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  • 504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    504 करोड़ के बैंक घोटाले में छह अफसरों पर चार्जशीट, रिश्वत और नियमों की अनदेखी के आरोप

    चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थाओं से जुड़े 504 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में छह अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसी ने साकेत कुमार, राम कुमार सिंह, पंकज अग्रवाल, प्रदीप कुमार, विनीत गर्ग और मोहम्मद शाइन पर बैंक अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों के साथ कथित आपराधिक साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में सरकारी धन को निजी बैंकों में स्थानांतरित कराने, बैंक चयन और एफडी निवेश से जुड़े नियमों की अनदेखी तथा वित्त विभाग की निर्धारित सीमाओं को दरकिनार करने जैसे आरोप शामिल हैं।

    जांच के मुताबिक अधिकारियों पर सरकारी धन के निवेश में प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने के साथ-साथ कथित तौर पर रिश्वत या अन्य अनुचित लाभ लेने के आरोप भी लगाए गए हैं। मामले में सबूत छिपाने और वित्तीय फैसलों के जरिए कुछ निजी बैंक अधिकारियों को फायदा पहुंचाने की बात भी चार्जशीट में कही गई है।

    साकेत कुमार के संबंध में आरोप है कि उन्होंने 16 जून 2025 से 10 अप्रैल 2026 के बीच विकास एवं पंचायत विभाग के आयुक्त एवं सचिव के पद पर रहते हुए हरियाणा पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। जांच के अनुसार, एक निजी बैंक के पूर्व अधिकारी की सिफारिश पर एचपीजीसीएल पेंशन फंड ट्रस्ट से 25 करोड़ रुपये निकाले गए और उन्हें संबंधित बैंक में जमा कराया गया।

    पंचकूला नगर निगम के तत्कालीन आयुक्त राम कुमार सिंह को लेकर भी चार्जशीट में वित्तीय लेनदेन का उल्लेख है। जांच के अनुसार, 11 जनवरी 2026 को उनके आवास पर 50 लाख रुपये पहुंचाए गए। इसके बाद 22 जनवरी को दिल्ली में उनके बेटे प्रशांत सिंह को तीन अलग-अलग किश्तों में कुल दो करोड़ रुपये दिए जाने का आरोप है। इन किश्तों में एक करोड़ रुपये, 50 लाख रुपये और 50 लाख रुपये शामिल थे।

    हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष विनीत गर्ग के मामले में भी कथित अनुचित लाभ का उल्लेख किया गया है। जांच में आरोप लगाया गया कि दीपावली से पहले एक बैंक अधिकारी के माध्यम से उनके घर 50-50 ग्राम वजन के दो सोने के सिक्के पहुंचाए गए। चार्जशीट में पंकज अग्रवाल के लिए होटल में पार्टियों और नृत्य कार्यक्रमों के आयोजन का भी उल्लेख है। इन घटनाओं को सरकारी वित्तीय फैसलों से जुड़े कथित अनुचित लाभ के संदर्भ में जांचा गया।

    एचपीजीसीएल के तत्कालीन प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष मोहम्मद शाइन पर भी बैंक को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। चार्जशीट के मुताबिक नवंबर 2024 में इंडसइंड बैंक में करीब 108.46 करोड़ रुपये की एफडी समय से पहले तुड़वाई गई। इसमें से 50 करोड़ रुपये दूसरे निजी बैंक में जमा कराए गए। जांच एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया से एचपीजीसीएल को करीब 1.66 करोड़ रुपये के ब्याज का नुकसान हुआ।

    वहीं, प्रदीप कुमार पर ब्याज दरों से संबंधित अनियमितताओं के जरिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आर्थिक नुकसान पहुंचाने का आरोप है। चार्जशीट के अनुसार इस मामले में बोर्ड को करीब 159.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

    कुल मिलाकर जांच में सरकारी संस्थाओं के बैंक खातों और सावधि जमा से जुड़े फैसलों, बैंक चयन, धन हस्तांतरण और कथित निजी लाभ के बीच संबंधों की पड़ताल की गई है। छह अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप फिलहाल चार्जशीट में दर्ज आरोप हैं। मामले में इन आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच होगी और अंतिम जिम्मेदारी अदालत के निर्णय के आधार पर तय होगी।

  • राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    राम मंदिर में चंदा चोरी का बड़ा खुलासा, CCTV में 105 घटनाएं आईं सामने; 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी

    नई दिल्ली । अयोध्या स्थित राम मंदिर में चंदा चोरी के मामले की जांच अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मामले की जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने रखी गईं। जांच के दौरान मंदिर परिसर में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग खंगाली गई, जिसमें चंदा चोरी की 105 घटनाओं का पता चला है। इन घटनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

    जांच में CCTV फुटेज के अलावा गवाहों के बयान और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों को भी शामिल किया गया। रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण कर घटनाओं की परिस्थितियों को समझने और संबंधित लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई। जांच में सामने आए अलग-अलग साक्ष्यों को आपस में मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने का काम किया गया है।

    अदालत को यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर में कीमती सामान से संबंधित रसीदें सॉफ्टवेयर के जरिए तैयार की जाती हैं। इन रसीदों को सुरक्षित रखने के लिए SBI लॉकर में रखा जाता है। जांच के दौरान रसीदों की व्यवस्था, रिकॉर्ड और अन्य जरूरी सामग्री को भी देखा गया। CCTV में सामने आई 105 घटनाएं अब मामले की जांच का अहम हिस्सा बन गई हैं।

    जांच की मौजूदा स्थिति के मुताबिक पड़ताल लगभग पूरी हो चुकी है। 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद संबंधित मजिस्ट्रेट कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करेंगे। इस समयसीमा को देखते हुए मामले की जांच और आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से जांच की स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। हालांकि अदालत ने रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल मामले को सेशन जज से अपने पास लेने की आवश्यकता नहीं है। अगर आगे किसी अतिरिक्त जांच की जरूरत महसूस होती है, तो उस संबंध में उचित आदेश जारी किया जा सकता है।

    चंदा चोरी के मामले के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। ट्रस्ट में CEO व्यवस्था लागू की गई है और पूर्व सैन्य अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। नई व्यवस्था के तहत प्रशासनिक कामकाज को नए तरीके से संचालित करने की तैयारी की गई है।

    मामले में पहली गिरफ्तारी के बाद 90 दिन की अवधि पूरी होने की तारीख भी अहम है। बताया गया कि 25 सितंबर को यह अवधि पूरी हो रही है। यदि निर्धारित समय तक चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो गिरफ्तार आरोपियों को कानून के तहत स्वत: जमानत मिलने की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से समय पर आरोप पत्र दाखिल करना जांच के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    अब 25 सितंबर तक चार्जशीट दाखिल होने और उसके बाद होने वाली कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। CCTV में सामने आई 105 घटनाओं, गवाहों के बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • 'पुष्पा 2' प्रीमियर भगदड़ मामले में अल्लू अर्जुन को कोर्ट का समन, 22 जून को व्यक्तिगत पेशी के आदेश से बढ़ीं कानूनी चुनौतियां

    'पुष्पा 2' प्रीमियर भगदड़ मामले में अल्लू अर्जुन को कोर्ट का समन, 22 जून को व्यक्तिगत पेशी के आदेश से बढ़ीं कानूनी चुनौतियां

    नई दिल्ली । हैदराबाद के संध्या थिएटर में फिल्म ‘पुष्पा 2’ के प्रीमियर के दौरान हुई भगदड़ और उससे जुड़े दुखद हादसे का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस प्रकरण में अभिनेता अल्लू अर्जुन की कानूनी चुनौतियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। अदालत ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए अभिनेता को निर्धारित तिथि पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। न्यायिक प्रक्रिया के इस नए चरण ने मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

    दिसंबर 2024 में हुए इस हादसे ने फिल्म उद्योग, प्रशासन और आम जनता के बीच बड़े आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। फिल्म के विशेष प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शकों के थिएटर पहुंचने से अचानक भीड़ बढ़ गई थी। स्थिति नियंत्रण से बाहर होने पर भगदड़ जैसी परिस्थिति पैदा हुई, जिसमें एक महिला की जान चली गई थी जबकि एक किशोर गंभीर रूप से घायल हो गया था। घटना के बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई थी और विभिन्न पहलुओं को लेकर पुलिस ने विस्तृत पड़ताल की।

