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  • 308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा

    308 पहियों वाले ‘बाहुबली’ ट्रक का क्यों बदला गया रूट? फुट ओवरब्रिज काटकर निकाला, अब इस रास्ते से लखीमपुर पहुंचेगा


    लखीमपुर।
    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में निर्माणाधीन चीनी मिल के प्लांट के लिए बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए लाया गया विशाल बॉयलर इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस भारी-भरकम मशीन से ज्यादा 308 पहियों वाला ट्रेलर लोगों का ध्यान खींच रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस ‘बाहुबली’ ट्रक के वीडियो तेजी से चर्चा में हैं। इसे देखने और वीडियो बनाने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ जुट रही है। फोटो और सेल्फी लेने के लिए उमड़ रही भीड़ के कारण ट्रेलर को आगे बढ़ने में परेशानी हो रही है। इसी के चलते इसके निर्धारित मार्ग में बदलाव करना पड़ा है।

    ट्रेलर को सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए पुलिस की टीम साथ चल रही है। रास्ते में आने वाले संकेतक बोर्ड और फुट ओवरब्रिज जैसी बाधाओं को हटाने के लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। गुरुवार को यह ट्रेलर हरहुआ से रिंग रोड फेज-1 होते हुए संदहा के पास पहुंचा। स्वर्वेद महामंदिर के नजदीक बने फुट ओवरब्रिज को इसके गुजरने के लिए देर शाम तक काटकर हटाया गया। इसके बाद ट्रेलर को वहां से निकाला गया।

    स्वर्वेद मंदिर के पास फुट ओवरब्रिज बना बाधा

    करीब 200 टन वजनी बॉयलर लेकर चल रहा 308 पहियों वाला ट्रेलर हरहुआ से आगे बढ़ते हुए उमरहां के पास पहुंचा तो स्वर्वेद महामंदिर के सामने बना पैदल फुट ओवरब्रिज रास्ते में बाधा बन गया। भारी-भरकम ट्रेलर को निकालने के लिए ओवरब्रिज के हिस्से को काटने का काम शुरू किया गया। इस दौरान आसपास के लोग विशाल ट्रक को देखने के लिए जमा रहे।

    ट्रेलर के हरहुआ, संदहा और उमरहां सहित विभिन्न स्थानों से गुजरने के दौरान बड़ी संख्या में लोग वीडियो और रील बनाते नजर आए। लोगों की भीड़ के चलते वाहन की रफ्तार प्रभावित हुई। संभावना जताई गई कि ट्रेलर गुरुवार देर रात उमरहां पहुंचेगा, जिसके बाद वह गाजीपुर की ओर रवाना होगा।

    डाफी टोल प्लाजा पर 693 रुपये का टोल

    लखीमपुर खीरी के लिए बॉयलर लेकर जा रहा मल्टी-एक्सल वैक्यूम ट्रेलर बुधवार दोपहर करीब 12 बजे के बाद डाफी टोल प्लाजा से आगे बढ़ा। यहां ट्रेलर से 693 रुपये टोल लिया गया। इसके बाद वाहन उल्टी लेन से रखौना होते हुए रिंग रोड पर पहुंचा। गंजारी स्टेडियम के पास ट्रेलर अपनी निर्धारित लेन में आया और देर शाम कोईराजपुर के पास पहुंचा।

    बॉयलर लेकर चलने वाला यह ट्रेलर डाफी टोल प्लाजा से अखरी, लठिया, कन्नाडाड़ी और मोहनसराय होते हुए राजातालाब की ओर बढ़ा था। गुरुवार सुबह इसे संदहा के रास्ते आगे गाजीपुर की ओर रवाना किया गया।

    ट्रेलर निकालने के लिए हटाए गए संकेतक और ओवरब्रिज

    करीब 200 टन वजनी यह विशाल ट्रेलर बॉयलर के साथ दोपहर करीब 1:30 बजे मोहनसराय पहुंचा। यहां रास्ते में लगे संकेतक बोर्ड को हटाना पड़ा। मोहनसराय-गंगापुर मोड़ पर फुट ओवरब्रिज को भी पहले ही काटकर हटाया जा चुका था।

