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  • पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR

    पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची पर खौफनाक हमला, तीसरी के छात्र ने ईंट से सिर पर किए कई वार, स्टाफ पर FIR


    पंचकूला । हरियाणा के पंचकूला के एक प्रसिद्ध स्कूल में छह साल की KG की छात्रा के साथ हुई हिंसक घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि तीसरी कक्षा में पढ़ने वाले करीब आठ साल के छात्र ने बच्ची पर हमला किया। उसने पहले बच्ची को बेंच पर पटका और फिर बाल पकड़कर जमीन पर घसीटा। इसके बाद ईंट से उसके सिर और चेहरे पर कई वार किए। करीब 96 सेकेंड तक चली यह घटना कक्षा में लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। बच्ची को गंभीर हालत में चंडीगढ़ के PGI में भर्ती कराया गया था। परिवार के मुताबिक अब उसकी हालत में सुधार है। घटना के बाद पुलिस ने स्कूल स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की है और स्कूल प्रबंधन की भूमिका की जांच शुरू कर दी है।

    यह घटना गुरुवार दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। मामले का पता उस समय चला जब स्कूल की छुट्टी के बाद बच्ची को लेने ऑटो चालक पहुंचा। बच्ची वहां नहीं मिली तो उसने परिजनों को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोग तुरंत स्कूल पहुंचे और बच्ची की तलाश शुरू की। बच्ची के चाचा के मुताबिक जिस छात्र पर हमला करने का आरोप है उसी ने परिवार को बताया कि बच्ची ऊपर कमरे में पड़ी है। परिजन जब वहां पहुंचे तो बच्ची खून से लथपथ हालत में मिली। उसे देखकर उसके पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गए।

    परिजन बच्ची को पहले अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत को देखते हुए चंडीगढ़ PGI रेफर कर दिया। परिवार के अनुसार बच्ची का इलाज जारी है और उसकी स्थिति में सुधार के संकेत मिले हैं। 31 अक्टूबर की रात उसने अपनी मां के हाथ से खाना भी खाया। परिवार ने बच्ची के जल्द स्वस्थ होने की कामना करने वाले लोगों का आभार जताया है।

    स्कूल के CCTV फुटेज में हमले की गंभीरता सामने आई है। फुटेज के मुताबिक छात्र ने बच्ची को पकड़कर बेंच पर सिर के बल पटका। इसके बाद उसके बाल पकड़कर नीचे गिराया और सिर तथा पेट पर लात मारी। फिर वह कक्षा के दूसरे हिस्से से ईंट लेकर आया और बच्ची पर हमला करने लगा। वीडियो में वह बार बार ईंट से उसके सिर और चेहरे पर वार करता दिखाई देता है। बच्ची जमीन पर पड़ी दर्द से परेशान होती रही। हमले के दौरान छात्र ने उसे दोबारा बाल पकड़कर घसीटा और जाते समय भी सिर पर लात मारी। घटना के दृश्य बेहद विचलित करने वाले हैं इसलिए उनका प्रदर्शन नहीं किया जा रहा है।

    मामले की जानकारी मिलने के बाद सेक्टर-20 थाना पुलिस स्कूल पहुंची। थाना प्रभारी यशदीप और जांच अधिकारी प्रदीप कुमार ने स्कूल प्रबंधन से पूछताछ की है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय कक्षा में निगरानी की व्यवस्था कैसी थी और बच्ची पर हमला होने के दौरान स्कूल स्टाफ कहां था। पंचकूला की DCP अदिति सिंह के मुताबिक मामले में स्कूल की लापरवाही सामने आई है और स्टाफ के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हमला करने वाले नाबालिग छात्र की काउंसिलिंग विशेषज्ञों से कराई जा रही है। पुलिस उसके माता-पिता से भी पूछताछ कर रही है ताकि घटना की परिस्थितियों और बच्चे की पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझा जा सके।

    हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि CCTV फुटेज देखना तक मुश्किल है। मामले की जांच के लिए मुख्यालय स्तर पर कमेटी बनाई गई है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और लापरवाही मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। घटना के बाद स्कूल के बाहर अभिभावकों ने भी नाराजगी जताई और प्रबंधन के खिलाफ विरोध किया। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि इतनी गंभीर घटना स्कूल परिसर में कैसे हुई और बच्ची की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार व्यवस्था कहां चूक गई।
  • बेटी की मौत से टूटे पिता का छलका दर्द, भोपाल में बच्ची की हत्या के बाद थाने का घेराव, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

    बेटी की मौत से टूटे पिता का छलका दर्द, भोपाल में बच्ची की हत्या के बाद थाने का घेराव, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप


    भोपाल । भोपाल के बैरागढ़ इलाके में 12 साल की बच्ची की हत्या के मामले ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। रोजाना की तरह कबाड़ा बीनने के लिए घर से निकली बच्ची का शव अगले दिन एक खंडहर में मिला। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। बच्ची के पिता आरोपी को कठोरतम सजा देने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपनी बेटी को बचा नहीं सके और अब चाहते हैं कि दोषी को ऐसी सजा मिले जिससे भविष्य में कोई इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न करे। परिजनों ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।
    परिवार के मुताबिक बच्ची 15 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे घर से कबाड़ा बीनने के लिए निकली थी। इसी दौरान रास्ते में उसकी मुलाकात मोबिन नाम के युवक से हुई। परिजनों का आरोप है कि वह बच्ची को अपने साथ ले गया और इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटी। काफी देर तक बच्ची के नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की। पिता का कहना है कि उसी रात करीब 11 से 12 बजे के बीच वे बैरागढ़ थाने पहुंचे और बच्ची के लापता होने की सूचना दी। परिवार का आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी बच्ची की तलाश के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।
    परिजन रातभर बच्ची को खोजते रहे और अगले दिन भी तलाश जारी रखी। 16 अक्टूबर की दोपहर एक अन्य बच्ची कचरा बीनने के लिए एक खंडहर में पहुंची तो वहां उसे लापता बच्ची का शव दिखाई दिया। इसके बाद परिवार और पुलिस को सूचना दी गई। शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में तनाव और आक्रोश बढ़ गया। परिवार के लिए यह खबर असहनीय थी क्योंकि वे पूरी रात अपनी बेटी को सुरक्षित वापस लाने की उम्मीद में तलाश कर रहे थे।
    बच्ची के पिता ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ गलत काम करने के बाद उसकी हत्या की गई। उनका यह भी दावा है कि सबूत छिपाने के लिए बच्ची के मुंह में कपड़ा ठूंसा गया और शव के ऊपर पुरानी अलमारी डालकर उसे कपड़े से ढक दिया गया। ये आरोप परिवार की ओर से लगाए गए हैं और मामले की वास्तविक परिस्थितियों का खुलासा जांच के बाद ही हो सकेगा। पिता आरोपी मोबिन को फांसी देने की मांग कर रहे हैं। गहरे दुख और गुस्से के बीच उन्होंने यह भी कहा कि यदि कानून दोषी को सजा नहीं दिला सकता तो आरोपी को उनके हवाले कर दिया जाए।
    परिवार के सदस्यों ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। बच्ची की बुआ का आरोप है कि मोहल्ले की एक बच्ची ने उनकी भतीजी को आखिरी बार मोबिन के साथ जाते हुए देखा था। इस जानकारी के आधार पर परिजनों को उस पर संदेह हुआ और उन्होंने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले किया। बुआ के मुताबिक पुलिस ने पूछताछ की लेकिन बच्ची के बारे में जानकारी होने से इनकार करने पर उसे छोड़ दिया गया। उनका दावा है कि शव मिलने के बाद आरोपी को दोबारा पकड़ा गया। परिजन चाहते हैं कि शुरुआती शिकायत पर हुई कार्रवाई की भी जांच हो और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
    घटना के बाद बैरागढ़ में लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और थाने का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति बनी और किसी अप्रिय घटना से बचने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया। लोगों की मांग है कि बच्ची को न्याय मिले और मामले की निष्पक्ष जांच हो। परिवार का कहना है कि उनकी बेटी अब लौटकर नहीं आएगी लेकिन दोषियों को सजा मिलना जरूरी है। फिलहाल इस मामले में आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और पुलिस की कथित लापरवाही से जुड़े आरोप जांच के महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

