 फीसदी की वृद्धि हुई, जिसमें तनिष्क और कैरेटलेन में खरीदारों की संख्या दोहरे अंकों में बढ़ी। इसी तरह कल्याण ज्वैलर्स का समेकित राजस्व 46 फीसदी बढ़कर 10,589 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जिसमें कुल बिक्री का 55 फीसदी से अधिक हिस्सा पुराने सोने की रीसाइक्लिंग से आया।

    खुदरा बाजार में भी बड़ा बदलाव आया है। सीबीआरई के आंकड़ों के अनुसार, कुल संगठित रिटेल लीजिंग में ज्वैलरी सेक्टर की हिस्सेदारी 2019 के मात्र 2 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 8 फीसदी हो गई है। 8,000 वर्ग फुट से बड़े एक्सपीरियंस सेंटर्स और मेगा शोरूम का दबदबा 50 फीसदी तक पहुंच चुका है।


    पुराना सोना बना ग्रोथ इंजन

    महंगे अंतरराष्ट्रीय आभूषणों से बचने के लिए कंपनियों ने भारतीय घरों की तिजोरियों में पड़े सोने को रिसाइकिल करने का नया मॉडल खड़ा किया है। कल्याण ज्वैलर्स के कार्यकारी निदेशक रमेश कल्याणरामन के अनुसार, मई में शुरू हुए शाइन विद इंडिया अभियान के बाद जून में कंपनी के कुल राजस्व में पुराने सोने के एक्सचेंज की हिस्सेदारी 55 से 60 फीसदी तक पहुंच गई है। कंपनियों को अब महंगा विदेशी सोना आयात करने के बजाय घरेलू ग्राहकों से ही कच्चा माल मिल रहा है, जिससे उनकी पूंजी की लागत घटी है और मुनाफा मार्जिन सुरक्षित हुआ है।


    आभूषण अब निवेश नहीं

    केयरएज रेटिंग्स और सीबीआरई की संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि युवा पीढ़ी के बीच सोने की पारंपरिक 22 कैरेट वाली भारी जूलरी की जगह डेली वियर और स्टाइलिश गहनों ने ले ली है। सेनको गोल्ड और तनिष्क जैसे ब्रांड्स ने 9-कैरेट और 14-कैरेट में स्टडड डायमंड जूलरी पेश की है। जो ग्राहक 22 कैरेट के भारी सोने का सेट नहीं खरीद पा रहे, वे उसी बजट में हल्के 14 कैरेट सोने के साथ हीरे जड़े आकर्षक डिजाइन खरीद रहे हैं। सेनको ने लाइफस्टाइल ब्रांड सेनेस और पुरुषों के लिए 20,000 से एक लाख रुपये के टाइटेनियम गहनों का दायरा बढ़ाया है। युवा खरीदार अब गहनों को सिर्फ लॉकर में बंद रखने वाले निवेश के बजाय रोज पहनने वाले फैशन एक्सेसरी के रूप में देख रहे हैं।

  • ITR से लेकर LPG-तत्काल टिकट बुकिंग तक…. 1 अगस्त से बदल जाएंगे ये नियम

    ITR से लेकर LPG-तत्काल टिकट बुकिंग तक…. 1 अगस्त से बदल जाएंगे ये नियम


    नई दिल्ली।
    हर नए महीने की पहली तारीख अपने साथ कई नए बदलाव (Rules Changing ) लेकर आती है, जिनका सीधा असर देश के आम नागरिकों के घरेलू बजट और रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ता है। 1 अगस्त 2026 ( 1st August 2026) से भी देश में कई महत्वपूर्ण नियम (New Rules) बदलने जा रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब, यात्रा, टैक्स और बैंकिंग सेवाओं से जुड़े हुए हैं।

    इन नए नियमों में रसोई गैस (LPG) की कीमतों से लेकर, रेलवे (Railways, Banking) की तत्काल टिकट खिड़की, क्रेडिट कार्ड के सर्विस चार्ज, आईटीआर पेनल्टी और पहचान सत्यापन की पूरी व्यवस्था शामिल है। सही जानकारी न होने पर आपको वित्तीय नुकसान झेलना पड़ सकता है। आइए बेहद आसान और सरल भाषा में समझते हैं कि 1 अगस्त से देश में कौन से 5 बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।


    एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें

    तेल विपणन कंपनियां हर महीने की पहली तारीख को रसोई गैस सिलेंडरों के दामों की समीक्षा करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए 1 अगस्त को घरेलू और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के नए रेट जारी किए जाएंगे। अगर कमर्शियल गैस सिलेंडरों के दाम बढ़ते हैं, तो बाहर होटलों और रेस्टोरेंट में खाना-पीना महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर आपके मासिक बजट पर पड़ेगा।