    ट्रेलर के पहुंचने पर जेसीबी की मदद से संकेतक और फुट ओवरब्रिज के हिस्सों को ऊपर उठाकर रास्ता साफ किया गया। वाहन के गुजरने के बाद आवश्यक हिस्सों को दोबारा व्यवस्थित किया गया। ट्रेलर रखौना होते हुए रिंग रोड फेज-2 से आगे बढ़ा। इसके सुरक्षित आवागमन के लिए संबंधित मार्गों पर कुछ समय के लिए सामान्य यातायात भी रोका जाता रहा।

    दलदली जमीन में फंस गया था ट्रेलर

    इससे पहले भी 308 पहियों वाले ट्रेलर को रास्ते में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा पहुंचे इस ओवर डायमेंशन कार्गो बॉयलर को सड़क मार्ग से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा है। बिहार के नौबतपुर बॉर्डर पर पहुंचने के बाद ट्रेलर शुक्रवार को कटसिला के पास हाईवे पर रात होने के कारण रोक दिया गया था।

    शनिवार को पचफेड़वा के पास रिंग रोड के पुल के कारण ट्रेलर को वैकल्पिक मार्ग से निकालने की योजना बनाई गई, लेकिन निर्धारित तरीके से आगे बढ़ना संभव नहीं हो सका। रविवार को बॉयलर लेकर चल रहा ट्रेलर रेवसा के पास रिंग रोड की पूर्वी सर्विस लेन पर पहुंचा। आगे जमीन दलदली होने के कारण उसे वहीं रोकना पड़ा। बाद में देर शाम ट्रेलर रिंग रोड पार कर पश्चिमी लेन तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, वाहन चंदौली में भी करीब दो दिन तक फंसा रहा, जहां से उसे निकालने के लिए रास्ता तैयार किया गया।

    देश के पहले बायोप्लास्टिक प्लांट के लिए लाया जा रहा बॉयलर

    यह विशाल बॉयलर लखीमपुर खीरी जिले के कुंभी में मैसर्स बलराम चीनी मिल लिमिटेड की ओर से बनाए जा रहे बायोप्लास्टिक यानी पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) विनिर्माण संयंत्र के लिए लाया जा रहा है। इसे देश के पहले बायोप्लास्टिक विनिर्माण संयंत्र के रूप में बताया जा रहा है।

    इस विशेष उपकरण की लंबाई करीब 41 मीटर, चौड़ाई 6 मीटर और ऊंचाई 7 मीटर है। इसका वजन 164.28 मीट्रिक टन बताया गया है। इसे ले जाने के लिए 308 पहियों वाले विशेष ट्रेलर का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ट्रैफिक पुलिस ने ट्रेलर को चंदौली जिले की सीमा से सुरक्षित निकालकर वाराणसी में प्रवेश कराया। अब सड़क की स्थिति, रास्ते में आने वाली बाधाओं और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।

  • ट्रेन टिकट बुकिंग का तरीका बदला… शॉर्टकट अपनाया तो ब्लॉक होगी IRCTC आईडी

    ट्रेन टिकट बुकिंग का तरीका बदला… शॉर्टकट अपनाया तो ब्लॉक होगी IRCTC आईडी


    नई दिल्ली।
    ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग (Online Train Ticket Booking) के दौरान शॉर्टकट (Shortcut) अपनाने से आपकी आईआरसीटीसी आईडी (IRCTC ID) ब्लॉक हो सकती है। समय से पहले बुकिंग प्रक्रिया पूरा करने पर यह कार्रवाई की जा सकती है। आईआरसीटीसी की नई तकनीक टिकट बुकिंग के दौरान टाइपिंग की गति से वैध-अवैध उपभोक्ताओं का पता लगा लेगी। इस सख्ती से आम जनता को कन्फर्म टिकट मिलने की संभावना 40 फीसदी तक बढ़ जाएगी।

    रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेलवे ने ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नया एआई प्रीडेटर सिस्टम (एआई सॉफ्टवेयर) लागू कर दिया गया है। इस नई तकनीक का उद्देश्य अवैध सॉफ्टवेयर की मदद आईआरसीटीसी वेबसाइट में घुसपैठ कर कन्फर्म टिकट लेने वाले दलालों पर नकेल कसना है।

    एआई आधारित सिस्टम बुकिंग के दौरान प्रक्रिया से पहचान लेगा कि टिकट इंसान बुक कर रहा या कोई सॉफ्टवेयर। ऐसे रेल यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत है जो टिकट बुक करते समय स्मार्ट ट्रिक्स (कट-पेस्ट) अपनाते हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को संदिग्ध मानकर रेलवे का सिस्टम यूजर आईडी (अकाउंट) को ब्लॉक कर सकता है। यदि आम उपभोक्ता रात में थोक में नाम जोड़ते या हटाता है तो वह एआई के जद में आएंगे।


    फॉर्म कम समय में न भरे

    रेलवे का एल्गोरिदम टाइपिंग की गति मापता है। यदि पांच यात्रियों का विवरण (नाम, उम्र, जेंडर आदि) 4.2 सेकेंड से कम समय में भर दिया जाता है तो सिस्टम यूजर को रेड फ्लैग कर देगा।


    आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगिन न करें

    एक अधिकारी ने बताया, अगर उपभोक्ता एक आईडी से आधे घंटे में पांच बार से ज्यादा लॉगइन या लॉगआउट करते हैं तो ऐसे अकाउंट को 24 घंटे के लिए बैन कर दिया जाएगा। इसके अलावा आईपी एड्रेस और मोबाइल नंबर एक ही क्षेत्र में होना चाहिए। अगर दोनों अलग-अलग हैं तो ट्रांजक्शन बीच में ही रुक जाएगा। एक महीने में 2.8 लाख ऐसे अकाउंट ब्लॉक किए गए हैं।


    रेलवन ऐप से अनारक्षित टिकट पर डिजिटल पेमेंट से मिलेगी छूट

    बता दें कि, भारतीय रेलवे यात्रियों को डिजिटल माध्यमों से अधिक सुविधा, पारदर्शिता और प्रोत्साहन देने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। इसी क्रम में रेलवे द्वारा संचालित रेलवन ऐप के माध्यम से अनारक्षित रेल टिकट बुकिंग पर मिलने वाली 3 प्रतिशत बोनस छूट की सुविधा का दायरा बढ़ा दिया गया है। यह व्यवस्था ट्रायल आधार पर 14 जनवरी 2026 से 14 जुलाई 2026 तक लागू रहेगी। इस सुविधा की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने के लिए प्रमुख स्टेशनों पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। अब तक रेलवन ऐप पर अनारक्षित टिकट बुक करने पर केवल आर-वॉलेट से भुगतान करने पर ही 3 प्रतिशत बोनस कैशबैक की सुविधा उपलब्ध थी। यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तथा डिजिटल भुगतान को अधिक प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से रेलवे ने यह लाभ अब सभी स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लागू करने का निर्णय लिया है।

    नई व्यवस्था के अंतर्गत रेलवन ऐप के जरिए अनारक्षित टिकट लेते समय यदि यात्री यूपीआई, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग अथवा अन्य स्वीकृत डिजिटल भुगतान माध्यमों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें टिकट मूल्य पर 3 प्रतिशत का लाभ प्राप्त होगा। इससे यात्रियों को टिकट बुकिंग में प्रत्यक्ष आर्थिक बचत होगी।

    रेलवे की यह पहल कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के साथ-साथ डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगी। विशेष रूप से दैनिक यात्रा करने वाले, अनारक्षित श्रेणी में सफर करने वाले आम नागरिकों और उपनगरीय क्षेत्रों के यात्रियों को इस सुविधा से सीधा लाभ मिलेगा।