  • शिवपुरी में 7 साल की अवनी पर कुत्ते का हमला, चेहरे और मुंह पर गंभीर चोटें, जिला अस्पताल में इलाज जारी

    शिवपुरी में 7 साल की अवनी पर कुत्ते का हमला, चेहरे और मुंह पर गंभीर चोटें, जिला अस्पताल में इलाज जारी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी थाना क्षेत्र के ककरा गांव में बुधवार शाम कुत्ते के हमले की घटना सामने आई है। घर के बाहर खेल रही सात साल की बच्ची अवनी आदिवासी पर एक कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। हमले में बच्ची के चेहरे और मुंह पर गंभीर चोटें आईं। उसकी चीख सुनकर नानी मौके पर पहुंचीं और उसे कुत्ते से बचाया। इसके बाद परिजन घायल बच्ची को तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसके मुंह पर आठ टांके लगाए हैं। फिलहाल बच्ची अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है।

    जानकारी के मुताबिक अवनी के पिता राम अवतार आदिवासी और मां बुधवार को मजदूरी करने के लिए शिवपुरी गए हुए थे। बच्ची घर पर अपनी नानी के साथ थी। शाम के समय अवनी घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान गांव के एक कुत्ते ने उस पर अचानक हमला कर दिया। हमला इतना गंभीर था कि बच्ची के चेहरे और मुंह पर चोटें आ गईं। अचानक हुए हमले से बच्ची घबरा गई और जोर-जोर से चीखने लगी।

    बच्ची की आवाज सुनकर उसकी नानी तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने अवनी को कुत्ते से बचाया और परिजनों की मदद से उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की। घायल बच्ची को जिला अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों ने उसकी चोटों का उपचार किया। मुंह पर गंभीर घाव होने के कारण आठ टांके लगाए गए। घटना के बाद परिवार के लोग बच्ची की हालत को लेकर चिंतित हैं। फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज जारी है।

    ग्रामीण इलाकों में बच्चे अक्सर घरों के आसपास खेलते हैं। ऐसे में कुत्तों के अचानक हमले की घटनाएं परिवारों के लिए चिंता का कारण बन सकती हैं। इस मामले में बच्ची के माता-पिता मजदूरी के लिए बाहर गए हुए थे और वह अपनी नानी के साथ घर पर थी। यदि नानी समय पर मौके पर नहीं पहुंचतीं तो बच्ची को और गंभीर चोटें लग सकती थीं। हालांकि हमले की परिस्थितियों और कुत्ते के व्यवहार से जुड़ी अन्य जानकारी सामने आना बाकी है।

    कुत्ते के काटने या चेहरे पर हमला करने की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी होता है। घाव को साफ पानी और साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज से बचाव के टीके तथा अन्य जरूरी उपचार कराना चाहिए। गंभीर घावों में देरी किए बिना अस्पताल पहुंचना महत्वपूर्ण है। अवनी के मामले में परिजन उसे तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां उसका उपचार शुरू किया गया।

    फिलहाल सात साल की अवनी आदिवासी जिला अस्पताल में भर्ती है। इस घटना ने गांव में बच्चों की सुरक्षा और कुत्तों के हमलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बच्ची के स्वास्थ्य में सुधार और आगे के उपचार को लेकर परिवार की नजर डॉक्टरों की निगरानी पर है।

  • YouTube गेम का ऐसा चढ़ा खुमार कि घर छोड़कर निकल पड़े बच्चे, फार्महाउस के पास बनाया सीक्रेट ठिकाना

    YouTube गेम का ऐसा चढ़ा खुमार कि घर छोड़कर निकल पड़े बच्चे, फार्महाउस के पास बनाया सीक्रेट ठिकाना


