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  • पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार

    पड़ोस बना काल: नर्मदापुरम में मासूम बच्ची से पड़ोसी ने पार की मर्यादा, FIR दर्ज होते ही आरोपी फरार



    नई दिल्ली । नर्मदापुरम जिले के केसला थाना क्षेत्र में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है, जहाँ एक 50 वर्षीय व्यक्ति ने मानवता को ताक पर रखकर 11 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी की कोशिश की। यह घटना 8 मई की शाम की है, जिसने पूरे इलाके में आक्रोश और भय का माहौल पैदा कर दिया है।

    पड़ोसी की शर्मनाक करतूत: घर में अकेला पाकर की छेड़छाड़
    घटना उस वक्त हुई जब बच्ची की मां किसी जरूरी काम से सुखतवा गई हुई थी। घर में 11 साल की मासूम अपनी 5 साल की छोटी बहन के साथ अकेली थी। सूने घर और बच्चियों को अकेला देख पड़ोस में रहने वाले बुद्धू चाचा उर्फ नर्मदा प्रसाद की नीयत डोल गई।

    आरोपी चुपके से घर में दाखिल हुआ और मासूम बच्ची को बुरी नीयत से दबोच लिया। आरोपी ने बच्ची के साथ ‘बैड टच’ और छेड़छाड़ शुरू कर दी। अचानक हुए इस हमले से बच्ची बुरी तरह घबरा गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और शोर मचाना शुरू कर दिया। मासूम की चीखें सुनकर आरोपी पकड़े जाने के डर से मौके से फरार हो गया।

    मां के लौटते ही खुला राज, पुलिस ने कसा शिकंजा
    शाम करीब 6 बजे जब मां घर लौटी, तो उसने अपनी बेटी को डरा-सहमा और रोता हुआ पाया। पूछने पर मासूम ने ‘बुद्धू चाचा’ की सारी सच्चाई बयां कर दी। अपनी कलेजे के टुकड़े के साथ हुई इस हरकत को सुनकर मां तुरंत उसे लेकर केसला थाने पहुंची।

    पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति:
    केस दर्ज: पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और छेड़छाड़ की अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

    आरोपी की पहचान: आरोपी नर्मदा प्रसाद सीपीई (CPE) में एक प्राइवेट कर्मचारी के रूप में कार्यरत है। फरार आरोपी: वारदात को अंजाम देने के बाद से ही आरोपी फरार है। पुलिस की टीमें लगातार उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। केसला थाना प्रभारी मदन लाल पवार ने आश्वासन दिया है कि आरोपी की तलाश के लिए टीमें पिछले दो दिनों से सक्रिय हैं और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

  • क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा

    क्रिकेट की एक गेंद ने ,छीनी दो जानें दोस्ती निभाने उतरे, और मौत ने घेरा


    देवास । देवास जिले के नेवरी इलाके में एक साधारण सा खेल अचानक ऐसी त्रासदी में बदल गया जिसने पूरे गांव को शोक और सन्नाटे में डुबो दिया खेत के पास बने एक खाली मैदान में बच्चे रोज की तरह क्रिकेट खेल रहे थे हंसी ठिठोली और खेल का उत्साह अपने चरम पर था तभी खेलते खेलते गेंद पास के एक पुराने कुएं में जा गिरी किसी ने नहीं सोचा था कि यही एक छोटी सी घटना दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लेगी

    करीब पंद्रह वर्षीय देवेंद्र सबसे पहले गेंद निकालने के लिए कुएं में उतरा बताया जा रहा है कि कुएं में पानी का स्तर काफी ज्यादा था और फिसलन भी थी जैसे ही वह नीचे पहुंचा उसका संतुलन बिगड़ गया और वह पानी में डूबने लगा ऊपर खड़े उसके साथियों के बीच अचानक चीख पुकार मच गई इसी बीच अपने दोस्त को बचाने की कोशिश में सोलह वर्षीय राजवीर बिना कुछ सोचे समझे कुएं में कूद पड़ा लेकिन यह बहादुरी दोनों के लिए भारी पड़ गई

    दोनों एक दूसरे को पकड़कर खुद को बचाने की कोशिश करते रहे लेकिन पानी की गहराई और घबराहट ने उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया कुछ ही पलों में दोनों पानी में समा गए ऊपर खड़े बच्चों की चीख सुनकर आसपास के ग्रामीण दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया गया काफी मशक्कत के बाद दोनों को कुएं से बाहर निकाला गया और तुरंत अस्पताल ले जाया गया लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया

    इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है हर तरफ सिर्फ सन्नाटा और मातम का माहौल है सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाली बात यह रही कि देवेंद्र का उसी दिन जन्मदिन था जिस दिन उसकी जिंदगी खत्म हो गई वह अपनी विधवा मां का इकलौता सहारा था पिता के निधन के बाद मां ने बेटे के सहारे ही जिंदगी को थाम रखा था लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था बेटे का शव देखते ही मां का विलाप हर किसी की आंखें नम कर गया

    राजवीर भी अपने परिवार का चहेता था और उसकी अचानक मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया दोनों बच्चों की दोस्ती और एक दूसरे के लिए जान जोखिम में डालने की कोशिश अब गांव के हर व्यक्ति के दिल को चुभ रही है

    पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं को देखा जा रहा है पोस्टमार्टम के बाद दोनों बच्चों का अंतिम संस्कार एक साथ किया जाएगा गांव में हर व्यक्ति इस हादसे को याद कर सहम उठा है और यह सवाल हर किसी के मन में है कि अगर थोड़ी सी सावधानी बरती जाती तो शायद ये दो जिंदगियां बच सकती थीं

    यह हादसा एक कड़वी सीख भी छोड़ गया है कि खुले कुएं और असुरक्षित स्थान बच्चों के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं एक छोटी सी लापरवाही कब बड़ी त्रासदी बन जाए इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है

  • इंदौर में दोस्ती की आड़ में दरिंदगी: 12 साल की छात्रा से दुष्कर्म, जेवर-नकदी भी ठगे

    इंदौर में दोस्ती की आड़ में दरिंदगी: 12 साल की छात्रा से दुष्कर्म, जेवर-नकदी भी ठगे


    इंदौर मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और स्वच्छता में सिरमौर इंदौर शहर से एक ऐसा दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहाँ के एक प्रतिष्ठित थाना क्षेत्र में बारह वर्षीय नाबालिग छात्रा के साथ दोस्ती के नाम पर विश्वासघात और फिर घिनौनी दरिंदगी की वारदात को अंजाम दिया गया। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक युवक ने पहले मासूम बच्ची को अपने झांसे में लेकर उससे दोस्ती की और फिर एकांत का फायदा उठाकर उसे अपनी हवस का शिकार बना डाला। अपराधी की हैवानियत यहीं नहीं थमी बल्कि उसने इस कुकृत्य के बाद बच्ची को डराना और धमकाना शुरू कर दिया ताकि वह किसी को कुछ बता न सके।

    हैवानियत के बाद शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का खौफनाक दौर

    दुष्कर्म की इस घिनौनी वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बच्ची की मासूमियत और डर का फायदा उठाते हुए उसे बदनाम करने की धमकी दी। लोक लाज और समाज के डर से सहमी छात्रा अपराधी के इशारों पर नाचने को मजबूर हो गई। आरोपी ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया और बच्ची पर घर से कीमती जेवर और नकदी लाने का भारी दबाव बनाना शुरू कर दिया। डरी-सहमी छात्रा ने बदनामी के डर से अपने ही घर की अलमारी में सेंध लगाना शुरू कर दिया और समय-समय पर घर के गहने और मेहनत की कमाई आरोपी के हवाले करती रही। आरोपी का दुस्साहस इतना बढ़ गया था कि वह लगातार और अधिक धन की मांग कर रहा था जिससे बच्ची मानसिक तनाव के गहरे भंवर में फंसती चली गई।

    परिजनों की चौकसी से उजागर हुआ दरिंदगी का राज

    इस पूरी घटना का पर्दाफाश तब हुआ जब घर की महिलाओं ने अलमारी से कीमती जेवर और नकदी को गायब पाया। पहले तो परिजनों को लगा कि घर में कोई बाहरी चोर घुस आया है लेकिन जब घर का सामान बार-बार गायब होने लगा तो उन्हें किसी करीबी पर शक हुआ। इसी दौरान उन्होंने अपनी बारह वर्षीय बेटी के व्यवहार में एक अजीब सा डर और चिड़चिड़ापन महसूस किया। जब माता-पिता ने बच्ची को विश्वास में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो वह फूट-फूटकर रोने लगी। छात्रा ने जो आपबीती सुनाई उसे सुनकर परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बच्ची ने बताया कि किस तरह दोस्ती के नाम पर उसे धोखा दिया गया और फिर उसे आर्थिक रूप से लूटने का सिलसिला शुरू हुआ।