    तत्काल टिकट बुकिंग में टोकन से जुड़ा नया नियम

    पश्चिम मध्य रेलवे 1 अगस्त से रिजर्वेशन काउंटरों पर तत्काल टिकटों की बुकिंग के लिए नया ‘टोकन सिस्टम’ लागू कर रहा है। अब काउंटरों पर लंबी लाइन और धक्का-मुक्की रोकने के लिए टोकन बांटने का समय तत्काल बुकिंग खुलने के समय के साथ मिलाया जा रहा है। एसी तत्काल के लिए सुबह 8:30-9:00 बजे और नॉन-एसी के लिए सुबह 9:00-9:30 बजे टोकन मिलेंगे, इसके बाद ही काउंटर से तत्काल टिकट बुक कर सकेंगे।


    क्रेडिट कार्ड और बैंकिंग चार्ज में बड़ा बदलाव

    1 अगस्त से कुछ बैंक अपने क्रेडिट कार्ड से जुड़े शुल्क, रिवॉर्ड पॉइंट्स या अन्य नियमों में बदलाव कर सकते हैं। बता दें कि यह बदलाव सभी बैंकों पर लागू नहीं होगा। इसलिए अगर आप क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने बैंक की वेबसाइट या एप पर जाकर नए नियम और शुल्क जरूर चेक करें।


    आईटीआर (ITR) फाइलिंग पर भारी लेट फीस और पेनल्टी

    वित्तीय वर्ष के लिए बिना जुर्माने के इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। जो लोग इस समय सीमा तक अपना रिटर्न फाइल नहीं कर पाए हैं, उन्हें 1 अगस्त से बिलेटेड रिटर्न भरने पर आय के आधार पर भारी जुर्माना (पेनल्टी) देना होगा। इसलिए टैक्सपेयर्स को किसी भी अन्य कानूनी पचड़े से बचने के लिए जल्द से जल्द लेट फीस के साथ रिटर्न भरने की सलाह दी जाती है।


    सीकेवाईसी (CKYC) 2.0 की शुरुआत

    1 अगस्त से देश के बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों में ग्राहक सत्यापन को सुरक्षित बनाने के लिए ‘सेंट्रल नो योर कस्टमर’ यानी सीकेवाईसी 2.0 सिस्टम लागू होने जा रहा है। इसके तहत ग्राहकों को 14 अंकों का एक यूनिक सीकेवाईसी नंबर मिलेगा। इस नए सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आपको हर बैंक, बीमा कंपनी या म्यूचुअल फंड में अलग-अलग केवाईसी दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

  • अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी

    अमेरिका में भारतीय छात्रों को बड़ा झटका, F-1 वीजा पर रहने की अवधि 4 साल तक सीमित करने की तैयारी


    नई दिल्ली। अमेरिका में उच्च शिक्षा हासिल करने का सपना देख रहे लाखों विदेशी छात्रों, खासकर भारतीय विद्यार्थियों के लिए नई चुनौती सामने आ सकती है। अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने F-1 छात्र वीजा नियमों में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत अमेरिका में विदेशी छात्रों के रहने की अवधि अधिकतम चार साल तक सीमित की जा सकती है।

    यदि यह नियम लागू होता है, तो दशकों से चली आ रही ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ (Duration of Status) व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। वर्तमान व्यवस्था के तहत F-1 वीजा वाले छात्र तब तक अमेरिका में रह सकते हैं, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम में सक्रिय हैं और वीजा की सभी शर्तों का पालन कर रहे हैं।

    चार साल से ज्यादा पढ़ाई के लिए लेनी होगी मंजूरी
    रिपोर्ट्स के अनुसार, नए नियम के तहत F-1 वीजा पर अमेरिका जाने वाले छात्रों को सामान्य तौर पर अधिकतम चार साल तक रहने की अनुमति मिलेगी। अगर किसी छात्र का कोर्स, रिसर्च या प्रशिक्षण चार साल से अधिक समय तक चलता है, तो उसे अपनी वैध अवधि समाप्त होने से पहले DHS से एक्सटेंशन की मंजूरी लेनी होगी। समय पर अनुमति नहीं मिलने की स्थिति में छात्र की कानूनी स्थिति प्रभावित हो सकती है।

    यह बदलाव सिर्फ F-1 वीजा तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्तावित नियम J-1 एक्सचेंज विजिटर वीजा और विदेशी मीडिया प्रतिनिधियों को दिए जाने वाले I वीजा पर भी निश्चित अवधि लागू कर सकता है। हालांकि, लागू होने से पहले इस नियम को अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा।

    सरकार ने बताई राष्ट्रीय सुरक्षा वजह
    ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्र वीजा प्रणाली की निगरानी को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी बनाना है। वहीं, अमेरिकी विश्वविद्यालयों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संगठनों ने चिंता जताई है कि नए नियमों से चार साल से अधिक अवधि वाले शैक्षणिक कार्यक्रमों में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    भारतीय छात्रों पर सबसे ज्यादा असर की आशंका
    इस बदलाव का प्रभाव भारतीय छात्रों पर खास तौर पर पड़ सकता है। ‘ओपन डोर्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में अमेरिका के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में 3.31 लाख से अधिक भारतीय छात्र अध्ययन कर रहे थे। यह संख्या अमेरिका में पढ़ने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय छात्रों का करीब 30 प्रतिशत है।