    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के मेरठ में बच्चों के बीच ऑनलाइन वीडियो और गेमिंग कंटेंट के बढ़ते असर का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां दो मासूम बच्चों ने YouTube पर सीक्रेट हाउस गेम से जुड़ा वीडियो देखा और उससे इतने प्रभावित हुए कि खुद भी 24 घंटे तक छिपे रहने का चैलेंज पूरा करने निकल पड़े। दोनों बच्चे अचानक घर से गायब हो गए तो परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर आसपास और रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन जब उनका कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और मिशन शक्ति की टीम ने तेजी से तलाश शुरू की और करीब दो घंटे के भीतर दोनों बच्चों को सुरक्षित ढूंढकर उनके परिवार के हवाले कर दिया।

    यह मामला मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र का है। बताया गया कि बी ब्लॉक कॉलोनी में रहने वाले 11 और 7 साल के दो बच्चे रविवार दोपहर अचानक घर से निकल गए। शुरुआत में परिजनों को लगा कि दोनों बच्चे आसपास खेल रहे होंगे लेकिन काफी देर तक वापस नहीं लौटे तो चिंता बढ़ने लगी। परिवार के लोगों ने आसपास के घरों में पूछताछ की और रिश्तेदारों के यहां भी जानकारी जुटाई लेकिन बच्चों का कहीं पता नहीं चला। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

    पुलिस के लिए यह मामला गंभीर था क्योंकि दोनों बच्चे काफी कम उम्र के थे और उनके अचानक गायब होने से परिवार बेहद परेशान था। सूचना मिलते ही पुलिस ने बच्चों की तलाश शुरू की। मिशन शक्ति की टीम को भी खोजबीन में लगाया गया। लगातार तलाश के बाद टीम को दोनों बच्चे सुरक्षित मिल गए। पुलिस के अनुसार बच्चे किसी अनहोनी का शिकार नहीं हुए थे बल्कि उन्होंने खुद ही घर से निकलकर छिपने की योजना बनाई थी।

    पूछताछ में जो बात सामने आई उसने सभी को हैरान कर दिया। बच्चों ने बताया कि उन्होंने YouTube पर सीक्रेट हाउस गेम और 24 घंटे तक छिपे रहने से जुड़ा गेमिंग कंटेंट देखा था। वीडियो देखने के बाद उनके मन में भी ऐसा ही चैलेंज करने का विचार आया। दोनों ने तय किया कि वे घर से दूर जाकर अपना एक गुप्त ठिकाना बनाएंगे और 24 घंटे तक वहीं छिपे रहेंगे। इसी योजना के तहत दोनों घर से निकल पड़े।

    पुलिस के मुताबिक बच्चों ने एक फार्महाउस के पास सुनसान जगह को अपना ठिकाना बनाया था। उनका इरादा वहां 24 घंटे तक छिपे रहने का था ताकि वे वीडियो में देखे गए चैलेंज को पूरा कर सकें। बच्चों को शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनके अचानक गायब होने से परिवार किस कदर परेशान हो जाएगा और उन्हें खोजने के लिए पुलिस तक को सक्रिय होना पड़ेगा।

    करीब दो घंटे की मशक्कत के बाद पुलिस और मिशन शक्ति की टीम ने दोनों बच्चों को खोज निकाला। बच्चों के सुरक्षित मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। इसके बाद उन्हें परिवार के हवाले कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने भी बच्चों से बातचीत कर उन्हें समझाया कि इंटरनेट या वीडियो में दिखाई जाने वाली हर गतिविधि को वास्तविक जीवन में दोहराना सुरक्षित नहीं होता।

    यह घटना एक बार फिर बच्चों द्वारा मोबाइल और ऑनलाइन कंटेंट देखने पर निगरानी की जरूरत को सामने लाती है। इंटरनेट पर कई तरह के गेमिंग वीडियो और चैलेंज मौजूद हैं जिन्हें बच्चे मनोरंजन या खेल समझकर दोहराने की कोशिश कर सकते हैं। कम उम्र में बच्चे वीडियो में दिखने वाले खतरे और वास्तविक जीवन के जोखिम के बीच अंतर को पूरी तरह नहीं समझ पाते। ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी है कि वे बच्चों के ऑनलाइन कंटेंट पर नजर रखें और उन्हें यह समझाएं कि किसी भी वायरल गेम या चैलेंज को बिना सोचे समझे आजमाना खतरनाक हो सकता है।

