Tag: children

  • मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज

    मंगला एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद 20 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, खंडवा में ट्रेन रोककर किया इलाज


    भोपाल। दिल्ली से केरल लौट रहे स्कूली बच्चों के एक दल में शुक्रवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस में खाना खाने के बाद करीब 15-20 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों ने उल्टी, जी मिचलाने और बेचैनी की शिकायत की। सूचना मिलते ही ट्रेन को खंडवा रेलवे स्टेशन पर रोका गया, जहां डॉक्टरों की टीम ने ट्रेन में ही बच्चों की जांच कर प्राथमिक उपचार दिया।

    जानकारी के मुताबिक, बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक टूर पर दिल्ली गए थे। टूर पूरा होने के बाद सभी ट्रेन से केरल लौट रहे थे। इटारसी स्टेशन के बाद बच्चों ने ट्रेन की पेंट्री कार से खाना मंगाकर खाया था। इसके कुछ समय बाद एक के बाद एक बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। ट्रेन स्टाफ ने इसकी सूचना रेलवे अधिकारियों को दी।

    स्टेशन पर पहले से तैयार थी मेडिकल टीम

    बच्चों की तबीयत खराब होने की सूचना खंडवा रेलवे प्रशासन को ट्रेन के पहुंचने से पहले ही मिल गई थी। ऐसे में स्टेशन पर डॉक्टरों की टीम को तैयार रखा गया था। मंगला लक्षद्वीप एक्सप्रेस रात करीब 9:05 बजे खंडवा स्टेशन पहुंची। ट्रेन रुकते ही मेडिकल टीम ने प्रभावित बच्चों की जांच शुरू कर दी।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, सीएसपी अभिनव बारंगे और सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर समेत रेलवे और प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। डॉक्टरों ने बच्चों को प्राथमिक उपचार दिया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं। चिकित्सकों ने फूड पॉइजनिंग की आशंका जताई है।

    40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही ट्रेन

    खंडवा के स्टेशन मास्टर जीएल मीणा के अनुसार, बच्चों के उपचार के दौरान ट्रेन करीब 40 मिनट स्टेशन पर खड़ी रही। मेडिकल टीम ने बच्चों की जांच कर उन्हें जरूरी दवाइयां दीं। उपचार के बाद ट्रेन को रात करीब 9:45 बजे भुसावल की ओर रवाना कर दिया गया।

    बच्चों के साथ रेलवे के डॉक्टरों और कर्मचारियों की एक टीम भी आगे के सफर के लिए रवाना की गई, ताकि रास्ते में जरूरत पड़ने पर उन्हें चिकित्सा सहायता मिल सके।

    15 से 18 साल के हैं सभी बच्चे

    बताया गया है कि बीमार हुए सभी बच्चे केरल के रहने वाले हैं और एक क्रिश्चियन स्कूल से जुड़े हुए हैं। उनकी उम्र करीब 15 से 18 वर्ष बताई गई है। बच्चे स्कूल स्टाफ के साथ शैक्षणिक भ्रमण के लिए दिल्ली गए थे। टूर खत्म होने के बाद वे ट्रेन से वापस केरल लौट रहे थे।

    अधिकारियों के मुताबिक, प्राथमिक उपचार के बाद बच्चों की हालत फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरे मामले पर नजर रख रही है। खाना खाने के बाद एक साथ कई बच्चों की तबीयत बिगड़ने के कारण फूड पॉइजनिंग की आशंका के आधार पर मामले की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम

    पत्नी की दूसरी शादी के बाद क्या पहले पति की एलिमनी खत्म हो जाती है, जानिए भारतीय कानून में गुजारा भत्ते का नियम


    नई दिल्ली ।
    तलाक के बाद पत्नी को मिलने वाले गुजारा भत्ते यानी एलिमनी को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि अगर महिला दोबारा शादी कर ले तो क्या पहले पति को पहले की तरह आर्थिक सहायता देते रहना होगा। भारतीय कानून में इस स्थिति को लेकर अलग-अलग प्रावधान मौजूद हैं और दूसरी शादी के बाद पूर्व पति की जिम्मेदारी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

