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  • सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें इन 5 विशेष वस्तुओं का दान: पुण्य की जगह लग सकता है दोष, घर में आ सकती है दरिद्रता

    सोमवती अमावस्या पर भूलकर भी न करें इन 5 विशेष वस्तुओं का दान: पुण्य की जगह लग सकता है दोष, घर में आ सकती है दरिद्रता

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए बेहद पवित्र और फलदायी माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या सोमवार के दिन पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या का विशेष योग बना रही है। इस बार की सोमवती अमावस्या ज्योतिषीय दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दिन कई बड़े और दुर्लभ ग्रहों के संयोग बन रहे हैं। जहां एक ओर सूर्य देव वृषभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं जिससे वृषभ संक्रांति का निर्माण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर ज्येष्ठ अधिक मास का समापन भी इसी दिन हो रहा है।

    धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस सोमवती अमावस्या पर वृद्धि योग, सर्वार्थसिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का एक साथ त्रिवेणी संगम हो रहा है। इस दौरान सूर्य देव की कृपा से युक्त वृद्धि योग और शाम तक रहने वाले सर्वार्थसिद्धि व अमृत सिद्धि योग में किए गए कार्यों को अक्षय फल देने वाला माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस शुभ बेला में किए गए दान से कुंडली के विभिन्न ग्रहों की पीड़ा शांत होती है और जीवन से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। हालांकि, ज्योतिषियों का कहना है कि अमावस्या के दिन दान करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतना अनिवार्य है, क्योंकि गलत चीजों का दान पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है।

    शास्त्रों के अनुसार, सोमवती अमावस्या पर वस्त्र दान महादान की श्रेणी में आता है, लेकिन इस दिन किसी को भी फटे, मैले या अत्यंत पुराने वस्त्र देने से बचना चाहिए। ऐसी अनुपयोगी वस्तुओं का दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति नहीं होती और मानसिक तनाव बढ़ता है। इसी प्रकार, पितरों की तृप्ति के लिए अन्न दान का विशेष महत्व है, परंतु दान में दिया जाने वाला अनाज पूरी तरह साफ, शुद्ध और खाने योग्य होना चाहिए। कीड़े लगे या पूरी तरह बेकार हो चुके अनाज का दान करने से पूर्वज रुष्ट हो जाते हैं, जिससे परिवार को पितृदोष का सामना करना पड़ सकता है।

    इस पावन तिथि पर नमक के दान को भी पूरी तरह वर्जित माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या के दिन किसी अन्य व्यक्ति को नमक का दान करने से घर की संचित लक्ष्मी चली जाती है और परिवार में दरिद्रता का वास होने लगता है। इसके साथ ही, इस दिन शनि देव से जुड़ी धातु यानी लोहे का दान भी सामान्य लोगों को नहीं करना चाहिए। लोहे के साथ-साथ इस दिन सरसों के तेल का दान करने से भी बचने की सलाह दी जाती है, हालांकि सरसों के तेल का उपयोग पूजा-पाठ और दीप प्रज्वलन के लिए किया जा सकता है।

    अक्सर देखा जाता है कि लोग अपने घरों में पड़े फटे-पुराने या टूटे हुए जूते-चप्पल अमावस्या के दिन किसी जरूरतमंद को दे देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सोमवती अमावस्या जैसी पवित्र तिथि पर फटे या अनुपयोगी जूते-चप्पल दान करने से कुंडली में शनि देव का अशुभ प्रभाव तेजी से बढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में बड़ी बाधाओं और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, इस महासंयोग पर केवल साफ, उपयोगी और सात्विक वस्तुओं का ही दान करना श्रेयस्कर रहता है।

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।