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  • सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई

    सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोना 18 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर रहा है। अक्टूबर 2008 के बाद पहली बार कीमती धातु बाजार में इस तरह का तेज दबाव देखा जा रहा है। 1 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के नीचे आ गईं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिसला
    वैश्विक बाजार में सोना 22 डॉलर से अधिक गिरकर 3,985 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले सोना 4,005.69 डॉलर प्रति औंस पर खुला था, लेकिन दिनभर में इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट के साथ ही सोना एक बार फिर 4,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे चला गया है।

    MCX पर भी भारी गिरावट
    घरेलू बाजार MCX पर भी सोने में तेज गिरावट देखने को मिली है। साल 2026 की शुरुआत में 10 ग्राम सोना 1.92 लाख रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि जून 2026 में ही सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

    आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ एक महीने में सोना करीब 19,700 रुपये तक सस्ता हुआ। महीने की शुरुआत में जहां यह लगभग 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं 30 जून तक यह घटकर करीब 1.40 लाख रुपये पर आ गया।

    रिकॉर्ड स्तर से 20% नीचे आया सोना, चांदी 43% तक टूटी
    साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोना अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। वहीं चांदी में इससे भी तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 43 प्रतिशत तक सस्ती हो चुकी है।

    क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?
    विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई में इजाफा हुआ है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

    नए संभावित फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख को भी बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ऊंची ब्याज दरों के चलते निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं।

    इसके अलावा डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग पर असर डाला है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार में कमजोर सेंटिमेंट के चलते निवेशक अपने निवेश को संतुलित करने के लिए सोने से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।

  • बीमा लेना होगा सस्ता… भारी कमीशन में चलेगी कैची…. बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में IRDA

    बीमा लेना होगा सस्ता… भारी कमीशन में चलेगी कैची…. बड़े सुधार लागू करने की तैयारी में IRDA


    नई दिल्ली।
    अगर आपको लगता है कि बीमा (Insurance) लेना महंगा (Costly) हो गया है, तो यह खबर आपके काम की है। बीमा नियामक इरडा (Insurance Regulator IRDA) अगले 4-6 महीनों में ऐसे कई बड़े सुधार लागू करने जा रहा है, जिससे बीमा किफायती होगा और आपको पैसे का पूरा दम मिलेगा। इन बदलावों की सबसे बड़ी मार उन भारी-भरकम कमीशनों पर पड़ेगी, जो बीमा कंपनियां एजेंटों और बैंकों को देती हैं।


    बीमा सुगम: एक प्लेटफॉर्म, सबके लिए

    जल्द ही लॉन्च होगा बीमा सुगम – एक डिजिटल मार्केटप्लेस जहां आप अमेजॉन-फ्लिपकार्ट की तरह सभी बीमा कंपनियों की पॉलिसियां कंपेयर कर सकेंगे। कीमत, फीचर्स, क्लेम सेटलमेंट रेशियो – सब कुछ एक क्लिक पर। जब सबकुछ खुला होगा, कंपनियों को अपने दम पर प्रीमियम कम रखना होगा।

    1 लाख करोड़ रुपये का सवाल
    सोचिए, वित्त वर्ष 2025 में अकेले कमीशन के नाम पर बीमा कंपनियों ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये बांटे। यही वह पैसा है जो आपकी जेब से प्रीमियम के रूप में निकलता है। आरबीआई और इरडा दोनों ने इस पर चिंता जताई है। अब नियामक इस वितरण लागत को तर्कसंगत बनाने पर काम कर रहा है।

    30% खर्च पर कैंची चलेगी
    फिलहाल बीमा कंपनियां आपके प्रीमियम का 30% हिस्सा डिस्ट्रिब्यूशन और एडमिन के कामों पर खर्च करती हैं। इसमें 17-18% सीधे बैंकों, एनबीएफसी और एजेंटों की जेब में जाता है। इरडा अब इसे घटाने की तैयारी में है, खासकर हेल्थ इंश्योरेंस में जहां प्रीमियम तेजी से बढ़े हैं।


    कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता

    नियामक IRDA एक सहमति-आधारित डेटा रजिस्ट्री बना रहा है, जहां पॉलिसी और दावों का सारा डेटा सुरक्षित रहेगा। इससे अंडरराइटिंग तेज होगी, फ्रॉड पर लगाम लगेगी और पॉलिसी पोर्टेबिलिटी आसान होगी। मतलब – कम लागत, तेज प्रोसेस और ज्यादा पारदर्शिता।


    अब कंपनियां नहीं छुपा पाएंगी सच

    इरडा बीमा कंपनियों पर शिकंजा कस रहा है। अब कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स, रिटर्न और क्लेम सेटलमेंट रेशियो का खुलकर खुलासा करना होगा। जब सबकुछ सार्वजनिक होगा, तो कंपनियों के बीच बेहतर सर्विस और कॉम्पिटिटिव प्राइसिंग की होड़ लगेगी।


    आम आदमी को क्या मिलेगा?

    इन सुधारों का सीधा फायदा आपको मिलेगा। कमीशन खर्च घटेगा तो प्रीमियम स्थिर या कम हो सकता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर तुलना से बेहतर और किफायती पॉलिसी चुन पाएंगे। पता चलेगा कि आपका पैसा कहां जा रहा है और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से क्लेम प्रोसेस तेज होगा। खासकर हेल्थ और लाइफ इंश्योरेंस में इन बदलावों का असर साफ दिखेगा, जहां बढ़ती लागत ने मिडल क्लास की जेब पर दबाव बढ़ा दिया था।