    सामान्य कानूनी स्थिति यह है कि तलाकशुदा महिला के दोबारा विवाह करने के बाद पहले पति से मिलने वाला नियमित गुजारा भत्ता जारी रहने का आधार खत्म हो सकता है। इसकी वजह यह है कि पुनर्विवाह के बाद महिला के भरण-पोषण की परिस्थितियां बदल जाती हैं। हालांकि, किसी मामले में अंतिम स्थिति संबंधित कानून, अदालत के आदेश और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

    हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 स्थायी गुजारा भत्ता और भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इसके तहत अदालत परिस्थितियों में बदलाव होने पर पहले दिए गए आदेश में बदलाव कर सकती है। पत्नी के पुनर्विवाह को भी ऐसे महत्वपूर्ण बदलावों में माना जा सकता है, जिसके आधार पर पूर्व पति अदालत से एलिमनी के आदेश में संशोधन या उसे समाप्त करने की मांग कर सकता है।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि केवल दूसरी शादी की जानकारी सामने आते ही हर स्थिति में भुगतान अपने आप समाप्त मान लिया जाएगा। यदि पहले पति के पक्ष में कोई एलिमनी आदेश मौजूद है, तो उसके प्रभाव और उसे बदलने की प्रक्रिया को संबंधित न्यायालय के आदेश के अनुसार देखा जाता है। इसलिए किसी व्यक्ति को अपने स्तर पर भुगतान बंद करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाना जरूरी हो सकता है।

    भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 144 भी पत्नी, बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण से संबंधित प्रावधान देती है। इस व्यवस्था में भी तलाकशुदा महिला के पुनर्विवाह की स्थिति महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, किसी विशेष मामले में लागू कानूनी प्रावधान और न्यायालय के आदेश के आधार पर परिणाम अलग हो सकते हैं।

    मुस्लिम तलाकशुदा महिलाओं के मामलों में भी पुनर्विवाह का पहले पति से मिलने वाले भरण-पोषण पर प्रभाव पड़ता है। हालांकि, व्यक्तिगत कानून और मामले की परिस्थितियों के कारण कानूनी स्थिति को हमेशा संबंधित प्रावधानों और न्यायिक आदेशों के संदर्भ में समझना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात बच्चों के भरण-पोषण को लेकर है। यदि तलाकशुदा पत्नी ने दूसरी शादी कर ली है, लेकिन पहले पति से उसके बच्चे हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी केवल मां की दूसरी शादी के कारण खत्म नहीं होती। बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और आवश्यक खर्चों की जिम्मेदारी उनके जैविक पिता पर बनी रह सकती है।

    इसलिए पत्नी की दूसरी शादी और बच्चों के अधिकार को अलग-अलग कानूनी मुद्दों के रूप में देखा जाता है। पूर्व पत्नी को मिलने वाली एलिमनी पर पुनर्विवाह का प्रभाव पड़ सकता है, लेकिन बच्चों के भरण-पोषण का अधिकार स्वतंत्र विषय है।

    एलिमनी से जुड़े मामलों में आय, आर्थिक स्थिति, अदालत का पूर्व आदेश, पुनर्विवाह की स्थिति और बच्चों की जिम्मेदारी जैसे कई तथ्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए किसी भी मामले में केवल सामान्य नियम के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित अदालत के आदेश और लागू कानून को देखना जरूरी है। यही वजह है कि एलिमनी बंद करने या बदलने से पहले कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

  • भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश

    भारत के पड़ोसी देश में माता-पिता की इजाजत के बगैर बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव पेश


    नई दिल्ली। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया है। इसमें मांग की गई है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या कानूनी संरक्षक की अनुमति के बिना सोशल मीडिया अकाउंट बनाने और चलाने की इजाजत नहीं दी जाए।

    सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी (IPP) की विधायक सारा अहमद ने मंगलवार को पंजाब विधानसभा में यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने साइबर उत्पीड़न, ऑनलाइन यौन शोषण और बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता को देखते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करने की मांग उठाई।

    बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानून बनाने की मांग
    सारा अहमद पंजाब बाल संरक्षण ब्यूरो की अध्यक्ष भी हैं। उनके द्वारा पेश किया गया यह प्रस्ताव पाकिस्तान की किसी प्रांतीय या संघीय विधायिका में अपनी तरह का पहला प्रस्ताव बताया जा रहा है।

    प्रस्ताव में संघीय सरकार से बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को नियंत्रित करने और ऑनलाइन सुरक्षा को मजबूत करने के लिए व्यापक कानून बनाने की सिफारिश की गई है।

