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  • क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    क्या ‘हमजा’ का किरदार असली है? धुरंधर 2 से जुड़े कर्नल ने सुनाई रियल जासूस की कहानी

    मुंबई। धुरंधर 2 की रिलीज के बाद दर्शकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि फिल्म में दिखाया गया जासूसी किरदार कितना वास्तविक है। इसी बीच फिल्म से जुड़े सैन्य सलाहकार कर्नल भूपेंद्र शाही ने दावा किया है कि कहानी में कई पहलू वास्तविक घटनाओं से प्रेरित हैं। उन्होंने एक ऐसे जासूस का किस्सा भी साझा किया, जिसने सीमा पार जाकर महीनों तक गुप्त मिशन पूरा किया।

    विजय विक्रम सिंह के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कर्नल शाही ने कहा कि जासूसी गतिविधियां हर देश में होती हैं और फिल्म में दिखाया गया अंदाज काफी हद तक वास्तविक है। उन्होंने बताया कि उनके पास एक ऐसा युवक था, जिसे सीमा पार भेजा गया था और उसने महत्वपूर्ण जानकारी जुटाकर वापसी की।

    कर्नल शाही के मुताबिक, वह जासूस पीओके में करीब तीन-चार महीने तक रहा। वहां उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए स्थानीय माहौल में खुद को ढाल लिया, यहां तक कि निकाह भी किया और मदरसे में रहकर गूंगे व्यक्ति का अभिनय करता रहा। मिशन के दौरान एक बार उसकी पहचान उजागर होने का खतरा भी पैदा हुआ, लेकिन स्थानीय महिला की मदद से वह बच निकला।

    उन्होंने बताया कि जासूस को एक तय तारीख तक एलओसी पार कर वापस लौटना था, लेकिन परिस्थितियों के कारण देरी हो गई। इसके बावजूद वह किसी तरह भारतीय सीमा में दाखिल हो गया। बाद में सेना ने उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उसके पास मौजूद जानकारी को सुरक्षित तरीके से निकाला गया।

    कर्नल शाही ने कहा कि मिशन के दौरान जासूस को पर्याप्त नकद राशि भी दी गई थी, जिसे उसने स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बनाने में इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, फिल्म में दिखाए गए कई तत्व ऐसे वास्तविक अभियानों से प्रेरित हैं, हालांकि सिनेमा में उन्हें थोड़ा नाटकीय रूप दिया जाता है।

    बताया जाता है कि कर्नल शाही इससे पहले भी कई फिल्मों में सैन्य सलाहकार की भूमिका निभा चुके हैं। उनका काम फिल्मों को यथार्थ के करीब लाना और सैन्य प्रक्रियाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करना होता है।

  • आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट

    आवेज दरबार का “इतना मारूंगी” डायलॉग पर धमाकेदार डांस, अनुपमा फैंस हुए लोटपोट


    नई दिल्ली। टीवी शो अनुपमा इस समय दर्शकों की फेवरेट बन चुका है और टीआरपी चार्ट में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रुपाली गांगुली का किरदार और उनके चर्चित डायलॉग सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हाल ही में उनका फेमस डायलॉग “इतना मारूंगी” फिर से वायरल हो गया है इस बार के कारण है बिग बॉस 19 के फेमस कंटेस्टेंट आवेज दरबार का रील वीडियो।

    वीडियो में आवेज इस डायलॉग पर अपने स्टाइलिश और मजेदार मूव्स के साथ डांस करते नजर आए, जिसे देखकर फैंस खूब एंटरटेन हो रहे हैं। वीडियो में अनुपमा के डायलॉग की लंबाई और मजाकिया अंदाज का पूरा मज़ा देखने को मिलता है, जिसमें वह कहती हैं कि “गिरा गिरा कर, दौड़ा दौड़ा कर, भगा भगा कर, जूता भिगो के, सैंडल तोड़ के, हाथ थक गए तो लातों से और पैर थक गए तो बातों से” मारेंगी।

