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  • हाई कोलेस्ट्रॉल को कहें अलविदा, इन सरल टिप्स से दिल और लिवर दोनों रहेंगे मजबूत

    नई दिल्ली: आज की आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि काफी कम हो गई है और ज्यादातर लोग दिनभर एक ही जगह बैठकर काम करते हैं, इस वजह से शरीर धीरे-धीरे कई बीमारियों की चपेट में आने लगता है, खासकर बढ़ता हुआ कोलेस्ट्रॉल आज एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, 30 की उम्र के बाद युवाओं में लिवर और हृदय से जुड़ी दिक्कतें तेजी से देखने को मिल रही हैं, आमतौर पर डॉक्टर इसके लिए दवाएं देते हैं, जो रक्त को पतला करने और हृदय को सुरक्षित रखने में मदद करती हैं, लेकिन आयुर्वेद में भी इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए कई प्राकृतिक और असरदार उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर बिना ज्यादा दवाओं के भी कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखा जा सकता है

    कोलेस्ट्रॉल बढ़ना शरीर में कई खतरों को न्योता देता है, इससे स्ट्रोक और दिल का दौरा पड़ने का जोखिम बढ़ जाता है, शुरुआती स्टेज में इसके लक्षण कम दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ संकेत मिल सकते हैं जैसे पलकों पर धब्बे होना, सीने में भारीपन या दर्द महसूस होना, सांस लेने में तकलीफ, थकान और पैरों में ऐंठन की समस्या, अगर समय रहते उपाय किए जाएं तो यह गंभीर नहीं बनता और हृदय स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है

    सुबह की शुरुआत मेथी के पानी से करना बेहद लाभकारी है, इसके लिए रात को मेथी के दानों को पानी में भिगो दें और इसमें एक कली लहसुन डाल दें, सुबह इसे छानकर पीने से रक्त में जमा कोलेस्ट्रॉल धीरे-धीरे कम होने लगता है और शरीर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ती है, यदि पसंद हो तो लहसुन को हल्का भूनकर भी सुबह सेवन किया जा सकता है, यह उपाय न केवल हृदय को मजबूत बनाता है बल्कि लिवर की कार्य क्षमता को भी सुधारता है

    नाश्ते में ओट्स का सेवन करने से भी कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है, ओट्स में मौजूद बीटा-ग्लूकन और अलसी का ओमेगा-3 खराब कोलेस्ट्रॉल को बाहर निकालने में मदद करता है और दिल पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है, साथ ही राजमा और दालों को अपने आहार में शामिल करें, ये प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत हैं, जो कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकते हैं और हृदय को सुरक्षित रखते हैं

    आहार में रिफाइंड तेल का त्याग करना भी बेहद जरूरी है क्योंकि यह कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का प्रमुख कारण है, इसके स्थान पर घी, तिल का तेल या जैतून का तेल इस्तेमाल किया जा सकता है, इसके अलावा पानी की पर्याप्त मात्रा लेना और हल्की एक्सरसाइज जैसे चलना या योग करना भी शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद करता है, इसके साथ ही तनाव को कम करना और पर्याप्त नींद लेना भी आवश्यक है

    इन उपायों को नियमित दिनचर्या में शामिल करके आप बिना दवा के अपने कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रख सकते हैं, इससे न केवल हृदय मजबूत रहेगा बल्कि लिवर भी स्वस्थ रहेगा, सही आहार और प्राकृतिक उपायों के संयोजन से आप अपने स्वास्थ्य को लंबे समय तक सुरक्षित रख सकते हैं और गंभीर बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं

  • आयुष मंत्रालय की सलाह: चियासीड्स से रखें दिल दुरुस्त, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल रहेगा संतुलित

    आयुष मंत्रालय की सलाह: चियासीड्स से रखें दिल दुरुस्त, ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल रहेगा संतुलित


    नई दिल्ली । चियासीड्स को आज के समय में पोषण का पावरहाउस माना जाता है। छोटे आकार के ये बीज सेहत के लिए कई तरह से लाभकारी साबित होते हैं। खासतौर पर हृदय स्वास्थ्य के लिहाज से चियासीड्स का नियमित सेवन बेहद उपयोगी माना गया है। फाइबर ओमेगा थ्री फैटी एसिड और प्रोटीन से भरपूर चियासीड्स न केवल दिल को मजबूत बनाते हैं बल्कि पाचन सुधारने और वजन नियंत्रित रखने में भी सहायक होते हैं।

    भारत सरकार का आयुष मंत्रालय भी चियासीड्स को हृदय रोगों से बचाव के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक विकल्प मानता है। मंत्रालय के अनुसार इन छोटे काले बीजों में मौजूद पोषक तत्व शरीर के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में ओमेगा थ्री फैटी एसिड पाए जाते हैं जो हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाने और रक्त संचार को बेहतर करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

    चियासीड्स में मौजूद ओमेगा थ्री फैटी एसिड विशेष रूप से अल्फा लिनोलेनिक एसिड के रूप में पाए जाते हैं। यह फैटी एसिड शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने और खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। इससे धमनियों में जमा होने वाली चर्बी कम होती है और ब्लॉकेज का खतरा घटता है। यही कारण है कि चियासीड्स को हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव में उपयोगी माना जाता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जो लोग नियमित रूप से चियासीड्स का सेवन करते हैं उनमें कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित बना रहता है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी यह बीज सहायक होता है। चियासीड्स में पोटैशियम मैग्नीशियम और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है जो रक्त वाहिकाओं को आराम देने में मदद करती है। इससे दिल पर दबाव कम पड़ता है और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या नियंत्रित रहती है।

    चियासीड्स का सेवन बेहद आसान है। रोजाना एक से दो चम्मच चियासीड्स पर्याप्त माने जाते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाया जा सकता है। इसके अलावा दही स्मूदी सलाद दलिया ओट्स या फलों के साथ मिलाकर भी सेवन किया जाता है। पानी में भिगोने पर चियासीड्स जेल जैसी बनावट बना लेते हैं जो पेट के लिए लाभकारी होती है और पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है।

    इसके साथ ही चियासीड्स में फाइबर प्रोटीन कैल्शियम आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने ऊर्जा देने और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं। संतुलित आहार के साथ चियासीड्स को दिनचर्या में शामिल करना सेहत के लिए एक समझदारी भरा कदम माना जाता है।