ओमेगा-3 एक प्रकार का पॉलीअनसैचुरेटेड फैटी एसिड है। इसे जरूरी फैटी एसिड इसलिए कहा जाता है क्योंकि शरीर इसे पर्याप्त मात्रा में खुद नहीं बना पाता। ऐसे में भोजन के जरिए इसकी पूर्ति करना जरूरी होता है। ओमेगा-3 के प्रमुख प्रकारों में एएलए यानी अल्फा लिनोलेनिक एसिड और ईपीए तथा डीएचए शामिल हैं। एएलए मुख्य रूप से पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों में पाया जाता है जबकि ईपीए और डीएचए मछली तथा समुद्री खाद्य पदार्थों में अधिक मात्रा में मिलते हैं। शरीर एएलए के कुछ हिस्से को ईपीए और डीएचए में बदल सकता है लेकिन यह प्रक्रिया सीमित होती है।
दिल और दिमाग के लिए क्यों जरूरी है ओमेगा-3
ओमेगा-3 फैटी एसिड हृदय की सेहत के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। खासतौर पर ईपीए और डीएचए ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा ये मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और उनके सामान्य कामकाज में भी भूमिका निभाते हैं। डीएचए आंखों के रेटिना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए शरीर में इसकी पर्याप्त उपलब्धता आंखों और दिमाग के सामान्य विकास के लिए जरूरी मानी जाती है।
गर्भावस्था के दौरान भी ओमेगा-3 का विशेष महत्व होता है। गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क और आंखों के विकास में डीएचए की भूमिका होती है। इसके अलावा ओमेगा-3 शरीर में सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। कुछ अध्ययनों में इसे जोड़ों की सूजन और गठिया से जुड़ी परेशानी में संभावित लाभ से भी जोड़ा गया है।
अलसी के बीज से करें शुरुआत
शाकाहारी लोगों के लिए अलसी ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत है। इसमें एएलए की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। अलसी के बीजों को हल्का भूनकर या पीसकर भोजन में शामिल किया जा सकता है। पिसी हुई अलसी को आटे दही या दलिया में मिलाकर खाना भी आसान तरीका है। साबुत अलसी के बीजों की तुलना में पिसी हुई अलसी से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर हो सकता है।
चिया सीड्स भी हैं फायदेमंद
चिया सीड्स में ओमेगा-3 के साथ फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। इन्हें पानी में भिगोकर या दही स्मूदी और ओट्स के साथ लिया जा सकता है। फाइबर की मौजूदगी के कारण ये पाचन को बेहतर रखने में भी मदद कर सकते हैं। हालांकि इन्हें पर्याप्त पानी के साथ और संतुलित मात्रा में लेना चाहिए।
अखरोट और सोयाबीन को बनाएं डाइट का हिस्सा
अखरोट भी शाकाहारी लोगों के लिए ओमेगा-3 का अच्छा विकल्प है। इसमें एएलए पाया जाता है। रोजाना सीमित मात्रा में अखरोट खाने से डाइट में अच्छे फैट शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा सोयाबीन और सोया ऑयल से भी एएलए प्राप्त होता है। इन चीजों को नियमित भोजन में शामिल करके ओमेगा-3 की पूर्ति में मदद मिल सकती है।
क्या शाकाहारी लोगों को सप्लीमेंट की जरूरत है
अधिकतर लोगों के लिए संतुलित आहार से एएलए की जरूरत पूरी करना संभव है। हालांकि गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य स्थितियों वाले लोगों को ओमेगा-3 की जरूरत अलग हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह लेना बेहतर रहता है। शाकाहारी विकल्प के रूप में एल्गी यानी समुद्री शैवाल से तैयार डीएचए और ईपीए सप्लीमेंट भी उपलब्ध हैं। बिना जरूरत या विशेषज्ञ की सलाह के फिश ऑयल अथवा अन्य सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है।
इस तरह शाकाहारी लोगों को ओमेगा-3 के लिए मछली या फिश ऑयल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। अलसी चिया सीड्स अखरोट और सोयाबीन जैसे खाद्य पदार्थों को संतुलित डाइट में शामिल करके शरीर को जरूरी फैटी एसिड उपलब्ध कराया जा सकता है।



