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  • 14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

    14 अक्टूबर 2026 का पंचांग: नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा, जानें राहुकाल और शुभ-अशुभ समय

    नई दिल्ली: 14 अक्टूबर 2026, बुधवार को आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। पंचांग के अनुसार, इस तिथि के देवता भगवान गणेश माने जाते हैं। यह दिन विरोधियों के खिलाफ रणनीतिक योजना बनाने के लिए अच्छा बताया गया है। हालांकि, रिक्ता तिथि होने के कारण इस दिन शुभ कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्माण्डा की पूजा-अर्चना का भी विशेष महत्व है।

    आज विक्रम संवत 2083 चल रहा है और मास आश्विन है। पक्ष शुक्ल तथा दिन बुधवार है। तिथि शुक्ल पक्ष चतुर्थी, योग आयुष्यमान और करण वणिज है। चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा, जबकि सूर्य कन्या राशि में स्थित रहेगा। आज सूर्योदय सुबह 6 बजकर 21 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 52 मिनट पर होगा। चंद्रोदय सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर तथा चंद्रास्त शाम 7 बजकर 54 मिनट पर निर्धारित है।

    आज चंद्रमा वृश्चिक राशि में अनुराधा नक्षत्र में रहेगा। यह नक्षत्र वृश्चिक राशि में 3 डिग्री 20 मिनट से 16 डिग्री 40 मिनट तक फैला हुआ है। अनुराधा नक्षत्र के शासक ग्रह शनि हैं और इसके देवता मित्र माने जाते हैं, जो 12 आदित्यों में से एक हैं। इस नक्षत्र का स्वभाव सौम्य बताया गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, यह नक्षत्र ललित कलाओं को सीखने, मित्रता करने, रोमांस, नए वस्त्र धारण करने, विवाह, गायन और जुलूस में शामिल होने के लिए अनुकूल माना जाता है। कृषि कार्यों और यात्रा के लिए भी इसे शुभ बताया गया है।

    पंचांग के अनुसार, बुधवार को राहुकाल दोपहर 12 बजकर 7 मिनट से 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शुभ कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा यमगंड, गुलिक, दुमुहूर्त और वर्ज्यम के समय का भी ध्यान रखना चाहिए। यमगंड का समय सुबह 7 बजकर 47 मिनट से 9 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी महत्वपूर्ण या शुभ कार्य की योजना बनाते समय इन समयावधियों को ध्यान में रखना उचित माना जाता है।

  • Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की स्थापना से पहले जुटा लें पूजा सामग्री, चौकी से मोदक और पंचामृत तक पूरी तैयारी रखें

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी पर घर में भगवान गणेश की स्थापना को लेकर तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बप्पा के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाने से लेकर पूजा की सामग्री जुटाने तक कई काम पहले से करने पड़ते हैं। यदि आप भी इस बार घर पर गणपति स्थापना करने की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की पूरी सूची पहले ही तैयार कर लेना बेहतर रहेगा। इससे स्थापना के समय किसी जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और पूजा की तैयारी व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।

    गणपति को विराजमान करने के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी की जरूरत होती है। चौकी पर बिछाने के लिए लाल या पूजा के अनुकूल साफ कपड़ा रखा जा सकता है। इसी स्थान पर गणपति की मूर्ति स्थापित की जाती है। मूर्ति के साथ अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी की गांठ और सिक्का जैसी पूजा सामग्री भी पहले से तैयार रखी जा सकती है।

    गणेश स्थापना में कलश का भी महत्व बताया गया है। इसके लिए तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल और कलावा जैसी सामग्री जुटाकर रखी जा सकती है। पूजा के समय इन चीजों की जरूरत पड़ती है, इसलिए इन्हें पहले से एक स्थान पर रखना सुविधाजनक रहेगा।

    गणपति पूजा की सामग्री में दूर्वा और सुपारी भी खास तौर पर शामिल की जाती है। बप्पा को अर्पित करने के लिए ताजे फूल भी तैयार रखें। इसके अलावा जनेऊ, पानी वाला नारियल और गुड़-नारियल का गोला भी पूजा की सामग्री में रखा जा सकता है। इनका इस्तेमाल पूजा और भोग की तैयारी में किया जाता है।

