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  • चारधाम यात्रा हुई महंगी: पेट्रोल-डीजल, होटल और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी से श्रद्धालुओं का बजट बिगड़ा

    चारधाम यात्रा हुई महंगी: पेट्रोल-डीजल, होटल और टैक्सी किराए में बढ़ोतरी से श्रद्धालुओं का बजट बिगड़ा


    नई दिल्ली। उत्तराखंड की पवित्र चारधाम यात्रा इस बार श्रद्धालुओं की जेब पर भारी पड़ती नजर आ रही है। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ होटल, टैक्सी और खाने-पीने की सेवाओं के दामों में भी तेजी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बजट पर पड़ रहा है। बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले प्रमुख मार्गों पर इस समय यात्रा खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। यात्रा सीजन में बढ़ती भीड़ और सीमित संसाधनों के कारण स्थानीय स्तर पर सेवाओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

    टैक्सी और होटल किराए में भारी उछाल
    चारधाम यात्रा रूट पर टैक्सी किराए में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई स्थानों पर पहले की तुलना में यात्रा पैकेज और लोकल ट्रांसपोर्ट महंगा हो गया है। इसके साथ ही होटल और गेस्ट हाउस के कमरों के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे ठहरने का खर्च भी यात्रियों के लिए चुनौती बन गया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस बार उन्हें यात्रा पर कहीं अधिक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे पूरा बजट प्रभावित हो रहा है।

    ईंधन की कीमतों का सीधा असर सेवाओं पर
    स्थानीय कारोबारियों के अनुसार पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर परिवहन और होटल उद्योग पर पड़ा है। पहाड़ी क्षेत्रों में सामान पहुंचाने की लागत बढ़ने से होटल, ढाबा और ट्रैवल सेवा प्रदाताओं ने अपने रेट बढ़ा दिए हैं। इस वजह से खाने-पीने की सामान्य चीजें भी पहले से महंगी हो गई हैं, जिससे यात्रा का कुल खर्च और बढ़ गया है।

    श्रद्धालुओं की जेब पर बोझ, फिर भी आस्था मजबूत
    कई श्रद्धालुओं ने बताया कि टैक्सी और होटल बुकिंग में अचानक बढ़ी कीमतों के कारण उनका बजट बिगड़ गया है। हालांकि इसके बावजूद आस्था और धार्मिक विश्वास के चलते यात्रियों की संख्या में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग चारधाम यात्रा के लिए लगातार पहुंच रहे हैं।

    प्रशासन कर रहा सुविधाएं बेहतर करने का दावा
    प्रशासन का कहना है कि यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए लगातार इंतजाम किए जा रहे हैं। भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाएं और ट्रैफिक नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    आगे और बढ़ सकता है खर्च
    विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में जैसे-जैसे यात्रा का पीक सीजन बढ़ेगा, वैसे-वैसे भीड़ और खर्च दोनों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी जा रही है कि वे यात्रा से पहले सही बजट प्लानिंग और एडवांस बुकिंग जरूर करें।

  • पहाड़ों में भीषण जाम का संकट: जोशीमठ में 7 KM तक लगी गाड़ियों की कतार, तीर्थयात्रा प्रभावित

    पहाड़ों में भीषण जाम का संकट: जोशीमठ में 7 KM तक लगी गाड़ियों की कतार, तीर्थयात्रा प्रभावित


    नई दिल्ली । उत्तराखंड के जोशीमठ क्षेत्र में चारधाम यात्रा के दौरान भीषण ट्रैफिक जाम की स्थिति देखने को मिली है, जहां करीब 7 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग गई। बढ़ती गर्मी, छुट्टियों का सीजन और तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ के कारण पहाड़ी मार्गों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे यात्रियों को घंटों तक सड़क पर फंसे रहना पड़ रहा है।

    जानकारी के अनुसार, मारवाड़ी से लेकर टीसीपी जोशीमठ तक सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जो धीरे-धीरे 6 से 7 किलोमीटर तक फैल गईं। स्थिति यह रही कि कुछ ही समय के अंतराल में ट्रैफिक का दबाव फिर से बढ़ जाता और गाड़ियों की कतार और लंबी हो जाती। पुलिस मौके पर मौजूद रहकर यातायात को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है, लेकिन लगातार बढ़ती भीड़ के कारण स्थिति को पूरी तरह संभालना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

