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  • पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी

    पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व विवाद जारी, बघेल-चन्नी की बैठक बेनतीजा, राजा वड़िंग को हटाने की मांग फिर उठी


    चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर चल रहा नेतृत्व विवाद फिलहाल सुलझता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं के साथ करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर सहमति नहीं बन सकी। बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने एक बार फिर राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग दोहराई।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के लिए मजबूत नेतृत्व जरूरी है। नेताओं ने अपनी आपत्तियां कांग्रेस हाईकमान तक पहुंचाने का आग्रह करते हुए प्रदेश अध्यक्ष बदलने की मांग रखी।

    हालांकि बैठक के बाद भूपेश बघेल ने विवाद को ज्यादा तूल देने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि पिछले कई दिनों से वह अलग-अलग नेताओं से लगातार चर्चा कर रहे हैं। उनके अनुसार, कोई भी नेता हाईकमान के फैसले का विरोध नहीं कर रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं और संगठन से जुड़े मुद्दे हैं, जिन्हें पार्टी नेतृत्व के सामने रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी नेताओं के हितों का ध्यान रखते हुए उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि क्या बैठक में राजा वड़िंग को हटाने की मांग उठी, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

    चन्नी और वड़िंग को साथ नहीं ला सके बघेल
    पंजाब में पिछले छह दिनों से संगठनात्मक विवाद सुलझाने की कोशिश कर रहे भूपेश बघेल शनिवार दोपहर छत्तीसगढ़ रवाना हो गए। इस दौरान वह चरणजीत सिंह चन्नी और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को एक मंच पर लाने में भी सफल नहीं हो सके।

    बैठक के बाद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि सभी मांगें भूपेश बघेल के सामने रख दी गई हैं। उनका कहना था कि पार्टी की प्राथमिकता 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है और इसके लिए मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है, न कि समझौता करने वाले नेता की।

    रंधावा ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि प्रदेश कांग्रेस का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो मुख्यमंत्री भगवंत मान की राजनीतिक चुनौतियों का मजबूती से सामना कर सके। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक दल समय-समय पर अपने फैसलों में बदलाव करते हैं और कांग्रेस भी ऐसा कर सकती है।

    गौरतलब है कि कांग्रेस हाईकमान ने हाल ही में पंजाब संगठन की नई सूची जारी करते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पार्टी के भीतर दो स्पष्ट खेमे दिखाई दे रहे हैं और चन्नी समर्थक नेता लगातार इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

    बैठक में कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
    भूपेश बघेल के साथ हुई बैठक में चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा, ओपी सोनी, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, विधायक परगट सिंह, पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, भारत भूषण आशु, पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया, पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष बरिंदर ढिल्लों सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

    रंधावा के बयान पर राजा वड़िंग का पलटवार
    सुखजिंदर सिंह रंधावा के “समझौता करने वाला नेता नहीं चाहिए” वाले बयान पर अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि किसी का नाम नहीं लिया गया, तो इशारा उनकी ओर क्यों किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी में स्लीपर सेल या समझौता करने वाले नेताओं के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    राजा वड़िंग ने कहा कि वह और रंधावा करीब साढ़े चार साल तक साथ काम कर चुके हैं। यदि वह समझौता करने वाले नेता होते तो रंधावा उनके साथ काम नहीं करते। वहीं, भाजपा नेता सुनील जाखड़ के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि जाखड़ लंबे समय तक कांग्रेस में रहे और बाद में यह कहते हुए पार्टी छोड़ दी कि यहां हिंदुओं की नहीं सुनी जाती। उन्होंने कहा कि “असली गद्दार तो वही हैं।”

  • पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी खींचतान: भूपेश बघेल की बैठकों से दूर रहा चन्नी खेमा, संगठन में मतभेद हुए उजागर

    पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी खींचतान: भूपेश बघेल की बैठकों से दूर रहा चन्नी खेमा, संगठन में मतभेद हुए उजागर


    नई दिल्ली। पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर जारी गुटबाजी अब खुलकर सामने आने लगी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व को लेकर असहमति जताई है। इसी बीच पार्टी के पंजाब प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संगठनात्मक हालात संभालने के लिए चंडीगढ़ पहुंचे, लेकिन उनकी अब तक चन्नी गुट के नेताओं से मुलाकात नहीं हो सकी है।

    मंगलवार को भूपेश बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कीं, हालांकि चन्नी समर्थक नेताओं ने इन बैठकों से दूरी बनाए रखी। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए चन्नी का समर्थन कर रहे नेताओं की बघेल से मुलाकात नहीं होने के बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

