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  • हिंदू नववर्ष 2026: ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ कार्य, पूरे साल मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

    हिंदू नववर्ष 2026: ब्रह्म मुहूर्त में करें ये शुभ कार्य, पूरे साल मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में नववर्ष का विशेष महत्व माना गया है जो चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है। वर्ष 2026 में यह पावन अवसर 19 मार्च को पड़ रहा है इसी दिन से विक्रम संवत 2083 की शुरुआत होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नववर्ष का पहला दिन पूरे साल की दिशा तय करता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त में किए गए कार्य अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस शुभ समय में किया गया हर सकारात्मक प्रयास पूरे वर्ष जीवन में खुशियां सफलता और समृद्धि लेकर आता है।

    ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार नववर्ष के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस समय वातावरण शुद्ध और ऊर्जा से भरपूर होता है जो मन और शरीर को सकारात्मकता से भर देता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर विधिपूर्वक पूजा अर्चना करें। विशेष रूप से भगवान विष्णु मां दुर्गा और भगवान गणेश की पूजा करने का विधान बताया गया है। ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है और पूरे वर्ष ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।

    नववर्ष के पहले दिन घर की साफ सफाई का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि स्वच्छ और सुसज्जित घर में देवी देवताओं का वास होता है। इस दिन घर के मुख्य द्वार को सजाना चाहिए रंगोली बनानी चाहिए और आम के पत्तों या फूलों से तोरण लगाना चाहिए। यह न केवल घर की सुंदरता बढ़ाता है बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है और नकारात्मकता को दूर करता है।

    इसके साथ ही दान पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या अन्य आवश्यक चीजें दान करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। दान करने से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि यह हमारे भीतर करुणा और सेवा की भावना को भी जागृत करता है। ऐसा करने से जीवन में समृद्धि और संतोष का भाव बना रहता है।

    हिंदू नववर्ष को नई शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन व्यक्ति को अपने जीवन के लिए सकारात्मक संकल्प लेना चाहिए। जैसे नियमित पूजा करना अच्छे कर्म करना दूसरों की सहायता करना और जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने का प्रण लेना। कई लोग इस शुभ अवसर पर नया व्यवसाय नई योजना या किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत भी करते हैं क्योंकि इसे अत्यंत शुभ समय माना गया है।

    अंतत ब्रह्म मुहूर्त में किया गया हर शुभ कार्य व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव डालता है। यदि इस पावन दिन को श्रद्धा भक्ति और सकारात्मकता के साथ मनाया जाए तो पूरे वर्ष जीवन में खुशहाली सफलता और मानसिक शांति बनी रहती है।

  • 2026 में पड़ेगा ज्येष्ठ अधिकमास 13 महीने का साल धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से विशेष संयोग"

    2026 में पड़ेगा ज्येष्ठ अधिकमास 13 महीने का साल धार्मिक और खगोलीय दृष्टि से विशेष संयोग"


    नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 एक विशेष खगोलीय संयोग लेकर आ रहा है जिसमें साल 13 महीनों का होगा। इस वर्ष में ज्येष्ठ अधिकमास अधिक मास पड़ने वाला है। यह एक दुर्लभ खगोलीय घटना है जो धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिषाचार्य अमर डिब्बेवाला के अनुसार यह संयोग अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जा रहा है। इसके साथ ही सिंहस्थ कुंभ से पहले का समय विशेष फलदायक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगा।

    अधिकमास क्या है

    हिंदू पंचांग के अनुसार हर 2-3 वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है जिसे अधिकमास अधिकार मास या मलमास कहा जाता है। यह अतिरिक्त महीना तब जुड़ता है जब सूर्य किसी भी राशि में प्रवेश नहीं करता और चंद्र मास और सौर मास की गति में अंतर पैदा हो जाता है। इस कारण पंचांग की गणना में एक और महीना जुड़ता है ताकि यह अंतर संतुलित किया जा सके।

    अधिकमास का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है क्योंकि इस महीने में किए गए व्रत तप पूजा और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक माना जाता है। 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास के कारण यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    धार्मिक दृष्टि से अधिकमास का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिकमास का महीना अत्यंत पवित्र और पुण्य फलदायक होता है। इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों व्रत साधना और दान का फल कई गुना अधिक मिलता है। यह महीना विशेष रूप से भगवान पुरुषोत्तम की पूजा के लिए जाना जाता है। इस दौरान लोग तीर्थ यात्रा भजन कीर्तन पूजा और दान आदि पुण्य कार्य करते हैं जो उनके जीवन में आशीर्वाद और समृद्धि लेकर आते हैं।

    पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास का विशेष धार्मिक महत्व है और यह माह करीब 58-59 दिनों तक रहेगा। इस दौरान धार्मिक कार्यों और पुण्य कार्यों को बढ़-चढ़कर किया जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और इस महीने के दौरान विशेष रूप से भगवान पुरुषोत्तम की साधना की जाती है।

    क्या करें इस माह में

    इस महीने में किए जाने वाले कुछ विशेष धार्मिक कार्यों में शामिल हैं धार्मिक अनुष्ठान और पूजन जैसे भजन कीर्तन भागवत और अन्य धार्मिक कार्य।तीर्थ यात्रा पर जाना और पवित्र नदियों में स्नान करना। विशेषकर शिप्रा नदी में स्नान करने और महाकालेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना करने की परंपरा है।ब्राह्मणों को दान देना और गरीबों की सहायता करना। इस दौरान लोग अपने पितरों का तर्पण करने के लिए भी विशेष पूजा करते हैं।

    यह पुण्य कार्य पितरों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। हिंदू पंचांग में ज्येष्ठ का महीना एक विशेष समय होता है और अधिकमास के दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनमोल माना जाता है। विशेष रूप से सिंहस्थ कुंभ से पहले आने वाला यह माह आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत लाभकारी है।

    ज्येष्ठ अधिकमास का खगोलीय संयोग

    वर्ष 2026 का ज्येष्ठ अधिकमास विशेष खगोलीय संयोग का हिस्सा है। इस दौरान सूर्य और चंद्रमा की स्थिति ऐसी होती है कि अतिरिक्त महीना जोड़ने की आवश्यकता होती है। इस समय का प्रभाव पूरे साल में पड़ता है और 2026 का यह अधिकमास विशेष रूप से एक आदर्श समय माना जा रहा है जब विभिन्न धार्मिक कार्यों के जरिए जीवन में सुख समृद्धि और शांति प्राप्त की जा सकती है।

    साल 2026 के इस 13 महीने के पंचांग में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का एक नया अध्याय शुरू होगा जो भविष्य में आने वाले कुंभ मेले से पहले एक बेहद महत्वपूर्ण संयोग रहेगा। इस समय को धार्मिक अनुष्ठानों और पुण्य कार्यों के लिए उपयुक्त माना जा रहा है और लोग इस अवसर का पूरा लाभ उठाने के लिए तैयार हैं।