    प्रशासन द्वारा एक समय में एक ही दिशा की गाड़ियों को आगे बढ़ने दिया जा रहा है, जिससे दूसरे दिशा में वाहनों की लंबी कतार और अधिक बढ़ जा रही है। खासकर बद्रीनाथ धाम से लौटने वाले और वहां जाने वाले यात्रियों के बीच ट्रैफिक का भारी दबाव देखा जा रहा है। इससे तीर्थयात्रियों को काफी समय जाम में ही बिताना पड़ रहा है, जिससे उनकी यात्रा की गति प्रभावित हो रही है।

    स्थानीय जानकारी के अनुसार, जोशीमठ के जीरो बेंड से लेकर मारवाड़ी तक कई स्थानों पर सड़क बेहद संकरी हो गई है, जिसके कारण ट्रैफिक का प्रवाह बाधित हो रहा है। इसी संकरे मार्ग पर दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही होने के कारण बार-बार जाम की स्थिति बन रही है। सड़क की इस स्थिति ने पूरे मार्ग को एक संवेदनशील ट्रैफिक जोन में बदल दिया है।

    यह भी बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से सड़क चौड़ीकरण का कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है, जिसके कारण बढ़ते यातायात दबाव को संभालने में कठिनाई आ रही है। वर्तमान में केवल बद्रीनाथ यात्रा से जुड़े यात्री ही इस मार्ग से गुजर रहे हैं, लेकिन आने वाले दिनों में हेमकुंड साहिब यात्रा शुरू होने के बाद भीड़ और बढ़ने की संभावना है।

    जून का महीना चारधाम यात्रा का सबसे व्यस्त समय माना जाता है, जब बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जैसे धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर सबसे अधिक यात्री पहुंचते हैं। ऐसे में यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है तो यातायात व्यवस्था पर और अधिक दबाव पड़ सकता है।

    स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि लगातार बढ़ती भीड़ और संकरी सड़कों के कारण जाम की समस्या रोजाना दोहराई जा रही है। यात्रियों का कहना है कि लंबे समय तक जाम में फंसे रहने से उनकी यात्रा समय पर पूरी नहीं हो पा रही है और उन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

    कुल मिलाकर, जोशीमठ में बना यह ट्रैफिक जाम चारधाम यात्रा की सुचारू व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है और त्वरित समाधान की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से सामने ला रहा है।

  • भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में

    भारी बारिश के बीच चारधाम यात्रा? ये जरूरी सावधानियां रखें ध्यान में


    नई दिल्ली । उत्तराखंड में चल रही बारिश और ओलावृष्टि के बीच चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रशासन ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की यह पवित्र यात्रा जितनी आस्था से जुड़ी है, उतनी ही कठिन और जोखिमभरी भी हो सकती है खासकर खराब मौसम में।

    मौसम की जानकारी सबसे जरूरी
    विशेषज्ञों के अनुसार यात्रा शुरू करने से पहले मौसम का अपडेट लगातार देखते रहना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कभी भी अचानक बदल सकता है धूप के बाद तेज बारिश, ओलावृष्टि या धुंध जैसी स्थिति बन सकती है। यदि किसी क्षेत्र में रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी हो तो वहां यात्रा टालना ही सुरक्षित विकल्प है।

    यात्रा की योजना में रखें लचीलापन
    चार धाम यात्रा के दौरान समय का बहुत सख्त शेड्यूल न रखें। बारिश और भूस्खलन के कारण रास्ते कई घंटों या कभी-कभी पूरे दिन के लिए बंद हो सकते हैं। इसलिए अतिरिक्त 1–2 दिन का समय रखना और होटल बुकिंग में लचीलापन रखना समझदारी मानी जाती है।

    सुबह की यात्रा सबसे सुरक्षित
    मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में सुबह का समय यात्रा के लिए सबसे बेहतर होता है। शाम होते-होते धुंध और बारिश बढ़ने लगती है, जिससे विजिबिलिटी कम हो जाती है और हादसों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए कोशिश करें कि लंबा सफर सुबह जल्दी शुरू कर शाम से पहले पूरा कर लिया जाए।

    जरूरी सामान साथ रखें
    यात्रा के दौरान हल्का लेकिन जरूरी सामान रखना बेहद जरूरी है। इसमें रेनकोट, वाटरप्रूफ जैकेट, अतिरिक्त मोजे और मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज शामिल होने चाहिए। खासकर केदारनाथ और यमुनोत्री जैसे ट्रैक बारिश में बेहद फिसलन भरे हो जाते हैं।