    मेरठ की यह घटना भले ही सुखद अंत तक पहुंच गई क्योंकि दोनों बच्चे समय रहते सुरक्षित मिल गए लेकिन इसने परिवारों के लिए एक बड़ा संदेश जरूर छोड़ा है। कुछ घंटों के एक ऑनलाइन वीडियो ने दो बच्चों को 24 घंटे तक घर से दूर छिपने की योजना बनाने के लिए प्रेरित कर दिया और परिवार की चिंता बढ़ा दी।

  • झांसी में 7 साल की बच्ची से दुष्‍कर्म, लोगों ने चप्पलों से पीटा, जमकर की धुनाई, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

    झांसी में 7 साल की बच्ची से दुष्‍कर्म, लोगों ने चप्पलों से पीटा, जमकर की धुनाई, आरोपी पुलिस गिरफ्त में

    झांसी । झांसी में एक युवक ने घर से 100 मीटर दूरी पर रहने वाली 7 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। 7 जुलाई को सुबह 9 बजे के करीब वह अपनी सहेली के साथ घर के बाहर खेल रही थी।

    तभी आरोपी आया और हाथी दिखाने के बहाने बच्ची को अपने साथ ले गया। सूनी गली में कार के पीछे बच्ची से दरिंदगी की। फिर लहूलुहान हालत में छोड़कर भाग गया। खून से सनी बच्ची को देखकर परिजन सकपका गए। उन्होंने बेटी से पूछताछ की। बेटी ने आरोपी के बारे में इनपुट दिया। जिसके बाद से परिजन आरोपी की तलाश कर रहे थे।

    उन्होंने अपने मकान मालिक को घटना की जानकारी दी थी। उससे बात करने पर आरोपी का सुराग मिला। जिसके बाद शुक्रवार सुबह परिजन उसके घर पहुंचे। आरोपी को पकड़कर अपने घर ले आए। बेटी ने आरोपी को पहचान लिया। उसके बाद भीड़ ने आरोपी की चप्पलों से पिटाई की। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आज दोपहर 12:30 बजे दुष्कर्म का केस दर्ज कर लिया। उससे पूछताछ की जा रही है।

    यह है पूरा मामला

    7 जुलाई को घर के बाहर से बुलाकर ले गया था
    बिहार के मुजफ्फरपुर निवासी एक युवक ने बताया- मैं अपने परिवार के साथ एक कॉलोनी में रहता हूं। मेरे 3 बच्चे हैं। जिसमें 12 साल की बेटी, 10 साल का बेटा और सबसे छोटी बेटी 7 साल की है। मैं ई-रिक्शा चलाता हूं, जबकि पत्नी घरों में झाड़ू-पोछा का काम करती है।

    7 जुलाई को सुबह करीब 9 बजे मैं ई-रिक्शा चलाने गया था और पत्नी भी काम पर गई थी। 7 साल की बेटी उस समय घर के बाहर सहेली के साथ खेल रही थी। बाकी के दो बच्चे घर पर थे। तभी एक युवक आया और बेटी से कहने लगा कि चलो हाथी दिखाएंगे। झांसे में आकर बच्ची उसके साथ चली गई। जब सहेली भी साथ जाने लगी तो उसे डांटकर भगा दिया।

    पिता काम से लौटकर आए तो हुई घटना की जानकारी
    पिता ने आगे बताया- आरोपी बेटी को एक सूनी गली में ले गया और वहां पर खड़ी कार के पीछे रेप किया। फिर लहूलुहान हालत में बेटी को छोड़कर भाग गया। शाम लगभग 4 बजे मैं घर पहुंचा तो बेटी गेट पर खड़ी थी और रो रही थी। उसके कपड़ों पर खून लगा था।

    बेटी ने आरोपी के बारे में दिया था इनपुट
    मैंने पत्नी को फोन करके बुलाया। तब बेटी ने घटना के बारे में जानकारी दी। बेटी ने यह भी बताया कि आरोपी चेहरे पर तौलिया बांधे था और काले कपड़े पहने था। वो नाम और उसके बारे में जानकारी नहीं दे पाई। हम लोग भी डर गए थे। इसलिए उस समय किसी को कुछ नहीं बताया।

