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  • भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी

    भोपाल के विधोदय तीर्थ में गूंजे ‘नमोस्तु’ के स्वर, आचार्य समय सागर बोले- सम्यक दर्शन ही मोक्ष की पहली सीढ़ी


    भोपाल । राजधानी भोपाल का रानी कमलापति जिनालय परिसर इन दिनों भक्ति, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम में राष्ट्रसंत आचार्य समय सागर महाराज के सान्निध्य में प्रस्तावित 20 मुनिराजों के मंगल चातुर्मास की तैयारियां पूरे श्रद्धाभाव के साथ चल रही हैं। परिसर में गूंजते श्रद्धालुओं के “हे स्वामी नमोस्तु… नमोस्तु… नमोस्तु…” के स्वर और साधु-संतों की तपस्या से वातावरण पूरी तरह धर्ममय हो गया है।

    कार्यक्रम की शुरुआत भगवान आदिनाथ की पूजा-अर्चना और परम पूज्य आचार्य विद्यासागर महाराज की आराधना के साथ हुई। इस अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि धर्म का मूल उद्देश्य आत्मकल्याण है, न कि प्रदर्शन। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “दर्शन में प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। सम्यक दर्शन ही मोक्ष मार्ग की प्रथम सीढ़ी है।” आचार्य श्री ने लोगों से बाहरी आडंबर से दूर रहकर आत्मचिंतन, संयम और सच्ची आस्था के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

    प्रवक्ता अंशुल जैन ने बताया कि चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। सुबह गुरु वंदना के साथ दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद पूजा-अर्चना, धार्मिक प्रवचन और साधना का क्रम चलता है। दोपहर में प्रतिक्रमण, तत्व चर्चा और आचार्य भक्ति का आयोजन किया जाता है, जबकि शाम को मंगल आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

    आचार्य श्री की नवधा भक्ति पूर्वक आहार चर्या कराने का सौभाग्य इस बार पंचायत कमेटी ट्रस्ट के उपमंत्री ऋषभ जैन, मनीष जैन, निमिषा जैन एवं प्रगति परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अलावा राकेश जैन, सुनीता जैन, सुधा जैन, सविता जैन और पी.सी. जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भी पूर्ण श्रद्धा और समर्पण के साथ आहार चर्या में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान अनुशासन, सेवा और भक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिल रहा है।

    आयोजकों के अनुसार आचार्य समय सागर महाराज के मंगल चातुर्मास की विधिवत कलश स्थापना 2 अगस्त को होगी। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालुओं के भोपाल पहुंचने की संभावना है। इसे लेकर तीर्थ परिसर में व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।

    निर्माणाधीन विधोदय तीर्थ धाम को भविष्य में जैन समाज के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चातुर्मास के इस आयोजन ने न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का अवसर दिया है, बल्कि संयम, सेवा और आत्मशुद्धि के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया है।

  • चातुर्मास कब से होगा शुरू? जानें कब तक रहेंगे मांगलिक कार्य बंद

    चातुर्मास कब से होगा शुरू? जानें कब तक रहेंगे मांगलिक कार्य बंद


    नई दिल्ली। देवशयनी एकादशी के साथ हिंदू धर्म में चातुर्मास की शुरुआत मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके कारण विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। हालांकि, जप, तप, व्रत, दान और भगवान की आराधना के लिए यह समय अत्यंत शुभ माना जाता है।

    इस वर्ष देवशयनी एकादशी 25 जुलाई 2026 को पड़ रही है और उदया तिथि के अनुसार इसी दिन से चातुर्मास का आरंभ होगा। यह अवधि 20 नवंबर 2026 तक रहेगी। इस दौरान सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक—ये चार पवित्र महीने शामिल रहेंगे।

    सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व
    चातुर्मास का पहला महीना सावन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, बेलपत्र अर्पित करना और शिव सहस्रनाम का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की उपासना से वैवाहिक जीवन, स्वास्थ्य, ग्रह दोष और मनोकामनाओं से जुड़े मामलों में शुभ फल प्राप्त हो सकते हैं। इस वर्ष सावन 30 जुलाई से 28 अगस्त तक रहेगा।