    भारतीय छात्रों का एक बड़ा हिस्सा पीएचडी, रिसर्च आधारित मास्टर्स, मेडिकल ट्रेनिंग, इंजीनियरिंग रिसर्च और अन्य पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिला लेता है, जिनकी अवधि कई बार चार साल से ज्यादा हो जाती है। ऐसे छात्रों को अब पढ़ाई जारी रखने के लिए समय रहते DHS से अतिरिक्त समय की अनुमति लेनी पड़ सकती है।

    एक्सटेंशन में देरी से बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें
    विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी छात्र का एक्सटेंशन आवेदन समय पर मंजूर नहीं होता या दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक देरी अथवा अन्य कारणों से उसकी वैध अवधि खत्म हो जाती है, तो वह अमेरिका में ‘अनलॉफुल प्रेजेंस’ (अवैध रूप से रहने) की स्थिति में आ सकता है।

    इसका असर भविष्य में वीजा आवेदन, रोजगार के अवसर और अमेरिका में दोबारा प्रवेश पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस की समीक्षा पूरी होने और अंतिम प्रभावी तारीख घोषित होने तक F-1 छात्रों के लिए मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था ही जारी रहेगी।

  • निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम

    निवेशकों को बड़े नुकसान से बचाने के लिए SEBI का बड़ा फैसला… बदलेंगे Gold-Silver ETF के नियम


    नई दिल्ली।
    बाजार नियामक सेबी (Market Regulator SEBI) ने सोने और चांदी के ईटीएफ (Gold-Silver ETF) के कारोबारी नियमों में बदलाव करने का फैसला किया है। इसका मकसद है कि इनकी कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव के ज्यादा करीब रहें और निवेशकों को सही भाव पर खरीद-फरोख्त का मौका मिल सके। इससे आम निवेशकों को काफी फायदा होगा और अनचाहा नुकसान होने से बचाव हो सकेगा।

    दरअसल, दुनियाभर में सोने और चांदी की खरीद-बिक्री 24 घंटे होती है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी एक्सचेंज में भी इनकी कीमतें लगातार ऊपर-नीचे हो जाती हैं लेकिन भारत में ईटीएफ की खरीद-बिक्री शेयर बाजार के समय मुताबिक सुबह 9:15 से दोपहर 3:30 बजे तक ही होती है। इस दौरान इनके भाव एक तय सीमा (फिक्स्ड प्राइस बैंड) के भीतर ही घट-बढ़ सकते हैं।

    इस तय सीमा और समय अंतर की वजह से अक्सर भारतीय ईटीएफ की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमतों से पिछड़ जाती हैं या उनमें बड़ा अंतर आ जाता है। इसके चलते आम निवेशकों को सही दाम पर खरीद-बिक्री नहीं मिल पाती और कई बार बिना वजह नुकसान हो भी जाता है। वर्तमान में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है जिसकी वजह से निवेशकों को नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। इसके चलते सेबी ने ईटीएफ के कारोबारी नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है।


    क्या है नया प्रस्ताव

    सेबी ने अब ‘डायनामिक प्राइस बैंड’ लागू करने का सुझाव दिया है। इसका मतलब यह है कि कीमतों की सीमा बाजार की स्थिति के अनुसार बदली जा सकेगी। शुरुआत में एक तय सीमा रहेगी, लेकिन अगर बाजार में ज्यादा हलचल होती है तो यह दायरा बढ़ाया जा सकेगा। हर बड़े बदलाव के बाद कुछ समय का अंतर भी दिया जाएगा, ताकि बाजार स्थिर हो सके और घबराहट में खरीद-फरोख्त न हो। सेबी ने हाल ही में प्रस्ताव का मसौदा जारी किया है और मार्च 2026 तक लोगों से राय मांगी है, जिसके बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा।


    निवेशक ऐसे समझें योजना को

    प्रस्ताव के मुताबिक, नया दायरा छह फीसदी का होगा। यानी एक दिन में ईटीएफ के भाव छह फीसदी तक ऊपर या नीचे हो सकते हैं। अगर बाजार में तेज हलचल होती है तो इस दायरे को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा और हर बार यह तीन फीसदी तक बढ़ेगा। हर बदलाव के बाद बाजार को स्थिर होने के लिए 15 मिनट का समय दिया जाएगा। एक दिन में कुल दायरा ±20% की सीमा तक जा सकेगा। इसका सीधा फायदा यह होगा कि निवेशक को ईटीएफ की जो कीमत स्क्रीन पर दिखेगी, वह उसकी वास्तविक वैल्यू के करीब होगी।


    बाजार खुलने से पहले ही तय होगी दिशा

    सेबी ने एक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया है, जो है ‘प्री-ओपन सेशन’ की शुरुआत। शेयर बाजार की तरह अब गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ के लिए भी बाजार खुलने से पहले एक खास सत्र हो सकता है। इसका मकसद यह है कि रातभर में विदेशी बाजारों में जो भी बदलाव हुए हैं, उन्हें भारतीय बाजार खुलने से पहले ही समायोजित कर लिया जाए। इससे सुबह बाजार खुलते ही कीमतों में दिखने वाले भारी गैप को कम किया जा सकेगा और निवेशकों को एक संतुलित शुरुआत मिलेगी।