    मकान मालिक से बात करने पर आरोपी का मिला सुराग
    9 जुलाई को हिम्मत करके मैंने अपने मकान मालिक को घटना की जानकारी दी। तब पता चला कि कुछ देर पहले एक आरोपी ने इसी तरह घोड़ा दिखाने के बहाने बच्ची को ले जाने की कोशिश की। बच्ची के चिल्लाने पर वो भाग गया। तब हम लोगों ने आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

    बच्ची ने आरोपी को पहचाना
    पिता ने आगे बताया- आज सुबह करीब 11 बजे पता चला कि कुछ दिन पहले मोनू सिकरवार नाम का युवक किराए पर रहने आया था। वह 7 जुलाई को काले कपड़े पहने था। हम लोग उसे खोजते हुए उसके घर पहुंचे तो वो मिल गया। उसे पकड़कर अपने घर पर लाए। जहां पर मेरी बच्ची ने पहचान लिया कि इन्हीं अंकल ने मेरे कपड़े उतारकर गलत काम किया। इसके बाद भीड़ ने उसकी धुनाई कर दी। फिर पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया। आरोपी मध्य प्रदेश के गुना का रहने वाला है।

    पुलिस बोली- केस दर्ज किया, मेडिकल करा रहे
    सीओ सिटी रामवीर सिंह ने बताया- आज परिजनों ने थाने आकर रेप की तहरीर दी है। जिस पर पॉक्‍सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल करवाया जा रहा है। आरोपी से भी पूछताछ की जा रही है।

  • पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार

    पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार



    नई दिल्ली । नर्मदापुरम जिले के केसला थाना क्षेत्र में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने मानवता को ताक पर रखकर 11 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की कोशिश की। यह घटना 8 मई की शाम की है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

    पड़ोसी की शर्मनाक करतूत: घर में अकेला पाकर की छेड़छाड़
    घटना उस वक्त हुई जब बच्ची की मां किसी जरूरी काम से सुखतवा गई हुई थी। घर में 11 साल की मासूम अपनी 5 साल की छोटी बहन के साथ अकेली थी। सूने घर और बच्चियों को अकेला देख पड़ोस में रहने वाले बुद्धू चाचा उर्फ नर्मदा प्रसाद की नीयत डोल गई।

    आरोपी चुपके से घर में दाखिल हुआ और मासूम बच्ची को बुरी नीयत से दबोच लिया। आरोपी ने बच्ची के साथ ‘बैड टच’ और छेड़छाड़ शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से बच्ची बुरी तरह घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और शोर मचाना शुरू कर दिया। मासूम की चीखें सुनकर आरोपी पकड़े जाने के डर से मौके से फरार हो गया।

    मां के लौटते ही खुला राज, पुलिस ने कसा शिकंजा
    शाम करीब 6 बजे जब मां घर लौटी, तो उसने अपनी बेटी को डरा-सहमा और रोता हुआ पाया। पूछने पर मासूम ने ‘बुद्धू चाचा’ की सारी सच्चाई बयां कर दी। अपनी कलेजे के टुकड़े के साथ हुई इस हरकत को सुनकर मां तुरंत उसे लेकर केसला थाने पहुंची।

    पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति:
    केस दर्ज: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और छेड़छाड़ की अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    आरोपी की पहचान: आरोपी नर्मदा प्रसाद सीपीई (CPE) में एक प्राइवेट कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। फरार आरोपी: वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी फरार है। पुलिस की टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने आश्वासन दिया है कि आरोपी की तलाश के लिए टीमें पिछले दो दिनों से सक्रिय हैं और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

  • क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा

    क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा


    देवास । देवास जिले के नेवरी इलाके में एक साधारण सा खेल अचानक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने पूरे गांव को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया खेत के पास बने एक खाली मैदान में बच्चे रोज की तरह क्रिकेट खेल रहे थे हंसी ठिठोली और खेल का उत्साह अपने चरम पर था तभी खेलते खेलते गेंद पास के एक पुराने कुएं में जा गिरी किसी ने नहीं सोचा था कि यही एक छोटी सी घटना दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लेगी

