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  • विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास

    विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी तरुणा वर्मा ने 80 के दशक की यादें कीं साझा, मोबाइल और सोशल मीडिया से दूर जिंदगी को बताया खास


    नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर इन दिनों 1980 के दशक की तस्वीरों का ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग अपनी तस्वीरों को उस दौर की फैशन और फोटोग्राफी शैली में बदलकर पुरानी यादों को ताजा कर रहे हैं। इसी बीच शिक्षक विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी और दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर तरुणा वर्मा ने भी 80 के दशक से जुड़ी यादों को एक तस्वीर के जरिए साझा किया है।

    तरुणा वर्मा ने अपने पति विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीर शेयर करते हुए कहा कि यह तस्वीर वास्तव में 80 के दशक की नहीं, बल्कि वर्तमान समय की है। इसके साथ उन्होंने उस दौर को याद किया, जब लोगों की जिंदगी मोबाइल फोन, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसी सुविधाओं से पूरी तरह दूर थी।

    उन्होंने अपने पोस्ट में उस समय के जीवन को याद करते हुए लिखा कि आज यह सोचकर हैरानी होती है कि बिना मोबाइल और सोशल मीडिया के लोग किस तरह अपनी जिंदगी बिताते थे। उस दौर में फोन पर लगातार समय बिताने की आदत नहीं थी और लोगों के पास एक-दूसरे के साथ समय बिताने के लिए ज्यादा मौके होते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के दिनों को याद करते हुए गर्मियों की दोपहर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि घरवालों के मना करने के बावजूद बच्चे छिपकर अपनी सहेलियों के साथ खेलने निकल जाते थे। तेज धूप के बावजूद खेल-कूद का उत्साह कम नहीं होता था और बच्चों का ध्यान अपनी त्वचा या धूप से होने वाले बदलावों पर नहीं रहता था।

    उन्होंने उस समय और आज के दौर के बीच अंतर को अपने अंदाज में सामने रखा। उनके मुताबिक, पहले चेहरे पर दाग-धब्बे होने जैसी बातों को लेकर इतनी चिंता नहीं होती थी। लोग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और दोस्तों के साथ बिताए पलों में ज्यादा सहज रहते थे।

    तरुणा वर्मा ने बचपन के खेलों का जिक्र करते हुए कबड्डी और रुमाल चोर जैसी गतिविधियों को याद किया। इन खेलों में दोस्तों के बीच जीतने की होड़ होती थी, लेकिन उस प्रतिस्पर्धा का आधार सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स नहीं थे। उन्होंने पुराने समय की दोस्ती और आज की सोशल मीडिया वाली दोस्ती के बीच के अंतर को भी अपने पोस्ट में रेखांकित किया।

    उन्होंने आज के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाले दिखावे की ओर भी इशारा किया। उनकी बातों में यह भाव नजर आया कि अब कई बार लोगों के बीच तुलना और लाइक्स की प्रतिस्पर्धा रिश्तों और दोस्ती के सहजपन को प्रभावित करती है।

    उन्होंने बिजली चले जाने के एक सामान्य अनुभव को भी आज के मोबाइल-केंद्रित जीवन से जोड़कर बताया। पहले बिजली जाने पर लोग एक-दूसरे के साथ बैठते थे, जबकि अब कुछ समय के लिए फोन और इंटरनेट उपलब्ध न होने पर बेचैनी महसूस होने लगती है।

    तरुणा वर्मा और विकास दिव्यकीर्ति की शादी 1998 में हुई थी। उनका एक बेटा है, जिसका नाम सात्विक है। तरुणा वर्मा वर्तमान में दृष्टि आईएएस की डायरेक्टर हैं। वह दृष्टि वेलफेयर फाउंडेशन से भी जुड़ी हुई हैं और संस्थान में अध्यापन का अनुभव रखती हैं।

  • 5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    5 से 12 साल की उम्र में सही पोषण है सबसे बड़ी पूंजी, संतुलित आहार से मिलेगा तेज दिमाग और मजबूत शरीर

    नई दिल्ली । पांच से बारह वर्ष की आयु बच्चों के संपूर्ण विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर माना जाता है। इसी उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है, मांसपेशियां और हड्डियां मजबूत होती हैं तथा मस्तिष्क नई चीजों को सीखने और समझने की क्षमता विकसित करता है। ऐसे में संतुलित और पोषणयुक्त आहार बच्चों के वर्तमान स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य की सेहत की भी मजबूत नींव तैयार करता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों की दैनिक डाइट में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन शामिल होना चाहिए। प्रोटीन शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, मांसपेशियों के विकास और ऊतकों की मरम्मत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दाल, दूध, दही, पनीर, अंडा, सोया, चना और अन्य प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ नियमित रूप से देने से बच्चों की शारीरिक वृद्धि बेहतर होती है और उनकी ताकत भी बढ़ती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी भी बेहद आवश्यक हैं। बढ़ती उम्र में हड्डियों का विकास तेज गति से होता है, इसलिए दूध, दही, पनीर, रागी और अन्य कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को भोजन का हिस्सा बनाना चाहिए। साथ ही नियमित रूप से कुछ समय धूप में बिताने से शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी प्राप्त करने में मदद मिलती है, जिससे हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं।

    फल और हरी सब्जियां बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनमें मौजूद विटामिन, खनिज और फाइबर शरीर को आवश्यक पोषण प्रदान करते हैं। रंग-बिरंगे फल और विभिन्न प्रकार की सब्जियां खाने वाले बच्चों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत कम रहता है और उनका मानसिक विकास भी बेहतर माना जाता है।

    ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति के लिए साबुत अनाज को भोजन में शामिल करना लाभदायक होता है। गेहूं, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस और मल्टीग्रेन खाद्य पदार्थ धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करते हैं, जिससे बच्चे लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं और पढ़ाई या अन्य गतिविधियों के दौरान उनकी एकाग्रता बनी रहती है। इसके विपरीत अत्यधिक रिफाइंड आटे और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखना बेहतर माना जाता है।

    दिमाग के स्वस्थ विकास के लिए हेल्दी फैट भी जरूरी है। बादाम, अखरोट, मूंगफली और विभिन्न बीजों में मौजूद पोषक तत्व याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं। इन्हें सीमित मात्रा में नियमित रूप से आहार में शामिल किया जा सकता है।

    पर्याप्त पानी पीना भी बच्चों के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पानी शरीर में तरल संतुलन बनाए रखने, पाचन प्रक्रिया को बेहतर करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद करता है। वहीं अत्यधिक मीठे पेय और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि इनके अधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन से ही बच्चों में संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ खान-पान की आदतें विकसित की जाएं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास बेहतर होता है। यही आदतें आगे चलकर उन्हें स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन की दिशा में मजबूत आधार प्रदान करती हैं।