    प्रस्ताव में कहा गया है कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक विकास की सुरक्षा करना राज्य की संवैधानिक और नैतिक जिम्मेदारी है। सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से बच्चे साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण, अनुचित सामग्री, मानसिक तनाव और डिजिटल लत जैसी समस्याओं का सामना कर सकते हैं।

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऐज वेरिफिकेशन की मांग
    प्रस्ताव में पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (PTA) से देश में संचालित सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रभावी उम्र सत्यापन प्रणाली (Age Verification System) लागू करने की मांग भी की गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित नियमों का सही तरीके से पालन हो सके।

    दुनिया के कई देश भी बना रहे हैं सख्त नियम
    यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब दुनिया के कई देश बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नए नियमों पर विचार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक ऑनलाइन गतिविधियों, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, साइबर उत्पीड़न और हानिकारक कंटेंट के संपर्क के बीच संबंधों को देखते हुए सरकारें नियमन बढ़ा रही हैं।

    कई देशों में लागू हो चुके हैं आयु आधारित नियम
    ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ के कई सदस्य देशों समेत दुनिया के कई देशों ने बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने के लिए आयु आधारित प्रतिबंध लागू किए हैं। वहीं कुछ देश अधिक सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था और ऑनलाइन बाल सुरक्षा कानूनों पर काम कर रहे हैं।

  • सपनों को उड़ान और मां की नम आंखें: बच्चों की बड़ी कामयाबी पर भावुक हुईं फराह खान

    सपनों को उड़ान और मां की नम आंखें: बच्चों की बड़ी कामयाबी पर भावुक हुईं फराह खान


    नई दिल्ली। जिंदगी में कुछ पल ऐसे होते हैं, जो केवल खुशियां नहीं लाते बल्कि भावनाओं का समंदर भी साथ लेकर आते हैं। खासतौर पर माता-पिता के लिए बच्चों की सफलता से बड़ा कोई जश्न नहीं होता। ऐसा ही एक बेहद खास और भावुक पल उस समय देखने को मिला जब एक मां ने अपने बच्चों को जिंदगी के एक महत्वपूर्ण पड़ाव को पार करते देखा। खुशी, गर्व और भावनाओं से भरे इस पल ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर माता-पिता हमेशा कई सपने संजोते हैं। जब वे बच्चे अपनी मेहनत और लगन से किसी बड़ी उपलब्धि तक पहुंचते हैं तो वह पल पूरे परिवार के लिए बेहद यादगार बन जाता है। हाल ही में ऐसा ही एक अवसर सामने आया, जहां परिवार के लिए जश्न और भावनाओं का अनोखा संगम देखने को मिला। हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद बच्चों के चेहरे पर खुशी दिखाई दी, वहीं एक मां की आंखों में गर्व के साथ भावनाएं भी साफ नजर आईं।

    समारोह के दौरान परिवार के कई खूबसूरत पल कैमरे में कैद हुए। तस्वीरों और वीडियो में खुशी का माहौल साफ दिखाई दे रहा था। बच्चों की उपलब्धि पर पूरे परिवार की मुस्कान इस बात की गवाही दे रही थी कि यह दिन उनके लिए कितना खास था। पढ़ाई पूरी करना केवल एक शैक्षणिक उपलब्धि नहीं बल्कि जीवन की नई शुरुआत का संकेत भी माना जाता है। यही कारण है कि इस तरह के अवसर परिवारों के लिए बेहद भावनात्मक बन जाते हैं।

    इस खास अवसर पर एक भावुक संदेश ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उस संदेश में एक मां के मन की भावनाएं साफ दिखाई दीं। बच्चों को बड़ा करना, उन्हें सही दिशा देना और फिर उन्हें अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए तैयार करना किसी भी माता-पिता के लिए आसान नहीं होता। एक तरफ बच्चों की सफलता की खुशी होती है तो दूसरी तरफ उनसे जुड़ी यादें मन को भावुक भी कर देती हैं। यही भावनाएं उस संदेश में साफ तौर पर महसूस की गईं।

    माता-पिता और बच्चों का रिश्ता हमेशा बेहद खास माना जाता है। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, उनके सपने भी आकार लेने लगते हैं। एक समय ऐसा आता है जब माता-पिता उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होते देखते हैं और गर्व महसूस करते हैं। लेकिन इसी के साथ यह एहसास भी जुड़ा होता है कि अब बच्चे अपनी जिंदगी की नई दिशा की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यही बदलाव भावनाओं को और गहरा बना देता है।

    आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ऐसे पारिवारिक पल लोगों को रिश्तों की अहमियत का एहसास कराते हैं। सफलता केवल डिग्री या उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि उन भावनाओं से भी जुड़ी होती है जो उसके साथ चलती हैं। यह पल केवल एक ग्रेजुएशन समारोह नहीं बल्कि एक मां के सपनों, संघर्ष और गर्व की खूबसूरत कहानी बन गया, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया।

  • संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका

    संजय कपूर केस में बढ़ी कानूनी हलचल, बच्चों के भविष्य से जुड़े खर्च पर अदालत में नई याचिका


    नई दिल्ली । दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर से जुड़े संपत्ति विवाद में एक बार फिर नया कानूनी मोड़ सामने आया है, जिसने इस हाई-प्रोफाइल मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। इस बार मामला सीधे तौर पर बच्चों की शिक्षा और उनके रोजमर्रा के खर्चों से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव कपूर ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक नई याचिका दाखिल की है। इस याचिका के बाद संपत्ति विवाद की जटिलताएं और बढ़ती दिखाई दे रही हैं, हालांकि अदालत पहले से ही इस मामले में अंतरिम आदेशों के तहत स्थिति को नियंत्रित कर रही है।

    प्रिया कपूर की ओर से अदालत में यह आग्रह किया गया है कि बच्चों की पढ़ाई से जुड़े खर्च बिना किसी रुकावट के नियमित रूप से जारी रहने चाहिए। इसके लिए उन्होंने कुछ बैंक खातों के संचालन की अनुमति मांगी है, ताकि स्कूल फीस और अन्य आवश्यक शैक्षणिक खर्च समय पर पूरे किए जा सकें। यह मामला मुख्य रूप से संजय कपूर की बेटी समायरा और बेटे कियान की शिक्षा और उनके भविष्य से जुड़े वित्तीय प्रबंधन पर केंद्रित बताया जा रहा है।

    याचिका में यह भी कहा गया है कि कुछ विदेशी संयुक्त खातों के उपयोग की अनुमति दी जाए, ताकि बच्चों की विदेश में शिक्षा, रहने और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा किया जा सके। इस पहल को परिवार की ओर से बच्चों के हितों की सुरक्षा और उनकी शिक्षा को बाधित न होने देने के प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब संपत्ति से जुड़े कई पहलुओं पर पहले से ही कानूनी जांच और विवाद चल रहा है।

    इससे पहले अदालत ने इस मामले में संपत्ति के बड़े और स्थायी निर्णयों पर रोक लगाते हुए स्थिति को यथावत बनाए रखने के आदेश दिए थे। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा है कि अंतिम निर्णय आने तक किसी भी पक्ष के अधिकारों को नुकसान न पहुंचे। हालांकि, बच्चों से जुड़े आवश्यक खर्चों को लेकर अदालत ने पहले भी संवेदनशील रुख अपनाया है और जरूरतों के आधार पर सीमित अनुमति देने पर विचार किया गया है।

    संजय कपूर के निधन के बाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब उनकी कथित वसीयत और संपत्ति के बंटवारे को लेकर परिवार के भीतर मतभेद सामने आए। अलग-अलग पक्षों की ओर से संपत्ति के अधिकारों और प्रबंधन को लेकर दावे किए जाने लगे, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। समय के साथ यह विवाद और जटिल होता गया और इसमें कई कानूनी पहलू जुड़ते चले गए।

    अब प्रिया कपूर की नई याचिका ने इस मामले को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस नए अनुरोध पर क्या रुख अपनाती है और बच्चों के हितों तथा संपत्ति विवाद के बीच संतुलन कैसे स्थापित करती है। फिलहाल यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और सभी पक्ष अदालत के अगले निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, जिससे इस लंबे चल रहे विवाद की दिशा तय हो सकती है।

  • बदलते दौर में बिना शादी के बच्चे पैदा करना कई देशों में हुआ सामान्य … कई जगह अब भी सामाजिक कलंक!

    बदलते दौर में बिना शादी के बच्चे पैदा करना कई देशों में हुआ सामान्य … कई जगह अब भी सामाजिक कलंक!