    स्वास्थ्य का रखें विशेष ध्यान
    बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों के लिए यह यात्रा और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ठंड, ऊंचाई और बारिश की वजह से सांस लेने में दिक्कत, थकान और बुखार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अस्थमा, हार्ट या ब्लड प्रेशर के मरीजों को यात्रा से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

    सावधानी ही सुरक्षा है
    विशेषज्ञ मानते हैं कि चार धाम यात्रा को सफल बनाने के लिए तैयारी और सतर्कता सबसे जरूरी है। सही योजना, मौसम की जानकारी और जरूरी सावधानियों के साथ यह यात्रा न सिर्फ सुरक्षित बल्कि यादगार भी बन सकती है।

  • बद्रीनाथ धाम के अद्भुत रहस्य, 6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती मिलती है अखंड ज्योति..

    बद्रीनाथ धाम के अद्भुत रहस्य, 6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती मिलती है अखंड ज्योति..

    देहरादून । बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 की सुबह 6 बजे खोल दिए गए हैं। इसके साथ ही अगले छह महीनों तक श्रद्धालु भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर सकेंगे और इस पवित्र स्थल के दिव्य वातावरण में आध्यात्मिक शांति का अनुभव करेंगे। इसी मौके पर बद्रीनाथ धाम से जुड़े कुछ ऐसे रहस्य और मान्यताएं चर्चा में हैं, जिनका वैज्ञानिक प्रमाण भले ही न हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था में इनका विशेष स्थान है।

    6 महीने बंद रहने के बाद भी जलती रहती है अखंड ज्योति
    मान्यता के अनुसार, शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद करने से पहले यहां एक बड़ा घी का दीपक जलाया जाता है, जिसे अखंड ज्योति कहा जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि छह महीने बाद जब मंदिर के कपाट फिर खोले जाते हैं, तो यह दीपक जलता हुआ मिलता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस दौरान देवतागण स्वयं इस ज्योति की रक्षा करते हैं। मंदिर खुलने पर सबसे पहले इसी दिव्य ज्योति के दर्शन कराए जाते हैं, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है।

    कुत्ते नहीं भौंकते और माहौल रहता है शांत
    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार बद्रीनाथ धाम में कुत्तों का भौंकना नहीं सुना जाता। इसे मंदिर के आध्यात्मिक और शांत वातावरण से जोड़ा जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह स्थान इतना पवित्र और दिव्य है कि यहां हर जीव शांत व्यवहार करता है।

    सांप-बिच्छुओं को लेकर अनोखी मान्यता
    धार्मिक कथाओं और लोक मान्यताओं में कहा जाता है कि बद्रीनाथ क्षेत्र में पाए जाने वाले सांप और बिच्छू विषहीन होते हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहां नर-नारायण स्वरूप में तप किया था, जिससे यह भूमि अत्यंत पवित्र और शांत मानी जाती है। इसी कारण यहां के जीव-जंतु किसी को हानि नहीं पहुंचाते। हालांकि वैज्ञानिक रूप से इसका कोई प्रमाण नहीं है, लेकिन यह क्षेत्र की आध्यात्मिक छवि को और गहरा बनाता है।

    आस्था और आध्यात्म का संगम
    बद्रीनाथ धाम से जुड़ी ये मान्यताएं भले ही लोक आस्था और परंपराओं पर आधारित हों, लेकिन यह स्थान सदियों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस दिव्य धाम की अलौकिक अनुभूति को महसूस करते हैं।

  • मुख्यमंत्री की पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा भक्तिमय माहौल से गूंजा उत्तराखंड..

    मुख्यमंत्री की पूजा के साथ शुरू हुई पवित्र यात्रा भक्तिमय माहौल से गूंजा उत्तराखंड..


    नई दिल्ली। उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चार धाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ रविवार को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हो गया। इस अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गंगोत्री धाम में विधि विधान के साथ पूजा अर्चना की और यात्रा की औपचारिक शुरुआत का संदेश दिया। मंदिरों को भव्य रूप से फूलों से सजाया गया और पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला। जैसे ही कपाट खुले, देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने दर्शन के लिए उमड़कर अपनी आस्था प्रकट की।

    यात्रा के पहले दिन ही तीर्थस्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली, जिसे देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और प्रबंधन के इंतजाम किए थे। पूरे आयोजन के दौरान पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोल दमाऊ और रानसिंघा की गूंज ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ साथ सांस्कृतिक परंपराओं का भी सुंदर समावेश देखने को मिला, जिससे यह आयोजन और अधिक भव्य और जीवंत बन गया।