    इस बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अगले एक-दो दिनों में भूपेश बघेल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि बघेल अधिकांश समितियों के अध्यक्षों से चर्चा कर चुके हैं और अब केवल चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी तथा कोर कमेटी के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा से बैठक बाकी है।

    राजा वडिंग के अनुसार, चन्नी ने पहले ही बघेल को सूचित कर दिया था कि वे एक-दो दिन के लिए शहर से बाहर रहेंगे। हालांकि चन्नी के करीबी नेताओं ने भी अब तक बघेल से मुलाकात नहीं की है। चन्नी के निकट माने जाने वाले भारत भूषण आशु भी बैठकों से दूर रहे।

    गौरतलब है कि भूपेश बघेल 6 जुलाई को पंजाब के पांच दिवसीय दौरे पर चंडीगढ़ पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर उनका स्वागत प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने किया। चंडीगढ़ पहुंचने के बाद बघेल ने सबसे पहले प्रताप सिंह बाजवा के साथ बंद कमरे में बैठक की।

    मंगलवार सुबह बघेल ने पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष राजकुमार वेरका के साथ नाश्ते पर मुलाकात की। इसके बाद वेरका सीधे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी से मिलने पहुंचे। इसे कांग्रेस नेतृत्व की ओर से असंतुष्ट नेताओं के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

    उधर, प्रताप सिंह बाजवा ने भरोसा जताया कि पार्टी के भीतर मौजूद सभी मतभेद जल्द दूर कर लिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी नेता को अपनी शिकायतों के बावजूद पार्टी की मर्यादा नहीं लांघनी चाहिए। बाजवा ने दावा किया कि पंजाब की जनता बदलाव चाहती है और कांग्रेस उसके लिए सबसे मजबूत विकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ती है तो जनता का विश्वास जरूर मिलेगा। मुख्यमंत्री पद को लेकर उन्होंने कहा कि इस पर फैसला चुनाव परिणाम आने और सरकार बनने की स्थिति में किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन ऐसे कदमों से बचना चाहिए जो पार्टी के लिए अनावश्यक विवाद का कारण बनें।

  • चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं

    चन्नी के बयान पर कांग्रेस हाईकमान सख्त, राहुल गांधी ने दी क्लास, पंजाब में कोई बदलाव नहीं


    नई दिल्ली: पंजाब में पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के बयान को लेकर मचा हंगामा आज नई दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान की बैठक के बाद कुछ हद तक शांत हुआ। बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई जिसमें राहुल गांधी सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूद थे।

    सूत्रों के मुताबिक चन्नी के उस बयान के बाद ही पंजाब कांग्रेस के कई नेताओं को दिल्ली तलब किया गया था। बैठक में राहुल गांधी ने नेताओं को अनुशासन और जिम्मेदारी के पाठ पढ़ाते हुए साफ कर दिया कि कांग्रेस में किसी तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने चन्नी के बयान पर नाराजगी जताई और स्पष्ट किया कि पंजाब कांग्रेस के प्रमुख पदों पर कोई बदलाव नहीं होगा। राज्य अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला कांग्रेस अध्यक्ष जैसे पद ज्यों के त्यों बने रहेंगे।बैठक में शामिल नेताओं में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी महासचिव केसी वेणुगोपाल पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब प्रभारी भूपेश सिंह बघेल सुखजिंदर सिंह रंधावा पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी और अन्य नेता शामिल थे।

    चन्नी ने हाल ही में एक वीडियो में कहा था कि पंजाब में प्रदेश अध्यक्ष महासचिव नेता प्रतिपक्ष और महिला विंग की अध्यक्ष सभी अपर कास्ट से हैं। उनका सवाल था कि बड़े पदों पर दलितों का प्रतिनिधित्व क्यों नहीं है जबकि पंजाब में दलित आबादी लगभग 38 प्रतिशत है। उनके इस बयान ने पार्टी में विभिन्न प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। कुछ नेताओं ने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया तो कुछ ने इसे जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश करार दिया।विवाद बढ़ने पर चन्नी ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी के खिलाफ बात करना नहीं था। उन्होंने बताया कि उनके शब्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्हें जातीय राजनीति से जोड़ने की कोशिश की गई। चन्नी ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने हमेशा उन्हें सम्मान और जिम्मेदारी दी जिन्हें उन्होंने ईमानदारी से निभाया।

    पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और चन्नी के बयान ने पार्टी के भीतर नेतृत्व और जातीय संतुलन के सवाल को फिर से ताजा कर दिया। हाईकमान ने स्थिति को संभालते हुए साफ किया कि पार्टी का ढांचा स्थिर रहेगा और किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा।इस बैठक के बाद कांग्रेस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है और सभी नेताओं से उम्मीद की जाती है कि वे पार्टी के हित में काम करें।