    भाद्रपद में श्रीकृष्ण और गणेश आराधना
    चातुर्मास का दूसरा महीना भाद्रपद भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इसी महीने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश उत्सव जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान श्रीमद्भागवत का पाठ, श्रीकृष्ण की आराधना और भक्ति करने से सुख-शांति, प्रेम और संतान सुख की प्राप्ति होती है। इस वर्ष भाद्रपद 29 अगस्त से 26 सितंबर तक रहेगा।

    आश्विन में शक्ति उपासना और पितृ पक्ष
    चातुर्मास का तीसरा महीना आश्विन देवी साधना और पितरों के तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी महीने शारदीय नवरात्रि और पितृ पक्ष आते हैं। इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ, देवी आराधना और पितरों का स्मरण विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इससे जीवन में शक्ति, सौभाग्य और विजय की प्राप्ति होती है। इस वर्ष आश्विन 27 सितंबर से 26 अक्टूबर तक रहेगा।

    कार्तिक में फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
    चातुर्मास का अंतिम महीना कार्तिक होता है। इसी दौरान दीपावली, तुलसी विवाह और देवउठनी एकादशी जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं, जिसके बाद विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों की शुरुआत दोबारा होती है। कार्तिक मास में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा को विशेष फलदायी माना गया है। इस वर्ष कार्तिक 27 अक्टूबर से 24 नवंबर तक रहेगा।

  • भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी

    भोपाल में भक्ति का सागर उमड़ा चतुर्मास के लिए आचार्य समय सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हजारों श्रद्धालु बने साक्षी


    भोपाल  भोपाल रविवार को जैन समाज की आस्था श्रद्धा और गुरु भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। चतुर्मास के पावन अवसर पर आचार्य समय सागर महाराज का 20 मुनियों के संघ के साथ राजधानी में भव्य मंगल प्रवेश हुआ। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने पहुंचे। पूरे मार्ग पर गुरु भक्ति के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ आचार्य संघ का स्वागत किया।

    मंगल प्रवेश के उपलक्ष्य में नारायण नगर जैन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में महिलाएं युवा बच्चे और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। श्रद्धालु पूरे मार्ग पर आचार्य विद्यासागर महाराज और आचार्य समय सागर महाराज के जयकारे लगाते हुए भक्ति भाव से आगे बढ़ते रहे। धार्मिक उल्लास और अनुशासित वातावरण ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया।

    यात्रा के दौरान नाके चौराहे पर एक भावुक और आध्यात्मिक दृश्य देखने को मिला जब मुनि निर्णय सागर महाराज उपाध्याय विश्रुत सागर महाराज और निर्यापक मुनि संभव सागर महाराज सहित पूरे मुनि संघ ने आचार्य समय सागर महाराज की परिक्रमा कर चरण वंदना की। श्रद्धालुओं ने इस दिव्य क्षण को अत्यंत श्रद्धा के साथ देखा और गुरु भक्ति के इस दृश्य ने सभी को भावविभोर कर दिया।

    शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जीव दया गोसेवा और हथकरघा को प्रोत्साहित करने वाले संदेशों के साथ निकाली गई झांकियों ने समाज को सेवा और करुणा का संदेश दिया। निर्माणाधीन रानी कमलापति जिनालय की प्रतिकृति ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। विभिन्न मंदिर समितियों महिला मंडलों युवा मंडलों सामाजिक संगठनों पाठशाला परिवारों और दिव्य घोष दल ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया।

    इस आयोजन में केवल भोपाल ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र दिल्ली राजस्थान और आसपास के कई राज्यों से भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। शहर के अनेक सामाजिक व्यापारिक और राजनीतिक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच बनाकर आचार्य संघ का अभिनंदन किया और श्रद्धा के साथ उनका स्वागत किया।