    नई दिल्ली।
    शादी, परिवार और संतान… जिन्हें कभी समाज की स्थायी नींव माना जाता था, लेकिन बदलते समय (Changing Times) में दुनिया के कई हिस्सों में ये अवधारणाएं नए सिरे से परिभाषित हो रही हैं। बदलती जीवनशैली (Changing Lifestyle), कानूनी व्यवस्था (Legal System) और सामाजिक स्वीकृति (Social Acceptance) के कारण विवाह (Marriage) के बाहर बच्चों का जन्म कुछ देशों में सामान्य हो चुका है, जबकि कहीं यह अभी भी सामाजिक कलंक बना हुआ है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, कई देशों में विवाह के बाहर बच्चों का जन्म अब आम बात हो गई है। हालांकि, एशिया और कुछ अन्य क्षेत्रों में यह प्रवृत्ति अभी भी बहुत कम है। ये बदलाव सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े हैं, जहां विवाह हर जगह संतान प्राप्ति की शर्त नहीं रहा। यूं कहें तो बिना शादी के परिवार बसाना कई जगहों पर ‘न्यू नॉर्मल’ बन गया है। ओईसीडी (OECD) के नए आंकड़ों के अनुसार, विश्व के कई देशों में औसतन लगभग 43% बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यानी बिना शादी के महिलाएं मां बन रही हैं। आइए जानते हैं कि इस मामले में कौन-से देश सबसे आगे हैं…


    सबसे आगे लैटिन अमेरिका

    लैटिन अमेरिकी देश इस मामले में सबसे आगे हैं। कोलंबिया में 87% बच्चे विवाह के बाहर जन्म ले रहे हैं। इसके बाद चिली (78.1%), कोस्टा रिका (74%) और मैक्सिको (73.7%) का नंबर आता है। यहां लिव-इन रिलेशनशिप लंबे समय से सामाजिक और कानूनी रूप से स्वीकार्य है, जिससे औपचारिक शादी की जरूरत कम हो गई है। ऐतिहासिक असमानता और कानूनी पहुंच की कमी ने भी इन बदलावों को बढ़ावा दिया है।


    नॉर्डिक देशों में कल्याण व्यवस्था के साथ हाई रेशियो

    नॉर्डिक देशों ने परिवार के मानदंडों को नए सिरे से परिभाषित किया है। आइसलैंड में 69.4%, नॉर्वे में 61.2%, स्वीडन में 58% (लगभग) और डेनमार्क में 55% के आसपास बच्चे विवाह के बाहर पैदा हो रहे हैं। यहां मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों को माता-पिता की वैवाहिक स्थिति से अलग कानूनी संरक्षण मिलने से विवाह अब व्यक्तिगत चुनाव बन गया है। लिव इन में रहने वाले जोड़ों को विवाहित जोड़ों के बराबर अधिकार प्राप्त हैं।


    एशिया और पूर्वी भूमध्यसागरीय में न्यूनतम दरें

    दूसरी ओर एशिया के कई देशों में स्थिति बिल्कुल उलट है। जापान में सिर्फ 2.4%, दक्षिण कोरिया में 4.7%, तुर्की में 3.1%, इजरायल में 8.6% और ग्रीस में 9.7% बच्चे विवाह के बाहर जन्म लेते हैं। यहां सांस्कृतिक मूल्य, धार्मिक परंपराएं और सख्त कानूनी ढांचा विवाह को संतान से जोड़े रखते हैं। एकल माता-पिता को सामाजिक कलंक और कम सहायता मिलने से यह प्रवृत्ति दबाव में रहती है।


    ओईसीडी

    भारत जैसे देशों में भी विवाह के बाहर जन्म की दर बहुत कम बनी हुई है। यही विवाद के बाहर बच्चों की जन्म दर एक फीसदी से भी कम है। भारत के पड़ोसी देशों और एशिया में भी यही स्थिति है, जहां सांस्कृतिक और सामाजिक मानदंड विवाह को प्राथमिकता देते हैं।