    भगवान गणेश को भोग लगाने के लिए मोदक या लड्डू, फल और पंचमेवा तैयार रखना चाहिए। यदि घर पर मोदक बनाने की तैयारी है तो उन्हें पूजा के समय से पहले बनाकर रख लेना बेहतर रहेगा। पंचामृत भी पूजा के लिए तैयार किया जा सकता है। इससे स्थापना और पूजा के दौरान जरूरी सामग्री पहले से उपलब्ध रहेगी।

    पूजा की थाली में घी का दीपक और धूप भी जरूर रखें। आरती और पूजा के दौरान इनकी जरूरत होती है। पूजा की सभी छोटी-बड़ी चीजों को एक साथ व्यवस्थित करके रखने से स्थापना के समय सामान तलाशने में परेशानी नहीं होगी।

    गणेश चतुर्थी की पूजा में कई तरह की सामग्री का इस्तेमाल होता है। इसलिए आखिरी समय की भागदौड़ से बचने के लिए पूजा का सामान एक दिन पहले ही जुटा लेना बेहतर रहेगा। चौकी, कपड़ा, गणपति मूर्ति, अक्षत, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, सिक्का, कलश, गंगाजल, पत्ते, नारियल, कलावा, सुपारी, दूर्वा, फूल और जनेऊ जैसी सामग्री की तैयारी पहले की जा सकती है।

    इसी तरह भोग के लिए मोदक या लड्डू, फल, पंचमेवा और पंचामृत भी समय से तैयार रखें। दीपक और धूप को भी पूजा की सामग्री के साथ रख दें। इस तरह गणपति स्थापना के समय जरूरी सामान पहले से तैयार रहेगा और पूजा की प्रक्रिया को आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

  • गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग

    गजानन संकष्टी चतुर्थी आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय समय और दिनभर का पूरा पंचांग


    नई दिल्ली ।
    आज सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर गजानन संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत रखा जा रहा है। भगवान गणेश को समर्पित यह व्रत विघ्नों के नाश, सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक गणपति की पूजा करने और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु सुबह से ही पूजा-अर्चना और व्रत की तैयारियों में जुटे हुए हैं।

    पंचांग के अनुसार आज सावन कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। यह तिथि 1 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 7 मिनट पर प्रारंभ हुई थी और 2 अगस्त की रात्रि 11 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। इसके बाद पंचमी तिथि का आरंभ होगा। आज रविवार का दिन है तथा पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बना हुआ है। दिनभर पंचक का प्रभाव भी रहेगा, इसलिए कई लोग शुभ कार्यों में पंचांग के अनुसार समय का विशेष ध्यान रखेंगे।

    आज सूर्य का उदय सुबह 5 बजकर 56 मिनट पर हुआ, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 11 मिनट पर होगा। गजानन संकष्टी चतुर्थी के व्रत में चंद्रोदय का विशेष महत्व होता है। आज चंद्रमा का उदय रात 9 बजकर 44 मिनट पर होगा। व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करेंगे और इसके पश्चात ही व्रत का पारण करेंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रदर्शन के बिना संकष्टी चतुर्थी का व्रत पूर्ण नहीं माना जाता।

    पूजा और शुभ कार्यों के लिए आज सुबह का चौघड़िया सुबह 5 बजकर 56 मिनट से 10 बजकर 59 मिनट तक रहेगा। वहीं शाम का चौघड़िया शाम 5 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। दूसरी ओर राहुकाल शाम 5 बजकर 52 मिनट से 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस अवधि में नए या मांगलिक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 44 मिनट से 2 बजकर 24 मिनट तक तथा गुलिक काल शाम 4 बजकर 5 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।

    ग्रहों की वर्तमान स्थिति के अनुसार सूर्य और बुध कर्क राशि में, चंद्रमा तथा राहु कुंभ राशि में, मंगल वृषभ राशि में, गुरु मिथुन राशि में, शुक्र कन्या राशि में, शनि मीन राशि में और केतु सिंह राशि में विराजमान हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से इन ग्रह स्थितियों का प्रभाव विभिन्न राशियों पर अलग-अलग रूप में देखा जाता है। हालांकि किसी भी निर्णय से पहले व्यक्तिगत कुंडली का विचार करना अधिक उचित माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गजानन संकष्टी चतुर्थी पर भगवान गणेश को 11 अथवा 21 गांठ वाली दूर्वा अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय नैवेद्य अर्पित कर विघ्नहर्ता से सुख, समृद्धि और सफलता की प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया यह व्रत जीवन की बाधाओं को दूर करने और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में सहायक माना जाता है।