    पुलिस की सख्त कार्रवाई और आरोपी की सरगर्मी से तलाश

    मामले की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में तत्काल टीम गठित की गई। पुलिस ने छात्रा के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। पीड़िता को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा गया है और उसे इस सदमे से बाहर निकालने के लिए मनोवैज्ञानिकों द्वारा काउंसलिंग भी प्रदान की जा रही है। पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उसके तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अपराधी चाहे कहीं भी छिपा हो उसे जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और कठोरतम दंड सुनिश्चित किया जाएगा।

  • रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी

    रतलाम में 10 बच्चों को खसरा, स्वास्थ्य विभाग सक्रिय; एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन-ए अभियान जारी


    रतलाम । रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स यानी खसरा के 10 मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और बच्चों की हालत का जायजा लिया। विभाग के मुताबिक बच्चों की स्थिति अब नियंत्रण में है।

    मरीजों में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चे शामिल हैं। होली पर बाहर गए कुछ बच्चे वापस भी पलायन कर गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार गांवों में भ्रमण कर बच्चों को आवश्यक उपचार सलाह और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। मामले में संबंधित एएनएम के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की गई है।

    शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल और स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचा। टीम ने ग्राम बोरपाड़ा और रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन के साथ विटामिन ए का घोल भी पिलाया।

    जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा एक संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार खांसी बहती नाक लाल और पानी भरी आंखें और पूरे शरीर पर लाल भूरे रंग के दाने शामिल हैं। दाने आने से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे कोप्लिक स्पाट्स भी दिखाई दे सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद ये लक्षण प्रकट होते हैं।

    स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्र में नोटिफिकेशन जारी करने घर घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने और अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली है। बच्चों की हालत अब बेहतर है और विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। मरीजों के इलाज और संक्रमण रोकने के लिए एमआर वैक्सीनेशन और विटामिन ए अभियान लगातार जारी रहेगा।

  • भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

    भारत में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन? सरकार ले सकती है बड़ा फैसला


    नई दिल्ली । भारत सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती करने की तैयारी शुरू कर दी है। ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों में पहले ही इस उम्र में सोशल मीडिया का इस्तेमाल रोक दिया गया है, और अब भारत भी इसी मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस दिशा में इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड, 2021 में संशोधन किया जा सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया मॉडल: कैसे काम करता है

    सरकार पूर्ण प्रतिबंध की जगह ऑस्ट्रेलिया मॉडल की ओर झुक रही है, जिसमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से रोका गया है। केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पुष्टि की कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत चल रही है और उम्र-आधारित नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है।

    क्यों उठ रहा यह कदम?
    इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने चेतावनी दी है कि युवाओं में स्क्रीन एडिक्शन, कंपल्सिव यूज, साइबरबुलिंग और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चों को एडिक्शन, अश्लील कंटेंट और डीपफेक जैसी ऑनलाइन समस्याओं से बचाया जा सके।

    मौजूदा कानून और DPDP एक्ट
    भारत में अभी कोई कानून नहीं है जो सोशल मीडिया के लिए उम्र-आधारित प्रतिबंध लगाए। लेकिन DPDP एक्ट के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए पेरेंटल कंसेंट जरूरी है। इससे प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के डेटा कलेक्शन और टारगेटेड एड्स पर नियंत्रण रखना पड़ता है।

    दुनिया में स्थिति

    ऑस्ट्रेलिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया बैन। फ्रांस: 15 साल से कम उम्र पर सोशल मीडिया का उपयोग रोकने वाला बिल पास। यूके, स्पेन, डेनमार्क, ग्रीस: ऐसी पाबंदियों पर विचार भारत के कुछ राज्यों जैसे गोवा, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक ने भी ऑस्ट्रेलिया मॉडल अपनाने पर चर्चा शुरू की है।

    चुनौतियां और विरोधाभास

    इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन (IFF) के फाउंडर डायरेक्टर अपर गुप्ता का कहना है कि भारत में यह बैन केवल कागज पर ही रह सकता है। बच्चे अक्सर फेक उम्र डालकर सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर लेते हैं।

    अगला कदम

    सरकार अभी सोशल मीडिया कंपनियों से बातचीत कर रही है। कोई फाइनल फैसला या टाइमलाइन अभी तय नहीं हुई है, लेकिन लागू होने पर यह नियम भारत के करोड़ों युवा यूजर्स को प्रभावित करेगा, खासकर जब भारत दुनिया में सोशल मीडिया का सबसे बड़ा मार्केट है।

  • शीर्षक: उज्जैन: ट्रेन में बच्ची से छेड़छाड़, विरोध करने पर मारपीट; स्टेशन पर भड़का सांप्रदायिक तनाव