    एंग्लो-अमेरिकी और पश्चिमी यूरोप

    संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और ज्यादातर पश्चिमी यूरोपीय देश बीचों बीच खड़े हैं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में लगभग 40 प्रतिशत बच्चे विवाह के बाहर पैदा होते हैं, जो ऑस्ट्रिया और इटली के स्तर के करीब है। इन आंकड़ों से साफ है कि विवाह के बाहर बच्चों का जन्म सिर्फ सामाजिक बदलाव नहीं, बल्कि कानूनी संरचना, कल्याणकारी नीतियों और सांस्कृतिक स्वीकार्यता का संयुक्त परिणाम है। आने वाले वर्षों में यह अंतर और बढ़ सकता है, जिसका असर भारत समेत अन्य एशियाई देशों पर भी पड़ सकता है।

  • टेलीविजन की ‘क्वीन’ से बॉलीवुड की कॉमिक स्टार: अश्विनी कालसेकर ने साबित किया कि सपोर्टिंग रोल भी बना सकते हैं सुपरस्टार

    टेलीविजन की ‘क्वीन’ से बॉलीवुड की कॉमिक स्टार: अश्विनी कालसेकर ने साबित किया कि सपोर्टिंग रोल भी बना सकते हैं सुपरस्टार


    नई दिल्ली। ‘भूल भुलैया 2’ में पंडिताइन का किरदार निभा रही अश्विनी कालसेकर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छोटे रोल भी बड़े प्रभाव छोड़ सकते हैं। संजय मिश्रा और राजपाल यादव के साथ उनकी कॉमेडी ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया और उनका अभिनय जमकर सराहा गया। यह पहली बार नहीं है कि अश्विनी ने किसी फिल्म या शो में लीड रोल नहीं निभाया, लेकिन उनकी भारी आवाज, दमदार पर्सनालिटी और नेचुरल एक्टिंग ने उन्हें 28 साल में इंडस्ट्री का एक मजबूत नाम बना दिया है।

    अश्विनी का जन्म 22 जनवरी 1970 को मुंबई में हुआ। उनके पिता अनिल कालसेकर बैंक में कर्मचारी थे। उन्होंने 1991 में BA की पढ़ाई पूरी की और 1991-94 तक थिएटर किया। इस दौरान उन्होंने नीना गुप्ता और थिएटर कोच मुजामिल वकील से ट्रेनिंग ली। 1994 के बाद वे एयरलाइन की केबिन क्रू बन गईं और उसी दौरान उन्हें पहला टीवी शो ‘शांति’ मिला।

     ‘शांति’ के दौरान अश्विनी नौकरी के साथ शूटिंग भी करती थीं, लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर एक्टिंग को ही फोकस किया। इसके बाद उन्होंने ‘CID’ में कॉप की भूमिका निभाई, जहां उन्हें दर्शकों ने पसंद किया। असली पहचान उन्हें एकता कपूर के डेली सोप ‘कसम’ से मिली, जिसमें उन्होंने वैम्प ‘जिज्ञासा’ का किरदार निभाया। उनके बड़े बिंदी, भारी मेकअप, नोज पिन और सिंदूर वाली लुक ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी और यह लुक काफी समय तक चर्चित रहा।

    अश्विनी ने टीवी में ‘एक और महाभारत’ में द्रौपदी, ‘सिद्धांत’ में एसीपी नेत्रा मेनन, ‘विरुद्ध’ में देवयानी, ‘परिवार’ में मनोरमा, ‘झांसी की रानी’ में हीरा बाई, ‘गंगा की दहलीज’ में महामाई, ‘जोधा अकबर’ में महामंगा, ‘इतना करो न मुझे प्यार’ में पूनम खन्ना, ‘कवच काली शक्तियों’ में सौदामिनी और ‘पार्टनर्स ट्रबल हो गई डबल’ में नीना नादकर्णी जैसे कई यादगार किरदार निभाकर खुद को एक सशक्त अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया।

    फिल्मों और वेब सीरीज में भी उन्होंने अपना जलवा दिखाया।

    ‘द हीरो: लव स्टोरी ऑफ अ स्पाई’, ‘खाकी’, ‘किसना’, ‘आशिक बनाया आपने’, ‘जॉनी गद्दार’, ‘गोलमाल रिटर्न्स’, ‘फूंक’, ‘गोलमाल 3’, ‘बद्रीनाथ’, ‘सिंघम रिटर्नस’, ‘गोलमाल अगेन’, ‘सिम्बा’, ‘लक्ष्मी’, ‘भूल भुलैया 2’ समेत कई फिल्मों में उनके किरदारों ने लोगों का दिल जीता। वेब सीरीज में ‘हुतात्मा’, ‘द चार्जशीट’, ‘रुद्र: द एज ऑफ डार्कनेस’ जैसी परियोजनाओं में भी उन्होंने काम किया।

