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  • नितेश तिवारी की रामायण में कुंभकर्ण का किरदार निभाएंगे फैजल मलिक, हल्क को बनाया रोल की तैयारी का रेफरेंस

    नितेश तिवारी की रामायण में कुंभकर्ण का किरदार निभाएंगे फैजल मलिक, हल्क को बनाया रोल की तैयारी का रेफरेंस


    नई दिल्ली। नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म रामायण को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह लगातार बढ़ रहा है। फिल्म में भगवान राम और रावण जैसे प्रमुख किरदारों के साथ अब दूसरे महत्वपूर्ण पात्रों की भी चर्चा होने लगी है। इसी बीच पंचायत वेब सीरीज में प्रह्लाद चाचा के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता फैजल मलिक ने अपने नए रोल को लेकर दिलचस्प खुलासा किया है। वह फिल्म में रावण के भाई कुंभकर्ण की भूमिका निभाते नजर आएंगे। खास बात यह है कि इस विशालकाय पौराणिक पात्र को पर्दे पर जीवंत करने के लिए फैजल मलिक ने हॉलीवुड की सुपरहीरो फिल्म एवेंजर्स के हल्क से प्रेरणा ली है।

    फैजल मलिक ने वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में बताया कि जब वह कुंभकर्ण के लुक और उसके व्यक्तित्व की कल्पना कर रहे थे तो उनके सामने हल्क का उदाहरण था। अभिनेता मार्क रफालो ने जिस तरह हल्क जैसे विशाल हरे किरदार को पर्दे पर प्रस्तुत किया है उससे उन्हें अपने किरदार की शारीरिक बनावट और रूप को समझने में मदद मिली। फैजल के मुताबिक हल्क उनके लिए एक अहम रेफरेंस था। हालांकि कुंभकर्ण का किरदार केवल विशाल शरीर तक सीमित नहीं है बल्कि उसका अपना पौराणिक महत्व और अलग व्यक्तित्व भी है। ऐसे में इस भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाना उनके लिए बड़ी चुनौती है।

    अभिनेता ने बताया कि रामायण का हिस्सा बनना उनके लिए बचपन के सपने के सच होने जैसा है। वह भी रामायण देखते हुए बड़े हुए हैं और इस महाकाव्य से उनका भावनात्मक जुड़ाव रहा है। ऐसे में इसकी कहानी के किसी महत्वपूर्ण पात्र को निभाने का मौका मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। फैजल के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कुंभकर्ण को आम इंसान से अलग और असाधारण रूप में कैसे प्रस्तुत किया जाए। पौराणिक कथाओं में कुंभकर्ण को विशाल शरीर वाले शक्तिशाली योद्धा के रूप में जाना जाता है। उसकी लंबी नींद भी उसके चरित्र की एक प्रमुख विशेषता है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए किरदार के लिए खास तैयारी करनी पड़ी।

    फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी और उनकी टीम ने भी कुंभकर्ण के लुक को तैयार करने में काफी मेहनत की है। फैजल मलिक के अनुसार यह किरदार फिल्म के दूसरे पात्रों से अलग है और इसकी विशालता को पर्दे पर उतारने के लिए विशेष ध्यान दिया गया है। दर्शकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म में कुंभकर्ण का रूप कैसा दिखाई देता है और फैजल अपने अभिनय से इस पौराणिक पात्र को किस तरह जीवंत बनाते हैं।

    फैजल ने यह भी कहा कि उनके लिए एक बड़ी चुनौती दर्शकों के दिलों में वही जगह बनाना है जो उन्हें पंचायत में प्रह्लाद चाचा के किरदार से मिली थी। इस भूमिका ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई और अब वह चाहते हैं कि दर्शक कुंभकर्ण के रूप में भी उन्हें उतना ही प्यार दें। उनके लिए यह किरदार एक नई शुरुआत और अभिनय की अलग दुनिया में कदम रखने जैसा है।

    बातचीत के दौरान फैजल मलिक ने रामानंद सागर की टीवी रामायण की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि उस धारावाहिक के किरदार और उन्हें निभाने वाले कलाकार आज भी लोगों की यादों में अमर हैं। अरुण गोविल को दशकों बाद भी दर्शक भगवान राम के रूप में देखते हैं और उनके प्रति सम्मान जताते हैं। यह रामायण के सांस्कृतिक प्रभाव को दर्शाता है। अब नई फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं और फैजल मलिक का कुंभकर्ण वाला किरदार फिल्म के चर्चित आकर्षणों में शामिल हो सकता है।

  • अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    अक्षय खन्ना फिर मचाएंगे तहलका, रहमान डकैत के बाद अब 'महाकाली' में निभाएंगे असुर गुरु शुक्राचार्य का किरदार

    नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बहुमुखी और सशक्त अभिनय क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता अक्षय खन्ना एक बार फिर से एक नए और चुनौतीपूर्ण अवतार में दर्शकों के सामने आने की तैयारी कर रहे हैं। हाल के समय में कई बड़ी फिल्मों और सीरीज़ में अपनी बेहतरीन अदाकारी से वाहवाही बटोरने के बाद अब वे पौराणिक और काल्पनिक सिनेमा के एक बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने जा रहे हैं। अपनी पिछली चर्चित भूमिकाओं में अलग-अलग रंगों को पेश करने के बाद अभिनेता का यह नया रूप दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता पैदा कर रहा है।

    हाल ही में प्रदर्शित हुई फिल्म धुरंधर में रहमान डकैत के नकारात्मक और जटिल किरदार को निभाकर अक्षय खन्ना ने आलोचकों और दर्शकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। इस फिल्म में उनके द्वारा निभाए गए चरित्र की बारीकियों और संवाद अदायगी की काफी सराहना हुई थी। अब वे प्रशांत वर्मा सिनेमैटिक यूनिवर्स की आगामी बड़ी फिल्म महाकाली में पौराणिक चरित्र असुर गुरु शुक्राचार्य की भूमिका में दिखाई देंगे। इस फिल्म से जुड़ा उनका पहला लुक और झलक 24 अगस्त को सार्वजनिक रूप से जारी किए जाने की संभावना है।

    अक्षय खन्ना के फिल्मी सफर पर नजर डालें तो वे लगातार अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं का चयन करते रहे हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म छावा में मुगल सम्राट औरंगजेब का गंभीर और प्रभावशाली किरदार हो या फिर कोर्टरूम ड्रामा फिल्म सेक्शन 375 में एक तीक्ष्ण बुद्धि वाले वकील तरुण सलूजा की भूमिका, उन्होंने हर बार अपनी अदाकारी से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। इसके अलावा हाल ही में आई वेब सीरीज इक्का में भी उनके नकारात्मक चरित्र शौर्यमान गौर को काफी सराहा गया था।

    सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की भूमिकाओं में समान रूप से सहज दिखने वाले इस अभिनेता ने अपने करियर की शुरुआत से ही कई यादगार फिल्में दी हैं। थ्रिलर शैली की फिल्म हमराज में चालाक प्रेमी करण मल्होत्रा का रोल हो या फिर सुपरहिट फिल्म दृश्यम 2 में आईजी तरुण अहलावत का सख्त पुलिस अधिकारी वाला किरदार, अक्षय खन्ना ने हर बार कहानी में एक अलग तनाव और रोमांच पैदा किया है। इसके अतिरिक्त दिल चाहता है, ताल और रेस जैसी सुपरहिट फिल्मों में निभाए गए उनके किरदारों को आज भी भारतीय सिनेमा के बेहतरीन प्रदर्शनों में गिना जाता है।

    फिल्म प्रेमियों के बीच अक्षय खन्ना की आने वाली फिल्मों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है। महाकाली में असुर गुरु शुक्राचार्य जैसे महत्वपूर्ण पौराणिक चरित्र को वे किस तरह पर्दे पर जीवंत करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि अपनी अनूठी संवाद शैली और चेहरे के भावों से गंभीर से गंभीर किरदार में जान फूंकने की उनकी कला इस नई फिल्म को भी एक खास ऊंचाई पर ले जाने में मददगार साबित होगी।

  • क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    मुंबई। धुरंधर 2 की रिलीज के बाद दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि फिल्म में दिखाया गया जासूसी किरदार कितना वास्तविक है। इसी बीच फिल्म से जुड़े सैन्य सलाहकार कर्नल भूपेंद्र शाही ने दावा किया है कि कहानी में कई पहलू वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं। उन्होंने एक ऐसे जासूस का किस्सा भी साझा किया, जिसने सीमा पार जाकर महीनों तक गुप्त मिशन पूरा किया।