    शीर्षक: उज्जैन: ट्रेन में बच्ची से छेड़छाड़, विरोध करने पर मारपीट; स्टेशन पर भड़का सांप्रदायिक तनाव


    उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा रेलवे स्टेशन पर रविवार देर रात एक गंभीर घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया गुजरात के दाहोद जिले से अस्थि विसर्जन के लिए ट्रेन से उज्जैन आ रहे एक परिवार की बच्ची के साथ ट्रेन में कुछ युवकों ने छेड़छाड़ का प्रयास किया जब परिवार ने विरोध किया तो युवकों ने जमकर मारपीट शुरू कर दी

    पीड़ित परिवार के अनुसार महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और युवकों को बुरी तरह पीटा गया पूरी बोगी में हंगामा मच गया घटना की जानकारी जैसे ही नागदा में स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों को लगी बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पर जमा हो गए वहीं मुस्लिम समाज के लोग भी बड़ी तादाद में स्टेशन पहुंचे जिससे टकराव की स्थिति बन गई

    स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया सूत्रों के अनुसार मुस्लिम युवकों ने खाचरोद से अपने साथियों को बुला लिया और करीब 50-60 युवक ट्रेन में चढ़कर मारपीट में शामिल हो गए देर रात तक जिले भर से पुलिस बल नागदा पहुंचा और स्थिति को नियंत्रण में रखापीड़ित परिवार ने नागदा जीआरपी थाने में शिकायत दर्ज कराई इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा के बीच परिवार को निजी वाहन से उज्जैन पहुंचाया परिवार इतना डर गया कि स्टेशन पर कई सदस्य रोने लगे पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश कर रही है

    इस घटना ने इलाके में तनाव का माहौल बना दिया हालांकि फिलहाल पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में रखी हुई है और दोनों समुदायों को शांत रहने की अपील की है स्थानीय प्रशासन ने भी सुरक्षा बढ़ा दी है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सकेइस घटना ने एक बार फिर ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था के महत्व को उजागर किया है प्रशासन और पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और दोषियों को पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है

  • ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?

    ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया बैन: एक महीने में हटे 50 लाख अकाउंट, कितना कारगर रहा फैसला?


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बन गया है जहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले को लागू हुए अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है और इसके शुरुआती नतीजे सामने आने लगे हैं। सवाल यह है कि क्या यह सख्त कदम वास्तव में असरदार साबित हो रहा है?

    यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक कानून लागू होने के पहले ही महीने में सोशल मीडिया कंपनियों ने करीब 50 लाख नाबालिग अकाउंट हटा दिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट रेगुलेटर ने बताया कि 10 दिसंबर से लागू हुए इस कानून के तहत 16 साल से कम उम्र के करीब 4.7 मिलियन अकाउंट विभिन्न प्लेटफॉर्म्स से डिलीट किए गए हैं। इसे डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    ऑस्ट्रेलिया की ई-सेफ्टी कमिश्नर ने इस संबंध में गुरुवार को आधिकारिक डेटा जारी किया। उन्होंने बताया कि यह आंकड़े इस बात का शुरुआती संकेत हैं कि बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अब नियमों को गंभीरता से लागू कर रहे हैं और नाबालिगों को प्लेटफॉर्म से दूर रखने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं।ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने इन शुरुआती नतीजों पर संतोष जताते हुए कहा “मैं इन आंकड़ों से बहुत खुश हूं। यह साफ है कि डिजिटल सुरक्षा को लेकर दी गई रेगुलेटरी गाइडेंस और प्लेटफॉर्म्स के साथ बेहतर समन्वय अब सकारात्मक नतीजे देने लगा है।” उन्होंने इसे कम्प्लायंस पर पहला सरकारी डेटा बताया।

    हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कुछ 16 साल से कम उम्र के अकाउंट अभी भी सक्रिय हैं। उनका कहना था कि जैसे समाज में अन्य सुरक्षा कानूनों के साथ होता है वैसे ही इस कानून की सफलता केवल पूर्ण रोक से नहीं बल्कि नुकसान को कम करने और सामाजिक व्यवहार को बदलने से आंकी जाएगी। उन्होंने माना कि कुछ बच्चे सोशल मीडिया पर बने रहने के लिए “क्रिएटिव तरीके” अपना सकते हैं लेकिन कानून का उद्देश्य एक सुरक्षित डिजिटल संस्कृति तैयार करना है।इन नियमों का उल्लंघन करने पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 4.95 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यही कारण है कि टेक कंपनियां अब उम्र सत्यापन और अकाउंट मॉनिटरिंग को लेकर ज्यादा सख्त रवैया अपना रही हैं।

