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  • नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की

    नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला: सीबीआई ने 13 आरोपितों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 गिरफ्तार आरोपितों के विरुद्ध राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत में पहली चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी ने जांच के दौरान जुटाए गए सैकड़ों गवाहों के बयान, दस्तावेज और भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों के खिलाफ अभियोजन की प्रक्रिया शुरू की है।’

    सीबीआई के अनुसार, चार्जशीट में 360 गवाहों के बयान, 422 दस्तावेज और 43 भौतिक साक्ष्यों को शामिल किया गया है। जांच में आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी, साक्ष्य नष्ट करने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम-2024 तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध पाए गए हैं। फिलहाल सभी 13 आरोपित न्यायिक हिरासत में हैं।

    एजेंसी ने बताया कि 3 मई 2026 को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद 12 मई को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच के लिए 72 अधिकारियों और आठ साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों की विशेष टीम गठित की गई। इसके बाद महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों में 92 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।

    जांच के दौरान प्रश्नपत्र लीक की पूरी श्रृंखला का खुलासा हुआ। गिरफ्तार आरोपितों में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के तीन विषय विशेषज्ञ, कई कथित बिचौलिये तथा दो कोचिंग संस्थानों से जुड़े पदाधिकारी शामिल हैं।

    चार्जशीट में शामिल आरोपितों के नाम इस प्रकार हैं:

    • मनीषा मंधारे (जीवविज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (रसायन विज्ञान विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय हवलदार (भौतिकी विषय विशेषज्ञ, एनटीए)
    • मनीषा संजय वाघमारे
    • धनंजय निवृत्ति लोखंडे
    • शुभम मधुकर खैरनार
    • यश यादव
    • मांगीलाल बिवाल
    • विकास बिवाल
    • दिनेश बिवाल
    • डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे
    • शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर (आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट, लातूर के संचालक)
    • तेजस हर्षदकुमार शाह (एपीएमए कोचिंग इंस्टीट्यूट, पुणे में भौतिकी संकाय एवं मुख्य परिचालन अधिकारी)

    सीबीआई ने जांच के दौरान आरोपितों के कथित आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिए हैं। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी, जबकि जांच के अन्य पहलुओं पर भी कार्रवाई जारी है।

  • MP: इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड केस में दो आरोपियों को क्लीनचिट… पुलिस ने चार्जशीट से नाम हटाए

    MP: इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड केस में दो आरोपियों को क्लीनचिट… पुलिस ने चार्जशीट से नाम हटाए


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर शहर (Indore city) के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी (Transporter Raja Raghuvanshi) की हत्या के मामले में नया मोड़ आया है। पुलिस ने इस हत्याकांड में पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को क्लीनचिट (Two Accused Clean chit) दे दी है और उनके नाम चार्जशीट से हटा दिए हैं। ये आरोपी थे बलवीर अहिरवार (गार्ड) और लोकेंद्र सिंह तोमर (बिल्डिंग मालिक), जिन्हें पहले साक्ष्य नष्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

    पुलिस की जांच में न तो इन आरोपियों के खिलाफ हत्या से जुड़े कोई ठोस प्रमाण मिले और न ही साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों की पुष्टि हो सकी। इससे मामले में शिलांग पुलिस की जांच पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद जांच में उनकी संलिप्तता न मिलने पर उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।


    गिरफ्तारी के बाद किया गया बरी

    शुरुआत में शिलांग पुलिस ने बलवीर और लोकेंद्र को साक्ष्य छुपाने के शक में गिरफ्तार किया था, क्योंकि राजा रघुवंशी की हत्या के बाद मृतक की पत्नी सोनम ने लोकेंद्र की हीरा नगर स्थित बिल्डिंग में ठहरने के लिए कमरे किराए पर लिए थे। ब्रोकर शिलोम जेम्स ने सोनम को छिपने के लिए यह रूम दिलवाया था। हालांकि, विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने इन दोनों की संलिप्तता से इनकार कर दिया।


    पुलिस अधीक्षक का बयान

    ईस्ट खासी हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक विवेक सिएम ने बताया, “शुरुआत में उपलब्ध परिस्थितियों और सूचनाओं के आधार पर इन दोनों को गिरफ्तार किया गया था। लेकिन बाद की जांच और सत्यापन में उनकी कोई भूमिका नहीं पाई गई, इसलिए उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया।”

    अब पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है और तीन आरोपियों में से केवल शिलोम जेम्स के खिलाफ ही कार्रवाई जारी है। बाकी सभी आरोपितों, जिनमें मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी और राज कुशवाह भी शामिल हैं, के खिलाफ जांच जारी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं।

  • CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां

    CBI ने किया 1 000 करोड़ के अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड का भंडाफोड़ चीन से जुड़े ठग 111 फर्जी कंपनियां


    नई दिल्ली । देश में बढ़ते हुए संगठित साइबर अपराधों पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय जांच ब्यूरो CBI ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा किया है जिसका अनुमानित आकार ₹1 000 करोड़ से अधिक का है। यह गिरोह फर्जी ऑनलाइन स्कीमों के माध्यम से आम जनता को निशाना बना रहा था। CBI ने इस मामले में गहन जांच के बाद 17 आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोपपत्र चार्जशीट दाखिल किया है। इन आरोपियों में चार विदेशी नागरिक भी शामिल हैं जो इस रैकेट के अंतर्राष्ट्रीय आयामों को दर्शाते हैं।

    ठगी का तरीका और विदेशी कनेक्शन

    जांच में सामने आया है कि यह अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। ठगों ने ऑनलाइन माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए फर्जी लोन ऑफर आकर्षक लेकिन झूठे लोन प्रस्तावों के ज़रिए प्रोसेसिंग फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट के नाम पर ठगी करना।
    नकली निवेश और पोंजी स्कीम मल्टी लेवल मार्केटिंग और पोंजी योजनाओं के झूठे वादे देकर लोगों से बड़ी पूंजी निवेश करवाना।
    फर्जी मोबाइल ऐप कई नकली मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम देना।झूठे नौकरी प्रस्ताव अच्छी वेतन वाली नौकरी का झांसा देकर सिक्योरिटी डिपॉजिट या रजिस्ट्रेशन फीस लेना।CBI सूत्रों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क के संचालन में चीन से जुड़े ठगों की महत्वपूर्ण भूमिका थी जो भारत में मौजूद अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस बड़े पैमाने की धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे थे।

    फर्जी कंपनियों का जाल

    धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को वैध दिखाने और उसे विदेश भेजने के लिए इस गिरोह ने कंपनियों का एक बड़ा जाल बिछाया था। प्रारंभिक जांच में 58 से लेकर 111 जैसा कि शीर्षक में बताया गया है तक फर्जी या शेल कंपनियों का पता चला है जिनका उपयोग केवल ठगी के पैसे को लेयरिंग करने के लिए किया जाता था।CBI ने इस मामले में अक्टूबर में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
    आरोपपत्र में सभी 17 आरोपियों पर धोखाधड़ी आपराधिक साजिश और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम IT Act की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।इस खुलासे से यह साफ होता है कि साइबर अपराधी अब छोटे स्तर पर नहीं बल्कि बड़े अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क बनाकर संगठित रूप से काम कर रहे हैं जिससे निपटने के लिए केंद्रीय एजेंसियों को लगातार अपनी जांच तकनीकों को उन्नत करना पड़ रहा है। CBI की यह सफलता देश में साइबर अपराधों के खिलाफ एक बड़ी जीत मानी जा रही है।