    विजय विक्रम सिंह के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कर्नल शाही ने कहा कि जासूसी गतिविधियां हर देश में होती हैं और फिल्म में दिखाया गया अंदाज काफी हद तक वास्तविक है। उन्होंने बताया कि उनके पास एक ऐसा युवक था, जिसे सीमा पार भेजा गया था और उसने महत्वपूर्ण जानकारी जुटाकर वापसी की।

    कर्नल शाही के मुताबिक, वह जासूस पीओके में करीब तीन-चार महीने तक रहा। वहां उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए स्थानीय माहौल में खुद को ढाल लिया, यहां तक कि निकाह भी किया और मदरसे में रहकर गूंगे व्यक्ति का अभिनय करता रहा। मिशन के दौरान एक बार उसकी पहचान उजागर होने का खतरा भी पैदा हुआ, लेकिन स्थानीय महिला की मदद से वह बच निकला।

    उन्होंने बताया कि जासूस को एक तय तारीख तक एलओसी पार कर वापस लौटना था, लेकिन परिस्थितियों के कारण देरी हो गई। इसके बावजूद वह किसी तरह भारतीय सीमा में दाखिल हो गया। बाद में सेना ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसके पास मौजूद जानकारी को सुरक्षित तरीके से निकाला गया।

    कर्नल शाही ने कहा कि मिशन के दौरान जासूस को पर्याप्त नकद राशि भी दी गई थी, जिसे उसने स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बनाने में इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, फिल्म में दिखाए गए कई तत्व ऐसे वास्तविक अभियानों से प्रेरित हैं, हालांकि सिनेमा में उन्हें थोड़ा नाटकीय रूप दिया जाता है।

    बताया जाता है कि कर्नल शाही इससे पहले भी कई फिल्मों में सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। उनका काम फिल्मों को यथार्थ के करीब लाना और सैन्य प्रक्रियाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना होता है।

  • आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट

    आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट


    नई दिल्ली। टीवी शो अनुपमा इस समय दर्शकों की फेवरेट बन चुका है और टीआरपी चार्ट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रुपाली गांगुली का किरदार और उनके चर्चित डायलॉग सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका फेमस डायलॉग “इतना मारूंगी” फिर से वायरल हो गया है इस बार के कारण है बिग बॉस 19 के फेमस कंटेस्टेंट आवेज दरबार का रील वीडियो।

    वीडियो में आवेज इस डायलॉग पर अपने स्टाइलिश और मजेदार मूव्स के साथ डांस करते नजर आए, जिसे देखकर फैंस खूब एंटरटेन हो रहे हैं। वीडियो में अनुपमा के डायलॉग की लंबाई और मजाकिया अंदाज का पूरा मज़ा देखने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं कि “गिरा गिरा कर, दौड़ा दौड़ा कर, भगा भगा कर, जूता भिगो के, सैंडल तोड़ के, हाथ थक गए तो लातों से और पैर थक गए तो बातों से” मारेंगी।

    अनुज कपाड़िया और अन्य सितारों ने दिया रिएक्शन
    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो पर कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया दी। अनुपमा के अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) ने लिखा, “भाई ये तुम्हारा बेस्ट वाला है।” इसके अलावा अभिषेक बजाज मृदुल तिवारी, आकांक्षा खन्ना और किम शर्मा समेत कई अन्य सितारों ने भी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की।

    अनुपमा बनी टीआरपी टॉप पर
    अनुपमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इस हफ्ते शो ने 2.2 की टीआरपी हासिल की है, जो इसे टीआरपी चार्ट में टॉप पर रखती है। वहीं स्मृति ईरानी के शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी ने भी इसी 2.2 की टीआरपी के साथ कड़ी टक्कर दी। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अनुपमा के डायलॉग्स और वीडियोज़ का मज़ा ले रहे हैं, और इस बार आवेज दरबार की मस्ती भरी रील ने इसे और भी वायरल बना दिया है।

  • प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया

    प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया


     
    नई दिल्ली ।  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज भारतीय परंपरा और शास्त्रीय ज्ञान के शाश्वत मूल्यों पर विचार करते हुए देशवासियों को जीवन में इनका पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संदेश में बल दिया कि सच्ची सुंदरता सद्गुणों से निखरती है वंश गौरव चरित्र से परिलक्षित होता है ज्ञान का वास्तविक मूल्य सफलता में है और धन का अर्थ केवल भोग नहीं बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण आनंद और समाज कल्याण में योगदान है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये मूल्य न केवल प्राचीन काल में महत्वपूर्ण रहे हैं बल्कि आधुनिक समाज और वर्तमान समय में भी ये उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने इसे देश की प्रगति सामूहिक जिम्मेदारी और समाज में सद्भाव कायम रखने की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में बताया। उन्होंने अपने संदेश में एक संस्कृत श्लोक साझा किया जो सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करता है:

    गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्।
    सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥

    प्रधानमंत्री ने इस श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता उसके गुणों में होती है। शिष्टाचार नैतिकता और चरित्र ही किसी वंश या परिवार का गौरव बढ़ाते हैं। शिक्षा और ज्ञान जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं जबकि धन का उपयोग केवल भोग के लिए नहीं बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं जो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करते हैं।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में ये मूल्य पीढ़ियों से संचित हैं और इन्हें जीवन में अपनाना न केवल नैतिक कर्तव्य है बल्कि आधुनिक जीवन में भी ये अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में इन मूल्यों को आत्मसात करें और दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

    इस संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन केवल व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति और विकास का मार्गदर्शन करने वाले शाश्वत मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि जब ये मूल्य समाज में व्यापक रूप से अपनाए जाएंगे तब ही भारत की सामूहिक शक्ति संस्कृति और नैतिकता का सही परिप्रेक्ष्य उजागर होगा।प्रधानमंत्री के इस संदेश को विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही प्रेरणादायक मान रहे हैं। यह न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है बल्कि आधुनिक जीवन में नैतिक सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

  • महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं

    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं


    कश्‍मीर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कैदियों की जेल बदलने पर बड़ा बयान दिया। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजन है कि जम्मू-कश्मीर के कैदियों को अन्य जगहों की जेलों से वापस घर लाने के आग्रह वाली उनकी याचिका को उच्च न्यायालय में खारिज कर दिया गया। स्थानीय कैदियों के स्थानांतरण का आग्रह करते हुए महबूबा मुफ्ती की ओर से दायर जनहित याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। एचसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दायर किया गया है। महबूबा ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘अदालत का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक है।’
    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है कि कोई भी आम आदमी जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन चूंकि वह एक राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उनकी जनहित याचिका राजनीतिक कारणों से है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘उच्च न्यायालय यह भूल रहा है कि राजनीतिक नेता जमीनी हकीकतों से गहराई से जुड़े रहते हैं। मैं एक राजनीतिक नेता होने के नाते जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्थिति से भली-भांति परिचित हूं। गरीब लोग जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। वे अपना मुकदमा कैसे लड़ेंगे!’ पीडीपी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया।
    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज

    पीडीपी चीफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नेता के रूप में मुझे कोई भी मुद्दा उठाने का पूरा अधिकार है। अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। उसे सरकार से पूछना चाहिए था कि कितने विचाराधीन कैदी जेलों में हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत में चर्चा उनके पेशे से परे इस मुद्दे पर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘अदालत ने मेरा मामला खारिज करने के लिए अजीब तर्क दिए हैं। यह फैसला तर्क पर आधारित होना चाहिए था, लेकिन मुझे खेद है कि अदालत ने ऐसा फैसला सुनाते हुए कहा कि मैं राजनीति कर रही हूं। अनुच्छेद 21 के तहत हमें इन मुद्दों को उठाने और अदालतों में जाने का मौलिक अधिकार है।’
    कुलदीप सिंह सेंगर मामले पर क्या कहा

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को खत्म नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल उन कैदियों को स्थानांतरित करने तक सीमित थी, जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और इस फैसले ने न्यायपालिका में विश्वास को ठेस पहुंचाई है। बलात्कार के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ न्यायाधीश अब भी सत्ता के सामने खड़े होने को तैयार हैं। उनका इशारा सूरजपुर जिला न्यायालय की ओर से अखलाक मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने से इनकार किए जाने की ओर था। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी ने सरकार से लड़ाई लड़ी और उनसे कहा कि वे मामला वापस नहीं ले सकते, तथा आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन की जाए। महबूबा ने कहा, ‘इसका मतलब है कि स्थिति मिली-जुली है। अगर अधिकतर न्यायाधीश राजनीति से प्रभावित हो गए हैं, तो द्विवेदी जैसे न्यायाधीश बहुत कम हैं।’