    ऑस्ट्रेलिया के इस कदम पर अब दुनिया के कई देश नजर बनाए हुए हैं। डेनमार्क समेत अन्य नॉर्डिक देशों ने भी इसी तरह के कानून पर काम शुरू कर दिया है। नॉर्डिक देशों के समूह ने नवंबर में घोषणा की थी कि वे 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया एक्सेस ब्लॉक करने को लेकर एक समझौते पर पहुंचे हैं जिसे 2026 के मध्य तक कानून का रूप दिया जा सकता है।डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया का यह प्रयोग भविष्य में अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकता है। हालांकि इसकी वास्तविक सफलता का मूल्यांकन लंबे समय में ही संभव होगा जब यह देखा जाएगा कि इससे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल व्यवहार में कितना सकारात्मक बदलाव आता है।

  • ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का तांडव, कोचिंग जा रहे मासूम पर हमला, 10 दिन में 872 लोग डॉग बाइट के शिकार

    ग्वालियर में स्ट्रीट डॉग का तांडव, कोचिंग जा रहे मासूम पर हमला, 10 दिन में 872 लोग डॉग बाइट के शिकार


    ग्वालियर । ग्वालियर में शनिवार सुबह कोचिंग जा रहे आठ वर्षीय मासूम अहिम पर अचानक एक स्ट्रीट डॉग ने हमला कर दिया। बच्चे की जांघ को जबड़े में दबाकर कुत्ते ने सड़क पर घसीटना शुरू किया। आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और बच्चे को डॉग के चंगुल से छुड़ाया। घायल मासूम को तुरंत जेएएच अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांघ पर टांके लगाए।

    घटना माधौगंज थाना क्षेत्र के लक्कड़खाना नाले के पास हुई। बच्चे के पिता दीन मोहम्मद ने बताया कि हमला करने वाला कुत्ता मानसिक रूप से अस्वस्थ है और लंबे समय से इलाके में घूम रहा है। इसके झुंड ने पहले भी कई लोगों पर हमला किया, लेकिन नगर निगम से शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

    अहिम पर हमला इतने अचानक हुआ कि बच्चे को कोई तैयारी नहीं थी। कुत्ते ने उसकी जांघ को जबड़े में दबाकर सड़क पर घसीटा। मौके पर पहुंचे लोगों ने कुत्ते को भगाया और बच्चे को सुरक्षित किया। अब अहिम गहरे सदमे और डर में है।

    ग्वालियर में डॉग बाइट का डर:
    पिछले कुछ दिनों में शहर में आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ गया है। सिर्फ 1 जनवरी से 10 जनवरी 2026 तक 872 लोग कुत्तों के काटने का शिकार हो चुके हैं। आंकड़े बताते हैं कि बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी को डॉग बाइट की घटनाओं में शामिल किया गया।

    जयारोग्य अस्पताल के रिकॉर्ड के अनुसार, जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक 18,993, जबकि 2025 में 8,606 डॉग बाइट के मामले सामने आए। इस तरह केवल दो साल में कुल 27,593 लोग कुत्तों के काटने से प्रभावित हुए।

    नगर निगम का कहना है कि रोजाना करीब 40 कुत्ते पकड़े जाते हैं और 25 कुत्तों की नसबंदी की जाती है। शहर में केवल एक एबीसी सेंटर है, जो बिरला नगर पुल के नीचे संचालित होता है। इसके बावजूद आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रण से बाहर है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरनाक स्थिति है। शहर के गलियों, मोहल्लों और चौराहों तक डॉग बाइट का डर आम हो गया है।

    नगर निगम से जनता की मांग है कि आवारा कुत्तों की संख्या कम करने और नसबंदी पर विशेष ध्यान दिया जाए।

    ग्वालियर में इस तरह की घटनाएं आवारा कुत्तों के असंगठित झुंडों की वजह से लगातार बढ़ रही हैं। इस घटना ने एक बार फिर नगर निगम की सुरक्षा व्यवस्था और सक्रियता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते प्रभावी कदम उठाएगा और शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
    यह घटना बच्चों की सुरक्षा, नगर निगम की जवाबदेही और आवारा कुत्तों के नियंत्रण की आवश्यकता को उजागर करती है। ग्वालियरवासियों की चिंता बढ़ती जा रही है, और समय रहते कदम न उठाए जाने पर हालात और गंभीर हो सकते हैं।