    करीब पंद्रह वर्षीय देवेंद्र सबसे पहले गेंद निकालने के लिए कुएं में उतरा बताया जा रहा है कि कुएं में पानी का स्तर काफी ज्यादा था और फिसलन भी थी जैसे ही वह नीचे पहुंचा उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी में डूबने लगा ऊपर खड़े उसके साथियों के बीच अचानक चीख पुकार मच गई इसी बीच अपने दोस्त को बचाने की कोशिश में सोलह वर्षीय राजवीर बिना कुछ सोचे समझे कुएं में कूद पड़ा लेकिन यह बहादुरी दोनों के लिए भारी पड़ गई

    दोनों एक दूसरे को पकड़कर खुद को बचाने की कोशिश करते रहे लेकिन पानी की गहराई और घबराहट ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया कुछ ही पलों में दोनों पानी में समा गए ऊपर खड़े बच्चों की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया काफी मशक्कत के बाद दोनों को कुएं से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया

    इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और मातम का माहौल है सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात यह रही कि देवेंद्र का उसी दिन जन्मदिन था जिस दिन उसकी जिंदगी खत्म हो गई वह अपनी विधवा मां का इकलौता सहारा था पिता के निधन के बाद मां ने बेटे के सहारे ही जिंदगी को थाम रखा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था बेटे का शव देखते ही मां का विलाप हर किसी की आंखें नम कर गया

    राजवीर भी अपने परिवार का चहेता था और उसकी अचानक मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया दोनों बच्चों की दोस्ती और एक दूसरे के लिए जान जोखिम में डालने की कोशिश अब गांव के हर व्यक्ति के दिल को चुभ रही है

    पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं को देखा जा रहा है पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार एक साथ किया जाएगा गांव में हर व्यक्ति इस हादसे को याद कर सहम उठा है और यह सवाल हर किसी के मन में है कि अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाती तो शायद ये दो जिंदगियां बच सकती थीं

    यह हादसा एक कड़वी सीख भी छोड़ गया है कि खुले कुएं और असुरक्षित स्थान बच्चों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं एक छोटी सी लापरवाही कब बड़ी त्रासदी बन जाए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है

  • इंदौर में दोस्ती की आड़ में दरिंदगी: 12 साल की छात्रा से दुष्कर्म, जेवर-नकदी भी ठगे

    इंदौर में दोस्ती की आड़ में दरिंदगी: 12 साल की छात्रा से दुष्कर्म, जेवर-नकदी भी ठगे


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और स्वच्छता में सिरमौर इंदौर शहर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहाँ के एक प्रतिष्ठित थाना क्षेत्र में बारह वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दोस्ती के नाम पर विश्वासघात और फिर घिनौनी दरिंदगी की वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक युवक ने पहले मासूम बच्ची को अपने झांसे में लेकर उससे दोस्ती की और फिर एकांत का फायदा उठाकर उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला। अपराधी की हैवानियत यहीं नहीं थमी बल्कि उसने इस कुकृत्य के बाद बच्ची को डराना और धमकाना शुरू कर दिया ताकि वह किसी को कुछ बता न सके।

    हैवानियत के बाद शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खौफनाक दौर

    दुष्कर्म की इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बच्ची की मासूमियत और डर का फायदा उठाते हुए उसे बदनाम करने की धमकी दी। लोक लाज और समाज के डर से सहमी छात्रा अपराधी के इशारों पर नाचने को मजबूर हो गई। आरोपी ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया और बच्ची पर घर से कीमती जेवर और नकदी लाने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया। डरी-सहमी छात्रा ने बदनामी के डर से अपने ही घर की अलमारी में सेंध लगाना शुरू कर दिया और समय-समय पर घर के गहने और मेहनत की कमाई आरोपी के हवाले करती रही। आरोपी का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि वह लगातार और अधिक धन की मांग कर रहा था जिससे बच्ची मानसिक तनाव के गहरे भंवर में फंसती चली गई।

