Tag: Children’s Health

  • सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा

    सावधान! बचपन का असामान्य वजन बढ़ा सकता है युवावस्था में बीमारियों का खतरा, नई स्टडी में बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। हर माता पिता अपने बच्चे की लंबाई और वजन को लेकर चिंतित रहते हैं। अक्सर घरों में बच्चे के दुबलेपन या मोटापे को केवल खान पान और खराब लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने इस धारणा को आंशिक रूप से बदल दिया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों के वजन और बॉडी मास इंडेक्स BMI में होने वाले बदलावों का एक बड़ा हिस्सा उनके जीन्स पर निर्भर करता है।

    ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित द्वारा की गई इस स्टडी में करीब 6 300 बच्चों और वयस्कों के 66 000 से अधिक BMI मापों का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि 10 वर्ष की आयु तक बच्चे का वजन और 18 वर्ष तक उसकी ग्रोथ की रफ्तार भविष्य में होने वाली बीमारियों का संकेत दे सकती है। यदि बचपन में वजन असामान्य रूप से बढ़ता या घटता है तो आगे चलकर डायबिटीज हाई कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ सकता है।

    अध्ययन में यह भी सामने आया कि अलग अलग उम्र में अलग जेनेटिक फैक्टर्स सक्रिय होते हैं। यानी छोटे बच्चों के शारीरिक आकार को प्रभावित करने वाले आनुवंशिक कारक किशोरावस्था में असर डालने वाले कारकों से अलग हो सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि बचपन में हल्का फुल्का मोटापा हमेशा भविष्य में गंभीर मोटापे का संकेत नहीं होता लेकिन लगातार असामान्य ग्रोथ चिंता का विषय हो सकती है।

    शोधकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल जीन्स ही जिम्मेदार नहीं हैं। पर्यावरण खान पान शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक जीवनशैली भी बच्चे के विकास को प्रभावित करते हैं। यानी जेनेटिक प्रवृत्ति और जीवनशैली मिलकर स्वास्थ्य की दिशा तय करते हैं।

    यह अध्ययन आंशिक रूप से ब्रिटेन की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रिस्टल के 90 के दशक के बच्चे स्टडी के डेटा पर भी आधारित है जिसे वैज्ञानिकों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य डेटाबेस माना जाता है। इस लंबे समय तक चले अध्ययन ने बच्चों के विकास और भविष्य के स्वास्थ्य जोखिमों को समझने में अहम भूमिका निभाई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि किस उम्र में हस्तक्षेप सबसे अधिक प्रभावी हो सकता है। यदि सही समय पर पोषण व्यायाम और स्वास्थ्य निगरानी की जाए तो भविष्य में मोटापे और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।

    इस स्टडी का संदेश स्पष्ट है बच्चों के वजन को लेकर न तो अनावश्यक घबराहट जरूरी है और न ही लापरवाही। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर बचपन से ही बेहतर स्वास्थ्य की नींव रखी जा सकती है।

  • जूते लाते हैं खतरनाक बैक्टीरिया और केमिकल्सजानें क्यों घर में नो शूज पॉलिसी जरूरी है

    जूते लाते हैं खतरनाक बैक्टीरिया और केमिकल्सजानें क्यों घर में नो शूज पॉलिसी जरूरी है

     
    नई दिल्‍ली ।
    हम अक्सर जूतों और चप्पलों को बिना सोचे-समझे घर के अंदर पहन लेते हैंयह सोचते हुए कि बस थोड़ी धूल-मिट्टी लगी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जूते न केवल धूल मिट्टीबल्कि कई खतरनाक और अदृश्य तत्वों को भी घर में लेकर आते हैंजो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं? इस आदत के बारे में डॉक्टर सौरभ सेठी ने अपनी राय दी हैऔर उनके मुताबिकघर में नो शूज पॉलिसी अपनाना हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।

    जूतों के साथ आते हैं खतरनाक तत्व

    जूते हमारे बाहर की दुनिया से होते हुए घर तक आते हैं। जब हम घर के बाहर चलते हैंतो हमारे जूतों में कीटनाशककेमिकल्सबैक्टीरियावायरसऔर यहां तक कि लेड जैसे हानिकारक तत्व लग जाते हैं। ये तत्व न केवल हमारी त्वचा के संपर्क में आते हैंबल्कि घर के फर्शकालीनऔर यहां तक कि बच्चों के खेलने के स्थानों पर भी पहुंच जाते हैं। डॉक्टर सौरभ के अनुसारइन टॉक्सिन्स का घर में प्रवेश करना स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है।

    बैक्टीरिया और वायरस का खतरा

    बाहर चलते समय जूते में कई बैक्टीरिया और वायरस भी जमा हो जाते हैंजिनका हम आमतौर पर अंदाजा नहीं लगा पाते। खासकर महामारी के दौर मेंइन बैक्टीरिया और वायरस का घर के अंदर आना संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है। डॉक्टर सौरभ बताते हैं कि यदि जूतों को घर में लाया जाएतो यह वायरस और बैक्टीरिया आपके घर के वातावरण में घुल सकते हैंजो परिवार के सदस्यखासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरे की बात हो सकती है।

    केमिकल्स और जहर

    इसके अलावाजूतों में अक्सर कई खतरनाक केमिकल्स भी होते हैंजो पेंटकागजया अन्य बाहरी पदार्थों से चिपक जाते हैं। ये केमिकल्स घर में प्रवेश करने पर वायुमंडल को प्रदूषित करते हैं और शरीर में अवशोषित होकर स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकते हैं। उदाहरण के लिएलेड leadजैसे भारी धातु के संपर्क में आना कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता हैखासकर बच्चों में।

    बच्चों के लिए खतरा

    बच्चों का इम्यून सिस्टम वयस्कों की तुलना में कमजोर होता हैऔर वे जमीन पर खेलते हैंजहां पर जूतों से आए हुए बैक्टीरियावायरसऔर केमिकल्स मौजूद हो सकते हैं। यह बच्चों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव डाल सकता है और उन्हें विभिन्न तरह की एलर्जी और बीमारियों का शिकार बना सकता है। इसलिए डॉक्टर सौरभ सख्ती से कहते हैं कि बच्चों को इन खतरनाक तत्वों से बचाने के लिए घर में जूते पहनने की आदत को छोड़ना बहुत जरूरी है।

    घर में नो शूज पॉलिसीअपनाने के फायदे

    डॉक्टर सौरभ सेठी का मानना है कि घर में नो शूज पॉलिसी अपनाने से न केवल घर का वातावरण साफ रहता हैबल्कि यह परिवार के स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। इसके अलावाजूतों को घर के बाहर छोड़ने से आपके घर का फर्श भी साफ रहता है और आपको अतिरिक्त सफाई का काम भी नहीं करना पड़ता। आप भी इस सरल आदत को अपना सकते हैंजो न सिर्फ आपके घर को साफ रखेगीबल्कि आपके परिवार की सेहत को भी सुनिश्चित करेगी।

    घर के प्रवेश द्वार पर जूते रखने के लिए एक विशेष जगह बनाएं और घर में प्रवेश करने से पहले जूते उतारने की आदत डालें। यह न केवल स्वास्थ्य के लिहाज से लाभकारी होगाबल्कि आपके घर को भी सुरक्षित और स्वच्छ बनाए रखेगा। इसलिएअगली बार जब आप घर के अंदर प्रवेश करेंतो यह याद रखें कि आपके जूतों में सिर्फ धूल या मिट्टी नहींबल्कि कई खतरनाक तत्व भी हो सकते हैंजिन्हें घर में नहीं लाना चाहिए।