    शोभायात्रा के समापन पर रानी कमलापति जिनालय में धर्मसभा आयोजित की गई। यहां भगवान आदिनाथ के दर्शन के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीफल अर्पित कर अष्टद्रव्य से आचार्य श्री के गुणों का स्मरण और वंदन किया। धर्मसभा में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।

    अपने संबोधन में आचार्य समय सागर महाराज ने आचार्य विद्यासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र निर्माण संस्कृति संरक्षण और आत्मकल्याण का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि आचार्य विद्यासागर महाराज के आदर्श केवल जैन समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं और उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को भी सही दिशा देता रहेगा।

    चतुर्मास के शुभारंभ के साथ भोपाल में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों का नया अध्याय शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में प्रवचन स्वाध्याय तप और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक साधना का विशेष अवसर प्राप्त होगा।

  • ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व

    ग्रहों के सेनापति और राजा बदलेंगे अपनी चाल, जगन्नाथ रथयात्रा और गुरु पूर्णिमा सहित जुलाई में सजेंगे महापर्व

    नई दिल्ली । अंग्रेजी कैलेंडर के सातवें महीने जुलाई की शुरुआत के साथ ही भारतीय जनमानस में आध्यात्मिक और धार्मिक उत्सवों का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है। इस वर्ष एक विशेष ज्योतिषीय और खगोलीय संयोग बन रहा है, जिसके तहत हिंदू पंचांग का पवित्र आषाढ़ मास लगभग पूरे जुलाई महीने में व्याप्त रहेगा। आषाढ़ महीने का प्रारंभ 30 जून से हो चुका है, जो आगामी 29 जुलाई तक अनवरत चलेगा। सनातन धर्म में आषाढ़ मास को विशेष तप, साधना और आत्मशुद्धि का समय माना गया है। यही कारण है कि इस पूरे महीने में देश भर में कई ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण व्रत-त्योहार पूरी श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे, जिससे चारों ओर एक उत्सवमयी और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिलेगा।

    मध्य प्रदेश । धार्मिक दृष्टि से इस महीने की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण घटना ‘चातुर्मास’ का प्रारंभ होना है। आगामी 25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु चार महीनों के लिए योग निद्रा में चले जाएंगे, जिसके साथ ही चातुर्मास की शुरुआत हो जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि में विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत और गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्यों पर पूरी तरह से रोक लग जाती है और लोग अपना ध्यान केवल ईश्वर भक्ति और सात्विक जीवन पर केंद्रित करते हैं। इसके अलावा, महीने के पूर्वार्ध में 3 जुलाई को कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी, 10 जुलाई को योगिनी एकादशी और 12 जुलाई को मासिक शिवरात्रि का व्रत श्रद्धापूर्वक रखा जाएगा, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।

    इस पवित्र महीने में तीर्थ स्थलों और प्रमुख मंदिरों में भारी भीड़ जुटने की संभावना है, क्योंकि 15 जुलाई से जहां आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है, वहीं ठीक अगले दिन यानी 16 जुलाई को ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी। इस रथयात्रा को देखने और भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं। महीने के अंतिम चरण में 28 जुलाई को कोकिला व्रत रखा जाएगा और अगले दिन 29 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर गुरु पूर्णिमा का महापर्व मनाया जाएगा। इस दिन सनातन परंपरा के अनुसार शिष्य अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हैं, जिससे इस महीने का धार्मिक समापन बेहद गरिमापूर्ण ढंग से होगा।

    धार्मिक व्रतों के साथ-साथ ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर भी जुलाई का यह महीना देश-दुनिया और सभी 12 राशियों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बदलावों वाला साबित होने जा रहा है। इस दौरान सौरमंडल के कई बड़े और प्रभावशाली ग्रह अपनी चाल, राशि और नक्षत्रों में परिवर्तन करेंगे। सबसे पहले 4 जुलाई को सुख-सुविधाओं के कारक शुक्र ग्रह सिंह राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पहले से मौजूद केतु के साथ उनकी युति बनेगी। इसके तुरंत बाद 7 जुलाई को बुद्धि और वाणी के देवता बुध ग्रह अपनी वक्री अवस्था में ही मिथुन राशि में गोचर कर जाएंगे, जो व्यापार और संचार व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