    परिजनों की चौकसी से उजागर हुआ दरिंदगी का राज

    इस पूरी घटना का पर्दाफाश तब हुआ जब घर की महिलाओं ने अलमारी से कीमती जेवर और नकदी को गायब पाया। पहले तो परिजनों को लगा कि घर में कोई बाहरी चोर घुस आया है लेकिन जब घर का सामान बार-बार गायब होने लगा तो उन्हें किसी करीबी पर शक हुआ। इसी दौरान उन्होंने अपनी बारह वर्षीय बेटी के व्यवहार में एक अजीब सा डर और चिड़चिड़ापन महसूस किया। जब माता-पिता ने बच्ची को विश्वास में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह फूट-फूटकर रोने लगी। छात्रा ने जो आपबीती सुनाई उसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची ने बताया कि किस तरह दोस्ती के नाम पर उसे धोखा दिया गया और फिर उसे आर्थिक रूप से लूटने का सिलसिला शुरू हुआ।

    पुलिस की सख्त कार्रवाई और आरोपी की सरगर्मी से तलाश

    मामले की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में तत्काल टीम गठित की गई। पुलिस ने छात्रा के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पीड़िता को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा गया है और उसे इस सदमे से बाहर निकालने के लिए मनोवैज्ञानिकों द्वारा काउंसलिंग भी प्रदान की जा रही है। पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उसके तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपा हो उसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाएगा।

  • रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी

    रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी


    रतलाम । रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स यानी खसरा के 10 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और बच्चों की हालत का जायजा लिया। विभाग के मुताबिक बच्चों की स्थिति अब नियंत्रण में है।

    मरीजों में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। होली पर बाहर गए कुछ बच्चे वापस भी पलायन कर गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांवों में भ्रमण कर बच्चों को आवश्यक उपचार सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। मामले में संबंधित एएनएम के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

    शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा। टीम ने ग्राम बोरपाड़ा और रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन के साथ विटामिन ए का घोल भी पिलाया।

    जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार खांसी बहती नाक लाल और पानी भरी आंखें और पूरे शरीर पर लाल भूरे रंग के दाने शामिल हैं। दाने आने से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे कोप्लिक स्पाट्स भी दिखाई दे सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद ये लक्षण प्रकट होते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र में नोटिफिकेशन जारी करने घर घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने और अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। बच्चों की हालत अब बेहतर है और विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। मरीजों के इलाज और संक्रमण रोकने के लिए एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन ए अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

    भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में पहले ही इस उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल रोक दिया गया है, और अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस दिशा में इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड, 2021 में संशोधन किया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया मॉडल: कैसे काम करता है

    सरकार पूर्ण प्रतिबंध की जगह ऑस्ट्रेलिया मॉडल की ओर झुक रही है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका गया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत चल रही है और उम्र-आधारित नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।

    क्यों उठ रहा यह कदम?
    इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने चेतावनी दी है कि युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन, कंपल्सिव यूज, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को एडिक्शन, अश्लील कंटेंट और डीपफेक जैसी ऑनलाइन समस्याओं से बचाया जा सके।

    मौजूदा कानून और DPDP एक्ट
    भारत में अभी कोई कानून नहीं है जो सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाए। लेकिन DPDP एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए पेरेंटल कंसेंट जरूरी है। इससे प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के डेटा कलेक्शन और टारगेटेड एड्स पर नियंत्रण रखना पड़ता है।

    दुनिया में स्थिति

    ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन। फ्रांस: 15 साल से कम उम्र पर सोशल मीडिया का उपयोग रोकने वाला बिल पास। यूके, स्पेन, डेनमार्क, ग्रीस: ऐसी पाबंदियों पर विचार भारत के कुछ राज्यों जैसे गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने पर चर्चा शुरू की है।

    चुनौतियां और विरोधाभास

    इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर डायरेक्टर अपर गुप्ता का कहना है कि भारत में यह बैन केवल कागज पर ही रह सकता है। बच्चे अक्सर फेक उम्र डालकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लेते हैं।

    अगला कदम

    सरकार अभी सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत कर रही है। कोई फाइनल फैसला या टाइमलाइन अभी तय नहीं हुई है, लेकिन लागू होने पर यह नियम भारत के करोड़ों युवा यूजर्स को प्रभावित करेगा, खासकर जब भारत दुनिया में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा मार्केट है।