    अनुज कपाड़िया और अन्य सितारों ने दिया रिएक्शन
    सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो पर कई सेलेब्स ने प्रतिक्रिया दी। अनुपमा के अनुज कपाड़िया (गौरव खन्ना) ने लिखा, “भाई ये तुम्हारा बेस्ट वाला है।” इसके अलावा अभिषेक बजाज मृदुल तिवारी, आकांक्षा खन्ना और किम शर्मा समेत कई अन्य सितारों ने भी वीडियो पर अपनी प्रतिक्रियाएं साझा की।

    अनुपमा बनी टीआरपी टॉप पर
    अनुपमा की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है। इस हफ्ते शो ने 2.2 की टीआरपी हासिल की है, जो इसे टीआरपी चार्ट में टॉप पर रखती है। वहीं स्मृति ईरानी के शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी ने भी इसी 2.2 की टीआरपी के साथ कड़ी टक्कर दी। सोशल मीडिया पर फैंस लगातार अनुपमा के डायलॉग्स और वीडियोज़ का मज़ा ले रहे हैं, और इस बार आवेज दरबार की मस्ती भरी रील ने इसे और भी वायरल बना दिया है।

  • प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया

    प्रधानमंत्री ने सुभाषितम के माध्यम से सद्गुण, चरित्र, ज्ञान और धन के शाश्वत मूल्यों को रेखांकित किया


     
    नई दिल्ली ।  प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज भारतीय परंपरा और शास्त्रीय ज्ञान के शाश्वत मूल्यों पर विचार करते हुए देशवासियों को जीवन में इनका पालन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपने संदेश में बल दिया कि सच्ची सुंदरता सद्गुणों से निखरती है वंश गौरव चरित्र से परिलक्षित होता है ज्ञान का वास्तविक मूल्य सफलता में है और धन का अर्थ केवल भोग नहीं बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण आनंद और समाज कल्याण में योगदान है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये मूल्य न केवल प्राचीन काल में महत्वपूर्ण रहे हैं बल्कि आधुनिक समाज और वर्तमान समय में भी ये उतने ही प्रासंगिक हैं। उन्होंने इसे देश की प्रगति सामूहिक जिम्मेदारी और समाज में सद्भाव कायम रखने की दिशा में एक मार्गदर्शक के रूप में बताया। उन्होंने अपने संदेश में एक संस्कृत श्लोक साझा किया जो सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन के महत्व को संक्षेप में प्रस्तुत करता है:

    गुणो भूषयते रूपं शीलं भूषयते कुलम्।
    सिद्धिर्भूषयते विद्यां भोगो भूषयते धनम्॥

    प्रधानमंत्री ने इस श्लोक की व्याख्या करते हुए कहा कि व्यक्ति की वास्तविक सुंदरता उसके गुणों में होती है। शिष्टाचार नैतिकता और चरित्र ही किसी वंश या परिवार का गौरव बढ़ाते हैं। शिक्षा और ज्ञान जीवन को दिशा और उद्देश्य प्रदान करते हैं जबकि धन का उपयोग केवल भोग के लिए नहीं बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यही वे मूल्य हैं जो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफलता और सम्मान दिलाते हैं बल्कि समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान करते हैं।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में ये मूल्य पीढ़ियों से संचित हैं और इन्हें जीवन में अपनाना न केवल नैतिक कर्तव्य है बल्कि आधुनिक जीवन में भी ये अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में इन मूल्यों को आत्मसात करें और दूसरों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करें।

    इस संदेश के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि सद्गुण चरित्र ज्ञान और धन केवल व्यक्तिगत लाभ का साधन नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र की प्रगति और विकास का मार्गदर्शन करने वाले शाश्वत मूल्य हैं। उन्होंने कहा कि जब ये मूल्य समाज में व्यापक रूप से अपनाए जाएंगे तब ही भारत की सामूहिक शक्ति संस्कृति और नैतिकता का सही परिप्रेक्ष्य उजागर होगा।प्रधानमंत्री के इस संदेश को विशेषज्ञ और नागरिक दोनों ही प्रेरणादायक मान रहे हैं। यह न केवल भारतीय सांस्कृतिक धरोहर की याद दिलाता है बल्कि आधुनिक जीवन में नैतिक सामाजिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के महत्व को भी रेखांकित करता है।

  • महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं

    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज, अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का कोई अधिकार नहीं


    कश्‍मीर। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कैदियों की जेल बदलने पर बड़ा बयान दिया। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजन है कि जम्मू-कश्मीर के कैदियों को अन्य जगहों की जेलों से वापस घर लाने के आग्रह वाली उनकी याचिका को उच्च न्यायालय में खारिज कर दिया गया। स्थानीय कैदियों के स्थानांतरण का आग्रह करते हुए महबूबा मुफ्ती की ओर से दायर जनहित याचिका को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया था। एचसी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि इसे राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के लिए दायर किया गया है। महबूबा ने श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘अदालत का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण और आश्चर्यजनक है।’
    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उच्च न्यायालय का कहना है कि कोई भी आम आदमी जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन चूंकि वह एक राजनीतिक नेता हैं, इसलिए उनकी जनहित याचिका राजनीतिक कारणों से है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘उच्च न्यायालय यह भूल रहा है कि राजनीतिक नेता जमीनी हकीकतों से गहराई से जुड़े रहते हैं। मैं एक राजनीतिक नेता होने के नाते जम्मू-कश्मीर के लोगों की स्थिति से भली-भांति परिचित हूं। गरीब लोग जेल में बंद अपने परिजनों से मिलने नहीं जा सकते। वे अपना मुकदमा कैसे लड़ेंगे!’ पीडीपी प्रमुख ने यह भी सवाल उठाया कि अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया।
    महबूबा मुफ्ती किस बात पर हुईं नाराज

    पीडीपी चीफ ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अदालत को मेरे चरित्र पर लांछन लगाने का अधिकार नहीं है। राजनीतिक नेता के रूप में मुझे कोई भी मुद्दा उठाने का पूरा अधिकार है। अदालत को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए था। उसे सरकार से पूछना चाहिए था कि कितने विचाराधीन कैदी जेलों में हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।’ जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अदालत में चर्चा उनके पेशे से परे इस मुद्दे पर होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, ‘अदालत ने मेरा मामला खारिज करने के लिए अजीब तर्क दिए हैं। यह फैसला तर्क पर आधारित होना चाहिए था, लेकिन मुझे खेद है कि अदालत ने ऐसा फैसला सुनाते हुए कहा कि मैं राजनीति कर रही हूं। अनुच्छेद 21 के तहत हमें इन मुद्दों को उठाने और अदालतों में जाने का मौलिक अधिकार है।’
    कुलदीप सिंह सेंगर मामले पर क्या कहा

    महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को खत्म नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि उनकी मांग केवल उन कैदियों को स्थानांतरित करने तक सीमित थी, जिन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है और इस फैसले ने न्यायपालिका में विश्वास को ठेस पहुंचाई है। बलात्कार के दोषी भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित किए जाने के बारे में पूछे जाने पर महबूबा ने आरोप लगाया कि न्यायपालिका का राजनीतिकरण कर दिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कुछ न्यायाधीश अब भी सत्ता के सामने खड़े होने को तैयार हैं। उनका इशारा सूरजपुर जिला न्यायालय की ओर से अखलाक मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने से इनकार किए जाने की ओर था। उन्होंने कहा कि न्यायाधीश सौरभ द्विवेदी ने सरकार से लड़ाई लड़ी और उनसे कहा कि वे मामला वापस नहीं ले सकते, तथा आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन की जाए। महबूबा ने कहा, ‘इसका मतलब है कि स्थिति मिली-जुली है। अगर अधिकतर न्यायाधीश राजनीति से प्रभावित हो गए हैं, तो द्विवेदी जैसे न्यायाधीश बहुत कम हैं।’