    जांच एजेंसियों ने हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का आकलन करते हुए कई व्यक्तियों और संबंधित पक्षों को मामले में आरोपी बनाया। पुलिस द्वारा दाखिल आरोपपत्र में थिएटर प्रबंधन के साथ-साथ अन्य संबंधित लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। इसी क्रम में अभिनेता अल्लू अर्जुन को भी आरोपी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जिसके बाद अदालत ने उन्हें सुनवाई के लिए तलब किया है।

    अदालत द्वारा जारी समन के अनुसार अभिनेता को 22 जून को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। इस मामले में केवल अभिनेता ही नहीं बल्कि कई अन्य आरोपियों को भी अदालत के समक्ष पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी सुनवाई मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इसी दौरान आरोपों और जांच से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।

    घटना के बाद पीड़ित परिवार लगातार न्याय की मांग करता रहा है। हादसे में जान गंवाने वाली महिला के परिजनों का कहना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। वहीं घायल युवक का उपचार लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा और उसके स्वास्थ्य को लेकर समय-समय पर जानकारी सामने आती रही।

    हाल के दिनों में अभिनेता के परिवार के सदस्यों ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। इस दौरान परिवार को हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया गया। इस कदम को मानवीय संवेदना के तौर पर देखा गया, हालांकि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित ढंग से आगे बढ़ रही है और अदालत में मामले की सुनवाई जारी है।

    फिल्मों के प्रीमियर और बड़े सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा प्रबंधन को लेकर यह मामला एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती लोकप्रियता और भारी भीड़ को देखते हुए आयोजकों, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

    अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत मामले से जुड़े तथ्यों, जांच रिपोर्ट और आरोपों पर आगे की कार्रवाई को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय ले सकती है। इस बीच, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को भी प्रमुखता से सामने ला रहा है।

  • आईडीएफसी बैंक फंड दुरुपयोग मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रकरणों में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    आईडीएफसी बैंक फंड दुरुपयोग मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रकरणों में 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    नई दिल्ली । हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के फंड के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने जांच को आगे बढ़ाते हुए नौ आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालतों में चार्जशीट दाखिल कर दी है। एजेंसी के अनुसार इन मामलों में सरकारी अधिकारियों, बैंक कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की कथित मिलीभगत के जरिए सरकारी धन के अनुचित उपयोग और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

    सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्रों के अनुसार हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में अवैध बैंकिंग लेन-देन के कारण लगभग 504 करोड़ रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। वहीं चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में करीब 153 करोड़ रुपये की धनराशि प्रभावित होने का दावा किया गया है। दोनों मामलों को मिलाकर कथित अनियमितताओं का आंकड़ा 650 करोड़ रुपये से अधिक पहुंचता है।

    जांच एजेंसी ने कहा है कि आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इसके साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं को भी आरोपपत्र में शामिल किया गया है। एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका का विस्तृत विश्लेषण किया गया है और आगे की जांच भी जारी रहेगी।

    हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में दाखिल चार्जशीट पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में प्रस्तुत की गई है। इस मामले में दो निजी व्यक्तियों को कथित रूप से अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताते हुए आरोपी बनाया गया है। यह इस प्रकरण में दाखिल दूसरी चार्जशीट है। इससे पहले एजेंसी 15 अन्य आरोपियों के खिलाफ भी आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है, जिनमें सरकारी कर्मचारी, बैंक अधिकारी, निजी कंपनियां और अन्य व्यक्ति शामिल थे।

    दूसरी ओर चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में पहली बार आरोपपत्र दाखिल किया गया है। चंडीगढ़ स्थित विशेष अदालत में प्रस्तुत इस चार्जशीट में सात आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें पांच बैंक अधिकारी, स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ा एक अधिकारी तथा एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि वित्तीय लेन-देन की प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन करते हुए सरकारी धन को अनुचित तरीके से स्थानांतरित किया गया।

