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  • घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद

    घर के सामने खेलते-खेलते लापता हुआ 3 साल का रितेश, 365 दिन बाद भी नहीं मिला सुराग, मां की टूटने लगी उम्मीद


    ग्वालियर। ग्वालियर के मोहनपुर गांव से एक साल पहले रहस्यमय तरीके से लापता हुआ मासूम रितेश पाल आज भी पुलिस और परिवार के लिए अनसुलझी पहेली बना हुआ है। 1 नवंबर 2025 को घर के सामने दूसरे बच्चों के साथ खेलते समय गायब हुए रितेश की तलाश में पुलिस ने कई स्तर पर जांच की। जंगलों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई और परिवार के कई सदस्यों से पूछताछ भी हुई। इसके बावजूद एक साल बीतने के बाद भी बच्चे का कोई पता नहीं चल सका है। बेटे की राह देख रही मां सपना पाल की उम्मीद अब धीरे-धीरे टूटने लगी है। उनका कहना है कि हर दिन इस इंतजार में गुजरता है कि कहीं बेटा वापस लौट आए और मां कहकर उन्हें पुकारे।

    सपना पाल ने अपने दर्द को बयां करते हुए कहा कि बेटे के बिना बीता यह एक साल उनके लिए जिंदगी का सबसे मुश्किल समय रहा है। एक मां के लिए अपने छोटे बच्चे से दूर रहना कितना तकलीफदेह होता है इसे वही महसूस कर सकती है। सपना का आरोप है कि पुलिस ने शुरुआत से ही परिवार के लोगों पर शक किया और उनसे लगातार पूछताछ करती रही। उनका कहना है कि परिवार का शायद ही कोई सदस्य बचा हो जिससे पुलिस ने सवाल जवाब न किए हों। सपना ने यह भी आरोप लगाया कि यदि किसी बड़े परिवार या कारोबारी का बच्चा लापता होता तो उसकी तलाश में ज्यादा गंभीरता दिखाई जाती। हालांकि ये उनके व्यक्तिगत आरोप हैं।

    रितेश के लापता होने की घटना 1 नवंबर 2025 की दोपहर की है। उस समय उसकी उम्र करीब तीन साल थी। वह मुरार क्षेत्र के मोहनपुर में काली माता मंदिर के पास स्थित झोपड़ी के बाहर अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था। दोपहर करीब 12:30 बजे तक वह वहीं मौजूद था। लगभग एक बजे जब उसकी मां सपना उसे दूध पिलाने के लिए बाहर पहुंचीं तो वह वहां नहीं मिला। परिवार ने आसपास के इलाकों में उसकी तलाश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद देर शाम मुरार थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने तलाश शुरू की लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया।

    बच्चे के गायब होने के बाद शुरुआती आशंका जताई गई थी कि वह खेलते हुए आसपास के जंगल में चला गया होगा। इसके बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन चलाया। दस से अधिक टीमें बनाई गईं और सौ से ज्यादा जवानों ने इलाके में तलाश की। जंगल के रास्तों और आसपास के स्थानों को खंगाला गया। ड्रोन कैमरों की मदद से भी निगरानी की गई। जमीन से लेकर आसमान तक तलाश की गई लेकिन रितेश का कोई पता नहीं चला।

    जांच के दौरान पुलिस ने परिवार के हालात और आपसी संबंधों को भी ध्यान में रखा। सपना और रितेश के पिता दलबीर सिंह के बीच मनमुटाव चल रहा था और दोनों करीब आठ महीने से अलग रह रहे थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा पिता के साथ जबकि छोटा बेटा रितेश मां के पास रह रहा था। पुलिस ने मां और पिता के अलावा मामा मामी ताऊ और बाबा सहित परिवार के कई लोगों से पूछताछ की। इसके बावजूद जांच किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी।

    पुलिस ने धार्मिक और पारिवारिक पहलुओं से भी जानकारी जुटाने की कोशिश की। दोनों परिवारों को गिरगांव महादेव मंदिर में शपथ लेने के लिए कहा गया था। 2 दिसंबर 2025 को दोनों पक्ष वहां पहुंचे और बच्चे के बारे में जानकारी नहीं होने की बात कही। इसके बाद भी कोई नया सुराग नहीं मिला। पति पत्नी के बीच विवाद को देखते हुए पुलिस ने किसी तीसरे व्यक्ति की भूमिका की आशंका पर भी जांच की लेकिन यह पहलू भी बेनतीजा रहा।

    इस मामले में रितेश के पिता दलबीर सिंह ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि बच्चा मां के पास है। हालांकि अदालत ने याचिका खारिज कर दी। दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि मामले में कई पहलुओं पर जांच की जा चुकी है और तलाश अब भी जारी है। प्रभारी एसपी जयराज कुबेर के मुताबिक फिलहाल कोई नया इनपुट नहीं मिला है लेकिन पुराने इनपुट के आधार पर छानबीन की जा रही है। पुलिस की एक टीम मामले से जुड़े लोगों पर नजर रखे हुए है। एक साल बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर रितेश कहां है और वह अपनी मां के पास कब लौटेगा।