    रेलवन ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कर रेल कनेक्ट या यूटीएस मोबाइल ऐप के मौजूदा उपयोगकर्ता अपनी पहचान के प्रमाण के साथ सीधे लॉग इन कर सकते हैं। इस ऐप पर अनारक्षित टिकट, आरक्षित टिकट, प्लैटफॉर्म टिकट, ट्रेन एवं स्टेशन से संबंधित जानकारी, शिकायत निवारण सहित विभिन्न यात्री सुविधाएं एक ही मंच पर उपलब्ध हैं।

  • महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल

    महंगाई मापने का आधार बदला… नई सीरीज में 299 की जगह 358 वस्तुएं, ई-कॉमर्स-ओटीटी भी शामिल


    नई दिल्ली।
    खुदरा महंगाई (Retail Inflation) की गणना के लिए नई शृंखला (New Series) का आगाज गुरुवार को किया गया। इसके लिए आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 किया गया है। आधार वर्ष वह संदर्भ वर्ष होता है जिसे तुलना के लिए चुना जाता है। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाता है कि कीमतों (Prices) में कितनी वृद्धि या कमी हुई है।


    कितने बाजार और कस्बे शामिल किए गए?

    नई सीरीज में 1,465 ग्रामीण बाजार और 1,395 शहरी बाजार शामिल हैं, जो 434 कस्बों में फैले हुए हैं। इसके अलावा, 25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार भी शामिल किए गए हैं। ग्रामीण और शहरी बाजारों से मूल्य डेटा मासिक आधार पर एकत्र किया गया, जबकि ऑनलाइन कीमतें साप्ताहिक आधार पर ली गई हैं।

    इसमें ऑनलाइन बाजार क्यों शामिल किए गए ?
    25 लाख से अधिक आबादी वाले 12 कस्बों में 12 ऑनलाइन बाजार शामिल किए गए हैं, ताकि ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्ज किया जा सके। इसके अलावा हवाई किराया, टेलीफोन और ओटीटी सेवाओं की कीमतें भी ऑनलाइन माध्यम से एकत्र की जा रही हैं।

    क्या बदलाव हुआ ?
    अखिल भारतीय स्तर पर भारित वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है। इनमें वस्तुओं की संख्या 259 से बढ़कर 308 और सेवाओं की संख्या 40 से बढ़कर 50 हो गई है।

    मकान किराये के लिए आवासों का नमूना आकार क्या है?
    किराया संग्रह के लिए कुल 19,039 आवासों की पहचान की गई है, जिनमें 15,715 शहरी और 3,324 ग्रामीण आवास शामिल हैं। चेन-आधारित सूचकांक के उपयोग को देखते हुए भविष्य में, उपलब्धता के अनुसार और आवास जोड़े जा सकते हैं। इसमें ग्रामीण आवास का भार 11.764% है, जिसमें आवास, पानी, बिजली, गैस और अन्य ईंधन शामिल हैं।

    क्या हवाई किराए की कीमतों की गणना भी होगी?
    – हवाई किराए की कीमतें प्रसिद्ध ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से एकत्र की जाती हैं।

    क्या स्ट्रीमिंग सेवाओं की कीमतें भी शामिल?
    – अमेजन प्रइम वीडियो, नेटफ्लिक्स, जियो हॉटस्टर, सोनी लिव जैसी सेवाओं की कीमतें सीधे सेवा प्रदाताओं की वेबसाइट्स से ऑनलाइन एकत्र की जाती हैं।

    ‘खाद्य एवं पेय पदार्थ’ के भार में कितना बदलाव हुआ ?
    – यदि सीपीआई 2012 की वर्गीकरण प्रणाली अपनाई जाती, तो खाद्य एवं पेय पदार्थों का हिस्सा 45.86% से घटकर 40.10% हो जाता। नई वर्गीकरण संरचना के अनुसार इसका हिस्सा 36.75% है। यह बदलाव संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी प्रभाग के फ्रेमवर्क को अपनाने के कारण हुआ है।