    अश्विनी खुद को टीवी की ही मानती हैं और मानती हैं कि टीवी ने उन्हें वह मुकाम दिया है जहां आज उन्हें काम मांगने की जरूरत नहीं पड़ती।

    उनका कहना है कि फिल्मों में जो काम उन्होंने किया वह उनके दोस्त और वेल-विशर्स के जरिए मिला, क्योंकि उनका कोई मैनेजर या पीआर एजेंसी नहीं है। वे एकता कपूर, श्रीराम राघवन, रोहित शेट्टी और रामगोपाल वर्मा को अपने करियर में महत्वपूर्ण योगदान मानती हैं।

    अश्विनी कालसेकर की शादी और पति
    अश्विनी कालसेकर की शादी फिल्म और टीवी अभिनेता मुरली शर्मा से हुई है। मुरली शर्मा भी इंडस्ट्री के जाने-माने कलाकार हैं और उन्होंने कई फिल्मों में अपनी अदाकारी से पहचान बनाई है। दोनों ने अपने निजी जीवन को हमेशा प्राइवेट रखा है और मीडिया में उनके बच्चों के बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली है। वे एक सफल जोड़ी के रूप में इंडस्ट्री में जाने जाते हैं और कई फिल्मों में साथ भी नजर आ चुके हैं।

  • MP: बच्चे चीनी मांझे से पतंग उड़ाते पकड़े गए तो माता-पिता होंगे जिम्मेदार, HC के सख्त निर्देश

    MP: बच्चे चीनी मांझे से पतंग उड़ाते पकड़े गए तो माता-पिता होंगे जिम्मेदार, HC के सख्त निर्देश

    भोपाल। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने चीनी मांझे (Chinese kite string) पर लगे प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है। अदालत ने साफ किया है कि यदि कोई बच्चा इस घातक डोर से पतंग उड़ाते पकड़ा गया तो उसके माता-पिता (Parents) को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। साथ ही चीनी मांझे की बिक्री या उपयोग करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) (लापरवाहीपूर्ण कृत्य के कारण होने वाली मृत्यु) के तहत कार्रवाई होगी।


    बेचने वालों पर भी चलेगा लापरवाही से मौत का केस

    मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने आदेश दिया है कि लोगों को जागरूक किया जाए कि चीनी मांझे को बेचने या इस्तेमाल करने पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत मामला दर्ज हो सकता है। यह धारा लापरवाही के कारण होने वाली मृत्यु से संबंधित है। अदालत ने पिछले साल 11 दिसंबर को चीनी मांझे से होने वाली मौतों और हादसों पर चिंता जताते हुए खुद जनहित याचिका के तौर पर संज्ञान लिया।


    सरकार ने कहा- चलाएंगे अभियान

    मध्य प्रदेश सरकार ने न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की अदालत को बताया कि चीनी मांझे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। चीनी मांझे से होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए जा रहे हैं। चीनी मांझे के इस्तेमाल और बिक्री को हतोत्साहित करने के लिए अखबारों और टीवी चैनलों के माध्यम से एक बड़ा जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।


    अभिभावक को भी ठहराया जा सकता है जिम्मेदार

    अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जागरूकता अभियान में यह साफ बताया जाए कि चीनी मांझे की बिक्री या इस्तेमाल करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (1) के तहत केस चलेगा। यदि कोई नाबालिग बच्चा इस खतरनाक मांझे से पतंग उड़ाता पाया गया तो इसके लिए उसके माता-पिता या अभिभावक को भी कानूनन जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।


    आसपास के जिलों में भी किया जाएगा लागू

    इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि प्रशासन जल्द निर्देशों का पालन करते हुए जरूरी आदेश जारी करेगा। अदालत को यह भी भरोसा दिया गया कि निर्देशों को इंदौर आसपास के जिलों में भी लागू किया जाएगा। बता दें कि पिछले डेढ़ महीने में इंदौर में चीनी मांझे से गला कटने के कारण दो लोगों की जान जा चुकी है। प्रशासन ने चीनी मांझे पर पूरी तरह रोक लगा रखी है फिर भी कई लोग चोरी से इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

