Tag: child protection

  • भिण्ड में नाबालिग से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर मामला दर्ज, आरोपी फरार

    भिण्ड में नाबालिग से दुष्कर्म, गर्भवती होने पर मामला दर्ज, आरोपी फरार


    भिण्ड । भिण्ड जिले के लहार अनुभाग के रौन थाना क्षेत्र में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता कक्षा आठवीं की छात्रा है और हाल ही में गर्भवती होने की जानकारी मिलने पर परिजन उसे लेकर थाने पहुंचे और मामला दर्ज कराया।

    जानकारी के अनुसार पीड़िता की मोहल्ले में रहने वाली दो सगी बहनों के साथ दोस्ती थी। दोनों बहनें अक्सर उसे अपने घर बुलाती थीं। इसी दौरान उन्होंने अपने भाई Sahil से उसकी पहचान कराई। परिजनों का आरोप है कि एक दिन दोनों बहनों ने किशोरी को घर बुलाकर कमरे में अकेला छोड़ दिया और बाहर चली गईं। इसी दौरान साहिल ने उसके साथ जबरन गलत संबंध बनाए और किसी को बताने पर बदनाम करने की धमकी दी।

    पीड़िता के परिजन ने बताया कि उन्होंने साहिल के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है लेकिन आरोपी साहिल फिलहाल फरार है। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी है और आसपास के क्षेत्रों में खोजबीन जारी है।

    घटना ने इलाके में सुरक्षा और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। पुलिस ने कहा है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार करने के लिए सभी संसाधन लगाए जा रहे हैं और पीड़िता और उसके परिवार को सुरक्षा का आश्वासन दिया गया है। यह मामला स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती बन गया है क्योंकि ऐसे अपराधों में त्वरित कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करना बेहद जरूरी होता है।

  • मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की

    मध्य पूर्व संघर्ष में 1100 से ज्यादा बच्चे बने निशाना, यूनिसेफ ने कूटनीति और बातचीत से हल निकालने की अपील की


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान की ओर से जारी हमलों के बीच संयुक्त राष्ट्र के बाल आपातकालीन कोष ने चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। 28 फरवरी से अब तक इस क्षेत्र में 1100 से अधिक बच्चे या तो घायल हो गए हैं या उनकी मौत हो चुकी है। इसमें ईरान में 200, लेबनान में 91, इजरायल में चार और कुवैत में एक बच्चा शामिल है। यूनिसेफ ने चेताया है कि जैसे-जैसे संघर्ष बढ़ेगा, यह संख्या और बढ़ सकती है।

    यूनिसेफ ने बच्चों को निशाना बनाने और उनकी निर्भरता पर हमलों की कड़ी निंदा की। संगठन ने बताया कि पढ़ाई में बड़े पैमाने पर बाधा उत्पन्न होने के कारण लाखों बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि लगातार बमबारी और हमलों से लाखों बच्चे बेघर हो चुके हैं। सिविलियन इंफ्रास्ट्रक्चर, जिसमें हॉस्पिटल, स्कूल और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं, को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है या नष्ट कर दिया गया है। बच्चों को मारना या उनके जीवन और शिक्षा के आधारभूत साधनों को नुकसान पहुंचाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है।

    यूनिसेफ ने कहा कि हथियारों से होने वाली लड़ाई में बच्चों के खिलाफ गंभीर उल्लंघन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। संगठन ने सभी संघर्षरत पक्षों से अपील की है कि वे लड़ाई के तरीके और साधनों का चुनाव करते समय बच्चों और आम नागरिकों को न्यूनतम जोखिम में रखें। खासकर ऐसे विस्फोटक हथियारों का इस्तेमाल करने से बचें जिनका असर बच्चों पर अधिक होता है।

    यूनिसेफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के नेतृत्व में सभी पक्षों से संघर्ष रोकने और कूटनीतिक बातचीत में शामिल होने की पुरजोर अपील की। संगठन ने चेताया कि इस इलाके के लगभग 20 करोड़ बच्चे दुनिया से तत्काल और प्रभावी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

    यूनिसेफ का यह बयान वैश्विक समुदाय को याद दिलाता है कि युद्ध केवल सैन्य या राजनीतिक संकट नहीं है, बल्कि इसमें सबसे संवेदनशील वर्ग बच्चे भी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। संगठन का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके बुनियादी अधिकारों की रक्षा के बिना इस संकट का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

    संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों, अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। यूनिसेफ ने सभी पक्षों से कहा कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नियमों और मानवता की दिशा में काम करना चाहिए, ताकि बच्चों और आम नागरिकों के जीवन को बचाया जा सके। यूनिसेफ का यह आंकड़ा और चेतावनी वैश्विक समुदाय के लिए गंभीर संदेश है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष में मानवीय राहत और कूटनीतिक प्रयासों को सबसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।