    सीबीआई के अनुसार इन मामलों की जांच विभिन्न एजेंसियों से प्राप्त शिकायतों और प्राथमिक जांच रिपोर्टों के आधार पर शुरू की गई थी। हरियाणा के कई सरकारी विभागों से जुड़े मामलों की जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक तंत्र से सीबीआई को सौंपी गई थी। वहीं चंडीगढ़ में आर्थिक अपराध से जुड़े मामलों की जांच भी बाद में केंद्रीय एजेंसी के हवाले की गई।

    जांच के दौरान एजेंसी ने हाल ही में चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इन छापों के दौरान कुछ सरकारी अधिकारियों के आवासों, निजी कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के परिसरों की जांच की गई। एजेंसी का उद्देश्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन के प्रवाह की जानकारी जुटाना था।

    सीबीआई का दावा है कि जांच में ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि कुछ सरकारी अधिकारियों और बैंक कर्मचारियों ने आपसी समन्वय के साथ खातों के संचालन, धन हस्तांतरण और रकम को विभिन्न माध्यमों से आगे भेजने में भूमिका निभाई। एजेंसी अब वित्तीय लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही है ताकि कथित अनियमितताओं के सभी पहलुओं को सामने लाया जा सके।

    जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया अभी समाप्त नहीं हुई है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर भविष्य में अतिरिक्त आरोपपत्र भी दाखिल किए जा सकते हैं। मामले की सुनवाई विशेष अदालतों में आगे बढ़ेगी, जहां प्रस्तुत साक्ष्यों और आरोपों की न्यायिक जांच की जाएगी।

  • NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल

    NIA की चार्जशीट में साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया सात आतंकवादियों के नाम शामिल


    नई दिल्ली । चर्चित जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के मामले में अपनी चार्जशीट दायर की है जिसमें सात आरोपियों का नाम शामिल है। इन आरोपियों में प्रमुख पाकिस्तानी आतंकवादी साजिद जट्ट को पहलगाम हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रेजिस्टेंस फ्रंट के आतंकवादी संगठनों का नाम भी शामिल है जो पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। इस हमले में 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक की मौत हुई थी। चार्जशीट में यह बताया गया है कि पाकिस्तान से इस हमले की साजिश रची गई और इसमें लश्कर और TRF की भूमिका अहम रही। एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों ने धर्म आधारित टार्गेट हत्याएं की थीं और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण समय था।

    एनआईए द्वारा दायर 1597 पन्नों की चार्जशीट में पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी शामिल हैं जिनकी पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी के रूप में हुई है। इन तीन आतंकवादियों को भारतीय सुरक्षा बलों ने जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम में ऑपरेशन महादेव के दौरान मार गिराया था।

    कौन है साजिद जट्ट

    चार्जशीट में लश्कर के टॉप कमांडर साजिद जट्ट को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। उनका पूरा नाम सैफुल्लाह साजिद जट्ट है और वह पाकिस्तान के पंजाब राज्य के कसूर जिले का रहने वाला है। साजिद जट्ट लश्कर-ए-तैयबा का तीसरा सबसे बड़ा कमांडर माना जाता है और हाफिज सईद के बाद वह इस संगठन में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक हैं।

    साजिद जट्ट को द रेजिस्टेंस फ्रंट का चीफ भी बताया जाता है जो जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देता है। TRF ने ही पहलगाम आतंकी हमले को अंजाम दिया था। भारत सरकार ने साल 2023 में TRF को यूएपीए के तहत बैन कर दिया था। एनआईए ने साजिद जट्ट पर 10 लाख रुपये का इनाम भी घोषित कर रखा है।

    चार्जशीट में साजिद जट्ट के अलावा अन्य चार आतंकवादियों पर भी आरोप लगाए गए हैं जिनमें भारतीय न्याय संहिता शस्त्र अधिनियम 1959 और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम 1967 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप में दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों को आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में 22 जून को एनआईए ने गिरफ्तार किया था।