  • Nestle Baby Food: नेस्ले के इस प्रोडक्ट में मिला खतरनाक टॉक्सिन, बच्चों में उल्टी और पेट दर्द का खतरा, ऐसे करें चेक

    Nestle Baby Food: नेस्ले के इस प्रोडक्ट में मिला खतरनाक टॉक्सिन, बच्चों में उल्टी और पेट दर्द का खतरा, ऐसे करें चेक

    Nestle Recall: नेस्ले दुनियाभर में कई प्रोडक्ट्स बेचती है, यह काफी फेमस है. कंपनी ने अपने एक प्रोडक्ट में टॉक्सिन होने की आशंका के चलते वापस मंगाया है. चलिए आपको इसके बारे में बताते हैं.
    फूड और बेवरेज सेक्टर की दिग्गज कंपनी नेस्ले ने मंगलवार को अपने कुछ प्रमुख बेबी न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स को वापस मंगाने का ऐलान किया. कंपनी ने बताया कि इन प्रोडक्ट्स में एक ऐसे टॉक्सिन के होने की आशंका है, जिससे बच्चों में उल्टी और मतली जैसी दिक्कतें हो सकती हैं.

    जिन प्रोडक्ट्स को रिकॉल किया गया है, उसमें SMA, BEBA और NAN ब्रांड के इन्फैंट और फॉलो-ऑन फॉर्मूला शामिल हैं. ये प्रोडेक्ट मुख्य रूप से यूरोप में बेचे जाते हैं, हालांकि BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, नेस्ले अधिकारियों ने इसे दुनियाभर में जहां भी बेचा जाता है, वहां से वापस मंगाया है.

    कंपनी ने क्या कहा?

    कंपनी की तरफ से Reuters को बताया गया कि एक बड़े सप्लायर से मिले एक इंग्रीडिएंट में क्वालिटी से जुड़ी समस्या सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया. इसके बाद नेस्ले ने अपने सभी प्रभावित इन्फैंट न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले एराकिडोनिक एसिड ऑयल और उससे जुड़े ऑयल मिक्स की जांच शुरू की.

    नेस्ले ने साफ किया है कि अब तक किसी भी रिकॉल किए गए प्रोडक्ट से जुड़ी बीमारी या लक्षण की पुष्टि नहीं हुई है. कंपनी ने यह भी बताया कि दिसंबर में सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह रिकॉल अब बड़े स्तर पर किया जा रहा है. ऑस्ट्रिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस रिकॉल से नेस्ले की 10 से ज्यादा फैक्ट्रियों में बने 800 से अधिक प्रोडक्ट्स प्रभावित हुए हैं. इसे कंपनी के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा प्रोडक्ट रिकॉल बताया जा रहा है.

    प्रभावित बैच की पहचान कैसे करें?

    नेस्ले ने अलग-अलग देशों में बिकने वाले उन बैच नंबरों की सूची जारी की है, जिनका सेवन नहीं किया जाना चाहिए. कंपनी ने कहा है कि वह सप्लाई में होने वाली किसी भी रुकावट को कम करने के लिए काम कर रही है.

    ग्राहकों को सलाह दी गई है कि पाउडर फॉर्मूला के लिए डिब्बे या पैक के नीचे लिखे कोड को देखें, जबकि रेडी-टू-फीड फॉर्मूला के लिए बाहरी बॉक्स और कंटेनर के साइड या ऊपर दिए गए कोड की जांच करें.

    क्यों किया गया रिकॉल?

    नेस्ले ने ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, नॉर्वे, स्विट्ज़रलैंड और ब्रिटेन में इन प्रोडक्ट्स को रिकॉल किया है. वजह बताई गई है सेर्यूलाइड नामक टॉक्सिन की संभावित मौजूदगी, जोबैसिलस सेरेस बैक्टीरिया के कुछ स्ट्रेन से बनता है.

    ब्रिटेन की फूड स्टेंडर्ड एजेंसी के अनुसार, यह टॉक्सिन पकाने, उबालने या दूध तैयार करने की प्रक्रिया में नष्ट नहीं होता. अगर इसका सेवन हो जाए, तो जल्दी ही उल्टी, मतली और पेट में ऐंठन जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं. वहीं, नॉर्वे की फूड सेफ्टी एजेंसी ने कहा है कि इससे कोई तुरंत गंभीर स्वास्थ्य जोखिम नहीं है.