    इसी क्रम में केदारनाथ धाम की यात्रा की शुरुआत भी ओंकारेश्वर मंदिर से भगवान केदारनाथ की डोली को रवाना करने के साथ हुई। पंचमुखी प्रतिमा को वैदिक मंत्रोच्चार और भक्ति संगीत के बीच एक भव्य शोभायात्रा के रूप में ले जाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु, पुजारी और साधु संत शामिल हुए जिन्होंने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस धार्मिक आयोजन में भाग लिया। मंदिर परिसर को सजाने के लिए बड़ी मात्रा में फूलों का उपयोग किया गया जिससे वातावरण अत्यंत पवित्र और आकर्षक बन गया।

    डोली यात्रा के दौरान पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ औपचारिकता का भी विशेष ध्यान रखा गया। यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने स्वागत किया और भंडारे का आयोजन कर सेवा भाव का प्रदर्शन किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार डोली यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ेगी और तय समय पर केदारनाथ धाम पहुंचेगी जहां विधिवत पूजा के बाद मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

    चार धाम यात्रा के अंतर्गत आने वाले केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के कपाट भी निर्धारित तिथियों पर खोले जाएंगे, जिसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों ने यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए हैं ताकि यात्रा सुचारु रूप से संचालित हो सके। चिकित्सा, परिवहन और आवास की व्यवस्थाओं को भी मजबूत किया गया है।

    चार धाम यात्रा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत गहरा है और हर वर्ष लाखों श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा में भाग लेते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है बल्कि हिमालयी क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखने का माध्यम है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि देखने को मिल रही है।

  • चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ, अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, श्रद्धा और सुरक्षा का संगम

    चारधाम यात्रा 2026 का शुभारंभ, अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले, श्रद्धा और सुरक्षा का संगम

    नई दिल्ली: उत्तराखंड में बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर विधिवत रूप से हो गई है। इस दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट परंपरागत पूजा अर्चना और धार्मिक विधि विधान के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही पूरे क्षेत्र में भक्ति और उत्साह का माहौल बन गया और देश भर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन का लाभ लेना शुरू कर दिया।

    गंगोत्री धाम में कपाट खुलने की प्रक्रिया पारंपरिक रीति रिवाजों के अनुसार संपन्न हुई। मां गंगा की उत्सव डोली अपने शीतकालीन प्रवास स्थल से विधिवत पूजा के बाद धाम की ओर रवाना हुई। यात्रा मार्ग में स्थानीय श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव के साथ डोली का स्वागत किया और पूरे वातावरण में जयकारों की गूंज सुनाई दी। निर्धारित परंपरा के अनुसार डोली रास्ते में विश्राम के बाद अगले दिन गंगोत्री धाम पहुंचेगी, जहां कपाट खुलने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई।

    यमुनोत्री धाम में भी कपाट खुलने के साथ ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मां यमुना के दर्शन के लिए भक्तों ने लंबी कतारों में प्रतीक्षा की और पूरे क्षेत्र में धार्मिक आस्था का वातावरण देखने को मिला। कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का औपचारिक आरंभ माना जाता है, जो आने वाले महीनों तक जारी रहती है।

    इस वर्ष यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रशासन ने विशेष तैयारियां की हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और यातायात नियंत्रण के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है। भीड़ प्रबंधन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई स्तरों पर व्यवस्थाएं लागू की गई हैं।

    केदारनाथ यात्रा के लिए इस बार आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली लागू की गई है। पूरे यात्रा मार्ग पर कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी की जा रही है और नियंत्रण कक्षों से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। इससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी और यात्रियों की सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा।

    यात्रा मार्ग को विभिन्न सेक्टरों में विभाजित कर अधिकारियों की तैनाती की गई है ताकि हर क्षेत्र की निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है और जगह जगह चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    प्रशासन ने ट्रैफिक प्रबंधन और आपदा प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया है। यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की बाधा को तुरंत दूर करने के लिए टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। इसके अलावा रियल टाइम सहायता व्यवस्था भी लागू की गई है जिससे यात्रियों को तुरंत मदद उपलब्ध कराई जा सके।

    इस बार चारधाम यात्रा में पारंपरिक धार्मिक आस्था के साथ आधुनिक तकनीक का भी समावेश देखने को मिल रहा है। एक ओर जहां सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए आधुनिक व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

  • Char Dham Yatra की तैयारियां अंतिम दौर में…. 6 मार्च से शुरू हो रहे हैं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