    एनआईए ने अपनी जांच में यह पुष्टि की कि दोनों स्थानीय कश्मीरी आरोपियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान की और यह भी बताया कि ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। इसके अलावा एनआईए ने पाकिस्तान के प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ अपनी सख्त कार्रवाई जारी रखने का संकल्प लिया है।

    इस चार्जशीट से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान लगातार भारतीय सीमा में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है और ऐसे आतंकवादियों की मदद करने में स्थानीय कश्मीरी भी शामिल हो रहे हैं। एनआईए की यह कार्रवाई इस बात को भी उजागर करती है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी कार्रवाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है।

  • NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार

    NIA की चार्जशीट में पहलगाम हमले के सात 'गुनहगार' तीन आतंकवादी ढेर दो स्थानीय लोग गिरफ्तार


    नई दिल्ली । 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के संबंध में अपनी चार्जशीट दायर कर दी है। इस चार्जशीट में लश्कर-ए-तैयबा और द रजिस्टेंस फ्रंट के सात प्रमुख आतंकवादियों को आरोपी ठहराया गया है। इनमें से तीन आतंकवादी मारे जा चुके हैं जबकि दो स्थानीय लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस हमले में कम से कम 25 लोग मारे गए थे जिससे पूरे क्षेत्र में भारी आतंकवादी गतिविधियां और तनाव उत्पन्न हो गया था।

    चार्जशीट में यह भी बताया गया है कि इस हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई थी और लश्कर-ए-तैयबा तथा के आतंकवादियों ने मिलकर इस हमले को अंजाम दिया। इसके अलावा पाकिस्तान के तीन मारे गए आतंकियों के नाम भी इसमें शामिल हैं जिनमें फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमजा अफगानी का नाम शामिल है। ये तीनों आतंकवादी श्रीनगर के जंगलों में चलाए गए ऑपरेशन महादेव के दौरान भारतीय सेना के साथ मुठभेड़ में ढेर हो गए थे।

    चार्जशीट में एनआईए ने भारतीय दंड संहिता के तहत आर्म्स एक्ट 1969 और यूएपीए 1967 की धारा 13 18 और 20 के तहत आरोप लगाए हैं। इसके अलावा एनआईए ने दो स्थानीय कश्मीरियों परवेज अहमद और बशीर अहमद को भी आरोपी बनाया है। इन दोनों को 22 जून को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आतंकवादियों को पनाह देने और उन्हें मदद पहुंचाने का आरोप है। पूछताछ के दौरान इन दोनों ने यह भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान के ये आतंकवादी लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य थे।

    एनआईए के मुताबिक आतंकवादियों को पनाह देने और उनकी मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किए गए दोनों स्थानीय कश्मीरियों ने हमले में शामिल तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों की पहचान भी की। इससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी संगठनों ने इस हमले की साजिश रची थी और इसमें स्थानीय कश्मीरियों का भी सहयोग था।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया कि हमले के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत पर हमला करना शुरू कर दिया लेकिन भारतीय सेना के मजबूत डिफेंस सिस्टम के सामने पाकिस्तान की कार्रवाइयां नाकाम हो गईं। अंत में पाकिस्तान को युद्धविराम की ओर कदम बढ़ाना पड़ा।

    यह चार्जशीट आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ नीति और पाकिस्तान द्वारा आतंकवादियों को पनाह देने की निरंतर कोशिशों को उजागर करती है। एनआईए द्वारा किए गए इस खुलासे से यह स्पष्ट हो गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और TRF जैसे आतंकवादी संगठन भारत के खिलाफ लगातार साजिशें रच रहे हैं।

    एनआईए की चार्जशीट से यह भी संदेश जाता है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है और पाकिस्तान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा। इस मामले में आगे की जांच जारी है और आरोपी आतंकवादियों को पकड़ा जाने तक उनकी तलाश जारी रहेगी।

  • फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

    फर्जी बैंक गारंटी से टेंडर मामले में ED की बड़ी कार्रवाई… रिलायंस पावर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल


    नई दिल्ली।
    एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (Enforcement Directorate- ED) ने शनिवार को रिलायंस पावर लिमिटेड (Reliance Power Limited) और 10 अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग (Money laundering.) के एक मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है. यह मामला 68 करोड़ रुपए से ज्यादा की फर्जी बैंक गारंटी के जरिए एक बड़ा सरकारी टेंडर हासिल करने से जुड़ा हुआ है. यह चार्जशीट दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दाखिल की गई है.

