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  • लापता बच्ची की मौत का रहस्य: नदी किनारे मिला शव, हत्या की आशंका तेज

    लापता बच्ची की मौत का रहस्य: नदी किनारे मिला शव, हत्या की आशंका तेज


    ग्वालियर । ग्वालियर के सिरोल थाना क्षेत्र से लापता हुई 12 वर्षीय 5वीं कक्षा की छात्रा का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। पांच दिन से लापता बच्ची का शव शुक्रवार रात भिंड जिले के मौ क्षेत्र में सिंध नदी किनारे क्षत-विक्षत हालत में बरामद किया गया। आशंका जताई जा रही है कि शव का कुछ हिस्सा जलीय जीवों, संभवतः मगरमच्छों द्वारा क्षतिग्रस्त किया गया है।

    मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब बच्ची के सौतेले पिता ने दावा किया कि 24 मई को बच्ची ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके अनुसार, बदनामी और पुलिस कार्रवाई के डर से उसने शव को भिंड ले जाकर नदी किनारे दफना दिया। हालांकि पुलिस इस बयान को संदिग्ध मान रही है और हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है।

    बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट 25 मई को सिरोल थाने में दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट सौतेले पिता द्वारा ही दर्ज कराई गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में ही पुलिस को उसके बयानों और व्यवहार पर संदेह होने लगा था। पुलिस ने उसे निगरानी में रखा और मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश जारी रखी।

    शुक्रवार रात भिंड के मौ इलाके में सिंध नदी किनारे से जब बच्ची का शव बरामद हुआ, तो पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। शव की स्थिति बेहद खराब थी, जिसके चलते पुलिस ने तुरंत उसे पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया। संभावना जताई जा रही है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। एक ओर सौतेला पिता इसे आत्महत्या के बाद शव छिपाने की बात बता रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस इसे संदिग्ध हत्या मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    मृत बच्ची पिछले करीब आठ वर्षों से अपने सौतेले पिता और मां के साथ रह रही थी। परिवार में उसकी दो छोटी बहनें भी हैं, जिनकी उम्र 6 और 8 वर्ष बताई जा रही है। सौतेला पिता पेशे से टैक्सी चालक है और ट्रैवल्स एजेंसी के लिए ईको वैन चलाता है।

    पुलिस ने बच्ची के माता-पिता दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, नदी किनारे और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान भी चलाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार के सबूत जुटाए जा सकें।

    यह मामला अब पूरी तरह से संदिग्ध बन चुका है और पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है कि यह वास्तव में आत्महत्या थी या फिर इसके पीछे कोई गंभीर अपराध छिपा हुआ है।

  • संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन

    संदिग्ध फूड पॉइजनिंग: एक मौत और तीन लोग बीमार, जांच में जुटा प्रशासन


    मध्य प्रदेश । सतना जिले के उचेहरा ब्लॉक में फूड पॉइजनिंग का दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसमें 7 साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि परिवार के तीन अन्य सदस्य गंभीर रूप से बीमार हैं। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और स्वास्थ्य विभाग जांच में जुट गया है।

    परिजनों के मुताबिक, 20 मई की रात परिवार ने घर में बनी करेले की सब्जी और रोटी खाई थी। इसके बाद सभी ने बेल का शरबत भी पिया। कुछ ही घंटों बाद सभी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। सात साल के किशुन को तेज उल्टी-दस्त शुरू हुए और हालत इतनी बिगड़ गई कि सुबह अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मौत हो गई।

    परिवार के अन्य सदस्य दादा बाबूलाल दहिया, दादी शांति बाई और भाई शिवम भी उल्टी-दस्त और चक्कर की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें से दो की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है।

    डॉक्टरों के अनुसार यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग का मामला है और सभी मरीजों में सीवियर डायरिया के लक्षण पाए गए हैं। वहीं प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि जहर किस वजह से फैला।

    जांच में तीन अलग-अलग संभावनाएं सामने आ रही हैं। पहली आशंका यह है कि घर के पीछे लगी बगिया में जिन करेले के पौधों पर हाल ही में कीटनाशक का छिड़काव किया गया था, उन्हीं सब्जियों का उपयोग खाना बनाने में किया गया। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि यह सबसे मजबूत वजह हो सकती है।

    दूसरी तरफ परिजनों का कहना है कि सब्जी खाने के बाद बेल का शरबत पीने के तुरंत बाद सभी की हालत बिगड़ी, जिससे शरबत की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं गांव के कुछ लोग कुएं के दूषित पानी को भी संभावित कारण मान रहे हैं, हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआती तौर पर इस थ्योरी को कम संभावना वाला बताया है।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पीएचई और स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंच चुकी है। कुएं के पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और बचे हुए स्रोतों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने, पानी उबालकर पीने और कीटनाशक लगे खेतों की सब्जियों का उपयोग तुरंत बंद करने की सलाह दी है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारण की पुष्टि हो सकेगी।

  • सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई

    सिस्टम की चूक, उजागर सतना में कुपोषण से बच्ची की मौत, के बाद जिम्मेदारों पर कार्रवाई


    सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में कुपोषण से एक चार माह की मासूम बच्ची की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई शुरू कर दी है। मझगंवा ब्लॉक के सुरांगी गांव में हुई इस घटना में जांच के दौरान आंगनबाड़ी स्तर से लेकर सुपरवाइजर तक की गंभीर लापरवाही सामने आई जिसके बाद तत्काल प्रभाव से कदम उठाए गए

    मृत बच्ची सूर्यांशी उर्फ प्रियांशी प्रजापति अति गंभीर कुपोषण की शिकार थी। जानकारी के अनुसार वह अपने जुड़वा भाई के साथ पोषण की कमी से जूझ रही थी लेकिन समय रहते उसे आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची की स्थिति गंभीर होने के बावजूद उसे समय पर पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं कराया गया जो उसकी जान बचाने के लिए बेहद जरूरी कदम था

    बुखार आने पर परिजन बच्ची को मझगंवा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया और उसे पीआईसीयू में भर्ती किया गया लेकिन हालत में सुधार नहीं होने पर उसे Rewa मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्ची ने दम तोड़ दिया और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा

    इस पूरे मामले में जांच के बाद प्रशासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पूजा पाण्डेय को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है। रिपोर्ट में सामने आया कि उन्होंने बच्ची की नियमित वृद्धि निगरानी नहीं की और अति गंभीर कुपोषण की श्रेणी में होने के बावजूद उसे NRC के लिए रेफर नहीं किया। इतना ही नहीं परिजनों को सही समय पर उचित सलाह भी नहीं दी गई और टीकाकरण में भी लापरवाही बरती गई

    कलेक्टर Satish Kumar S ने इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। वहीं पर्यवेक्षण स्तर पर भी बड़ी चूक सामने आई जिसके चलते दो सुपरवाइजर दीपक विश्वकर्मा और करूणा पाण्डेय के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। दोनों को बच्चों की निगरानी और फॉलोअप की जिम्मेदारी दी गई थी लेकिन उन्होंने अपने कर्तव्यों का सही निर्वहन नहीं किया

    प्रशासन ने दोनों सुपरवाइजर की दो वित्तीय वर्षों तक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई केवल दंड नहीं बल्कि एक सख्त संदेश भी है कि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी जिम्मेदारियों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी

    यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है बल्कि पूरे सिस्टम के लिए चेतावनी भी है कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अधिक सजगता और जवाबदेही की जरूरत है। यदि समय रहते सही कदम उठाए जाते तो शायद इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी

  • छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत

    छुट्टियों की खुशियां बदलीं मातम, में उज्जैन में जहरीली गैस से दो बच्चियों की मौत


    उज्जैन । मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर के नानाखेड़ा थाना क्षेत्र स्थित त्रिवेणी हिल्स से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है जहां गर्मियों की छुट्टियां मनाने आए दो परिवारों की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। यहां नाना के घर आए परिवार के दो मासूम बच्चों की बंद कमरे में जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई जिससे पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

    जानकारी के अनुसार, परिवार के सदस्य जिस छोटे से कमरे में सो रहे थे वहां बड़ी मात्रा में गेहूं का भंडारण किया गया था। यह कमरा लगभग 10 बाय 15 फीट का था और रात के समय पूरी तरह बंद होने के कारण अंदर ऑक्सीजन की कमी और संभवतः रासायनिक प्रतिक्रिया से जहरीली गैस का निर्माण हो गया। इसी स्थिति में कमरे में सो रहे बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

    सुबह करीब 9 बजे जब परिजनों की नींद खुली तो उन्होंने देखा कि बच्चों की हालत बेहद गंभीर है। मासूमों के मुंह से झाग निकल रहा था और वे बेहोश अवस्था में थे। घबराए परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन तब तक स्थिति काफी बिगड़ चुकी थी।

    इस हादसे में शाजापुर की रहने वाली मात्र डेढ़ महीने की मासूम तृषा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया जबकि कायथा निवासी चार वर्षीय अनिका की भी मौत हो गई। दोनों मासूमों की मौत ने परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    बताया जा रहा है कि छुट्टियों के चलते कई रिश्तेदार एक साथ त्रिवेणी हिल्स स्थित नाना के घर इकट्ठा हुए थे और वहीं यह दुखद घटना घटित हो गई। प्रारंभिक आशंका के अनुसार गेहूं के भंडारण के साथ रखी गई कीटनाशक दवाओं या बंद कमरे में हुई रासायनिक प्रक्रिया के कारण जहरीली गैस बनने की संभावना जताई जा रही है।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वास्तव में गैस बनने का कारण क्या था और क्या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही शामिल थी।

    इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और पीड़ित परिवारों का रो रोकर बुरा हाल है। मासूमों की असामयिक मौत ने एक बार फिर घरों में अनाज भंडारण और सुरक्षा उपायों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।