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  • दूसरे जन्मदिन के 24 घंटे बाद बुझ गई मासूम की जिंदगी रसोई हादसे ने छीन ली परिवार की मुस्कान मां भी गंभीर रूप से झुलसी

    दूसरे जन्मदिन के 24 घंटे बाद बुझ गई मासूम की जिंदगी रसोई हादसे ने छीन ली परिवार की मुस्कान मां भी गंभीर रूप से झुलसी


    नई दिल्ली । इंदौर जिले के देपालपुर क्षेत्र के ग्राम कुनगारा में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। जिस घर में एक दिन पहले दो साल की मासूम सृष्टि का जन्मदिन हंसी खुशी और उत्साह के साथ मनाया गया था वहीं अगले ही दिन उसकी मौत ने परिवार की सारी खुशियां छीन लीं। रसोई में खाना बनाते समय मां की साड़ी में अचानक आग लग गई और पास में खेल रही मासूम भी उसकी चपेट में आ गई। गंभीर रूप से झुलसी बच्ची को तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मां का उपचार अभी भी जारी है।

    जानकारी के अनुसार सृष्टि की मां काजल सुबह रसोई में खाना बना रही थीं। उसी दौरान किसी कारण उनकी साड़ी में आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि पास में खेल रही दो वर्षीय सृष्टि भी उसकी चपेट में आ गई। काजल मूक बधिर हैं इसलिए वह मदद के लिए आवाज नहीं लगा सकीं। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से खेत पर काम कर रहे परिजन को वीडियो कॉल कर घटना की जानकारी दी।

    परिजन तत्काल मौके पर पहुंचे और मां बेटी दोनों को गंभीर हालत में इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बच्ची को बचाने की पूरी कोशिश की लेकिन गंभीर रूप से झुलसने के कारण उसकी मौत हो गई। काजल करीब 50 प्रतिशत तक झुलस गई हैं और उनका इलाज जारी है।

    परिवार के लोगों ने बताया कि हादसे से कुछ समय पहले ही काजल की अपनी मां से फोन पर बात हुई थी। उस समय सृष्टि उनकी गोद में बैठी हुई थी। हादसा होने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपनी मां को ही वीडियो कॉल किया क्योंकि उनका नंबर फोन में आसानी से उपलब्ध था। इसके बाद अन्य परिजनों को सूचना दी गई और सभी लोग तुरंत मौके पर पहुंचे।

    मृत बच्ची के मामा मनीष ने बताया कि सृष्टि अपने माता पिता की इकलौती संतान थी। उसके पिता किसान हैं और पूरा परिवार बच्ची के दूसरे जन्मदिन की खुशियां मना रहा था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि अगले ही दिन ऐसा दर्दनाक हादसा हो जाएगा। पूरे परिवार का रो रोकर बुरा हाल है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे की वजह गैस पाइप में लगी आग बताई जा रही है जिसकी लपटें मां की साड़ी तक पहुंच गईं। पुलिस ने मामले में शून्य पर मर्ग कायम कर केस देपालपुर पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि हादसे के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

    यह घटना एक बार फिर रसोई में सुरक्षा बरतने की आवश्यकता की याद दिलाती है। खाना बनाते समय ढीले कपड़े पहनने से बचना गैस पाइप और चूल्हे की नियमित जांच करना तथा छोटे बच्चों को रसोई से सुरक्षित दूरी पर रखना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी कई बार ऐसे दर्दनाक हादसों को टाल सकती है। लेकिन इस परिवार के लिए अब यह सीख बहुत देर से आई क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही ने उनकी मासूम बेटी की जिंदगी हमेशा के लिए छीन ली।

  • नैनीताल घूमने गया था परिवार, तीसरी मंजिल से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, झाबुआ में पसरा मातम

    नैनीताल घूमने गया था परिवार, तीसरी मंजिल से गिरने से 3 साल के मासूम की मौत, झाबुआ में पसरा मातम


    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के राणापुर निवासी सराफा कारोबारी विशाल सोनी के तीन वर्षीय बेटे गौरांश सोनी की नैनीताल में हुए एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। परिवार के साथ छुट्टियां मनाने गया मासूम होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को पहले नैनीताल और फिर हल्द्वानी के अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उसे दिल्ली के फोर्टिस अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस घटना से परिवार के साथ पूरे राणापुर में शोक की लहर दौड़ गई है।

    परिजनों के अनुसार परिवार एक जुलाई को इंदौर से 22 सदस्यों के साथ नैनीताल घूमने गया था। सभी लोग मल्लीताल क्षेत्र के एक होटल में ठहरे हुए थे। रविवार सुबह गौरांश कमरे में खेल रहा था। इसी दौरान कुछ क्षण के लिए परिजनों का ध्यान उससे हट गया और वह होटल की तीसरी मंजिल की खिड़की से नीचे गिर पड़ा। करीब 20 फीट की ऊंचाई से गिरने के कारण उसके सिर और गर्दन में गंभीर चोटें आईं।

    हादसे के तुरंत बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और होटल कर्मचारियों ने बिना देर किए बच्चे को बीडी पांडे जिला चिकित्सालय पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे हल्द्वानी के हायर सेंटर रेफर कर दिया। जांच में पता चला कि उसके सिर की हड्डियां टूट गई थीं और गर्दन में भी गंभीर चोट लगी थी।

    बच्चे की हालत लगातार नाजुक बनी रहने पर डॉक्टरों ने उसे बेहतर उपचार के लिए दिल्ली भेजने का निर्णय लिया। परिजनों ने बताया कि दिल्ली ले जाते समय रास्ते में गौरांश की धड़कन भी बंद हो गई थी। चिकित्सकों ने उसे दोबारा जीवित करने का प्रयास किया और फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन गंभीर सिर की चोटों के कारण डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

    गौरांश परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत की खबर सामने आते ही झाबुआ जिले के राणापुर कस्बे में शोक की लहर फैल गई। रिश्तेदारों और परिचितों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। दिल्ली में आवश्यक कानूनी और चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी करने के बाद परिजन रविवार शाम एंबुलेंस से गौरांश के पार्थिव शरीर को लेकर राणापुर के लिए रवाना हो गए।