    ग्रहों के इस बड़े फेरबदल में एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 14 जुलाई को होगी, जब ज्ञान और सुख-सौभाग्य के प्रदाता गुरु ग्रह (बृहस्पति) अस्त हो जाएंगे और अगस्त के मध्य तक इसी स्थिति में रहेंगे। गुरु के अस्त होने से धार्मिक अनुष्ठानों की पद्धतियों में कुछ समय के लिए बदलाव आता है। इसके पश्चात 16 जुलाई को ग्रहों के राजा सूर्य देव कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे ‘कर्क संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है। महीने के अंत में एक और बड़ा ज्योतिषीय बदलाव 27 जुलाई को देखने को मिलेगा, जब न्याय के देवता शनि देव कुंभ राशि में वक्री यानी उल्टी चाल चलना शुरू कर देंगे। शनि की यह वक्री चाल साल के अंत तक जारी रहेगी, जिसका गहरा राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देश के विभिन्न हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

  • इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..

    इस साल 25 जुलाई से होगी चतुर्मास की शुरुआत…. चार महीने में पड़ेंगे कई बड़े व्रत-त्यौहार…..


    नई दिल्ली।
    चातुर्मास (Chaturmas 2026) देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) से प्रारंभ होता है और देवउठनी एकादशी पर समाप्‍त होता है. इन 4 महीनों में रक्षाबंधन, जन्‍माष्‍टमी, गणेशोत्‍सव, शारदीय नवरात्रि, दशहरा, दिवाली जैसे बड़े त्‍योहार पड़ेंगे. साथ ही सावन महीना भी आएगा। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होगा और 20 नवंबर 2026 देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) पर समाप्‍त होगा. देखिए चातुर्मास के 4 महीनों के सभी व्रत-त्‍योहार की लिस्‍ट।

    चातुर्मास 2026 व्रत-त्‍योहार लिस्‍ट
    – चातुर्मास का आरंभ 25 जुलाई 2026 – देवशयनी एकादशी
    – गुरु पूर्णिमा – 29 जुलाई 2026
    – सावन मास आरंभ – 30 जुलाई 2026
    – कामिका एकादशी – 9 अगस्‍त 2026
    – सावन शिवरात्रि – 12 अगस्‍त 2026
    – हरियाली तीज – 15 अगस्‍त 2026
    – नागपंचमी – 17 अगस्‍त 2026
    – पुत्रदा एकादशी – 23 अगस्‍त 2026
    – रक्षाबंधन, श्रावण पूर्णिमा – 28 अगस्त 2026 (सावन महीना समाप्‍त)
    – कजरी तीज – 31 अगस्‍त 2025
    – जन्‍माष्‍टमी – 4 सितंबर 2026
    – अजा एकादशी – 7 सितंबर 2026
    – गणेश चतुर्थी (गणेश स्‍थापना) – 14 सितंबर 2026
    – गणेश विसर्जन, अनंत चतुर्दशी – 25 सितंबर 2026
    – शारदीय नवरात्रि – 11 अक्‍टूबर 2026 से प्रारंभ
    – नवरात्रि नवमी – 19 अक्‍टूबर 2026
    – दशहरा – 20 अक्‍टूबर 2026
    – पापकुंशा एकादशी – 22 अक्‍टूबर 2026
    – करवा चौथ – 29 अक्‍टूबर 2026
    – रमा एकादशी – 5 नवंबर 2026
    – धन तेरस – 6 नवंबर 2026
    – नरक चतुर्दशी – 8 नवंबर 2026 (दिवाली की तारीख कुछ पंचांग में 8 नवंबर भी दी गई है)
    – दिवाली – 9 नवंबर 2026
    – गोवर्धन पूजा – 10 नवंबर 2026
    – भाई दूज – 11 नवंबर 2026
    – छठ पूजा – 15 नवंबर 2026
    – देवउठनी एकादशी – 20 नवंबर 2026