    इस चार्जशीट में रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल, रिलायंस NU BESS लिमिटेड, रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड, रिलायंस ग्रुप के एग्जीक्यूटिव पुनीत नरेंद्र गर्ग और ट्रेड फाइनेंसिंग कंसल्टेंट अमर नाथ दत्ता का नाम शामिल किया गया है. इसके अलावा बायोथेन केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड, रविंदर पाल सिंह चड्ढा और मनोज भैयासाहेब पोंगडे को भी आरोपी बनाया गया है.

    ED इससे पहले इस केस में अपनी पहली चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें ओडिशा की शेल कंपनी बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड और उसके MD पाठा सारथी बिस्वाल का नाम था. जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क कमीशन के बदले फर्जी बैंक गारंटी जारी करने में शामिल था. यह मामला 68.2 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी से जुड़ा है, जो रिलायंस पावर की लिस्टेड कंपनी रिलायंस NU BESS लिमिटेड की तरफ से सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से टेंडर हासिल करने के लिए जमा की गई थी. ED का दावा है कि रिलायंस ग्रुप के अधिकारियों को पता था कि बैंक गारंटी फर्जी थी।

    जांच एजेंसी के अनुसार, SBI की एक नकली ईमेल ID के जरिए SECI को जाली एंडोर्समेंट भेजे गए. जब SECI को धोखाधड़ी का शक हुआ, तो एक दिन के भीतर IDBI बैंक से असली बैंक गारंटी जुटाने की कोशिश की गई, लेकिन तय समयसीमा के बाद जमा होने के कारण SECI ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया. ED का आरोप है कि जब रिलायंस NU BESS लिमिटेड L-2 बिडर के तौर पर सामने आई और टेंडर हाथ से फिसलता दिखा, तो कोलकाता में SBI ब्रांच से एक और नकली विदेशी बैंक गारंटी का एंडोर्समेंट कराने की कोशिश की गई. इसके लिए एक बैंक के नाम पर फर्जी गारंटी तैयार की गई.

    जांच में यह भी सामने आया कि इस फर्जी गारंटी को असली दिखाने के लिए sbi.co.in से मिलता-जुलता एक नकली डोमेन s-bi.co.in इस्तेमाल किया गया. इसी डोमेन से SBI के नाम पर फर्जी ईमेल और एंडोर्समेंट लेटर भेजे गए. ED ने यह भी आरोप लगाया है कि फर्जी बैंक गारंटी के इंतजाम के लिए जरूरी फंडिंग जुटाने को रिलायंस की दूसरी सब्सिडियरी रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड से बिस्वाल ट्रेडलिंक को फर्जी ट्रांसपोर्टेशन सर्विस के नाम पर 6.33 करोड़ रुपए भेजे गए. इस मामले में ED ने अब तक करीब 1000 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है. जांच में 5.15 करोड़ रुपए की ठगी सामने आई है।

    इस केस में बिस्वाल के साथ-साथ रिलायंस पावर के पूर्व CFO अशोक कुमार पाल और अमर नाथ दत्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. रिलायंस पावर ने स्टॉक मार्केट को दिए अपने बयान में कहा है कि कंपनी, उसकी सब्सिडियरी और कर्मचारी पूरी तरह से निर्दोष हैं. वे थर्ड पार्टी द्वारा किए गए फ्रॉड, जालसाजी और साजिश के शिकार हैं. कंपनी का कहना है कि ED का यह केस उसी FIR पर आधारित है, जो खुद कंपनी ने दर्ज कराई थी. जांच एजेंसी के आरोपों की अभी तक न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है. यह मनी लॉन्ड्रिंग केस दिल्ली पुलिस की नवंबर 2024 में दर्ज FIR से निकला है।