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  • मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    मासूम की मौत पर सनसनी: Rewa में शरीर पर चोट के निशान, परिवार ने जताई हत्या की आशंका

    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Rewa जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 7 साल की बच्ची की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। परिजनों ने सौतेली मां पर बेरहमी से पिटाई कर हत्या करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है, वहीं पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।
    भाई का आरोप रात में पीटा, फिर बिगड़ी हालत
    मृतक बच्ची रागिनी साकेत के भाई पुष्पराज साकेत ने आरोप लगाया कि घटना वाली रात करीब 12 बजे उनकी सौतेली मां ने रागिनी को बुरी तरह पीटा। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई, उसे तेज बुखार आया और कुछ ही समय में उसकी मौत हो गई।
    भाई का कहना है कि पिटाई इतनी ज्यादा थी कि बहन की हालत संभल नहीं पाई।
    दादी का दावा शरीर पर थे चोट के कई निशान
    बच्ची की दादी गोमती साकेत ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रागिनी के पूरे शरीर पर चोट के निशान थे और उसे पानी तक नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि बच्ची दर्द से तड़पती रही, लेकिन समय पर इलाज नहीं मिल सका।
    80 किमी दूर गांव में हुई घटना
    यह घटना रीवा मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर त्योंथर विधानसभा क्षेत्र के आमिर कोनी गांव की है। बताया जा रहा है कि बच्ची के पिता मनोज साकेत जब शाम को घर लौटे, तो रागिनी की हालत बेहद खराब थी। वे उसे तुरंत एक निजी डॉक्टर के पास लेकर गए, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
    दूसरी शादी के बाद बढ़ी थीं मारपीट की घटनाएं
    परिजनों का कहना है कि पिता की दूसरी शादी के बाद से ही बच्चों के साथ मारपीट की घटनाएं बढ़ गई थीं। भाई-बहनों ने भी आरोप लगाया कि सौतेली मां अक्सर उन्हें प्रताड़ित करती थी और घटना वाले दिन भी रागिनी को बुरी तरह पीटा गया था।
    तीन डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां तीन डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराया गया है। फिलहाल सभी को पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा।
    पुलिस की भूमिका पर भी उठे सवाल
    इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जब थाना प्रभारी Balkesh Dwivedi से जानकारी ली गई, तो उन्हें बच्ची और परिजनों के नाम तक स्पष्ट नहीं थे। इससे जांच की गंभीरता पर सवाल उठने लगे हैं।
    हालांकि पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
    सार:
  • नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

    नाबालिगों के साथ कथित अपराध का मामला: चाइल्ड होम में सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल


    शिवपुरी  मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से सामने आया यह मामला पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला है। वर्ष 2016 में एक चाइल्ड केयर सेंटर से भागी दो नाबालिग लड़कियों ने पुलिस पूछताछ में जो खुलासे किए, उन्होंने बाल संरक्षण व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया। शुरुआत में गुमशुदगी के तौर पर दर्ज यह मामला तब सनसनीखेज मोड़ पर पहुंच गया जब लड़कियों ने बालगृह के अंदर कथित शोषण की बात बताई।

    सुरक्षित आश्रय बना डर का ठिकाना
    शहर के बीच स्थित माधव बाल आश्रम को अनाथ और बेसहारा लड़कियों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता था। यहां पुलिस द्वारा बरामद नाबालिग बच्चियों को भी रखा जाता था। 1997 से संचालित इस संस्था का संचालन समाजसेवी शैला अग्रवाल और उनके पिता केएन अग्रवाल द्वारा किया जाता था। बाहर से यह संस्था बेहद प्रतिष्ठित और विश्वसनीय मानी जाती थी, जहां प्रशासनिक अधिकारियों और नेताओं की भी भागीदारी रहती थी।

    काउंसलिंग में सामने आए चौंकाने वाले संकेत
    चाइल्ड काउंसलर द्वारा की गई शुरुआती काउंसलिंग के दौरान ही माहौल पर संदेह गहराने लगा। एक पीड़िता ने इशारों में बताया कि बालगृह में सब कुछ ठीक नहीं है और विरोध करने पर मारपीट की जाती है। जैसे ही संचालक वहां पहुंचीं, बच्ची चुप हो गई, जिससे संदेह और मजबूत हो गया। इसके बाद मामले की जानकारी बाल कल्याण समिति और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।

    रात में नशीला खाना और कथित शोषण के आरोप
    काउंसलिंग के दौरान सामने आए आरोपों में कहा गया कि रात के समय भोजन में नशीला पदार्थ मिलाया जाता था, जिसके बाद कई लड़कियां बेहोशी की स्थिति में चली जाती थीं। पीड़िताओं ने यह भी बताया कि सुबह उठने पर उन्हें दर्द और असहजता महसूस होती थी। कई बार विरोध करने पर मारपीट और धमकियों का भी सामना करना पड़ता था।

    मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप
    लड़कियों के अनुसार, आश्रम में डर और दहशत का माहौल था। किसी भी विरोध पर उन्हें अपमानित किया जाता और धमकाया जाता था। यहां तक कि उनके कपड़े फटे हुए या अस्त-व्यस्त हालत में पाए जाने की बातें भी सामने आईं। पीड़िताओं ने बताया कि वे लंबे समय तक डर के कारण कुछ भी बोल नहीं पाईं।

    प्रशासन में मचा हड़कंप, जांच के आदेश
    मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल आश्रम में जांच शुरू की गई और अन्य बच्चियों की भी काउंसलिंग कराई गई ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीर मामला मानते हुए उच्च स्तरीय जांच की प्रक्रिया शुरू की।

    कई गंभीर सवाल खड़े हुए
    इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं क्या बालगृह में चल रहे इस कथित अपराध में अंदरूनी लोग शामिल थे या बाहरी लोग? कितनी बच्चियां इस शोषण का शिकार हुईं? और सबसे बड़ा सवाल, क्या वर्षों तक चल रही यह गतिविधि प्रशासन की नजर से छिपी रही?