    Char Dham Yatra की तैयारियां अंतिम दौर में…. 6 मार्च से शुरू हो रहे हैं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में आस्था और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। चार धाम यात्रा (Char Dham Yatra) के लिए इस बार ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन (Online Registration) 6 मार्च से शुरू होने जा रहा है। टूरिज्म सेक्रेटरी गरब्याल रजिस्ट्रेशन और ट्रैवल से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। तैयारिया अंतिम चरण में हैं और 6 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू होने जा रहा है। फिलहाल ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए कोई फीस नहीं लगेगी, हालांकि इस पर अभी आखिरी फैसला लेना बाकी है।’


    ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन वालों के लिए भी व्यवस्था

    एक खबर के मुताबिक, टूरिज्म सेक्रेटरी ने बताया है कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन यात्रा शुरू होने से कुछ दिन पहले शुरू किया जाएगा। इसके लिए 20 टीमें गठित की गई हैं जो क होटलों आश्रमों और धर्मशालाओं में जाकर ग्रुप में आने वाले भक्तों की बुकिंग में मदद करेंगी।’आपको बता दें कि हर साल लगभग 50 लाख तीर्थयात्री चारों धामों के दर्शन करते हैं। सरकार को उम्मीद है कि इसबार ये संख्या और भी ज्यादा बढ़ सकती है।


    कब खुलेंगे कपाट?

    अक्षय तृतीया के अवसर पर 19 अप्रैल को यमुनोत्री और गंगोत्री के कपाट खुलेंगे। इसके बाद केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलेंगे। आमतौर पर बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि बसंत पंचमी तथा केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के पर्व पर घोषित की जाती है।


    मंदिर परिसरों में मोबाइल, कैमरे पर प्रतिबंध

    इस साल चार धाम के मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन और कैमरे पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। बीते वर्षों में मंदिर परिसरों में स्मार्टफोन और कैमरा ले जाने से दर्शन व्यवस्था में कई समस्याएं सामने आई थीं और इसे देखते हुए मंदिर परिसरों में स्मार्टफोन और कैमरों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया गया है। बीते महीने ही इस संबंध में जिलों के जिलाधिकारियों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों तथा विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई थी।

  • उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी

    उत्तराखंड में सख्ती बढ़ी: गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ पर भी प्रस्ताव की तैयारी


    देहरादून। हरिद्वार के गंगा घाटों पर प्रतिबंध के बाद अब उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का कदम बढ़ता जा रहा है। गंगोत्री धाम में यह फैसला लागू कर दिया गया है और अब बदरीनाथ-केदारनाथ में भी इसी तरह का प्रस्ताव बोर्ड में लाया जाएगा।

    गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन
    श्री गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है।
    गंगोत्री धाम के साथ-साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित रहेगा।

    बदरीनाथ-केदारनाथ में भी प्रस्ताव लाया जाएगा
    श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड की अगली बैठक में बदरीनाथ और केदारनाथ में भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का प्रस्ताव लाया जाएगा।
    इसके बाद इसे शासन और सरकार के समक्ष रखा जाएगा।

    हरिद्वार के बाद अब अन्य स्थलों पर मांग बढ़ी
    हरिद्वार में सरकार ने पहले ही गंगा घाटों, हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख स्थलों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई है।
    धार्मिक संस्थाओं की मांग है कि पूरे कुंभ क्षेत्र में भी इसी तरह का प्रतिबंध लागू किया जाए।

    बीकेटीसी अध्यक्ष का बयान
    हेमंत द्विवेदी ने इसे “ऐतिहासिक फैसला” बताया और कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिया गया यह कदम बदरी-केदार धाम में भी लागू होगा।
    उन्होंने कहा कि बोर्ड में प्रस्ताव पास होने के बाद सरकार को इसे लागू कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का रुख
    मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पवित्र धाम हमारी आस्था के धाम हैं और यहाँ पौराणिक मान्यता व संस्कृति के अनुसार ही निर्णय होंगे।
    उन्होंने कहा कि मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की मांग पर सरकार काम करेगी।
    हरिद्वार के गंगा घाटों के पुराने एक्ट का अध्ययन करके आगे निर्णय लिया जाएगा।


    सरकार का संकेत
    धामी ने कहा कि अगर बीकेटीसी से प्रस्ताव आता है, तो सरकार सभी पहलुओं को देखते हुए आगे निर्णय करेगी।
    सरकार सनातन धर्म के आस्था केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाने को तैयार है।